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हमारे देश में राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण या रजिस्टर को लेकर संसद से सड़क तक माहौल गर्म है और आरोप-प्रत्यारोप का दौरा जारी है।.... आखिर राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण की सच्चाई क्या है हम आपको बताते हैं।
नई दिल्ली । दिल्ली एनसीआर में मोबाइल चोरी से परेशान लोगों के लिए संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राहत की खबर दी है। सोमवार को उन्होंने उपराज्यपाल अनिल बैजल के साथ एक ऐसा पोर्टल लांच किया। जिसके जरिए आपके लिए दिल्ली-एनसीआर में चोरी, गुमशुदा या लूटे हुए मोबाइन फोन को ढूंढना बेहद आसान हो जाएगा। हालांकि आगे चलकर इस तकनीकि का लाभ सभी देशवासियों को भी मिल सकेगा।
संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद कहा है कि अब दिल्ली और एनसीआर के यूजर्स को मोबाइल गुम या चोरी होने पर https://www.ceir.gov.in वेब पोर्टल पर जाकर पहचान पत्र के साथ पुलिस कंप्लेंट की कॉपी अपलोड करनी होगी। इसके बाद डीओटी आपके नंबर और आईएमईआई को ब्लॉक कर देगा। और फिर आपको एक रिक्वेस्ट आइडी प्राप्त होगी। इसके जरिए आप पोर्टल पर अपने मोबाइल की स्थिति पर नजर रख सकेंगे। यदि आप चाहें तो भविष्य में आप आइएमईआइ को अनब्लॉक भी कर सकते हैं। जबकि संचार सचिव अंशु प्रकाश ने बताया कि देश के किसी भी कोने में यदि चोरी हुआ मोबाइल इस्तेमाल किया जा रहा होगा तो उसकी लोकेशन पता चल जाएगी और उसे ट्रैक किया जा सकेगा। और फिर पुलिस उस मोबाइल तक आसानी से पहुंच सकती है। एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में करीब 40,000 फोन चोरी हुए हैं या फिर गुम होते हैं।
आपको बता दें कि इस सुविधा के लिए दूरसंचार विभाग ने सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्ट्री नाम से एक प्रणाली विकसित की है और उसे सभी मोबाइल आपरेटरों के आइएमईआइ डेटाबेस से कनेक्ट किया है। सीईआइआर में सभी मोबाइल आपरेटर अपने नेटवर्क पर ब्लैकलिस्ट अथवा ब्लॉक किए गए मोबाइल सेट्स का डेटा शेयर करते हैं, ताकि एक नेटवर्क पर ब्लैकलिस्ट या ब्लॉक किया गया मोबाइल फोन दूसरे नेटवर्क पर भी काम नहीं कर सके। ऐसा होने से मोबाइल फोन पाने या चोरी करने वाला व्यक्ति सिम कार्ड बदलने के बाद भी उसका उपयोग नहीं कर पाता है। इससे मोबाइल फोन लौटाए जाने या चोर के पकड़े जाने की संभावना बढ़ जाती है। जो मोबाइल चोरी से परेशान व्यक्ति के लिए बहुत राहत की बात है।
नई दिल्ली । दिल्ली एनसीआर में मोबाइल चोरी से परेशान लोगों के लिए संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राहत की खबर दी है। सोमवार को उन्होंने उपराज्यपाल अनिल बैजल के साथ एक ऐसा पोर्टल लांच किया। जिसके जरिए आपके लिए दिल्ली-एनसीआर में चोरी, गुमशुदा या लूटे हुए मोबाइन फोन को ढूंढना बेहद आसान हो जाएगा। हालांकि आगे चलकर इस तकनीकि का लाभ सभी देशवासियों को भी मिल सकेगा।
संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद कहा है कि अब दिल्ली और एनसीआर के यूजर्स को मोबाइल गुम या चोरी होने पर https://www.ceir.gov.in वेब पोर्टल पर जाकर पहचान पत्र के साथ पुलिस कंप्लेंट की कॉपी अपलोड करनी होगी। इसके बाद डीओटी आपके नंबर और आईएमईआई को ब्लॉक कर देगा। और फिर आपको एक रिक्वेस्ट आइडी प्राप्त होगी। इसके जरिए आप पोर्टल पर अपने मोबाइल की स्थिति पर नजर रख सकेंगे। यदि आप चाहें तो भविष्य में आप आइएमईआइ को अनब्लॉक भी कर सकते हैं। जबकि संचार सचिव अंशु प्रकाश ने बताया कि देश के किसी भी कोने में यदि चोरी हुआ मोबाइल इस्तेमाल किया जा रहा होगा तो उसकी लोकेशन पता चल जाएगी और उसे ट्रैक किया जा सकेगा। और फिर पुलिस उस मोबाइल तक आसानी से पहुंच सकती है। एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में करीब 40,000 फोन चोरी हुए हैं या फिर गुम होते हैं।
