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हमारे देश में यदि कोई नेता एक दिन के लिए भी विधानसभा सदस्य बन जाता है तो वह आजीवन पेंशन और भत्तों का अधिकारी हो जाता है,,,, और उसके या उसके परिवार के लिए जीवन भर के लिए पेंशन और भत्ते की व्यवस्था पक्की हो जाती है। ऐसा क्यों...
हमारे देश में यदि कोई नेता एक दिन के लिए भी विधानसभा सदस्य बन जाता है तो वह आजीवन पेंशन और भत्तों का अधिकारी हो जाता है,,,, और उसके या उसके परिवार के लिए जीवन भर के लिए पेंशन और भत्ते की व्यवस्था पक्की हो जाती है। ऐसा क्यों...
जिला कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट जिले का मुख्य कार्यकारी, प्रशासनिक और राजस्व अधिकारी होने के साथ ही कल्याण और नियोजित विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। और जिले में कार्य कर रहीं विभिन्न सरकारी एजेंसियों के मध्य समन्वय स्थापित करता है।
हमारे देश में यदि कोई भी नेता एक दिन के लिए भी सांसद बन जाता है तो उसे संविधान के अनुच्छेद 106 के तहत भारत सरकार की ओर से पेंशन मिलनी शुरु हो जाती है। इतना ही नहीं, वह जितनी बार सांसद बनता है उतनी बार उसकी पेंशन और पेंशन की संख्या में बढ़ोतरी होती जाती है। आखिर क्यों !
हमारे देश में यदि कोई भी नेता एक दिन के लिए भी सांसद बन जाता है तो उसे संविधान के अनुच्छेद 106 के तहत भारत सरकार की ओर से पेंशन मिलनी शुरु हो जाती है। इतना ही नहीं, वह जितनी बार सांसद बनता है उतनी बार उसकी पेंशन और पेंशन की संख्या में बढ़ोतरी होती जाती है। आखिर क्यों !
जिला कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट जिले का मुख्य कार्यकारी, प्रशासनिक और राजस्व अधिकारी होने के साथ ही कल्याण और नियोजित विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। और जिले में कार्य कर रहीं विभिन्न सरकारी एजेंसियों के मध्य समन्वय स्थापित करता है।
उत्तर प्रदेश की जनता की शिकायत के समाधान के लिए स्थापित जनसुनवाई पोर्टल को अधिकारियों ने मजाक बनाकर रख दिया है। अधिकारी समस्या का निस्तारण करने की बजाय बिना जांच और कार्यवाही के झूठी रिपोर्ट लगाकर इस व्यवस्था का मजाक उड़ा रहे हैं। और सरकार के सामने अपनी पीठ थपथपा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश की जनता की शिकायत के समाधान के लिए स्थापित जनसुनवाई पोर्टल को अधिकारियों ने मजाक बनाकर रख दिया है। अधिकारी समस्या का निस्तारण करने की बजाय बिना जांच और कार्यवाही के झूठी रिपोर्ट लगाकर इस व्यवस्था का मजाक उड़ा रहे हैं। और सरकार के सामने अपनी पीठ थपथपा रहे हैं।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार के खिलाफ जिला उपभोक्ता फोरम में एक अनोखा मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि वह सड़क पर बाइक चला रहा था तभी डिवाइडर के ऊपर चल रहे अभिनेता अक्षय कुमार के विज्ञापन को देखकर उनका ध्यान भटक गया और और दुर्घटना हो गयी। जिसमें वह गंभीर रुप से घायल हो गए। उन्होंने साढ़े चार लाख रुपए के मुआवजे की मांग की है।
