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सीतामढ़ी (बिहार) । एक दारोगा ने घूसखोरी का एक नायाब तरीका ढूंढ निकाला है, जिसे सुनकर सभी हैरान हैं। सीतामढ़ी शहर में तैनात दारोगा ने एक आभूषण कारोबारी को डरा धमका कर उससे घूस के रुप में चार किलो चांदी हड़प ली। और बाद में चार सिपाहियों के साथ मिलकर एक-एक किलो चांदी आपस में बांट लिया। हालांकि पीड़ित कारोबारी की शिकायत पर आरोपी दारोगा अर्जुन राय को तीन सिपाहियों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है।
महाराष्ट्र में मुंबई के रहने वाले पीड़ित सचिन दिलीप धारगे का कहना है कि उनका पूरा परिवार कई वर्षों से सीतामढ़ी शहर के शंकर डेयरी गली में रह रहा है। वहीं पर उनका परिवार चांदी साफ करने का काम करता है। वे लोग सोनापट्टी के आभूषण दुकानदार से चांदी लेते हैं, जिसे साफ करके वापस दे देते हैं। उन्हें एक किलो चांदी की सफाई के बदले पांच सौ रुपये मिलते हैं। आगे उन्होंने बताया कि उनके भाई देवनाथ धारगे और अक्षय धारगे सफाई के लिए दुकानदारों से 12 किलो चांदी लेकर 31 अगस्त की रात को अपनी बाइक से घर लौट रहे थे, इसी दौरान पैंथर मोबाइल के जवान गोपाल कुमार ने शहर के कोट बाजार से दोनों को 12 किलो चांदी के साथ पकड़ लिया। इसके बाद गोपाल कुमार उनको थाने ले जाने की बजाए रिंग बांध पीली कुटी स्थित मंदिर में ले गया। जहां उन दोनों को खूब डराया और धमकाया। इसके कुछ देर बाद ही दारोगा अर्जुन राय के साथ जवान पंकज कुमार और कमल कुमार भी वहां पहुंच गए। सभी ने मिलकर दोनों भाइयों को जमकर डराया-धमकाया और फिर धारगे बंधुओं से चार किलो चांदी हड़प लिया। इतना ही नहीं दोनों भाइयों को चेतावनी दी कि यदि आगे से इस शहर में कारोबार करना है तो उन्हें घूस देनी ही पड़ेगी। और बाद में दारोगा समेत सभी पुलिस कर्मियों ने एक-एक किलो चांदी आपस में बांट लिया।
वहीं पुलिसवालों की इस गुंडागर्दी से हैरान और परेशान सचिन दिलीप धारगे ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय और पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई। इस मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस मुख्यालय हरकत में आया और पुलिस अधीक्षक को मामले की जांच कर, कार्रवाई करने का आदेश दिया। पुलिस अधीक्षक ने सचिन दिलीप धारगे और उनके दोनों भाइयों को अपने कार्यालय में बुला कर घटना के बारे में विस्तार से जानकारी ली। इस पूछताछ के दौरान दारोगा अर्जुन राय, पैंथर मोबाइल के जवान गोपाल कुमार, पंकज कुमार और कमल कुमार का नाम सामने आया। इसके बाद उन्होंने सचिन दिलीप धारगे के भाइयों से दारोगा और तीनों जवानों की पहचान कराई। और फिर बुधवार की रात पुलिस अधीक्षक कुमार नगर थाना पहुंचकर चारों पुलिस कर्मियों से घटना के विषय में जानकारी ली। उनके निर्देश पर पुलिस टीम ने दारोगा और जवानों के आवास पर छापा मारकर चार किलो चांदी बरामद कर लिया। इसके बाद दारोगा अर्जुन राय, पैंथर मोबाइल के जवान गोपाल कुमार, पंकज कुमार और कमल कुमार को गिरफ्तार कर, उनके खिलाफ नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी है।
तहसीलदार जिले की प्रशासकीय ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। यह तहसील (उपखंड) के मुख्य राजस्व प्रभारी के तौर पर कार्य करते हैं। तहसीलदार राज्य सरकार के द्वितीय श्रेणी के राजपत्रित अधिकारी होते हैं।