आपको बता दें कि इस सुविधा के लिए दूरसंचार विभाग ने सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्ट्री नाम से एक प्रणाली विकसित की है और उसे सभी मोबाइल आपरेटरों के आइएमईआइ डेटाबेस से कनेक्ट किया है। सीईआइआर में सभी मोबाइल आपरेटर अपने नेटवर्क पर ब्लैकलिस्ट अथवा ब्लॉक किए गए मोबाइल सेट्स का डेटा शेयर करते हैं, ताकि एक नेटवर्क पर ब्लैकलिस्ट या ब्लॉक किया गया मोबाइल फोन दूसरे नेटवर्क पर भी काम नहीं कर सके। ऐसा होने से मोबाइल फोन पाने या चोरी करने वाला व्यक्ति सिम कार्ड बदलने के बाद भी उसका उपयोग नहीं कर पाता है। इससे मोबाइल फोन लौटाए जाने या चोर के पकड़े जाने की संभावना बढ़ जाती है। जो मोबाइल चोरी से परेशान व्यक्ति के लिए बहुत राहत की बात है।
धनबाद (झारखंड)। उत्तर भारत में जारी सर्दी के सितम के कारण जहां शहर के बेघर लोगों के लिए अपनी जिंदगी बचाना मुश्किल हो गया है। वहीं दूसरी ओर धनबाद के पाटलिपुत्र मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के मुर्दे ठिकाना न मिलने के कारण एक नयी परेशानी में पड़ गए हैं। यहां के प्रबंधन ने आदेश जारी कर कहा है कि अस्पताल में अब किसी मुर्दे को नहीं रखा जाएगा। ऐसी दशा में मुर्दों को रखने की समस्या खड़ी हो गयी है।
आपको बता दें कि धनबाद के पाटलिपुत्र मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में मुर्दों को सुरक्षित रखने के लिए मोर्चरी में छह बॉक्स की व्यवस्था थी। इसमें छह मुर्दे रखे जा रहे थे। लेकिन, मरम्मत नहीं होने के कारण पाटलिपुत्र मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ने दस वर्ष पुराने बदहाल मोर्चरी को कंडम घोषित कर दिया है। और मोर्चरी को अस्पताल से बाहर निकाल दिया है। प्रबंधन का आदेश है कि अब किसी भी शव को मोर्चरी में नहीं रखा जाय। यदि अब पाटलिपुत्र मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में कोई शव आता है तो उसे के पोस्टमार्टम हाउस के मर्चरी में रखा जाएगा। बताया जा रहा है कि पोस्टमार्टम हाउस में जगह की कमी के कारण शवों की ठेला-ठली हो रही है। जिसके कारण अराजकता का माहौल बन गया है। हालांकि इस समस्या को ध्यान में रखते हुए पाटलिपुत्र मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ने नए मोर्चरी के लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि पाटलिपुत्र मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में औसतन हर दिन चार-पांच शवों का पोस्टमार्टम होता है। इन शवों में से एक-दो शव लावारिस भी होते हैं। इन लावारिस शवों को निर्धारित समय तक मर्चरी में रखा जाता है। इसके बाद शवों को लावारिस घोषित कर उनका अंतिम संस्कार किया जाता है, तब जाकर ही मोर्चरी में नए शव के लिए स्थान खाली होता है। लेकिन मोर्चरी को कंडम घोषित कर देने के कारण अब पाटलिपुत्र मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के मुर्दों के लिए जगह की गंभीर समस्या खड़ी हो गयी है।
कुल्लू (हिमाचल प्रदेश)। हमारे देश में आमतौर पर लोग किसी भी तरह के काम के लिए सरकारी व्यवस्था के इंतजार में बैठे रहते हैं। लेकिन हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में एक दूसरे की मदद के लिए एक ऐसा अनोखा संघ बनाया गया है, जिसका नाम पढ़कर आप हैरान रह जाएंगे। इस संघ का नाम है दामाद संघ। इसके अध्यक्ष के अनुसार संघ का उद्देश्य सांस्कृतिक आदान-प्रदान व मुसीबत में एक-दूसरे की मदद करना है।
दामाद संघ के अध्यक्ष मंडी जिले के बल्ह निवासी अध्यक्ष एल आर गुलशन हैं। इनकी शादी कुल्लू जिले में हुई है। कुल्लू जिले के कुछ रीति-रिवाज मंडी जिले से काफी अलग हैं। इसलिए उन्होंने कुल्लू जिले के कुछ रीति-रिवाजों को आत्मसात किया, लेकिन इसी दौरान उन्हें विचार आया कि क्यों न सांस्कृतिक आदान प्रदान को एक मंच दिया जाए। इसलिए उनके मन में दामाद संघ के गठन का विचार आया। इसके बाद उन्होंने अपने जिले में ऐसे लोगों के साथ इसकी चर्चा की जिनकी शादी कुल्लू जिले में हुई है। बातचीत के बाद ज्यादातर ने इस पर सहमति जताई। और फिर दामाद संघ अस्तित्व में आ गया।