शिकायतकर्ता सत्येंद्र कुमार शर्मा बरेली में करनपुर के रहने वाले हैं। उनका कहना है कि वह 29 सितंबर को फन रिपब्लिक मॉल के सामने अपनी बाइक से जा रहे थे। वहीं पर डिवाइडर के ऊपर सूचना विभाग की लगाई गई बड़ी स्क्रीन पर अक्षय कुमार का विज्ञापन चला रहा था। इसमें अभिनेता ट्रैफिक पुलिस की वर्दी पहनकर यातायात नियमों की जानकारी दे रहे थे। सत्येंद्र कुमार शर्मा का कहना है कि सड़क के बीचो-बीच दिखाए जा रहे विज्ञापन ने उनका ध्यान खींचा, जिससे आगे जा रहे वाहन से उनकी बाइक टकराकर क्षतिग्रस्त हो गई। दुर्घनटना से उनकी हेडलाइट, मिरर, साइट स्टेंड, स्विच आदि टूट गए। वह स्वयं भी गंभीर रुप से घायल हो गए । जिसके बाद बाइक को वह किसी तरह रिक्शे पर लादकर फैजाबाद रोड ले गए और अस्पताल में अपना इलाज कराया। बाइक की मरम्मत के साथ ही उनके इलाज में साढ़े चार लाख रुपये का खर्च आया। उन्होंने फोरम में शिकायत दर्ज कराकर साढ़े चार लाख रुपये मुआवजा दिलाए जाने की मांग की है। इसके साथ ही 25 हजार रुपये मानसिक व शारीरिक कष्ट के लिए और 25 हजार रुपये वाद व्यय दिलाए जाने की मांग की है। शिकायत में अभिनेता अक्षय कुमार और प्रमुख सचिव सूचना एवं जनसंपर्क विभाग आरोपित बनाया है।
जिला उपभोक्ता फोरम प्रथम के वरिष्ठ सदस्य और न्यायिक अधिकारी राजर्षि शुक्ला का कहना है कि शिकायत की सुनवाई की गई है। अब मुंबई निवासी अभिनेता अक्षय कुमार और प्रमुख सचिव सूचना को नोटिस भेजा गया है। 30 दिन के भीतर उनका जबाव मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। जरूरत होने पर लखनऊ स्मार्ट सिटी लिमिटेड को भी सुनवाई में शामिल कर नोटिस दिया जा सकता है।
नागौर (राजस्थान)। नागौर जिले के जालसू नानक गांव के ग्रामीणों ने बिना रेलकर्मी वाले जालसू नानक रेलवे स्टेशन का कुशलतापूर्वक संचालन करके देश में एक अनोखा उदाहरण पेश किया है। संभवत: यह देश का पहला रेलवे स्टेशन है। इस स्टेशन पर ग्रामीण ही टिकट काटते हैं और सभी लोग चंदा जुटाकर हर महीने करीब 1500 टिकट भी खरीदते हैं । जिससे कि हर दिन नियमित रुप से दस रेलगाड़ियां स्टेशन पर रुकती रहें।
आपको बता दें कि रेलवे विभाग ने 1976 में जालसू नानक रेलवे स्टेशन के स्वीकृत होने के बाद यहां पर एक लकड़ी की कुटिया बनाकर रेलगाड़ियों का ठहराव शुरू किया था। जालसू नानक गांव के पूर्व सरपंच गिरवर सिंह ने बताया कि सन् 2005 में जोधपुर रीजन में कम आमदनी वाले रेलवे स्टेशनों को रेलवे विभाग ने बंद कर दिया था। इस दौरान जालसू नानक रेलवे स्टेशन भी बंद हो गया। इसके बाद सेवानिवृत्त फौजियों और ग्रामीणों ने रेलवे स्टेशन खोलने के लिए धरना दिया तो रेलवे विभाग ने 11वें दिन स्टेशन तो शुरू कर दिया, लेकिन ग्रामीणों के सामने हर महीने 1500 टिकट और प्रतिदिन 50 टिकट बेचने की शर्त रख दी।
ग्रामीणों ने रेलवे विभाग की इस चुनौती को स्वीकार करते हुए स्टेशन का संचालन संभाल लिया और टिकट का वितरण शुरू कर दिया। विंडो संचालक रह चुके रतन सिंह ने बताया कि ग्रामीणों ने स्टेशन संचालन के लिए 1 लाख 50 हजार रुपए का चंदा कर रखा है। यह राशि गांव में ब्याज पर दी गई है। इससे हर माह 3 हजार रु. ब्याज मिलता है। वहीं, 1500 टिकट बिक्री के चलते बुकिंग संभालने वाले ग्रामीण को 15% कमीशन मिलता है। इस राशि से मानदेय भुगतान किया जाता है।
हालांकि 2001 तक इस स्टेशन पर कोई सुविधा नहीं थी। लेकिन तब की तत्कालीन सरपंच सुशीला कंवर ने पंचायत मद से स्टेशन पर एक हॉल और बरामदा बनवाया और डीआरएम की मौजूदगी में रेलवे विभाग को सुपुर्द किया। इतना ही नहीं ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा करके पीने के पानी के लिए एक प्याऊ बनवाया। इसके अलावा गांव के सेवानिवृत्त फौजियों ने फूलों का बगीचा भी तैयार किया। जालसू नानक गांव के हर घर में फौजी हैं। वर्तमान में गांव के 160 से ज्यादा बेटे सेना, बीएसएफ, नेवी, एयरफोर्स और सीआरपीएफ में हैं। जबकि 200 से ज्यादा रिटायर्ड फौजी हैं।