अमेठी (उत्तर प्रदेश)। अभी मथुरा में शिकायत न लिखने पर दंपति के आत्मदाह करने की तपिश कम भी नहीं हुई थी कि अमेठी में एक और पुलिसकर्मी का शर्मनाक कारनामा सामने आया है। एक गरीब महिला ने आरोप लगाया है कि वह जमीनी विवाद के संबंध में शिकायती पत्र लेकर जामो थाने पहुंची तो वहां तैनात एक सिपाही राकेश सिंह ने कार्रवाई के नाम उससे शारीरिक संबंध बनाने या 40 हजार रुपये घूस देने की मांग की। इस मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मचा हुआ है । हालांकि घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक ने महिला थानाध्यक्ष को मामले की जांच सौंप दी है।
आपको बता दें कि रविवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें महिला बता रही है कि भूमि विवाद के संबंध में वह शिकायती पत्र लेकर वह जामो थाने पहुंची तो उसकी मुलाकात सिपाही राकेश सिंह से हुई। सिपाही ने शिकायती पत्र लेकर मौके का निरीक्षण करने की बात कहकर उसे घर भेज दिया। इसके बाद वह गांव पहुंचा और विवादित स्थल का मुआयना किया। और फिर उसके पक्ष में रिपोर्ट लगाने के लिए पहले महिला को अपने कमरे पर आकर खाना बनाने को कहा। जब उसने ऐसा करने से मना कर दिया तो सिपाही ने कहा इसका तुम्हें जुर्माना भरना होगा। जब महिला ने सिपाही से जुर्माने के बारे में पूछा तो उसने कहा कि या तो मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाओ या फिर 40 हजार रुपए का आर्थिक लाभ पहुंचाओ। वहीं सोशल मीडिया के महिला के इस वीडियो के वायरल होने के जानकारी मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक डा. ख्याति गर्ग ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। गौरतलब है कि एक दिन पहले एक दूसरी ने महिला ने भी सिपाही राकेश सिंह पर 40 हजार रुपये घूस मांगने का आरोप लगाया था।
इंग्लैंड की प्रिवी काउंसिल ने 1637 में अपने फैसले में कहा कि वकीलों को समाज के अनुसार कपड़े पहनने चाहिए। उसी समय से वकीलों ने पूरी लंबाई के काले रंग के गाउन पहनने की शुरुआत की।
हमारे देश में सामान्यतया आम लोग पुलिसकर्मियों को उनकी वर्दी देखकर पहचान लेते हैं। कोलकाता को छोड़कर देश के सभी राज्यों की पुलिस की वर्दी खाकी है। हालांकि कहीं पर खाकी का रंग थोड़ा हल्का तो कहीं पर थोड़ा गहरा है।
भारत में डॉक्टरों के सफेद कोट की शुरुआत बीसवीं सदी में अंग्रेजों के समय में हुई। जो देश की आजादी के बाद आज भी चला आ रहा है।
पानीपत(हरियाणा)। हमारे देश में सब्सिडी की लूट करने वालों की कोई कमी नहीं है। ताजा मामला पानीपत है, जहां कृषि अधिकारियों ने किसानों और कृषि यंत्र बनाने वाली कंपनी के साथ मिलकर साढ़े तेरह लाख रुपए का घोटाला कर डाला। इन आधिकारियों ने हाईटेक एग्रो इंडस्ट्री कंपनी मालिक से मिलीभगत कर छोटे कृषि यंत्रों पर बड़े यंत्र की प्लेट लगाकर घोटाले को अंजाम दिया। विजिलेंस पुलिस ने कृषि विभाग के दो अधिकारियों, कंपनी मालिक और किसान समेत 23 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।
करनाल विजिलेंस पुलिस अधीक्षक श्याम लाल शर्मा के अनुसार यह मामला वर्ष 2017-18 का है। पानीपत के जाटल रोड पर पावर वीडर बनाने वाली हाईटेक एग्रो इंडस्ट्री कंपनी 5 व 7 हार्स पावर के पावर वीडर बनाने के लिए हिसार ट्रैक्टर ऑफ इंस्टीट्यूट से रजिस्टर्ड है। जबकि सरकार 9.5 एचपी पावर वीडर पर ही 50 हजार रुपए सब्सिडी देती है। ऐसे में इन शातिर अधिकारियों और कंपनी के मालिक ने मिलकर 5 एचपी और 7 एचपी के पावर वीडर पर 9.5 एचपी की प्लेट लगवा दी और फिर 27 किसानों को 50 हजार रुपए प्रति किसान के हिसाब से 13.50 लाख रुपये की सब्सिडी दिलवा दी। इनमें से 15 किसानों के नाम फर्जी दर्ज कर 7.50 लाख रुपए की सब्सिडी अधिकारियों ने गबन कर लिया। जब विजिलेंस पुलिस ने मामले की जांच की तो यह धोखाधड़ी