आपको बता दें कि पांच वर्ष पहले अस्तित्व में आए दामाद संघ में ऐसे लोगों को शामिल किया गया है, जिन्होंने हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की बेटियों से शादी की है। इस संघ का उद्देश्य है सांस्कृतिक आदान-प्रदान व मुसीबत में एक-दूसरे की मदद करना। संघ से अब तक करीब 700 लोग जुड़ चुके हैं। इसके सदस्य सोशल मीडिया और मोबाइल फोन के माध्यम से आपस में जुड़े रहते हैं। जब भी मौका मिलता है संघ की बैठक की जाती है। इस संघ से जुड़ने के लिए कोई फीस नहीं रखी गयी है। इसमें शामिल होने के लिए केवल एक ही शर्त है कि संबंधित व्यक्ति की शादी कुल्लू जिले की बेटी से हुई हो । साथ ही एक नियम यह भी है कि इसमें तलाकशुदा या दो शादियां करने वाले व्यक्ति को शामिल नहीं किया जाता है।
दामाद संघ की जब बैठक होती है तो सभी सदस्य अपने-अपने जिले के रीति रिवाजों के बारे में बताते हैं। और फिर ये लोग जब अपने-अपने रिश्तेदारों से मिलते हैं तो इन रीति-रिवाजों की चर्चा करते हैं। ऐसे रीति-रिवाजों की भी बैठक में जानकारी दी जाती है, जिन्हें दूसरे जिले के लोगों ने अपनाया है। संघ के सदस्यों की पत्नियां भी इसमें पूरा सहयोग देती हैं।
हालांकि अब दामाद संघ ने विस्तार करने की योजना बनायी है। अब तक इस संघ में केवल हिमाचल प्रदेश से संबंधित दामाद ही सदस्य बन सकते थे, लेकिन दामाद संघ ने फैसला लिया है कि अब देश के अन्य राज्यों से संबंधित दामादों को भी इस संघ में शामिल जाएगा। इतना ही नहीं विदेशी दामाद जिन्होंने कुल्लू आकर हिंदू रीति रिवाज से कुल्लू की बेटियों से शादी की है और यहीं रह रहे हैं, उन्हें भी दामाद संघ का सदस्य बनाया जाएगा। जिससे बड़े स्तर पर सांस्कृतिक आदान-प्रदान के साथ ही मुसीबत में एक-दूसरे की मदद की जा सके।
आप यदि उत्तर प्रदेश में आवास या निवास प्रमाण पत्र प्राप्त करने चाहते हैं तो इसके लिए आपको परेशान होने की कोई आवश्यकता नहीं है। उत्तर प्रदेश सरकार ने आवास और निवास प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए उत्तर प्रदेश के सभी जिलो में ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना को लागू कर आम जनता को सुविधा प्रदान करने तथा सेवाओं के वितरण हेतु सेवा केन्द्र (कॉमन सर्विस सेंटर) स्थापित किए हैं। इन सेंटर पर जाकर आप ऑनलाइन सेवा का लाभ उठा सकते हैं।
आवास प्रमाण पत्र साधारणत: यह साबित करने के लिए जारी किया जाता है कि प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाला व्यक्ति उत्तर प्रदेश का निवासी है जिसके द्वारा उसे प्रमाण पत्र जारी किया गया है।
आपको बता दें कि आवास या निवास प्रमाण पत्र तब तक वैध माना जाता है जब तक कि व्यक्ति अपना निवास स्थान नहीं बदलता है। निवास स्थान में परिवर्तन होनो पर नया प्रमाण पत्र बनवाना आवश्यक होता है।
इस प्रमाण पत्र की आवश्यकता प्रत्येक रोजगार के लिए आवेदन और स्कूल या कॉलेज में प्रवेश लेने में अधिक पड़ती है। आवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करने के लिए आपको कुछ जरूरी दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। जिनके साथ ही आप इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। जो कि कुछ इस प्रकार हैं:
आवास प्रमाण पत्र के लिए आवश्यक दस्तावेज
नोट- यह ध्यान रखना आवश्यक है कि आवास प्रमाण पत्र केवल एक ही राज्य/संघ राज्य क्षेत्र में बनवाया जा सकता है। एक से अधिक राज्य/संघ राज्य क्षेत्र से आवास प्रमाणपत्र प्राप्त करना अपराध माना जाएगा।
राजस्थान में आप मूल निवास प्रमाण-पत्र बनवाना चाहते हैं तो अब आपको सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की कोई आवश्यकता नहीं है। आप तहसील स्तर पर कॉमन सर्विस सेंटरों सीएसएस व ई-मित्र कियोस्कों पर जाकर डिजिटल हस्ताक्षर वाला मूल निवास प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं।
डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त मूल निवास प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए आपको ई मित्र कियोस्क या सीएसएस पर आवेदन करना होगा। कियोस्क से आवेदन पत्र और इसके साथ लगे दस्तावेज अपलोड कर दिए जाएंगे। अपलोड किए गए दस्तावेजों को संबंधित तहसीलदार,एसडीएम या एडीएम ऑनलाइन देखकर प्रमाण-पत्र जारी करने की मंजूरी देंगे। इस प्रमाण पत्र के लिए आपको 40 रुपए शुल्क का भुगतान करना पड़ेगा।
