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शिमला (हिमाचल प्रदेश) । सैकड़ों करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले में हर दिन हैरान कर देने वाले खुलासे हो रहे हैं। सीबीआई की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि संस्थान में ऐसे विद्यार्थियों के नाम से भी छात्रवृत्ति खाते खुलवाए गए, जिनकी बहुत पहले मौत हो चुकी है। वहीं इस घटना की अभिभावकों को भनक तक नहीं लगने दी गयी। अब आगे और भी चौंकाने वाले खुलासे होने की आशंका जतायी जा रही है।
छात्रवृत्ति घोटाले की प्रारंभिक सीबीआइ जांच में अब तक दो ऐसे छात्रों का पता चला है जिनकी कुछ साल पहले मौत हो चुकी है। हैरानी की बात है कि मौत के बाद भी शिक्षा विभाग के माध्यम से उनकी छात्रवृत्ति जारी होती रही। इतना ही नहीं बैंक प्रबंधन की मिलीभगत से बैंक में भी उनके नाम से चेक की ट्रांजेक्शन होती रही है। और साथ ही एटीएम कार्ड के अलावा चेकबुक तथा पासबुक बाकायदा अपडेट कराई जाती रही हैं। सीबीआइ को मिले सुबूत के आधार पर यह भी स्पष्ट हो रहा है कि छात्रवृत्ति के घोटाले में मामूली नहीं बल्कि बहुत बड़ा घोटाला किया गया है। इस जांच में यह भी पता चला है कि एक ही संस्थान के चालीस से अधिक छात्रों की जाति बदल दी गई और उनमें से कुछ कॉलेज में भी नहीं पहुंचे। इसके अलावा अन्य जातियों के सैकड़ों छात्रों को जो छात्रवृत्तियां जारी हुई हैं, उनमें भी कई छात्रों की वर्तमान स्थिति के बारे में संस्थान को कोई जानकारी नहीं है।
गौतरलब है कि यह 250 करोड़ से अधिक का छात्रवृत्ति घोटाला देश के कई राज्यों में फैला हुआ है। सीबीआई ने अब तक हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ समेत 18 से अधिक राज्यों में छापा मारने की कार्रवाई की है। करोंड़ो रुपए के इस छात्रवृत्ति घोटाले में निजी और सरकारी संस्थान के साथ ही कई राष्ट्रीयकृत बैंक भी शामिल पाए गए हैं।
खसरा राजस्व विभाग का मूल भू- अभिलेख है, जिसमें भूमिस्वामी की भूमि का खसरा नम्बर एवं क्षेत्रफल तथा अन्य जानकारी रहती है। जबकि खतौनी में किसी एक भूमिस्वामी के सारे खसरों का एक जगह पर ब्यौरा होता है। वहीं शजरा किसी गांव के जमीन का नक्शा होता है।
उच्चतम न्यायालय के फैसले के अनुसार स्वास्थ्य का अधिकार मौलिक अधिकार है , क्योंकि इसकी उत्पत्ति अनुच्छेद 21 में दिए गए जीने के अधिकार से होती है।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। शहर में आजकल मोबाइल को लेकर सड़क पर चलना जान जोखिम डालने के बराबर हो गया है। अपराधी सरेआम आम लोगों पर हमला करके मोबाइल छीनकर फरार हो जा रहे हैं, और वहीं जनता की सेवक पुलिस लूट और चोरी की बजाय गुमशुदगी की ई-एफआईआर दर्ज करने के लिए आम जनता को मजबूर कर रही है। जबकि अब तक पुलिस द्वारा मजबूरी में दर्ज की गयी एफआईआर के भी मामले भी हजारों से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन सिर्फ 54 मोबाइल के बारे में पता चल सका है।