जयपुर (राजस्थान)। सरकारी अधिकारी अक्सर अपने कारनामों से भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान स्थापित करते ही रहते हैं। ताजा मामला राजस्थान राज्य उपभोक्ता संघ में सामने आया है। जहां के महाप्रबंधक ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि संघ के दो वरिष्ठ प्रबंधक और सात कर्मचारी फर्जी डिग्री के जरिए बाइस वर्ष से बेखौफ होकर नौकरी कर रहे हैं। अब कानफैड ने सभी प्रबंधकों एवं कर्मचारियों से तीन दिन के अंदर शैक्षणिक मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा है।
आपको बता दें कि राजस्थान राज्य उपभोक्ता संघ में शिकायत की गयी थी कि दो वरिष्ठ प्रबंधक और सात कर्मचारी फर्जी डिग्री के जरिए संस्थान में नौकरी कर रहे हैं। मामले के सामने आने के बाद उपभोक्ता संघ के महाप्रबंधन दिव्या खंडलेवाल ने एक रिपोर्ट तैयार की, जिसमें अधिकारियों एवं कर्मचारियों की डिग्रियों को फर्जी बताया गया। दिव्या खंडलेवाल का कहना है कि इन अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति समचार पत्रों में विज्ञप्ति जारी किए बिना ही कर दी गयी थी। जिसमें 29 लोग भर्ती हुए थे। इनमें से अधिकांश लोगों के पास पद के लिए निर्धारित न्यूनतम योग्यता नहीं है,वहीं कुछ की मार्कशीट फर्जी है। जबकि सर्विस बुक से मूल दस्तावेज गायब हैं। इसकी रिपोर्ट विभाग के वरिष्ठ अफसरों को भी कार्रवाई के लिए भेजी गई है। लेकिन रविवार को पांच दिन गुजर जाने के बाद एक भी कॉनफैड कर्मी ने मूल प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किए हैं।
राजस्थान राज्य उपभोक्ता संघ में फर्जी तरीके से नौकरी पाने वालों में वरिष्ठ प्रबंधक योगेंद्र शर्मा और राजेंद्र सिंह शेखावत भी शामिल हैं, जिनके पास भी योग्यता प्रमाण पत्र नहीं थे। इसके बावजूद दोनों नौकरी करने से लेकर पदोन्नति तक लेते रहे हैं। लेकिन हैरान की बात यह है कि ये अधिकारी 16- सीसी चार्जशीट भुगत चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद इनकी नियमित वेतन वृद्धियां बिना रुकावट के होती रही हैं। वहीं राज्य उपभोक्ता संघ में भर्ती हुए कर्मचारियों के पास तय नियम अनुसार सीए, आईसीडब्ल्यूए, एमबीए जैसी डिग्रियां आवश्यक थी। लेकिन दो वरिष्ठ प्रबंधकों एवं सात कर्मचारियों के पास ये डिग्रियां भी नहीं थी। उन्होंने फर्जी डिग्री जमा करके नौकरी हासिल की थी।
महाप्रबधंक का कहना है कि 1987 में हुई इस भर्ती को लेकर कानफैड के भर्ती मंडल से लेकर अधिकारी तक सवालों के घेरे में आ गए हैं। आखिर इतनी भारी गड़बड़ियां कैसे हुईं। इस खुलासे के बाद अब उस समय भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है। अब देखने वाली यह बात होगी कि इनके खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मुद्रा योजना के तहत ऋण लेने वाले पांच व्यक्तियों में से केवल एक व्यक्ति ने नया व्यापार शुरु करने के लिये ऋण लिया है। इसमें से बाकी चार व्यक्तियों ने अपने पुराने व्यापार में मुद्रा योजना का पैसा लगाया और उसे आगे बढ़ाया। इसके कारण न तो नया व्यापार पैदा हुआ ओर न ही नए लोगों को रोजगार मिला।
भारत सरकार ने सन् 2008 में लोगों को स्तरीय और सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री जन औषधि योजना शुरू की थी। 2016 में इसका नाम बदलकर प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना कर दिया गया। इसके तहत देशभर में 5,000 से ज्यादा जन औषधि केंद्र खोले गए हैं। 'देश की सेहत' सुधारने के लिए शुरू हुई इस योजना के लिए इसका जोर-शोर से प्रचार और प्रसार भी किया गया। लेकिन यह योजना उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी।