मूल निवास प्रमाण पत्र से यह प्रमाणित होता हैं, कि आप राजस्थान के निवासी हैं। और राज्य में कितने वर्षों से निवास कर रहे हैं। मूल निवास प्रमाण पत्र की आवश्यकता स्कूल कॉलेजों में प्रवेश, छात्रवृति और किसी सरकारी नौकरी में आवेदन करने के लिए पड़ती हैं। यदि आप के पास मूल निवास प्रमाण पत्र नहीं है तो आप इन सेवाओं का लाभ नहीं उठा सकते हैं।
मूल निवास प्रमाण पत्र प्राप्त करने के दस्तावेज
राजस्थान में ऑनलाइन मूल निवास प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं।
http://techedu.rajasthan.gov.in/RPET/pdf/FORMATS%20of%20various%20certificates_2014.pdf
अब लिंक पर क्लिक करने के बाद आपको मूल निवास प्रमाण पत्र के लिए एक आवेदन फॉर्म प्राप्त होगा। इस फॉर्म में आपको नीचे दी गयी निम्नलिखित जानकारियों को दर्ज करना होगा।
इन सभी जानकारियों को भरने के बाद आप दोबारा ध्यान पूर्वक अवश्य पढ़ लें, जिससे कोई गलती न रह जाए। और अंत में आवेदन फॉर्म में पूछी गयी जगह पर हस्ताक्षर अवश्य कर दें।
छत्तीसगढ़ में आप आवास या निवास प्रमाण-पत्र बनवाना चाहते हैं तो अब आपको सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की कोई आवश्यकता नहीं है। आप लोक सेवा केंद्र पर जाकर डिजिटल हस्ताक्षर वाला निवास प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं।
निवास प्रमाण पत्र एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसे राज्य के राजस्व विभाग द्वारा जारी किया जाता है। निवास प्रमाण पत्र किसी भी व्यक्ति के रहने के स्थान को प्रमाणित करता है।
निवास प्रमाण पत्र के लिए आवश्यक दस्तावेज़
छत्तीसगढ़ निवास प्रमाण पत्र के लिए आप ऑनलाइन आवेदन ई-डिस्ट्रिक्ट की अधिकारिक वेबसाइट पर जाकर कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन हेतु आपको निम्नलिखित चरणों का पालन करना होगा । इस चरण को पूरा करने के बाद ही आप छत्तीसगढ़ निवास प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं-
यदि आप छत्तीसगढ़ निवास प्रमाण पत्र की ऑनलाइन स्थिति जाँच करना चाहते हैं तो आप निम्नलिखित बातों का पालन करके जानकारी प्राप्त कर सकते हैं-
निवास प्रमाण पत्र प्राप्त के लिए ऑनलाइन आवेदन करने पर 30.00 रुपए शुल्क का भुगतान करना होगा।
निवास प्रमाण पत्र के आवेदन के बाद आमतौर पर 15 दिनों के बाद के बाद इसकी जानकारी दी जाती है।
यह सुविधा जिला कलेक्टर कार्यालय, तहसील कार्यालय और ग्राम पंचायत में निकटतम लोक सेवा केंद्र पर भी उपलब्ध है।
इंदौर (मध्य प्रदेश)। हमारे देश में पढ़ा-लिखा व्यक्ति सरकारी नौकरी ही करना चाहता है, चाहे वह चपरासी का पद ही क्यों न हो। क्योंकि लोगों की धारणा है कि सरकारी नौकरी से ही बिना मेहनत किए भ्रष्टाचार करके करोड़पति बना जा सकता है। ऐसी ही सोच वाले इंदौर नगर निगम के बेलदार रियाजुल हक अंसारी के घर पर लोकायुक्त पुलिस इंदौर की टीम ने छापा मारा । इस कार्रवाई में करीब एक करोड़ से अधिक संपत्ति का खुलासा हुआ। हालांकि अभी उसके बैंक खातों की जांच होना बाकी है।
आपको बता दें कि इंदौर नगर निगम में बेदलदार (चपरासी के स्तर का पद) पद पर कार्यरत रियाजुल हक अंसारी के देव छाया अपार्टमेंट स्नेह लता गंज में लोकायुक्त पुलिस ने कार्रवाई की। यहां जांच के दौरान रियाजुल और उसके परिजनों के नाम से भवन, भूखंड और दुकान होने की जानकारी मिली, जिनकी कीमत करीब एक करोड़ से अधिक आंकी गई है। देव छाया अपार्टमेंट में फ्लैट नंबर 303, 404 एवं पेंटहाउस मिला। पाकिजा लाइफस्टाइल में एक प्लाट ए-22 जिसमें वर्तमान में मकान निर्माणाधीन है। 78.79 नाहर शाहवली कंपाउंड, खजराना में बहन के नाम पर मकान। जेल रोड में एक दुकान थी जिसे बेच दिया गया है।
लोकायुक्त डीएसपी प्रवीण सिंह बघेल ने बताया कि अंसारी के घर से तलाशी के बाद अब तक 50 हजार रुपए नगद, सोने-चांदी के आभूषण, प्लाट, जेल रोड पर दुकान व अन्य संपत्तियां मिली है। अंसारी के घर के पास से एक डस्टर कार और दो टू व्हीलर वाहन भी मिले हैं। इसके अलावा बैंकों में खाते होने की जानकारी भी प्राप्त हुई है, जिनकी जांच की जाएगी।
सबसे हैरानी की बात यह है कि बेलदार की नौकरी करने वाला रियाजुल हक अंसारी 16 साल की नौकरी में करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन गया। फिलहाल लोकायुक्त की कार्रवाई जारी है, अभी उसके और भी काले कारनामों का खुलासा हो सकता है।