सामने आयी। विजिलेंस टीम ने ईटेक एग्रो इंडस्ट्री कंपनी के मालिक शमीम अहमद, सहायक कृषि अभियंता विनीत कुमार, कनिष्ठ अभियंता विश्वपाल और 20 किसानों सहित 23 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। इस मामले में शामिल किसानों के नाम कृष्ण निवासी भापरा, अशोक कुमार निवासी सिठाना, ऋषि, भजन, जयकिशन, राकेश सैनी, नरेश कुमार, अनवर, मीनू, मुकेश निवासी पानीपत, मूर्ति निवासी भापरा, राजबाला निवासी काबड़ी, रीना निवासी बिहौली, सरोजबाला निवासी शेरा, गंगा सैनी निवासी कचरौली, ओमकौर निवासी बुआना लाखु, एमुर्तजा निवासी अधमी, सुरजीत निवासी इसराना, शांति देवी निवासी सिवाह, प्रेम निवासी उग्राखेड़ी हैं।
भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत जिले की तहसील (उपखंड) में तहसीलदार के समान ही राजस्व और मजिस्ट्रेट के कर्तव्यों का निर्वहन करने वाला नायब-तहसीलदार होता है। नायब तहसीलदार राजस्व के मामलों में तहसीलदार की ही तरह सहायक कलेक्टर, ग्रेड II की शक्तियों का उपयोग करता है। आइए जानते हैं कि नायब तहसीलदार के कार्य क्या हैं।
नायब तहसीलदार के कार्य:-
भारतीय लोक प्रशासन में तहसीलदार जिले की प्रशासकीय ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। यह तहसील (उपखंड) के मुख्य राजस्व प्रभारी के तौर पर कार्य करते हैं। तहसीदार राज्य सरकार के द्वितीय श्रेणी के राजपत्रित अधिकारी होते हैं। आइए जानते हैं कि तहसीलदार के कार्य क्या हैं:-
भारतीय लोक प्रशासन में जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जिसके शीर्ष पर कलेक्टर होता है, जबकि उसके अधीन तहसील (उपखंड) में डिप्टी कलेक्टर या उप जिला मजिस्ट्रेट होता है। राजस्व कानून के तहत, उसमें कलेक्टर की शक्तियों ही निहित होती है। आइए जानते हैं कि डिप्टी कलेक्टर या उप जिला मजिस्ट्रेट के क्या कार्य होते हैं।
डिप्टी कलेक्टर या उप जिला मजिस्ट्रेट के कार्य:-
भरतपुर(राजस्थान)। किसानों द्वारा बैंक का कर्ज ना चुका पाने पर उनकी संपत्ति नीलाम कर देने की घटनाएं बहुत सुनी और पढ़ी होंगी। लेकिन भरतपुर में न्यायालय का एक अनोखा फैसला सामने आया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने भरतपुर जिला प्रशासन द्वारा मनरेगा में पात्र महिला को जिला ग्राम रोजगार सहायक पद पर नियुक्ति नहीं देने पर जिला कलेक्टर आरूषि अजय मलिक की कार और जिला परिषद के फर्नीचर को कुर्क कर दिया है। जिला कलेक्टर की कार और जिला परिषद के फर्नीचर पर कुर्की का वारंट भी चस्पा कर दिया गया है। जिसमें लिखा हुआ है कि यदि एक महीने में पात्र महिला चंचल शर्मा को नियुक्ति नहीं दी गई तो जिला कलेक्टर की कार और जिला परिषद के फर्नीचर को सार्वजनिक रूप से नीलाम कर दिया जाएगा। हालांकि अभी इस मामले में कलेक्टर की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी है।
इस मामले के वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ शर्मा ने बताया कि वर्ष, 2008 में भरतपुर जिले के खोखर गांव की निवासी चंचल शर्मा पति रामचंद्र शर्मा ने मनरेगा में जिला ग्राम रोजगार सहायक पद के लिए आवेदन किया था। लेकिन पूरी योग्यता रखने के बावजूद उनकी जगह पर किसी 'अपात्र महिला' का चयन कर लिया गया और फिर उसे नियुक्ति भी दे दी गई। जिला प्रशासन के इस भ्रष्ट तरीके से परेशान पीड़ित चंचल शर्मा ने न्यायालय में अपील करते हुए परिवाद प्रस्तुत किया। न्यायालय ने इसी वर्ष चार महीने पहले जिला प्रशासन से चंचल शर्मा को जिला ग्राम रोजगार सहायक पद के लिए पात्र मानते हुए नियुक्ति कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन प्रशासन ने न्यायालय के आदेश को गंभीरता से नहीं लिया। ऐसी दशा में जिला प्रशासन की सीनाजोरी से परेशान महिला ने फिर न्यायालय की शरण ली। इसके बाद न्यायालय ने इसे अवमानना मानते हुए जिला कलेक्टर की कार और जिला परिषद के फर्नीचर को कुर्क कर नीलामी राशि से पीड़िता को भुगतान कर उसकी भरपाई करने के निर्देश दिए। जिनकी अनुपालना में गुरुवार को सेल अमीन वीरेंद्र गुप्ता ने जिला कलेक्टर की कार को कुर्क कर लिया, लेकिन जिला परिषद के कार्यालय की मय फर्नीचर समय अभाव के कारण कुर्की की कार्रवाई नहीं हो सकी। वीरेंद्र गुप्ता का कहना है कि अब यदि एक महीने में चंचल शर्मा को जिला प्रशासन द्वारा नियुक्ति नहीं दी जाती है तो सार्वजनिक रूप से जिला कलेक्टर की कार और जिला परिषद के फर्नीचर को नीलाम किया जाएगा। हालांकि न्यायालय के इस फैसले के विषय में जिला कलेक्टर का अभी तक कोई बयान नहीं आया है।
भारतीय लोक प्रशासन में जिला कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वह जिले का मुख्य कार्यकारी, प्रशासनिक और राजस्व अधिकारी होने के साथ ही कल्याण और नियोजित विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा जिले में कार्य कर रहीं विभिन्न सरकारी एजेंसियों के मध्य समन्वय स्थापित करने के चलते वह 'जिला प्रबंधक' की भी भूमिका निभाता है। आइए जानते हैं कि जिला कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट की भूमिका क्या है। -
जिला कलेक्टर के रुप में भूमिका:-
जिला मजिस्ट्रेट के रुप में भूमिका:-
जिला मुख्य प्रोटोकोल अधिकारी के रुप में भूमिका:-
जिला मुख्य विकास अधिकारी के रुप में भू्मिका क्या है:-
जिला निर्वाचन अधिकारी के रुप में भूमिका:-
लोहदरगा (झारखंड)। देश में बढ़ती बेरोजगारी का फायदा उठाते हुए शातिर ठग शिक्षित बेरोजगारों को नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का शिकार बना रहे हैं। ताजा मामला लोहदरगा का है जहां सिपाही बहाली के नाम पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी करने के मामले का खुलासा हुआ है। इससे कई शिक्षित बेरोजगार ठगी का शिकार होने से बच गए हैं। सदर थाना पुलिस ने छापा मारकर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह का सरगना युसुफ अंसारी है। इस मामले में अभी और कई लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।
पुलिस के अनुसार सिपाही बहाली के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का सरगना युसूफ अंसारी है। वह स्वयं को भारत कल्याण समिति का सचिव, भारतीय सूचना अधिकार मंच का केंद्रीय उपाध्यक्ष और झारखंड मुक्ति मोर्चा का जिला उपाध्यक्ष बताकर लोगों पर रौब झड़ता था। हालांकि इस मामले की जानकारी मिलने के बाद झामुमो के जिलाध्यक्ष मोजम्मिल अंसारी ने किसी दूसरे दल से संपर्क रखने के कारण युसूफ को दो दिन पहले पार्टी से निकालने की बात कही है। पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों में राहत नगर निवासी लुकमान अंसारी का पुत्र युसूफ अंसारी, हेंजला निवासी क्यूमुद्दीन अंसारी का पुत्र रोजामत अंसारी, कैरो थाना क्षेत्र निवासी एतवा उरांव का पुत्र फलगू उरांव, कुडू थाना क्षेत्र के चंदलासो निवासी सियानंद दुबे का पुत्र कमलेश दूबे और चारो उरांव का पुत्र महादेव उरांव शामिल हैं। वहीं छापेमारी के दौरान हिरासत में ली गयी पांच मॉडल युवतियों के साथ ही कुल 45 लोगों को पुलिस ने पूछताछ के बाद बांड भरवाकर थाने से छोड़ दिया है।