पटना (बिहार)। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार या कहें सुशासन बाबू के राज में कानून व्यवस्था बिगड़ती ही जा रही है। राष्ट्रीय जनता दल का एक विधायक अपराधियों के डर से अपना जिला छोड़कर राजधानी पटना में डेरा डाले हुए है। अपराधियों की धमकी और पुलिस के रवैये से परेशान राष्ट्रीय जनता दल विधायक सरोज यादव का कहना है कि यदि आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं की गई तो वह मुख्यमंत्री आवास के सामने आमरण अनशन करेंगे और इसके बाद आत्मदाह कर लेंगे।
भोजपुर जिले बड़हरा विधानसभा से निर्वाचित विधायक सरोज यादव का पैतृक गांव बडहरा थाना क्षेत्र का केशवपुर है। हालांकि इस समय वह दानापुर के आरकेपुरम कॉलोनी में रहते हैं। उनका कहना है कि उनके पैतृक गांव के आवास के पास अपराधियों ने पहले गोलीबारी की, फिर दो दिनों बाद भाकपा माओवादी नकुल के नाम से मोबाइल पर 10 लाख रुपये की रंगदारी का मैसेज भेजा और नहीं देने पर परिवार सहित बम से उड़ा देने की धमकी दी। इतना ही नहीं अपराधियों ने रंगदारी देने के लिए विधायक के नंबर पर बैंक का अकाउंट नंबर और आईएफएससी कोड भी भेजा है। हालांकि विधायक ने मोबाइल पर दी गई इस धमकी का मामला दानापुर थाना में दर्ज करवा दिया है और पुलिस से स्वयं और अपने परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई है। हालांकि पुलिस मामले की जांच कर रही है।
वहीं विधायक का कहना है कि भोजपुर पुलिस और राज्य के पुलिस महानिदेशक भी केवल आश्वासन दे रहे हैं। आरोपितों की जानकारी होने के बाद भी उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है। विधायक सरोज यादव ने बताया कि गोलीबारी व रंगदरी की मांग के दोनों मामलों में एफआइआर दर्ज करने के बावजूद पुलिस कुछ नहीं कर ही है। विधायक ने अपने साथ पहले भी हो चुकी घटनाओं का जिक्र करते हुए कह कि उनका पूरा परिवार डरा हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर घटना के आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं की गई तो वे 19 सितंबर को पटना में मुख्यमंत्री आवास के सामने आमरण अनशन पर बैठ जाएंगे। इसके बाद आत्मदाह कर लेंगे।
जयपुर (राजस्थान)। देश में नए मोटर वाहन अधिनियम के लागू होने के बाद पुलिस चालान काटने के नए-नए रिकॉर्ड बना रही है। वही राजस्थान के झालावाड़ में परिवहन विभाग ने चालान का एक अनोखा रिकॉर्ड बना डाला है। उन्होंने 8 वर्ष पहले मर चुके राजेंद्र कसेरा नाम के व्यक्ति के लाइसेंस को निलंबित करने का नोटिस भेज दिया है। और लाइसेंस की मूल प्रति के साथ जिला परिवहन कार्यालय में बुलाया है।
आपको बता दें कि झालावाड़ शहर के रहने वाले राजेंद्र कसेरा का निधन 5 सितंबर, 2011 को हो गया था। परिवहन कार्यालय ने डाक से 11 सितंबर को भेजे अपने नोटिस में राजेंद्र कसेरा को लिखा कि वह बिना बेल्ट लगाए तेज गति से वाहन चलाते हुए पाए गए थे । इसलिए विभाग ने उनको दोषी मानते हुए लाइसेंस निलंबन के लिए नोटिस भेजा है। विभाग ने लाइसेंस की मूल प्रति के साथ 23 सितंबर को जिला परिवहन कार्यालय में बुलाया है। यह भी लिखा है कि यदि वह तय दिन उपस्थित नहीं होंगे तो एकतरफा कार्रवाई करते हुए उनका लाइसेंस निलंबित कर दिया जाएगा। वहीं परिवहन विभाग के इस पत्र को पाने के बाद मृतक राजेंद्र कसेरा के परिजन हैरान हैं। मृतक के पुत्र का कहना है कि उनके पिता का लाइसेंस दो पहिया वाहन का था, जो 2014 तक ही वैध था।
वहीं इस मामले में जिला परिवहन अधिकारी समीर जैन का कहना है कि पुलिस ने चालान किया होगा और लाइसेंस निलंबन को लेकर हमारे यहां पत्र भेजा होगा। हमने लाइसेंस निलंबित करने से पूर्व जिसके नाम से लाइसेंस था उन्हें सूचना दी। अब आदमी जिंदा है या नहीं हमें इसकी जानकारी नहीं है।