रियाजुल हक अंसारी के बारे में जानकारी मिली है कि पिता की मौत के बाद 2003 में उसे इँदौर नगर निगम में अनुकंपा नियुक्ति दी गई थी। हालांकि कुछ समय बाद उसे स्थायी कर दिया गया था। जबकि इंदौर नगर निगम आयुक्त आशीष सिंह ने 20 दिसंबर को रियाजुल हक अंसारी को बर्खास्त कर दिया था। उसके ऊपर नगर निगम की छवि धूमिल करने के साथ अफसरों के खिलाफ बयानबाजी का भी आरोप है। लेकिन 8 दिन पहले उसको बहाल कर दिया गया था। वर्तमान में वह जोन क्रमांक-5 में कार्यरत है।
पुलिस बल राज्य द्वारा अधिकार प्राप्त व्यक्तियों का एक निकाय है, जो राज्य के द्वारा बनाए गए कानूनों को लागू करने, संपत्ति की रक्षा और नागरिक अव्यवस्था को सीमित रखने का कार्य करता है। पुलिस को प्रदान की गई शक्तियों में बल का वैध उपयोग करना भी शामिल है।
हम इसी मुद्दे पर बात करेंगे कि कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) क्या है,,,, निधि को किस प्रकार से प्राप्त किया जा सकता है। और किस प्रकार से कंपनी की मनमानी के खिलाफ शिकायत की जा सकती है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत जारी की जा रही इस मदद को प्राप्त करना किसानों के लिए लोहे के चने चबाने जैसा हो गया है। अब तक काफी किसानों के नाम पंजीकृत नहीं हो सके हैं। कई किसान ऐसे हैं जिनका डाटा विभाग के कर्मचारियों ने गलत जानकारी फीड कर दिया है। वहीं लाखों किसानों के खातों में अब तक एक भी किश्त नहीं पहुंची है, जबकि लाखों किसानों के खाते में दूसरी किश्त नहीं पहुंची है।
सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश)। ऐसा लगता है देश में नागरिकता को लेकर विरोध प्रदर्शन और हिंसा करने वाले लोगों के लिए सुल्तानपुर में बहुत ही अनोखा अवसर है ! सुल्तानपुर के हनुमानगंज बाजार में आधार कार्ड 300 रुपए प्रति बोरी मिल रहा है। यदि कोई चाहे तो बहुत ही सस्ते दाम में इस सुविधा का लाभ उठा सकता है ! और अपनी इच्छा पूरी कर सकता है।
आपको बता दें कि इस गंभीर मामले का खुलासा तब हुआ जब सुल्तानपुर कोतवाली देहात के हनुमानगंज बाजार में कबाड़ की दुकान चलाने वाले शीतला प्रसाद वर्मा के यहां से 125 आधार कार्ड व दर्जनों बैंक संबंधी पत्र बरामद हुए। शीतला प्रसाद वर्मा का दावा है कि उन्होंने तीन दिन पहले किसी फेरी वाले से कबाड़ के रूप में एक बोरा कागज तीन सौ रुपये में खरीदा था। जब उन्होंने बोरे को खोला तो उसमें करीब 500 की संख्या में आधार कार्ड मिले। इसमें वजूपुर, बेलासदा, पखरौली, धरौली, अमहट, गोराबारिक, इस्लामगंज, अहिरौली, भरखरे, सहित दर्जनों गांवों के आधार कार्ड शामिल थे। शीतला प्रसाद वर्मा का कहना है कि आधार मिलने पर उसने संबंधित प्रधानों को सूचित किया। बाद में करोमी के प्रधान शान आलम उर्फ बब्बन और अहिरौली के रामचंदर दूबे ने इसकी जानकारी सांसद प्रतिनिधि रंजीत सिंह को दी। इस घटना की सूचना मिलने के बाद रंजीत सिंह ने शनिवार को पुलिस को मामले की सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस आनन-फानन में मौके पर पहुंची और शीतला प्रसाद वर्मा की दूकान से करीब 125 आधार कार्ड व दर्जनों बैंक संबंधी पत्र भी बरामद किये। जिसके बाद शीतला प्रसाद वर्मा ने थाने में मामले की शिकायत दर्ज करवायी। वहीं सुल्तानपुर देहात कोतवाल शरद कुमार का कहना है कि मामला संज्ञान में है। छानबीन की जा रही है।
जबकि इस घटना ने डाक विभाग व सरकारी व्यवस्था की कार्य प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर इतनी भारी संख्या में आधार कार्ड कबाड़ी के यहां कैसे पहुचे। और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है। इस घटना ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस आधार कार्ड का इस्तेमाल करके कोई भी अराजक तत्व आतंकी व आपराधिक वारदातों को अंजाम दे सकता है। जबकि कुछ लोगों का मानना है कि नागरिकता संशोधन एक्ट को लेकर देश भर में जारी विरोध व 26 जनवरी नजदीक होने के कारण इतनी बड़ी संख्या में आधार कार्ड बरामद होना कोई बड़ी साजिश हो सकती है। इसलिए मामले की जांच कर दोषियों को सख्त सजा दी जानी चाहिए।