लखनऊ शहर में रोजाना करीब 9 मोबाइल गायब हो रहे हैं। शहर के एक थाने में चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचे डालीगंज निवासी राजू का कहना है कि उन्होंने पुलिस वालों के कहने पर चोरी की जगह मोबाइल के गायब होने की शिकायत दर्ज कराई थी फिर भी उनका मोबाइल नहीं मिला। हजरतगंज थाना स्थित गुमशुदगी सेल में जून तक 1642 मामले दर्ज हो चुके हैं। हर घटना की रिपोर्ट दर्ज न होने और थानों में इसका ब्योरा तैयार न होने का ही नतीजा है कि गोमती नगर में पिछले दिनों बरामद 54 मोबाइल में सिर्फ 6 मोबाइल धारकों का पता चल सका।
वहीं झारखंड में मोबाइल चोरी के आरोप में गिरफ्तार राहुल प्रकाश ने बताया कि चोरी व लूट के मोबाइल लखनऊ शहर में सर्विलांस की मदद से पकड़े जा सकते हैं, इसलिए वे लोग ऐसे मोबाइल को पश्चिम बंगाल और झारखंड में ले जाकर बेचते हैं। लखनऊ से चोरी मोबाइल की लोकेशन बिहार, झारखंड व पश्चिम बंगाल के नक्सली इलाकों में सर्विलांस के माध्यम से मिली है। मोबाइल चोर सूरज कश्यप का कहना है कि बाजार में आइ फोन की एलसीडी की मांग बहुत ज्यादा है। हम लोग शहर में चोरी, लूट और लावारिस मोबाइल को अपने ठिकानों पर बोरों में इकट्ठा करते हैं। जिन्हें कबाड़ के साथ पश्चिम बंगाल, बिहार व झारखंड सप्लाई कर देते हैं। वहीं पीड़ित लोगों की तमाम शिकायतों के बावजूद पुलिस इन मोबाइल्स के लिए इतनी दूर जाने को तैयार नहीं होती है। जिसके चलते पुलिस का यह मनमाना रवैया इन चोरों और लुटेरों के लिए वरदान साबित हो रहा है।
रामपुर (उत्तर प्रदेश) । योगी आदित्यनाथ की सरकार ने समाजवादी पार्टी के नेता और रामपुर के मौजूदा सांसद आजम खान को जोरदार झटका दिया है। उप जिला अधिकारी ने मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के लिए किसानों की जमीनें कब्जा करने के आरोप में आजम खां को भूमाफिया घोषित कर दिया है। उनका नाम उत्तर प्रदेश एंटी भू माफिया पोर्टल पर दर्ज करा दिया गया है।
इस मामले में रामपुर के जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह का कहना है कि उत्तर प्रदेश एंटी भू माफिया पोर्टल पर उसका नाम चढ़ाया जाता है, जिसने किसी की जमीन पर कब्जा किया हो, उसका आपराधिक एंगिल हो और वह अभी भी जमीन पर काबिज हो। जिलाधिकारी ने कहा कि हमने भू-माफिया पोर्टल पर समाजवादी पार्टी के सांसद और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति आजम खान का नाम चढ़ा दिया, क्योंकि सीधे तौर पर उनका नाम दो मामलों में आया है और उनके सहयोगियों का भी नाम है। उनके खिलाफ 12 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, जबकि 14 किसानों की शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज करने की तैयारी है। इसलिए उनका नाम पोर्टल पर जाना जरूरी था। उन्होंने कहा कि नदी के किनारों की जमीन कब्जा करना प्रमाणित हुआ है। 26 किसानों की जमीन कब्जा जांच में पाया गया कि किसानों की जमीन पर अवैध कब्जा जमाया है।
वहीं उप जिलाधिकारी सदर प्रेम प्रकाश तिवारी ने बताया कि आजम खां और वर्तमान में जौहर यूनिवर्सिटी के मुख्य सुरक्षा अधिकारी आले हसन खां का नाम एंटी भू माफिया पोर्टल पर दर्ज करा दिया गया है। शासन एवं प्रशासन के निर्देश पर अब आगे नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधीक्षक डॉक्टर अजय पाल शर्मा का कहना है कि आजम खां के खिलाफ दर्ज मुकदमों की विवेचना तीन सदस्यीय स्पेशल टीम करेगी। विवेचना पूरी तरह निष्पक्ष होगी। उन्होंने बताया कि भूमाफिया व हिस्ट्रीशीटर में अंतर होता है। हिस्ट्रीशीट उनकी खोली जाती है, जो अपराध करने के आदी हैं। उनके फरार होने की आशंका है और पुलिस को उनकी निगरानी की आवश्यकता है।