हैरानी की बात यह है कि जिले का एक जिम्मेदार परिवहन अधिकारी जब इतनी लापरवाही से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहा है तो भला परिवहन विभाग के पुलिसकर्मियों से भला क्या कोई उम्मीद की जा सकती है।
जयपुर (राजस्थान)। केंद्र सरकार द्वारा सूचना का अधिकार कानून में संशोधन करने से जहां देशभर में लोगों के बीच बहुत मायूसी है, वहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को जनसूचना पोर्टल 2019 को लांच करके सराहनीय कार्य किया है। इसके शुरु होने के बाद सरकारी विभाग की सूचनाओं के लिए अधिकारियों की इच्छा पर निर्भर नहीं रहना होगा। अब एक ही जगह पर सरकारी सूचनाएं अपने आप उपलब्ध होंगी। और सरकारी विभागों में पारदर्शिता आऩे के साथ ही उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ेगी।
इस पोर्टल (jansoochna.rajasthan.gov.in) की शुरूआत होने से सरकार के कार्यों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित होगी। इसके माध्यम से आम लोगों को सरकारी विभागों से जुड़ी सूचनायें उपलब्ध करवाई जाएंगी। लोगों को प्रारम्भ में 13 विभागों की 23 विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी एक ही क्लिक पर मिल जाएगी। हालांकि धीरे-धीरे अन्य विभागों की योजनाओं को भी जोड़ा जाएगा। विशेष बात यह है कि लोगों को किसी तरह की जानकारी लेने के लिए आरटीआई लगाने की आवश्यकता नहीं होगी।
जनसूचना पोर्टल से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग, ग्रामीण विकास व पंचायती राज विभाग, प्रारम्भिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग, श्रम एवं रोजगार विभाग, खान एवं भूविज्ञान विभाग, राजस्व विभाग, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, सहकारिता विभाग, ऊर्जा विभाग, आयोजना व सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग और प्रशासनिक सुधार विभाग जुड़े हुए हैं।
इसमें महात्मा गाँधी नरेगा से संबंधित कार्यों की जानकारी, ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौचमुक्त लाभार्थियों की जानकारी, पंचायतीराज संस्थाओं के विकास कार्यों की जानकारी, मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा एवं जाँच योजना, आयुष्मान भारत महात्मा गांधी राजस्थान, स्वास्थ्य बीमा योजना के लाभार्थियों की जानकारी, सूचना के अधिकार की जानकारी, खाद्य सुरक्षा योजना के लाभार्थियों की जानकारी, उचित मूल्य की दुकानों की जानकारी, राशनकार्ड धारकों की जानकारी, राजस्थान कृषक ऋण माफी योजना-2019 के लाभार्थियों की जानकारी उपलब्ध होगी।
इसी प्रकार अल्पकालीन फसली ऋण 2019 के वितरण, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दलहन व तिलहन खरीद, शालादर्पण व शाला दर्शन की सूचनाएं,सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लाभार्थियों, पालनहार योजना, ई-मित्र कियोस्को, क्लीयरेंस रिपोर्ट जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट, राज्य निवासी डेटा रिपोजिटरी कार्ड धारको, राजस्व गिरदावरी की नकल, सामुदायिक वन अधिकार व विद्युत उपभोक्ताओं से संबंधित जानकारी भी इस पोर्टल पर मिलेगी।
मैग्सेसे अवार्ड विजेता अरूणा राय का कहना है कि आरटीआई कानून के तहत जन सूचना पोर्टल के माध्यम से प्रत्येक विभाग की जानकारी उपलब्ध कराना बड़ा कदम है। यह पोर्टल ऐसी खिड़की साबित होगी, जो अधिकारियों को ही सूचना ऑनलाइन उपलब्ध कराने के लिए बाध्य करेगी।