आगरा (उत्तर प्रदेश)। प्रदेश में सरकारी निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार होना आम बात है, लेकिन आगरा जल निगम के अधिकारियों ने धांधूपुरा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में अनोखे तरह का घोटाला करके कमाल ही कर दिया। इन जादूगर अधिकारियों ने ताजमहल के पूर्वी गेट की ओर बने 78 एमएलडी क्षमता के धांधूपुरा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की दीवार को कागजों में ही बना दिया। जब मामले का खुलासा हुआ तो अधिकारियों ने सफाई दी कि हवा के दवाब से दीवार गिर गयी और उसकी ईंटें गायब हो गयीं।
आपको बता दें कि आगरा में 78 एमएलडी के धांधूपुरा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर करीब 2.5 करोड़ रुपये की लागत से 3000 मीटर लंबी दीवार का निर्माण होना था, लेकिन असलियत में जल निगम के अधिकारियों ने कागज पर ही दीवार दिखाकर तार लगवा दिए गए। तीन वर्ष पहले 950 मीटर लंबी और 10 फुट ऊंची बनायी गयी दीवार में मौके पर अब एक भी ईंट का अता-पता नहीं है।
जब इस मामले का खुलासा हुआ तो जल निगम के अधिकारियों ने कमाल का तर्क दिया उनका कहना था कि धांधूपुरा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के पूर्वी ओर दूसरे प्लांट की ओर जाने वाली सड़क के किनारे की ईंटों की 10 फुट ऊंची दीवार ढह गयी थी। इसके बाद उन्होंने 950 मीटर लंबे कटीले तार लगवा दिए। इतना ही नहीं इस दीवार को बनाने वाले ठेकेदार को आनन-फानन में पूरा भुगतान भी कर दिया गया।
लेकिन सवाल यह उठता है कि हवा के दबाव से दीवार गिरी तो ठेकेदार के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, और यदि दीवार का निर्माण हुआ था तो नींव में और ऊपर लगी ईंटें कहां गायब हो गयीं। जब दीवार गिर गयी तो ठेकेदार से दोबारा निर्माण क्यों नहीं कराया गया। इसके अलावा दीवार की गुणवत्ता खराब होने पर ठेकेदार की सिक्योरिटी मनी जब्त क्यों नहीं की गई। साथ ही तेज हवा में दीवार गिरने की रिपोर्ट कहां हैं, मॉनीटरिंग करने वाले अधिकारी पर क्या कार्रवाई हुई है।
जब इस खुलासे की भनक जल निगम के अधिकारियों को लगी तो वह मामले को छिपाने में जुट गये। जल निगम के यमुना एक्शन प्लान प्रोजेक्ट मैनेजर लोकेश शर्मा इस मामले में जवाब देने की बजाय स्वयं ही सवाल दागने लगे। उनका कहना है कि यह मामला उठाने की जरूरत ही क्या है। जब उनसे पूछा गया कि दीवार घोटाले में आरोपी अधिकारियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई तो वह मामले से पल्ला झाड़ते नजर आए। उनका कहना था कि वह वाप्कोस की टीम के साथ थे, इसलिए कुछ बता नहीं सकते हैं। साथ ही वह बोले कि यह मेरे कार्यकाल का मामला नहीं है, इसलिए मुझे कोई जानकारी नहीं है। इसके बारे में मत पूछिए। फाइलें अंदर रखी हैं। तलाश करके ही बता पाएंगे।
अब यमुना एक्शन प्लान प्रोजेक्ट मैनेजर की इस तरह की प्रतिक्रिया से यह तो साफ लग रहा है कि जल निगम के अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी । इसलिए उन्हें चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। वह जनता की मेहनत की कमायी को ऐसे ही लूटने में लगे रहे, उनका कोई बाल भी बांका नहीं कर पाएगा।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। प्रदेश में हर दिन आम आदमी भ्रष्ट अधिकारियों की बेइमानी और मनमानी का शिकार होता है, लेकिन भला उसकी कौन सुनने वाला है, लेकिन इस बार इनका शिकार गाजियाबाद की लोनी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर हो गए । उन्होंने विधानसभा में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए जिले के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और कमीशनखोरी के खिलाफ जांच की मांग की है।