पुलिस की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि 16 लोगों से सिपाही बहाली के नाम पर कुल 5.76 लाख रुपये की वसूली की गई थी। साक्षात्कार के लिए झारखंड की मॉडल परी पासवान सहित चार अन्य युवतियों और कई पुरुष मॉडल को भी बुलाया गया था। इसके अलावा रांची, लोहरदगा, डालटनगंज, हजारीबाग, लातेहार आदि क्षेत्रों से महिला-पुरुषों को सिपाही बहाली के लिए बुलाया गया था। होटल का हॉल बुक कर साक्षात्कार करने की तैयारी की गई थी। हालांकि अब पुलिस ने फर्जीवाड़ा करने वालों के बैंक खातों को फ्रीज करने प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। एसपी प्रियदर्शी आलोक ने खुद सदर थाना पहुंच कर मामले में पड़ताल की है। इस मामले में अभी और कई लोगों के गिरफ्तार होने की उम्मीद की जा रही है। पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ के आधार पर छापेमारी अभियान भी शुरू कर दिया है।
आप जब देश के किसी भी न्यायालय में जाते हैं तो वकीलों को काला कोट और सफेद शर्ट ही पहने हुए ही क्यों देखते हैं। क्या आप जानते हैं कि वकील काले कोट क्यों पहनते हैं और सफेद बैंड क्यों लगाते हैं। आइए जानते हैं।-
अधिवक्ता (वकील) काला कोट क्यों पहनते हैं
रायपुर (छत्तीगढ़)। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को आदिम जाति विभाग के सचिव डी डी सिंह की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति ने जोर का झटका दिया है। इस समिति ने अजीत जोगी के कंवर आदिवासी होने के प्रमाण पत्र को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही अजीत जोगी के सभी जाति प्रमाण पत्रों को निरस्त कर दिया है। उच्च स्तरीय समिति ने छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग (सामाजिक प्रास्थिति के प्रमाणीकरण का विनियमन) नियम 2013 के नियम 23 (3) एवं 24 (1) के प्रावधानों के तहत कार्यवाही के लिए बिलासपुर कलेक्टर को निर्देशित किया है। 2013 के नियम 23(5) के प्रावधानों के तहत उप पुलिस अधीक्षक को प्रमाण पत्र जब्त करने के निर्देश दिए हैं। वहीं अजीत जोगी ने जोगी ने समिति के इस आदेश को न्यायालय में चुनौती देने का फैसला किया है।
आपको बता दें कि सन् 2001 में बीजेपी नेता संतकुमार नेताम ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग से पूर्व मुख्यमंत्री जोगी की जाति को लेकर शिकायत की थी। नेताम का कहना था कि जोगी ने फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर स्वयं को आदिवासी बताया है। इस आधार पर आयोग ने अजीत जोगी को नोटिस जारी किया था। इसके बाद उन्होंने बिलासपुर उच्च न्यायालय में इसे चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग को जाति का निर्धारण करने, जांच करने और फैसला देने का अधिकार नहीं है। इस फैसले को लेकर संतकुमार नेताम सर्वोच्च न्यायालय गए थे। जिसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगा दी थी। सर्वोच्च न्यायालय ने 13 अक्टूबर, 2011 को अपने फैसले में कहा था कि सरकार उच्च स्तरीय समिति बनाकर अजीत जोगी की जाति प्रकरण का निराकरण करे। गठित समिति ने मामले की जांच के बाद 27 जून 2017 को आदेश जारी कर अजीत जोगी के सभी प्रमाणपत्रों को निरस्त कर दिया था। तब इस फैसले के खिलाफ अजीत जोगी बिलासपुर उच्च न्यायालय गए, जहां न्यायालय ने उच्च स्तरीय समिति अधिसूचित न होने की वजह से इसे विधि अनुरूप नहीं माना था। इसके बाद उच्च न्यायालय के निर्देश पर राज्य शासन ने 21 फरवरी 2018 को फिर से डीडी सिंह की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति का पुनर्गठन किया था।