भारतीय मानक ब्यूरो के कार्य किसी वस्तु अथवा प्रक्रिया के संबंध में भारतीय मानकों की स्थापना, प्रकाशन और संवर्धन करना है।
आमतौर पर हर स्कूल में नए सत्र की शुरुआत होने के साथ नए छात्रों का एडमिशन होता है, जबकि कुछ छात्र स्कूल छोड़ देते हैं। स्कूल छोड़ने के बाद छात्रों को टीसी और कॉशन मनी स्कूल प्रशासन की ओर से वापस की जाती है।
कृषि-जन्य पदार्थों की गुणवत्ता के प्रमाणीकरण के लिए एगमार्क का निशान बनाया गया है । जबकि ईको-मार्क निशान प्रदूषण मुक्त औद्योगिक इकाई के प्रमाणीकरण के लिए होता है। वहीं हॉलमार्क का निशान उपभोक्ता के हितों का संरक्षण और सोने की शुद्धता पर उपभोक्ता को तीसरे पक्ष की गारंटी प्रदान करना है। यह सोने के जेवरात की गुणवत्ता दर्शाता है ।
जबलपुर (मध्य प्रदेश)। केंद्र सरकार का दावा है कि उसने करीब पूरे देश में बिजली की सुविधा पहुंचा दी है, लेकिन सच्चाई कुछ और ही है। मध्य प्रदेश के सबसे बड़े शहरों में एक जबलपुर की रामदेव कालोनी में आजादी के बाद भी आज तक बिजली के तार नहीं पहुंच पाए हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि बिजली कंपनी ने रामदेव कालोनी के घरों में बिजली के तार लगाने की बजाय बिजली के बिल वसूलने के लिए खंभे में बिजली के मीटर टांग दिए हैं।
आपको बता दें कि केंद्र सरकार की तरफ से स्मार्ट सिटी घोषित किए जा चुके जबलपुर शहर में स्मार्ट रोड बनाई जा रही है, जबकि बिजली लाइन को अंडरग्राउंड किए जाने की भी योजना है। वहीं दूसरी तरफ आजादी के बाद आज तक मदर टेरेसा नगर के पास स्थित रामदेव कालोनी में बिजली कंपनी बिजली के खंभों में बिजली के तार तक नहीं लगा पायी है। वहीं अधिकारियों और कर्मचारियों की इस गैर जिम्मेदाराना करतूत से परेशान लोगों ने स्वयं ही अपने पैसे से बांस की बल्लियों पर केबल लगा लिया है और बिजली जलाना शुरु कर दिया है। ऐसे में बिजली कंपनी ने रामदेव कालोनी के लोगों को बिजली की सुविधा उपलब्ध कराने बजाय बिजली का बिल वसूलने के लिए घर की जगह खंभों पर दर्जनभर बिजली के मीटर टांग दिए हैं। और बिजली का बिल भुगतान करने के लिए कहा है।
जींद (हरियाणा)। जन स्वास्थ्य विभाग के सीवर व पेयजल लाइन घोटाले में विजिलेंस विभाग ने तत्कालीन एसडीओ, जेई समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है। विजिलेंस विभाग ने भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत कार्रवाई की है। बताया जा रहा है कि जल्दी ही अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकती है। इसमें एक्सईएन से लेकर बाबू तक इस घोटाले में शामिल हैं।
आपको बता दें कि वर्ष 2016 में स्वास्थ्य विभाग ने जींद शहर व सफीदों उपमंडल क्षेत्र में सीवर व पेयजल लाइन की मरम्मत के लिए मनजीत व अंग्रेज सिंह को ठेका दिया था। लेकिन इन ठेकेदारों ने तत्कालीन एक्सईएन भानू प्रताप, एसडीओ जगदीप सिंह, जेई अमरीक सिंह, क्लर्क सुभाष, सुरेश सहित आठ कर्मचारियों की मिलीभगत से बिना सामान खरीदे ही मरम्मत के लिए 31 लाख के फर्जी बिल पास करा लिए थे। वहीं इसके एवज में कोई काम ही नहीं हुआ था। इस गड़बड़ी का पता जन स्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन को 2016 में मासिक बैठक के दौरान चला। इसकी जानकारी मिलते ही विजिलेंस विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी। वहीं विजिलेंस की जांच शुरू होते ही एसई ने 18 अगस्त 2018 को विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ को मामले की जानकारी दे दी। जिसके बाद इंजीनियर-इन-चीफ ने इस मामले में क्लर्क सुरेश कुमार और सुभाष चंद्र को निलंबित कर दिया था। विजिलेंस की जांच के दौरान घोटाले में फिलहाल रोहतक में कार्यरत एक्सईएन भानू प्रताप, एसडीओ जगदीप सिंह जो जांच के दौरान सेवानिवृत्त हो गए, जेई अमरीक सिंह, क्लर्क सुरेश, वर्तमान में भिवानी कार्यालय में कार्यरत क्लर्क सुभाष, ठेकेदार मनजीत, अंग्रेज सिंह के अलावा दो अन्य कर्मचारी शामिल पाए गए। जांच के दौरान ठेकेदारों को 24,84,745 रुपये के ऐसे भुगतान का पता चला, जिसके एवज में कोई काम ही नहीं हुआ। इस जांच के शुरू होने के बाद क्लर्क सुभाष चंद्र ने 7,45,423 रुपये, क्लर्क सुरेश कुमार ने 7,45,423 तथा जेई अमरीक सिंह ने 9,93,899 रुपये सरकारी खजाने में जमा करवा दिए। वहीं जब जांच में घोटाला 31 लाख का निकला तो एक्सईएन और एसडीओ ने भी सरकारी खजाने में रुपये जमा करा दिए। 7 दिसंबर 2018 को इनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। विजिलेंस ने बताया कि सेवानिवृत एसडीओ जगदीप, जेई अमरीक सिंह, क्लर्क सुभाष, सुरेश व ठेकेदार मनजीत, अंग्रेज को गिरफ्तार कर लिया गया है। और जल्द ही अन्य आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
नोएडा (उत्तर प्रदेश)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन से लेकर बर्खास्तगी तक की कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन फिर भी पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा है। ऐसा ही एक मामला नोयडा के एसएसपी कार्यालय परिसर में सामने आया है, जहां सरेआम दलालों का गिरोह लंबे समय से सत्यापन के लिए तीन गुना फीस लेकर लोगों को चूना लगा रहा है। और वहीं पुलिसकर्मी इन दलालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय सहयोगी बने हुए हैं।
आपको बता दें कि नोयडा का एसएसपी कार्यालय परिसर सूरजपुर में स्थित है। जहां पर नोयडा में नौकरी करने वाले व सेक्टर, सोसायटी में रहने वाले किराएदार पुलिस सत्यापन के लिए आते हैं। उन्हें कार्यालय परिसर के सेकेंड फ्लोर पर बने सत्यापन सेल से एक फार्म दिया जाता है। जिसमें उन्हें नाम, पता, उम्र, संस्थान आदि सहित कई अन्य जानकारी देनी होती है। सत्यापन के लिए बैंक या फिर जन सुविधा केंद्र पर 50 रुपये की चालान फीस जमा करनी होती है। लेकिन यहां पर आवेदनकर्ता से 50 रुपये के बजाए 150 रुपये चालान फीस ली जा रही है। हैरानी की बात यह है कि ऑनलाइन जमा होने वाली फीस की 50 रुपये की पर्ची भी आवेदनकर्ता को दी जाती है, जबकि उससे फीस तीन गुना यानी 150 रुपये ली जाती है। और फिर बैंक में जमा की जाने वाली 50 रुपये की सत्यापन चालान फीस को एसएसपी कार्यालय परिसर में बनी कैंटीन में फोटोकॉपी वाला जमा करता है। सूत्रों का कहना है कि फोटोकॉपी करने वाला युवक पूरे दिन का हिसाब भी पुलिसकर्मियों को देता है। और फिर वे लोग काली कमाई का हिस्सा आपस में बराबर बांट लेते हैं। सूत्रों ने दावा किया है कि कार्यालय परिसर में सक्रिय दलालों का संपर्क जनसुविधा केंद्र के कर्मचारियों से भी है। खास बात यह है कि पुलिस की नाक के नीचे एसएसपी कार्यालय परिसर में लंबे समय से यह गिरोह संचालित हो रहा है। और पुलिस अधिकारी आंखें मूंदे हुए हैं।