जयपुर (राजस्थान)। केंद्र सरकार द्वारा सूचना का अधिकार कानून में संशोधन करने से जहां देशभर में लोगों के बीच बहुत मायूसी है, वहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को जनसूचना पोर्टल 2019 को लांच करके सराहनीय कार्य किया है। इसके शुरु होने के बाद सरकारी विभाग की सूचनाओं के लिए अधिकारियों की इच्छा पर निर्भर नहीं रहना होगा। अब एक ही जगह पर सरकारी सूचनाएं अपने आप उपलब्ध होंगी। और सरकारी विभागों में पारदर्शिता आऩे के साथ ही उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ेगी।
इस पोर्टल (jansoochna.rajasthan.gov.in) की शुरूआत होने से सरकार के कार्यों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित होगी। इसके माध्यम से आम लोगों को सरकारी विभागों से जुड़ी सूचनायें उपलब्ध करवाई जाएंगी। लोगों को प्रारम्भ में 13 विभागों की 23 विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी एक ही क्लिक पर मिल जाएगी। हालांकि धीरे-धीरे अन्य विभागों की योजनाओं को भी जोड़ा जाएगा। विशेष बात यह है कि लोगों को किसी तरह की जानकारी लेने के लिए आरटीआई लगाने की आवश्यकता नहीं होगी।
जनसूचना पोर्टल से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग, ग्रामीण विकास व पंचायती राज विभाग, प्रारम्भिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग, श्रम एवं रोजगार विभाग, खान एवं भूविज्ञान विभाग, राजस्व विभाग, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, सहकारिता विभाग, ऊर्जा विभाग, आयोजना व सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग और प्रशासनिक सुधार विभाग जुड़े हुए हैं।
इसमें महात्मा गाँधी नरेगा से संबंधित कार्यों की जानकारी, ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौचमुक्त लाभार्थियों की जानकारी, पंचायतीराज संस्थाओं के विकास कार्यों की जानकारी, मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा एवं जाँच योजना, आयुष्मान भारत महात्मा गांधी राजस्थान, स्वास्थ्य बीमा योजना के लाभार्थियों की जानकारी, सूचना के अधिकार की जानकारी, खाद्य सुरक्षा योजना के लाभार्थियों की जानकारी, उचित मूल्य की दुकानों की जानकारी, राशनकार्ड धारकों की जानकारी, राजस्थान कृषक ऋण माफी योजना-2019 के लाभार्थियों की जानकारी उपलब्ध होगी।
इसी प्रकार अल्पकालीन फसली ऋण 2019 के वितरण, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दलहन व तिलहन खरीद, शालादर्पण व शाला दर्शन की सूचनाएं,सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लाभार्थियों, पालनहार योजना, ई-मित्र कियोस्को, क्लीयरेंस रिपोर्ट जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट, राज्य निवासी डेटा रिपोजिटरी कार्ड धारको, राजस्व गिरदावरी की नकल, सामुदायिक वन अधिकार व विद्युत उपभोक्ताओं से संबंधित जानकारी भी इस पोर्टल पर मिलेगी।
मैग्सेसे अवार्ड विजेता अरूणा राय का कहना है कि आरटीआई कानून के तहत जन सूचना पोर्टल के माध्यम से प्रत्येक विभाग की जानकारी उपलब्ध कराना बड़ा कदम है। यह पोर्टल ऐसी खिड़की साबित होगी, जो अधिकारियों को ही सूचना ऑनलाइन उपलब्ध कराने के लिए बाध्य करेगी।
भीलवाड़ा (राजस्थान)। धन की लालच में किसी व्यक्ति की जान ले लेने की हद तक जाने वाले लोगों के बारे में आपने सुना और पढ़ा भी होगा। लेकिन भीलवाड़ा में एक फायनेंसर ने धन प्राप्त करने के लिए ऐसा कदम उठा लिया, जिसे पढ़कर आप भी हैरान और परेशान हो जाएंगे। आर्थिक तंगी से परेशान फाइनेंसर ने पचास लाख की बीमा राशि प्राप्त करने के लिए स्वयं की हत्या की सुपारी देकर हत्या करवा ली। पुलिस ने दोनों हत्या आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