डीडी सिंह की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति ने अपनी जांच में पाया कि अजीत जोगी अपने कंवर अनुसूचित जनजाति के सदस्य होने के दावे को साबित करने में असफल रहे हैं। इसलिए ‘छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (सामाजिक प्रास्थिति के प्रमाणीकरण का विनियमन) अधिनियम 2013’ के अधीन नियम 2013 के उपनियम 23 (2) में विहित प्रावधान के अनुसार जोगी के पक्ष में जारी किए गए ‘कंवर’ अनुसूचित जनजाति के जाति प्रमाण पत्रों को निरस्त कर दिया गया है। वहीं अजीत जोगी का कहना है कि वह उच्च स्तरीय समिति के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देंगे। रमन सिंह सरकार के कार्यकाल में दो बार रिपोर्ट आई। मैं तब से अब तक न्यायालय में इन फैसलों को चुनौती देता रहा हूं और अब पुन: मैं इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दूंगा।
किशनगंज (बिहार)। व्यापारियों और दुकानदारों से धोखाधड़ी करने वाले नटवरवाल के बारे में आपने बहुत सुना होगा, लेकिन बिहार के किशनगंज में सरकारी नौकरी की धोखाधड़ी करने वाले एक नटवरलाल का खुलासा हुआ है। सुरेश राम नाम का यह नटवरलाल 30 वर्ष से एक साथ तीन जिलों के दो सरकारी विभागों में तीन पदों पर नौकरियां कर रहा था। और भ्रष्ट व्यवस्था का फायदा उठाकर तीनों जगहों से हर माह वेतन और पदोन्नति का फायदा उठा रहा था। उसके इस कारनामे का खुलासा वेतन देने की नई व्यवस्था वृहद वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (सीएफएमएस) से हुआ। अब एफआईआर दर्ज होने के बाद सुरेश राम फरार चल रहा है।
पटना जिले के बभौल गांव के रहने वाले नटवरलाल सुरेश राम को पहली नौकरी राज्य सड़क निर्माण विभाग में 20 फरवरी, 1988 को पटना में सहायक अभियंता के पद पर मिली थी। एक साल बाद 1989 में सुपौल में जल संसाधन विभाग के पूर्वी तटबंध भीमनगर में भी उसकी नियुक्ति हो गयी। इतना ही नहीं जब तीसरी नौकरी का लेटर बांका में जल संसाधन विभाग से सहायक अभियंता पद के लिए आया तो उसने इसे भी ज्वाइन कर लिया। और भ्रष्ट व्यवस्था का फायदा उठाते हुए वह वेतन और पदोन्नति लेता रहा। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब वेतन भुगतान की नई प्रणाली सीएफएमएस के तहत सुरेश राम का दस्तावेज डाला गया। इसमें खुलासा हुआ कि तीन विभाग में एक ही नाम, जन्मतिथि से एक ही व्यक्ति सहायक अभियंता के रूप में कार्यरत है। जब मामले की गहराई से जांच की गयी तो पता चला कि एक ही कर्मचारी तीन जगह से वेतन ले रहा है। इसके बाद सरकार के उपसचिव चंद्रशेखर प्रसाद सिंह ने सुरेश राम को सभी प्रमाणपत्र लेकर 22 जुलाई को पटना मुख्यालय में बुलाया। लेकिन वह उपसचिव के समक्ष प्रस्तुत होने की बजाय मोबाइल बंद कर भूमिगत हो गया। इसके बाद उपसचिव ने सुरेश राम के खिलाफ किशनगंज थाने में एफआईआर दर्ज करा दी। अब एफआईआर दर्ज होने के बाद से वह फरार है। वहीं, किशनगंज के डीएसपी अजय कुमार झा का कहना है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच की जा रही है। मामले की जांच के बाद सारी बातें सामने आ जाएंगी तो उचित कार्रवाई की जाएगी।
आपको बता दें कि सीएफएमएस वित्तीय प्रबंधन का एक नया तरीका है, जिसके जरिए विभाग और संगठन अपनी आय, व्यय और संपत्ति का प्रबंधन करते हैं। नई व्यवस्था लागू होने से वित्त विभाग को सारी जानकारी समय-समय पर उपलब्ध होती है। इस सॉफ्टवेयर से महालेखाकार कार्यालय और रिजर्व बैंक को भी जोड़ा गया है, जिससे ई-बिलिंग की शुरुआत भी हो गई है। इस सॉफ्टवेयर में बिहार के सभी सरकारी कर्मचारियों के वेतन और अन्य कार्यों के लिए आधार कार्ड, जन्मतिथि और अन्य जानकारी डाली जाती हैं। इसी प्रक्रिया के दौरान जब सुरेश राम का दस्तावेज डाला गया तो खुलासा हुआ कि बिहार के तीन विभागों में एक ही नाम, जन्मतिथि से सुरेश राम नाम का व्यक्ति कार्यरत है। सुरेश कुछ ही दिनों बाद सेवानिवृत्त भी होने वाला था। वहीं इस खुलासे के बाद संबंधित विभाग में हड़कंप मचा गया है।