आमतौर पर हर स्कूल में नए सत्र की शुरुआत होने के साथ नए छात्रों का एडमिशन होता है, जबकि कुछ छात्र स्कूल छोड़ देते हैं। स्कूल छोड़ने के बाद छात्रों को टीसी और कॉशन मनी स्कूल प्रशासन की ओर से वापस की जाती है। लेकिन स्कूल प्रबंधन टीसी तो वापस कर देते हैं, पर कॉशन मनी वापस करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। स्कूल प्रबंधन ज्यादातर अभिभावकों पर कॉशन मनी वापस न लेने का दबाव बनाते हैं, जो पूरी तरह गलत है।
कॉशन मनी पर स्कूल की मनमानी
कॉशन मनी वापस लेने के नियम
कॉशन मनी प्राप्त करने के लिए शिकायत
शिवपुरी (मध्य प्रदेश)। लोकायुक्त पुलिस ने पिछोर नगर परिषद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को 1 लाख 17 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। पुलिस ने यह कार्रवाई पिछोर नगर परिषद अध्यक्ष संजय पाराशर के पुत्र की शिकायत के बाद की। मुख्य कार्यपालन अधिकारी नगर परिषद अंतर्गत स्वीकृत हुए निर्माण कार्यों के कार्यादेश देने के एवज में रिश्वत की मांग रहे थे।
लोकायुक्त पुलिस निरीक्षक पी.के. चतुर्वेदी और कविन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुधीर मिश्रा पिछोर नगर परिषद में अनुकम्पा नियुक्ति से सीएमओ पद पर पदस्थापित हैं। वह पिछले लम्बे समय से पिछोर नगर परिषद अध्यक्ष संजय पाराशर के बेटे मयंक पाराशर से नगर परिषद अंतर्गत स्वीकृत हुए निर्माण कार्यों के कार्यादेश देने के एवज में रिश्वत मांग रहे थे। मयंक पाराशर ने 10 जुलाई को ग्वालियर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में इस पूरे मामले की शिकायत की थी। शिकायत दर्ज करने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार करने की योजना बनायी। पुलिस की तय योजना के मुताबिक मयंक पाराशर ने थ्री स्टार होटल टूरिस्ट विलेज में मुख्य कार्यपालन अधिकारी को जैसे ही रिश्वत दी, वैसे ही होटल में मौजूद पुलिस टीम ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुधीर मिश्रा को 1 लाख 17 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने रिश्वत के रूप में लिए गए नोट का रंग और सीएमओ सुधीर मिश्रा के हाथ धुलवाकर केमिकल युक्त पानी मिलान के लिए अपने पास रख लिया। और सीएमओ सुधीर मिश्रा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988, संशोधित अधिनियम 2018 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। लोकायुक्त पुलिस अब इस मामले में सीएमओ के खिलाफ आगे की कार्यवाही शुरु कर दी है।
अमरोहा (उत्तर प्रदेश)। पंकज कुमार बालियान नाम के एक सिपाही की आत्महत्या ने उत्तर प्रदेश पुलिस की व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। पुलिस के ड्यूटी सिस्टम से परेशान होकर अमरोहा के धनोरा थाने में तैनात सिपाही पंकज ने आत्महत्या कर ली। अपने पीछे छोड़े सुसाइड नोट में पंकज ने अपनी आत्महत्या के लिए ख़राब पुलिस ड्यूटी सिस्टम को जिम्मेदार ठहराया है। और पुलिस अधिकारियों से अपील की है कि इसमें बदलाव किया जाना चाहिए। इस मामले में एसपी ने सीओ से रिपोर्ट तलब की है।
