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चंडीगढ़ (हरियाणा)। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हरियाणा की भ्रष्ट प्रशासनिक व्यवस्था पर लगाम लगाने के लिए बड़ी पहल की है । मुख्यमंत्री ने अंत्योदय सरल प्लेटफार्म के माध्यम से बिना बिचौलियों के विभागीय योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ पहुंचाना शुरु कर दिया है। अंत्योदय सरल प्लेटफार्म के जरिए अब तक 32 लाख लोग 37 विभागों की 491 सेवाओं का लाभ प्राप्त कर चुके हैं। इसकी वजह से अब राज्य के लोगों को कार्यालयों के चक्कर काटने से भी छुटकारा मिल गया है।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अंत्योदय सरल प्लेटफार्म के माध्यम से आम लोगों को एक छत के नीचे योजनाओं का लाभ देने की व्यवस्था सुनिश्चित की है, जिसके नतीजों से लोग काफी राहत महसूस कर रहे हैं। वहीं मनोहर सरकार का दावा है कि यह सुविधा सूबे में पूर्व में प्रशासनिक व्यवस्था पर हावी दलाल संस्कृति पर बड़ा शिकंजा है। इससे पहले प्रदेश में लोग किसी योजना व सेवा का लाभ उठाने से पहले योजना को लेकर बेहतर जानकारी के अभाव होने, अलग-अलग के फार्म होने व उन्हें भरने में आने वाली परेशानियों में ही उलझा रहता था। जिससे उसे संबंधित योजना का लाभ मिलने में ही देरी हो जाती थी। जिसका फायदा बिचौलिए उठाते थे।
गौरतलब है कि जनवरी से मई 2019 तक 17 लाख आवेदन अलग-अलग माध्यम से विभिन्न विभागों की सेवाओं के लिए आम लोगों के द्वारा किए गए हैं। इसमें 47 फीसद आवेदन आनलाइन, 32 फीसद कामन सर्विस सेंटर और 21 फीसद आवेदन सरल केंद्रों के माध्यम से हासिल हुए हैं। इसमें जनवरी, फरवरी एवं मार्च माह में आनलाइन 70 फीसद, 57 फीसद एवं 44 फीसद आवेदन किए गए, जबकि अप्रैल एवं मई माह में कामन सर्विस सेंटर के माध्यम से क्रमश: 42 और 40 फीसद आवेदन हुए हैं।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का कहना है कि '' हरियाणा में सरल शासन व्यवस्था के लिए रोडमैप तैयार किया गया था, जिसके तहत आमजन को सरल, सभी जरूरी योजनाओं को पाबंद तरीके से लंबे समय तक चलने वाले शासन की आधारशिला रखी गई। इसके तहत सभी सरकारी योजनाओं को ऑनलाइन किया गया। हमने विभागों की कार्य क्षमता को बढ़ाने, भ्रष्टाचार मिटाने और समय-धन की बर्बादी रोकते हुए एक छत के नीचे लाभ मिलना सुनिश्चित किया है। अब नागरिकों को विभागीय कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ते हैं।
चंडीगढ़ (हरियाणा)। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हरियाणा की भ्रष्ट प्रशासनिक व्यवस्था पर लगाम लगाने के लिए बड़ी पहल की है । मुख्यमंत्री ने अंत्योदय सरल प्लेटफार्म के माध्यम से बिना बिचौलियों के विभागीय योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ पहुंचाना शुरु कर दिया है। अंत्योदय सरल प्लेटफार्म के जरिए अब तक 32 लाख लोग 37 विभागों की 491 सेवाओं का लाभ प्राप्त कर चुके हैं। इसकी वजह से अब राज्य के लोगों को कार्यालयों के चक्कर काटने से भी छुटकारा मिल गया है।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अंत्योदय सरल प्लेटफार्म के माध्यम से आम लोगों को एक छत के नीचे योजनाओं का लाभ देने की व्यवस्था सुनिश्चित की है, जिसके नतीजों से लोग काफी राहत महसूस कर रहे हैं। वहीं मनोहर सरकार का दावा है कि यह सुविधा सूबे में पूर्व में प्रशासनिक व्यवस्था पर हावी दलाल संस्कृति पर बड़ा शिकंजा है। इससे पहले प्रदेश में लोग किसी योजना व सेवा का लाभ उठाने से पहले योजना को लेकर बेहतर जानकारी के अभाव होने, अलग-अलग के फार्म होने व उन्हें भरने में आने वाली परेशानियों में ही उलझा रहता था। जिससे उसे संबंधित योजना का लाभ मिलने में ही देरी हो जाती थी। जिसका फायदा बिचौलिए उठाते थे।