आपको बता दें, मंगलवार को विधानसभा की कार्यवाही के दौरान गाजियाबाद के लोनी से विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने सप्लाई इंस्पेक्टर के द्वारा अपने परिवार के उत्पीड़न का मामला उठाने की कोशिश की, लेकिन संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना की तरफ से उन्हें रोक दिया गया। इसके बाद गुर्जर के समर्थन में बीजेपी और विपक्ष के तमाम विधायक सदन में धरने पर बैठ गए और विधायक एकता जिंदाबाद के नारे लगाने लगे। नाराज विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने गाजियाबाद के सप्लाई इंस्पेक्टर को दंडित करने की मांग रखी। आखिरकार सदन की कार्यवाही 18 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी गई।
हालांकि अगले दिन नंद किशोर गुर्जर ने विधानसभा में मंगलवार की घटना को लेकर अपनी सफाई दी। उन्होंने विधानसभा में मंगलवार की घटना को लेकर खेद व्यक्त किया और कहा कि मेरी मंशा किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था। उनका कहना था कि गाजियाबाद जिले के अधिकारी खुल कर कमीशन ले रहे हैं। एक या दो प्रतिशत अधिकारी ही ईमानदारी दिखा रहे हैं। वहीं अधिकारी जानबूझकर जनप्रतिनिधियों का उत्पीड़न कर रहे हैं। वे अधिकारी सुनते नहीं हैं। भाजपा विधायक ने कहा कि अधिकारियों और उनकी पत्नियों की संपत्तियों की जांच कराई जाए तो सच सामने आ जाएगा। इसके साथ ही अधिकारियों की पत्नियों के एनजीओ की भी जांच होनी चाहिए। मेरी संपत्ति की भी जांच करवा लें।
नंद किशोर गुर्जर ने कहा कि मुझे अपराधी बताया गया, जिससे मुझे दुख हुआ है। मुझे न्याय की उम्मीद है। मैंने कभी किसी अधिकारी से कोई काम नहीं कहा है। जो बेईमानी की पुरानी परंपरा चली आ रही है, उस पर जांच कराकर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि मैंने कभी एक रुपया कमीशन नहीं लिया, लेकिन हमारे यहां अफसर 18 से 22 प्रतिशत कमीशन ले रहे हैं। यहां तक कि विधायक निधि में भी कमीशन की मांग की जाती है। कमीशन का विरोध करने पर अधिकारी कहते हैं कि पिछली सरकारों में 18 फीसद लेते थे अब तो 4 फीसद लेते हैं।
आपको बता दें कि बीते बुधवार को लोनी में तैनात फूड इंस्पेक्टर आशुतोष सिंह का एक वीडियो सामने आया था। जिसमें आरोप है कि विधायक नंद किशोर ने कार्यालय बुलाकर मीट के होटलों के लाइसेंस न बनाने का दबाव डाला। कानून के तहत काम करने की बात पर विधायक ने मारपीट की। कहा- यहां उनकी सरकार चलती है। जिसके बाद पुलिस अधीक्षक नीरज जादौन की संस्तुति पर विधायक व उनके साथियों पर आईपीसी की धारा 147, 148, 323, 504, 506 और 332 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया था।
ग्वालियर (मध्य प्रदेश)। यह तो आपने सुना होगा कि यदि किसी को बंदूक का लाइसेंस चाहिए तो उसे सरकार द्वारा निर्धारित फीस जमा करनी होगी, तभी उसे लाइसेंस मिलेगा। लेकिन ग्वालियर जिला कलेक्टर ने बंदूक के लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए एक अनोखा आदेश जारी किया है। कलेक्टर अनुराग चौधरी ने आदेश दिया है कि यदि किसी को बंदूक का लाइसेंस चाहिए तो उसे दस पौधे लगाने के साथ ही गायों के लिए दस कंबल दान करने पड़ेंगे।
आपको बता दें कि ग्वालियर-चंबल संभाग में लाइसेंसी हथियार रखना स्टेट्स सिंबल माना जाता है। इस क्षेत्र के लोग लाइसेंस प्राप्त करने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार रहते हैं। ग्वालियर जिले में वर्तमान में 28500 शस्त्र लाइसेंस हैं। हर माह लगभग सौ लाइसेंस के लिए आवेदन आते हैं। इसी चाहत का फायदा उठाते हुए जिला कलेक्टर ने लाइसेंस को हथियार बनाया और गौशाला में 10 कंबल दान करने की शर्त लगा दी। जिससे गायों को सर्दी से बचाया जा सके।
गौरतलब है कि बीते दिनों नगर निगम द्वारा संचालित मार्क गौशाला में सर्दी से 2 दिनों में 14 गायों की मौत हो गई थी। इसके बाद कलेक्टर ने गायों को सर्दी से बचाने के लिए 3 लाख रुपए का चेक दिया था। वहीं श्रीकृष्णायन देशी गौरक्षाशाला के संतों की ओर से भी 2 लाख स्र्पए के तिरपाल दान दिए गए थे। तमाम कोशिशों के बावजूद जब दोनों गोशालाओं की 9000 गायों को सर्दी से बचाना मुश्किल होने लगा तो कलेक्टर ने आदर्श गौशाला में गो सेवकों एवं समाजसेवियों की बैठक बुलायी । और गायों को सर्दी से बचाने का सुझाव मांगा । इसी दौरान उन्होंने जिले के संबंधित अधिकारियों को आदेश दिए कि जिले भर में जिसको भी बंदूक का लाइसेंस चाहिए उन्हें गौशाला में कम से कम 10 कंबल दान करने होंगे ।