फायनेंसर बलबीर खारोल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के मंगरोप थाना क्षेत्र का रहने वाला था। भीलवाड़ा एसपी हरेंद्र महावर ने बताया कि 3 सिंतबर को फाइनेंसर बलबीर खारोल नाम के व्यक्ति की लाश गुवारड़ी नाले में मिली थी। उसके हाथ-पैर बंधे थे। मुंह पर पॉलीथीन बंधी थी। मृतक के भाई की तहरीर पर मांगरोल थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस ने दो आरोपियों राजवीर और सुनील यादव को गिरफ्तार किया गया। राजवीर फाइनेंसर के साथ साझेदारी में में ढाबा भी चलाता था। आरोपियों ने पूछताछ के दौरान सुपारी लेकर हत्या की बात कबूल कर ली है। इस बात का खुलासा हुआ है कि ‘38 वर्षीय बलबीर खारोल ने कई लोगों को कुल 20 लाख रुपये उधार दिए थे। लेकिन वह उधार दी गई रकम वह वसूल नहीं कर पा रहा था और पिछले छह महीनों से ब्याज और मूल रकम नहीं मिलने से वह परेशान था। बलबीर ने 3 अगस्त को एक निजी बैंक से स्वयं का 50 लाख रुपये का बीमा करवाया था, जिसका दावा 28 अगस्त से शुरू हो रहा था। उसने पहली किस्त भी चुका दी थी। उन्होंने बताया कि मृतक बलबीर खारोल ने 80 हजार रुपए में अपनी हत्या करवाने की साजिश रची थी ताकि उसकी पत्नी और बेटे को बीमा की 50 लाख रुपए की राशि मिल जाए। उसने स्वयं की हत्या के लिए राजवीर सिंह और सुनील यादव को 80 हजार रुपये में अपनी हत्या की सुपारी दी थी। बलबीर ने योजना के अनुसार स्वयं की हत्या के लिये 2 सितम्बर को राजवीर सिंह और सुनील यादव को 10 हजार रुपये दिए और बाकी रकम हत्या वाले दिन अपनी जेब में रख ली। बलबीर दोनों आरोपियों के साथ एक सुनसान इलाके में गुवारड़ी नाले के पास गया और अपने हाथ और पैर एक रस्सी से बांध लिया। जिसके बाद राजवीर ने उसका गला घोट दिया। और हत्या के बाद दोनों बलबीर का शव वहीं फेंककर चले आए थे।
हर व्यक्ति को आत्मरक्षा या निजी रक्षा का अधिकार
भारतीय दण्ड संहिता की धारा 96 से लेकर 106 तक की धारा में सभी व्यक्तियों को आत्मरक्षा का अधिकार दिया गया है । व्यक्ति स्वयं की रक्षा किसी भी हमले या अंकुश या स्वयं की संपत्ति की चोरी, डकैती, शरारत व अपराधिक अतिचार के खिलाफ कर सकता है।
आत्मरक्षा अधिकार के सिद्धांत
1-आत्मरक्षा का अधिकार रक्षा या आत्मसुरक्षा का अधिकार है । इसका मतलब प्रतिरोध या सजा नहीं है।
2-आत्मरक्षा के दौरान चोट जितनी जरूरी हों उससे ज्यादा नहीं होनी चाहिए ।
3-ये अधिकार सिर्फ तभी तक ही उपलब्ध हैं जब तक कि शरीर अथवा संपत्ति को खतरे की उचित आशंका हो या जब कि खतरा सामने हो या होने वाला हो।
आत्मरक्षा को साबित करने की जिम्मेदारी अभियुक्त की होती है
1-आपराधिक मुकदमों में अभियुक्त को आत्मरक्षा के अधिकार के लिए निवेदन करना चाहिए।
2-ये जिम्मेदारी अभियुक्त की होती है कि वह तथ्यों व परिस्थितियों के द्वारा ये साबित करे कि उसका काम आत्मरक्षा में किया गया है।
3-आत्मरक्षा के अधिकार का प्रश्न केवल अभियोग द्वारा तथ्यों व परिस्थितियों के साबित करने के बाद ही उठाया जा सकता है ।
4-यदि अभियुक्त आत्मरक्षा के अधिकार की गुहार नहीं कर पाता है, तब भी न्यायालय को ये अधिकार है कि अगर उसे उचित सबूत मिले तो वह इस बात पर गौर करे। यदि उपलब्ध साक्ष्यों से ये न्याय संगत लगे तब ये निवेदन सर्वप्रथम अपील में भी उठाया जा सकता है ।
5-अभियुक्त पर घाव के निशान आत्मरक्षा के दावे को साबित करने के लिए मददगार साबित हो सकते हैं ।
आत्मरक्षा का अधिकार कब प्राप्त नहीं