सिपाही पंकज कुमार बालियान पुत्र नरेश बालियान मुजफ्फरपुर जिले के मोहम्मद मारन थाना बाराह कला के निवासी थे। पंकज बालियान की तैनाती अमरोहा के मंडी धनौरा थाने में थी। वह थाने के समीप ही किराए के मकान में अपने साथी अतुल कुमार के साथ रहते थे। सोमवार की रात पंकज गांव टंडेरा मार्ग पर गश्त ड्यूटी में थे। रात दस बजे ड्यूटी खत्म करने के बाद पंकज अपने कमरे पर आ गए। मंगलवार सुबह उनका साथी अतुल जब कमरे पर पहुंचा तो पंकज का शव रस्सी के फंदे पर लटका दिखाई दिया।
पुलिस ने पंकज के शव को नीचे उतारा, जिसके बाद शव की जेब से एक सूइसाइड नोट बरामद किया गया। पुलिस के मुताबिक सुइसाइड नोट डीजीपी के नाम है। जिसमें साफ कहा है कि वह पुलिस की ड्यूटी सिस्टम से परेशान हैं। नोट में पंकज ने लिखा, 'मेरी मौत का जिम्मेदार केवल ड्यूटी सिस्टम खराब होना है। इसलिए मेरी मौत का जिम्मेदार किसी अधिकारी, कर्मचारी, थाना स्टाफ, दोस्त, परिवार, लड़की, को ना ठहराया जाए।' इसमें ड्यूटी सिस्टम पर सवाल उठाते हुए मार्मिक अपील की गयी है कि ड्यूटी सिस्टम में सुधार लाकर मानसिक रूप से कमजोर हो रहे पुलिस कर्मियों को बचाएं। पुलिस कर्मियों का ड्यूटी सिस्टम खराब है। आए दिन ड्यूटी का बढ़ता दबाव उन्हें मानसिक रूप से कमजोर कर रहा है। दिनों-दिन खराब हो रहे इस डयूटी सिस्टम में सुधार लाया जाए, ताकि अन्य पुलिस कर्मियों को सुसाइड जैसे आत्मघाती कदम ना उठाना पड़े। वहीं पुलिस को एक आडियो भी मिला, जिसमें किसी लड़की से अंतिम बार बात की गई है। घटना के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
वहीं पंकज की आत्महत्या को लेकर परिजनों ने हंगामा किया और मुकदमा दर्ज कराने की मांग की। मृतक के पिता नरेश बालियान ने अपने बेटे पंकज की हत्या का आरोप थाना प्रभारी धनौरा मुकेश कुमार पर लगाया है। पिता का आरोप है कि दो दिन पूर्व ही पंकज छुट्टी बिताकर ड्यूटी पर लौटा था। तब उसने प्रभारी निरीक्षक के प्रताड़ित करने की बात कही थी। एसपी विपिन ताडा ने बताया कि मृतक के परिजनों ने उसे आत्महत्या के लिए प्रेरित करने वाले अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई के लिए तहरीर दी है। मामले की जांच सीओ मंडी धनौरा मोनिका यादव को दी गई है।
गौरतलब है कि पिछले साल पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह ने पुलिसकर्मियों के लिए हफ्ते में एक छुट्टी का प्रावधान किया था। लेकिन हकीकत यह है कि आज भी एक पुलिसकर्मी को सातों दिन 12 से 14 घंटों काम करना पड़ता है। पंकज के सुसाइड नोट ने इस बात को साबित किया है।
नई दिल्ली । सोमवार को लोकसभा के बाद राज्यसभा ने भी आधार संशोधन बिल 2019 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस बिल के पारित होने से बैंक खाता खोलने, मोबाइल सिम लेने के लिए आधार कार्ड को स्वैच्छिक बनाया गया है। अब किसी भी निजी कंपनी को आधार का डेटा जबरदस्ती प्राप्त करने की अनुमति नहीं होगी। यदि कोई इस तरह की मांग करता है तो उसके लिए सजा तथा जुर्माना दोनों का प्रावधान है।