जबकि शुक्रवार को मार्क गौशाला में गायों को सर्दी से बचाने के लिए स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया था। इसमें एक दर्जन से अधिक पशु चिकित्सकों सहित लगभग 30 अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों ने गायों को टीकाकरण एवं स्वास्थ्य परीक्षण किया था। अब ऐसे स्वास्थ्य शिविर का आयोजन प्रति सप्ताह करने का आदेश कलेक्टर ने दिया है। जिससे गायों को इस तेज सर्दी से बचाया जा सके।
पटना (बिहार)। आप यह अच्छी तरह जानते हैं कि हमारे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में सूचना का अधिकार कानून बहुत ही कारगर हथियार के रुप में जाना जाता है । लेकिन क्या आपने कभी सोंचा है कि इस कानून का उपयोग शादी से पहले संभावित वर के स्टेटस और शादी के बाद पति का वेतन पता करने में भी हो सकता है। यदि नहीं तो हम आपको बताते हैं कि किस प्रकार बिहार में सूचना का अधिकार के जरिए वधू पक्ष शादी से पहले संभावित वर के चाल-चलन, नौकरी व वेतन आदि की जानकारी मांग रहे हैं।
आपको जानकर यह हैरानी होगी कि बिहार में शादियों का मौसम शुरु होते ही कई सरकारी कार्यालयों में वर या लड़के की शैक्षणिक योग्यता, पदनाम, स्थायी नौकरी और वेतन की जानकारी प्राप्त करने के लिए आवेदनों की लाइन लग गयी है। लोक सूचना अधिकारी ने खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में जिला प्रबंधक के रूप में पदस्थापित एक लड़के के बारे में बताया कि उसकी शादी रांची के एक कारोबारी परिवार में तय हुई है। और लड़की के पिता ने उनके वेतन, नौकरी स्थायी है या अस्थायी एवं शैक्षणिक योग्यता के बारे में सूचना का अधिकार के तहत आवेदन देकर जानकारी मांगी है। और साथ ही सवाल पूछा है कि लड़के की एमबीए की डिग्री कहां की है?
इतना ही नहीं शिक्षा विभाग में भी इसी प्रकार के सात आवेदन आए हैं, जिनमें संभावित वर के बारे में कई दिलचस्प जानकारियां मांगी गईं हैं। भागलपुर के एक व्यक्ति ने सूचना का अधिकार के तहत आवेदन देकर शिक्षा विभाग से पूछा है कि लड़का नियोजित शिक्षक है, लेकिन उसका वेतन क्या है? भविष्य में उसे प्रोन्नति मिलेगी या नहीं, वेतन बढ़ेगा या नहीं? वहीं सारण के एक कारोबारी ने आवेदन देकर जयप्रकाश विश्वविद्यालय के एक कॉलेज में कार्यरत लेखा पदाधिकारी के वेतन और उम्र के बारे में सूचना मांगी है। जबकि सबसे दिलचस्प सूचना औरंगाबाद के शिव बालक यादव ने मांगी है। अपने आवेदन में उन्होंने पूछा है कि लोक स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत उनकी बेटी के संभावित वर का व्यवहार कैसा है?
कई वधू पक्ष तो इतने से ही संतुष्ट नहीं हैं वह संभावित वर की आर्थिक हैसियत की सही सूचना पाने के लिए क्रेडिट इनफॉरमेशन ब्यूरो इंडिया लिमिटेड (सिविल) का भी सहयोग ले रहे हैं। जिससे वर के कर्ज का विस्तृत ब्योरा प्राप्त करने के साथ ही आर्थिक हैसियत का अनुमान लगा सकें। वहीं शादी के बाद कई पत्नियां सूचना का अधिकार के जरिए अपने पतियों के वेतन के बारे में जानकारी मांग रहीं हैं।
आपको बता दें कि सूचना का अधिकार के तहत इस वर्ष जनवरी से लेकर अक्टूबर तक 1423 लोगों ने इस तरह की सूचनाएं मांगी। जिसमें से 645 मामलों में निजी जानकारियां मांगीं गयी थी। इनमें से 60 फीसदी सूचनाओं को लोक सूचना अधिकारी ने देने से मना कर दिया। और केवल 40 फीसद आवश्यक निजी सूचनाएं ही उपलब्ध करवायी हैं।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत जारी की जा रही इस मदद को प्राप्त करना किसानों के लिए लोहे के चने चबाने जैसा हो गया है। अब तक काफी किसानों के नाम पंजीकृत नहीं हो सके हैं। कई किसान ऐसे हैं जिनका डाटा विभाग के कर्मचारियों ने गलत जानकारी फीड कर दिया है। वहीं लाखों किसानों के खातों में अब तक एक भी किश्त नहीं पहुंची है, जबकि लाखों किसानों के खाते में दूसरी किश्त नहीं पहुंची है।
गौतमबुद्ध नगर जिले में जांच में खुलासा हुआ है कि थानों में 2 होमगार्डों की ड्यूटी लगाकर 10 होम गार्डों का वेतन निकाल लिया जाता था। इसके बाद विभिन्न थानाध्यक्षों के फर्जी हस्ताक्षर व मुहर के सहारे बैंक से दैनिक भत्ता निकाल लिया जाता था।