1- यदि लोक सेवक या सरकारी कर्मचारी कोई कार्य करता है, जिससे मृत्यु या नुकसान की आशंका युक्ति युक्त रुप से नहीं होती है । और वह सद्भावनापूर्वक अपने पद पर काम करता है ।
2-कोई व्यक्ति जो लोक सेवक के निर्देश पर कोई कार्य करे या करने की कोशिश करे। उदाहरण- कोर्ट के लाठीचार्ज के आदेश, पुलिस की कार्रवाई।
3-यदि कोई कार्य उचित देखभाल व सावधानी से किया जाए तब उसे सद्भावनापूर्वक किया गया माना जायेगा।
4-ऐसे समय में जब सुरक्षा के लिए उचित प्राधिकारियों की सहायता प्राप्त करने के लिए समय हो।
5-स्वयं या संपत्ति की रक्षा के लिए उतने ही बल के प्रयोग का अधिकार है, जितना स्वयं की रक्षा के लिए जरूरी हो।
6-किसी विकृतचित्त व्यक्ति(अपरिपक्व समझ के शिशु, पागल व्यक्ति , शराबी) के खिलाफ आत्मरक्षा का अधिकार है।
7-किसी आक्रमण करने वाले को जान से मारा जा सकता है, अगर उस हमलावर से मौत, बलात्कार, अप्राकृतिक कार्य, अपहरण आदि की आशंका हो।
8-सुप्रीम कोर्ट ने आत्मरक्षा के अधिकार से जुडे मामले में अपने निर्णय में कहा था कि कानून का पालन करने वाले लोगों को कायर बनकर रहने की जरूरत नहीं है, खासकर तब, जबकि आपके ऊपर गैरकानूनी तरीके से हमला किया जाए।
संपत्ति की रक्षा का अधिकार
1- संपत्ति के वास्तविक मालिक को अपना कब्जा बनाए रखने का अधिकार है ।
2-संपत्ति पर जबरदस्ती कब्जा जमाए रखने वाला व्यक्ति कब्जे को बनाए रखने की प्रार्थना नहीं कर सकता है ।
3-कोई बाहरी व्यक्ति अचानक खाली पड़ी जमीन पर कब्जा करके वास्तविक मालिक को बेदखल नहीं कर सकता है ।
4-जमीन के वास्तविक मालिक को अधिकार है कि वो कानूनी तरीके से बाहरी व्यक्ति को अपनी जमीन में ना घुसने दे।
5-बाहरी व्यक्ति को शारीरिक हमले से आत्मरक्षा का अधिकार तभी होगा जब वो संपत्ति का यह अधिकार लंबे समय से इस्तेमाल कर रहा हो।
6-अगर वास्तविक मालिक बलपूर्वक अचानक जमीन पर कब्जा करने वाले बाहरी व्यक्ति से बलपूर्वक अपनी जमीन को प्राप्त करेगा , तो वह किसी अपराध का दोषी नहीं होगा ।
7-यदि कोई बाहरी व्यक्ति असली मालिक को जानते हुए भी गलती से किसी जमीन के टुकड़े को लंबे समय तक इस्तेमाल करता है तो असली मालिक कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकता है। उसे कानूनी उपचारों की मदद लेनी होगी।
8-आईपीसी की धारा 103 के मुताबिक लूट, रात्रि में घर में सेंध,आगजनी,चोरी आदि की स्थिति में अगर जान का खतरा हो तो आक्रमणकारी की हत्या करना न्याय संगत होगा।
इसलिए आपके ऊपर जब भी गैरकानूनी तरीके से हमला किया जाए, आप निडर होकर अपनी आत्मरक्षा करें।
संपत्ति की निजी प्रतिरक्षा का अधिकार
1-संपत्ति की निजी प्रतिरक्षा का अधिकार तब शुरु होता है , जब संपत्ति के संकट की युक्तियुक्त आशंका शुरु होती है ।
2-संपत्ति का निजी प्रतिरक्षा का अधिकार चोरी के खिलाफ अपराधी के संपत्ति सहित पहुंच से बाहर हो जाने तक होती है अथवा लोक प्राधिकारियों की सहायता प्राप्त कर लेने तक बनी रहती है ।
3-संपत्ति का निजी प्रतिरक्षा अधिकार लूट के विरुद्ध तब तक बना रहता है , जब तक कि अपराधी किसी व्यक्ति की मृत्यु या उसे नुकसान पहुंचाने तक विरोध करता है या फिर कोशिश करता रहता है । अथवा जब तक तुरंत मौत का या निजी विरोध का भय बना रहता है ।
4-संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार अत्याचार के खिलाफ तब तक बना रहता है । जब तक कि अपराधी अत्याचार करता रहता है ।
5-संपत्ति का निजी प्रतिरक्षा का अधिकार रात में घर में सेंध लगाने के खिलाफ तब तक बना रहता है । जब तक सेंध से शुरु हुआ गृह अत्याचार जारी रहता है