मुरैना (मध्य प्रदेश)। देश में धोखाधड़ी के मामले आए दिन देखे और सुने जाते हैं। लेकिन मुरैना के कैलारस अस्पताल में ऐसा अजीबो-गरीब मामला सामने आया है, जिसे सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे। शुक्रवार को अस्पताल में जननी एक्सप्रेस से तीन महिलाएं आयीं और अस्पताल प्रबंधन से कहा कि उनके साथ आयी प्रसूता के बच्चे की मौत हो गयी है, इसलिए प्रसूता को भर्ती करके उसका नाम प्रसूता सहायता राशि में दर्ज किया जाए। वहीं जब डॉक्टर ने मृत बच्चे की जांच की तो वह आटे का निकला। लोग इन महिलाओं को पकड़ पाते इससे पहले ही वह अस्पताल से फरार हो गयी ।
बताया जा रहा है कि तीन महिलाएं जननी एक्सप्रेस से एक महिला व कपड़े से ढके नवजात को लेकर कैलारस अस्पताल पहुंची। इन महिलाओं ने अस्पताल के प्रसूति विभाग में बताया कि उनके साथ आयी महिला की डिलिवरी घर पर ही हो गयी है, जिसमें उनका बच्चा मरा हुआ पैदा हुआ है। इसलिए महिला को प्रसूति विभाग में भर्ती करके उसका नाम प्रसूति सहायता राशि के दस्तावेजों में दर्ज किया जाय। इसकी सूचना मिलने पर कैलारस के चिकित्सा अधिकारी डॉ. एस आर मिश्रा मौके पर पहुंचे और मृत बच्चे के ऊपर का कपड़ा हटाकर देखा तो नवजात आटे का बना हुआ निकला। इसके अलावा उस पर लाल रंग लगा हुआ था। इस अजीबो-गरीब घटना के सामने आते ही महिलाएं मौके से भाग निकलीं । इसकी सूचना मिलने के बाद पुलिस अस्पताल पहुंची और मामले की जांच की। जांच में पता चला कि ये महिलाएं खनपुरा गांव से आयी थी। हालांकि महिलाओं के भाग जाने की वजह से यह पता नहीं चल सका कि वो कौन थीं।
गौरतलब है कि शासन की ओर से प्रसूता सहायता के लिए 16 हजार रुपये की राशि दी जाती है। ये राशि शासन प्रसूता के खाते में जमा करवाता है। इसी राशि को हड़पने के लिये आटे का बना हुआ मृत बच्चा लेकर ये महिलाएं अस्पताल में आईं थीं। अस्पताल प्रबंधन जननी एक्सप्रेस के चालक के जरिये उन महिलाओं का पता लगाने का प्रयास कर रहा है।
योगी आदित्यनाथ की सरकार ने उत्तर प्रदेश में प्राइमरी स्कूलों की शिक्षा का बंटाढार कर रहे शिक्षकों की नकेल कसने की तैयारी कर ली है। बेसिक शिक्षा परिषद ‘प्रेरणा’ मोबाइल ऐप के जरिए परिषदीय प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों में होने वाली हर गतिविधि को ऑनलाइन करने जा रही है। इस व्यवस्था के तहत हेडमास्टर को अब एक टैब के जरिए स्कूल खुलने और बंद होते समय बच्चों के साथ एक सेल्फी लेकर ‘प्रेरणा’ मोबाइल ऐप पर अपलोड करना पड़ेगा। इस व्यवस्था से शिक्षकों की सही रिपोर्टिंग करने में बहुत सहायता मिलेगी।
बेसिक शिक्षा के प्रमुख सचिव विजय किरण आनंद ने प्रदेश के सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को बैठक की। इस बैठक के दौरान उन्होंने नयी व्यवस्था के बारे में सभी को बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में खामियों को ठीक करने के लिए अब परिषदीय प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों में होने वाली हर गतिविधि ऑनलाइन किया जाएगा। इसके लिए ‘प्रेरणा’ मोबाइल ऐप बनाया गया है। हर ब्लाक के खंड शिक्षाधिकारी और हर स्कूल के हेडमास्टर को एक-एक टैब मिलेगा । जब स्कूल खुलेगा और बंद होगा, उस समय बच्चों और शिक्षकों के साथ सेल्फी लेकर ‘प्रेरणा’ मोबाइल ऐप पर अपलोड होगा। इस