लोकसभा के बाद अब आधार संशोधन अधिनियम 2019 को राज्यसभा से भी मंजूरी मिल गई है। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आधार संशोधन अधिनियम 2019 को लेकर लोगों के डाटा सुरक्षा का आश्वासन दिया है। इस कानून बनने के बाद किसी की इच्छा के बिना उसका आधार डाटा स्टोर नहीं किया जा सकेगा और यदि कोई ऐसा करता पाया गया तो उसके ऊपर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान है। हालांकि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में आधार डाटा को देखा जा सकेगा अन्यथा आधार का डाटा देखते पर 3 साल की जेल हो सकती है। आधार का डाटा सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे की स्थिति में ही एक्सेस किया जा सकेगा।
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आधार कार्ड में धारक की मूलभूत जानकारियों का ही जिक्र है। इसमें जाति, धर्म, सम्प्रदाय आदि ऐसी जानकारियों का जिक्र नहीं है जिनकी मदद से किसी की प्रोफाइलिंग की जा सके। आधार में प्रतिदिन 2.88 करोड़ जानकारियों का प्रमाणीकरण किया जाता है। इसलिये यह डाटा पूरी तरह से सुरक्षित है। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस सहित अन्य सदस्यों द्वारा डाटा सुरक्षा कानून बनाने की मांग पर आश्वासन दिया कि सरकार जल्द ही ‘डाटा संरक्षण विधेयक’ पेश करेगी। इस पर पिछले दो वर्षो से व्यापक चर्चा चल रही है। यदि किसी के पास आधार नहीं है, फिर भी उसे राशन मिलना बंद नहीं होगा।
आधार संशोधन अधिनियम 2019 के अनुसार बैंक खातों और सिम कार्ड के लिए आधार अनिवार्य नहीं होगा। यदि कोई शख्स इन कार्यों के लिए अपने आधार की जानकारी नहीं दे रहा है तो उस पर दवाब नहीं बनाया जा सकेगा। दूसरे शब्दों में कहें तो सिम कार्ड लेने और बैंक खाता खुलवाने के लिए अब आपको आधार कार्ड देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पहचान के तौर पर आप वोटर कार्ड पेश कर सकते हैं। विधेयक के मुताबिक, आधार संख्या धारण करने वाले बच्चों को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर अपनी आधार संख्या रद्द करने का विकल्प भी मिलेगा।
नई दिल्ली । सोमवार को लोकसभा के बाद राज्यसभा ने भी आधार संशोधन बिल 2019 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस बिल के पारित होने से बैंक खाता खोलने, मोबाइल सिम लेने के लिए आधार कार्ड को स्वैच्छिक बनाया गया है। अब किसी भी निजी कंपनी को आधार का डेटा जबरदस्ती प्राप्त करने की अनुमति नहीं होगी। यदि कोई इस तरह की मांग करता है तो उसके लिए सजा तथा जुर्माना दोनों का प्रावधान है।
लोकसभा के बाद अब आधार संशोधन अधिनियम 2019 को राज्यसभा से भी मंजूरी मिल गई है। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आधार संशोधन अधिनियम 2019 को लेकर लोगों के डाटा सुरक्षा का आश्वासन दिया है। इस कानून बनने के बाद किसी की इच्छा के बिना उसका आधार डाटा स्टोर नहीं किया जा सकेगा और यदि कोई ऐसा करता पाया गया तो उसके ऊपर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान है। हालांकि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में आधार डाटा को देखा जा सकेगा अन्यथा आधार का डाटा देखते पर 3 साल की जेल हो सकती है। आधार का डाटा सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे की स्थिति में ही एक्सेस किया जा सकेगा।
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आधार कार्ड में धारक की मूलभूत जानकारियों का ही जिक्र है। इसमें जाति, धर्म, सम्प्रदाय आदि ऐसी जानकारियों का जिक्र नहीं है जिनकी मदद से किसी की प्रोफाइलिंग की जा सके। आधार में प्रतिदिन 2.88 करोड़ जानकारियों का प्रमाणीकरण किया जाता है। इसलिये यह डाटा पूरी तरह से सुरक्षित है। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस सहित अन्य सदस्यों द्वारा डाटा सुरक्षा कानून बनाने की मांग पर आश्वासन दिया कि सरकार जल्द ही ‘डाटा संरक्षण विधेयक’ पेश करेगी। इस पर पिछले दो वर्षो से व्यापक चर्चा चल रही है। यदि किसी के पास आधार नहीं है, फिर भी उसे राशन मिलना बंद नहीं होगा।
आधार संशोधन अधिनियम 2019 के अनुसार बैंक खातों और सिम कार्ड के लिए आधार अनिवार्य नहीं होगा। यदि कोई शख्स इन कार्यों के लिए अपने आधार की जानकारी नहीं दे रहा है तो उस पर दवाब नहीं बनाया जा सकेगा। दूसरे शब्दों में कहें तो सिम कार्ड लेने और बैंक खाता खुलवाने के लिए अब आपको आधार कार्ड देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पहचान के तौर पर आप वोटर कार्ड पेश कर सकते हैं। विधेयक के मुताबिक, आधार संख्या धारण करने वाले बच्चों को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर अपनी आधार संख्या रद्द करने का विकल्प भी मिलेगा।
बरेली (उत्तर प्रदेश)। प्रदेश में खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर लगातार गाज गिरना जारी है । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बरेली रेंज के 25 नाकारा या दागी पुलिसकर्मियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। इन सभी पुलिसकर्मियों की उम्र पचास साल से ज्यादा है।
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन दिनों उत्तर प्रदेश की बिगड़ी कानून व्यवस्था को ठीक करने में लगे हुए हैं। योगी आदित्यनाथ ने निर्णय लिया है कि जो पुलिसकर्मी 50 साल की उम्र पूरी कर चुके हैं और विभाग पर बोझ बने हुए हैं । ये बार-बार विभाग की बदनामी करवा रहे हैं, जिससे सरकार की छवि खराब हो रही है। ऐसे पुलिस वाले जो दागदार हैं, भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, नकारा हैं या उन पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। ऐसे सभी पुलिस वालों को नौकरी से निकाल दिया गया है। डीआइजी रेंज की स्क्रीनिंग कमेटी में ऐसे पुलिस वालों की पहचान की गई थी। इसमें फरीदपुर सीओ के स्टोनो का काम देख रहे इंस्पेक्टर ब्रहमपाल सिंह, बदायूं में तैनात दारोगा नेमपाल सिंह, रोहित हुसैन, विजयपाल सिंह, शाहजहांपुर में तैनात दारोगा अशोक कुमार, सत्येंद्र कुमार, एएसआइ जयकिशन का नाम शामिल था। इनके अलावा बरेली जिले के छह पुलिसकर्मियों को भी अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गयी है। इनमें एसआइ महेंद्र सिंह, हेड कांस्टेबल शिवकुमार सिंह, प्रीतम सिंह, नन्हकी लाल, अयूब खां, गंगाराम शामिल हैं। इस अनिवार्य सेवानिवृत्ति में एक इन्स्पेक्टर, 5 सब इन्स्पेक्टर, 7 हेड कॉन्स्टेबल, 11 सिपाही समेत 25 पुलिसकर्मी शामिल हैं।' हालांकि ऐसे सभी कर्मचारियों को 3 महीने का एडवांस वेतन के साथ-साथ रिटायरमेंट की अन्य सभी सुविधाएं भी दी जाएंगी।