व्यवस्था से शिक्षकों की उपस्थिति और बच्चों की संख्या की सही जानकारी उन्हें मिलती रहेगी। इसके साथ ही सभी शिक्षकों की नियुक्ति से लेकर स्थानांतरण, पोस्टिंग, पदोन्नति सब ऑनलाइन होगी। इसकी निगरानी शासन स्तर से की जाएगी। प्राथमिक विद्यालयों में यह व्यवस्था लागू होने से जिले के 1368 प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल के लगभग 7000 शिक्षकों का विवरण ऑनलाइन होगा। बेसिक शिक्षाधिकारी जय सिंह ने बताया कि बेसिक शिक्षकों का सभी विवरण अब पूरी तरह ऑनलाइन होंगे और प्रतिदिन शिक्षकों को अपनी हाजिरी सेल्फी लेकर देनी होगी। इससे शिक्षकों के सही आंकड़े ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेंगे।
इस नयी व्यवस्था की प्रक्रिया में बारे में उनका कहना था कि 'प्रेरणा' मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले एंड्रायड मोबाइल पर बने एमडीएम इंस्पेक्शन आइकन को क्लिक करना होगा। इसके बाद सबसे पहले अपने मोबाइल नंबर से 'प्रेरणा' मोबाइल ऐप पर नामांकन करना होगा। इस दौरान चार अंकों का पिन बनाना होगा। और फिर मोबाइल की स्क्रीन पर प्रदर्शित 'प्रेरणा' ऐप के आइकन को क्लिक करना होगा। अगली स्क्रीन दिखेगी, इसमें आपको अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर और आपके द्वारा बनाया गया चार अंकों का पिन उपयोग करना होगा। इसके बाद लॉग-इन के बटन को दबाना होगा। ऐसा करने पर स्क्रीन पर आपको अपने विद्यालय में क्या-क्या कार्य करने हैं, उसका विवरण दिखाई देगा। इसमें अध्यापक उपस्थिति, प्रार्थना सभा की उपस्थिति, मध्याह्न भोजन आदि से संबंधित विकल्प शामिल होंगे। यदि शिक्षक को अपनी उपस्थिति दर्ज करवानी है तो वह उपस्थिति दर्ज करने के लिए आइकन को क्लिक करेंगे। इसमें विद्यालय का नाम प्रदर्शित होगा। यहां पर स्वयं की उपस्थिति दर्ज करने के लिए चुनें। साथ ही अन्य शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए चुनने के विकल्प खुलेंगे। विकल्प खुलते ही मोबाइल का कैमरा खुल जाएगा। इसमें स्कूल के सभी शिक्षकों की एक ग्रुप फोटो अपलोड करनी होगी। फोटो क्लिक करने के बाद एक स्क्रीन दिखेगी, जिसमें विद्यालयों के सभी शिक्षकों की सूची प्रदर्शित होगी। इसमें जो शिक्षक अनुपस्थित होंगे, उनको अनुपस्थित पर मार्क करना होगा। मार्किंग के बाद अनुपस्थिति का कारण भी बताना होगा। अब देखना यह होगा कि उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल निकम्मे शिक्षकों की कार्यशैली में बदलाव लाती है या फिर यह प्रयास भी ढाक के तीन पात ही साबित होता है।
आप अस्पताल में जाते हैं तो देखेते हैं कि डॉक्टर से लेकर नर्स तक सभी सफेद कोट पहने हुए होते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि डॉक्टर सफेद कोट ही क्यों पहनते हैं। दरअसल डॉक्टरों के सफेद रंग के कोट के पीछे विशेष कारण होते हैं, जिनसे शायद बहुत से लोग अनजान होते हैं। आइए जानते हैं।
19वीं शताब्दी के मध्य में कनाडा में डॉ. जॉर्ज आर्मस्ट्रांग ने डॉक्टर की आधुनिक सफेद कोट को दवा के काम के लिए पेश किया था। डॉ. जॉर्ज आर्मस्ट्रांग मॉन्ट्रियल जनरल अस्पताल में एक सर्जन थे और कनाडाई मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष थे।
हमारे देश में सामान्यतया आम लोग पुलिसकर्मियों को उनकी वर्दी देखकर पहचान लेते हैं। कोलकाता को छोड़कर देश के सभी राज्यों की पुलिस की वर्दी खाकी है। हालांकि कहीं पर खाकी का रंग थोड़ा हल्का तो कहीं पर थोड़ा गहरा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पुलिस की वर्दी का रंग खाकी ही क्यों होता है।