गौरतलब है कि जनवरी से मई 2019 तक 17 लाख आवेदन अलग-अलग माध्यम से विभिन्न विभागों की सेवाओं के लिए आम लोगों के द्वारा किए गए हैं। इसमें 47 फीसद आवेदन आनलाइन, 32 फीसद कामन सर्विस सेंटर और 21 फीसद आवेदन सरल केंद्रों के माध्यम से हासिल हुए हैं। इसमें जनवरी, फरवरी एवं मार्च माह में आनलाइन 70 फीसद, 57 फीसद एवं 44 फीसद आवेदन किए गए, जबकि अप्रैल एवं मई माह में कामन सर्विस सेंटर के माध्यम से क्रमश: 42 और 40 फीसद आवेदन हुए हैं।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का कहना है कि '' हरियाणा में सरल शासन व्यवस्था के लिए रोडमैप तैयार किया गया था, जिसके तहत आमजन को सरल, सभी जरूरी योजनाओं को पाबंद तरीके से लंबे समय तक चलने वाले शासन की आधारशिला रखी गई। इसके तहत सभी सरकारी योजनाओं को ऑनलाइन किया गया। हमने विभागों की कार्य क्षमता को बढ़ाने, भ्रष्टाचार मिटाने और समय-धन की बर्बादी रोकते हुए एक छत के नीचे लाभ मिलना सुनिश्चित किया है। अब नागरिकों को विभागीय कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ते हैं।
गुरुग्राम (हरियाणा) । किसी कवि ने अपनी कविता में कचहरी के बारे में क्या खूब कहा है-
भले डांट घर में तू बीबी की खाना
भले जैसे -तैसे गिरस्ती चलाना
भले जा के जंगल में धूनी रमाना
मगर मेरे बेटे कचहरी न जाना।
गुरुग्राम में ऐसा ही एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां एक दुकानदार चोरी हुए अपने सामान को लेने के लिए कचेहरी जाने को तैयार नहीं है। पुलिस ने दुकानदार के चोरी हुए चारों डंडों को जब्त कर लिया है, लेकिन दुकानदार को उन डंडों को पाने के लिए अदालत से आदेश लाना पड़ेगा, जिसमें करीब छह हजार रुपए का खर्चा आएगा। जिससे वह बहुत हैरान व परेशान है।
आपको बता दें कि गुरुग्राम स्थित राजीव कॉलोनी में रहने वाला तिलक यादव जीवनी हार्डवेयर नाम से एक दुकान चलाता है। इस दुकान में 15 मई को चोरी हो गई थी। चोर 700 रुपए नगद, 3 टंकी और 4 लकड़ी के डंडे चोरी कर ले गए थे। तिलक यादव ने सदर थाने में केस दर्ज करवाया था। जिसके बाद सेक्टर-31 की क्राइम ब्रांच टीम ने प्रताप नगर कॉलोनी निवासी अजय उर्फ बेबी व राहुल को चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया और उनसे दो सौ रुपए कीमत के चारों डंडों को बरामद कर लिया, जबकि ये चोर तीनों टंकियों को बेच कर सभी पैसों को नशे में उड़ा चुके थे। चोरों से बरामद चारों डंडे सदर पुलिस थाने में जमा हैं। पुलिस दुकानदार से कह रही है कि वह बरामद डंडा ले जाए, लेकिन दुकानदार इन डंडों को लेने ही नहीं आ रहा है। दरअसल इन डंडों को प्राप्त करने की प्रक्रिया इतनी पेचीदा है कि दुकानदार हैरान और परेशान है। आखिर वह क्या करे। दरअसल इन डंडों को वापस लेने के लिए दुकानदार को अदालत से आदेश लाना पड़ेगा। उसे इस आदेश को प्राप्त करने के लिए करीब 6000 रुपए खर्च करने पड़ेंगे। गुड़गांव की अदालत के एक वकील का कहना है कि अदालत में सुपरदारी का आवेदन लगाना होता है। इसके लिए स्टैंप पेपर लगेगा। वकील फीस के तौर पर एक हजार रुपये से 5 हजार के बीच लेते हैं। कोर्ट से ऑर्डर लेकर थाने जाना होता है, जिसके बाद सामान पुलिस वापस करती है। सुपरदारी की इस पूरी प्रक्रिया में करीब 6 हजार रुपये तक खर्च होंगे।
छत्तीसगढ़ सरकार जाति प्रमाणपत्र ऑनलाइन जारी करती है। जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन भरने के लिए उपयोगकर्ता को चॉइस सेंटर जाना पड़ता है। जिसे संबंधित अधिकारी जाति प्रमाण पत्र जारी करते हैं। इसके लिए योग्यता निर्धारित की गयी है, जिस मानक को पूरा करने के बाद जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।
अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए प्रमाण पत्र योग्यता :
अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आवश्यक दस्तावेज़:
निवास का प्रमाण
जाति का प्रमाण
अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रमाण पत्र के लिए शुल्क :
अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रमाण पत्र जारी होने की अनुमानित तिथि :
आप खेत या प्लाट खरीदने जा रहे हैं तो इसे जरुर जान लें । भारत के अधिकांश भागों में खेतों के नाप के लिए गज, हाथ, कट्ठा, जरीब, बिस्सा, बिस्वॉनसी,उनवांनसी, कचवानसी, बीधा, किल्ला, एकड़, हेक्टेकयर आदि मात्रकों का प्रयोग होता हैं। नीचे देखें उनसे सम्बंधित जानकारी:
नापने का पैमाना
= 1 Yard (एक यार्ड)
= 0.91 Meters (0.91 मीटर)
= 36 Inch (36 इंच)
= ½ Gaz (आधा गज)
= 18 Inch (18 इंच)
= 5 ½ Hath (साढे पांच हाथ)
= 2.75 Gaz (पौने तीन गज)
= 99 Inch (99 इंच)
= 55 Gaz (55 गज)
क्षेत्रफल मापने के मात्रक
= 24.5025 Sq Inch (24.5025 वर्ग इंच)
= 20 Unwansi (20 उनवांसी)
= 20 Kachwansi (20 कचवांसी)
= 1 Sq. Gattha (एक वर्ग गट्ठा)
= 7.5625 Sq.Yard (7.5625 वर्ग गज)
= 9801 Sq Inch (9801 वर्ग इंच)
=20 Biswansi (20 बिस्वांसी)
= 20 Sq.Gattha (20 वर्ग गट्ठा)
= 6 2/3 Bissa (6 2/3 बिस्से:)
= 1008 Sq.Yard and 3Sq Feet (1008 वर्ग गज और 3वर्गफुट)
= 843 Sq. Meters (843 वर्ग मीटर)
= 1 sq. Jareeb (एक वर्ग जरीब)
= 3 Kaccha Bigha (तीन कच्चे बीघे)
=20 Bissa (20 बिस्सेंp)
= 3025 Sq. Yard (3025 वर्ग गज)
= 2529 Sq. Meters 2529 वर्ग मीटर)
= 27225 Sq. Feet (27225 वर्ग फुट)
=165x165 Feet
= 4840 Sq. Yard (4840 वर्ग गज)
= 4046.8 Sq.Meters (4046.8 वर्ग मीटर)
= 43560 Sq. Feet (43560 वर्ग फुट)
= 0.4047 Hectare (0.4047 हेक्टेiयर)
= 2.4711 Acre (2.4711 एकड)
= 10000 Sq meters ( 10000 वर्ग मीटर
यदि आप छत्तीसगढ़ आय प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन करना चाहते है। तो आपके पास निम्नलिखित दस्तावेज होना अनिवार्य है। तभी आप इसके लिए ऑनलाइन आवेदन कर पाएंगे।
छत्तीसगढ़ में आय प्रमाण पत्र की योग्यता:
आय प्रमाण पत्र के लिए आवश्यक दस्तावेज़:
आय प्रमाण पत्र के लिए शुल्क :
आय प्रमाण पत्र को जारी होने की अनुमानित तिथि :
आय प्रमाण पत्र के लिए नीचे दिए गए लिंक का उपयोग करें: –
पर जाएँ: https://edistrict.cgstate.gov.in/PACE/login.do#login
आवेदक आय प्रमाण पत्र के लिए योग्य है यदि वह-
आय प्रमाण पत्र के लाभार्थी की पहचान लिए प्रमाण (कोई भी अनिवार्य है)
आय प्रमाण पत्र के लाभार्थी के वर्तमान पते का प्रमाण (कोई भी अनिवार्य है)
लाभार्थी का स्थायी पता प्रमाण (कोई भी अनिवार्य है )
आय प्रमाण पत्र (यदि पहले जारी किया गया था) – अनिवार्य नहीं है।
बीपीएल राशन / नेशनल फूड सिक्योरिटी (एनएफएस) कार्ड यदि बीपीएल एयनियन / एनएफएस कार्ड धारक (यदि उपलब्ध हो)।
पारिवारिक आय प्रमाण (वेतन जहां भी लागू हो)।
बच्चों / किराए की रसीदों की बिजली / स्कूल फीस जैसे व्यय का प्रासंगिक दस्तावेज।
उम्मीदवार को आवेदन पत्र के साथ स्वयं घोषित घोषणा की हस्ताक्षरित प्रति प्रदान करनी होगी।
आय प्रमाण पत्र के लाभार्थी का एक पासपोर्ट आकार रंगीन फोटो (आकार 5 सेमी x 4.5 सेमी या 2 “x1.75”)।
महत्वपूर्ण नोट-
रायपुर (छत्तीसगढ़)। देश में पहली बार सोशल मीडिया पर बिजली कटौती की अफवाह फैलाने के मामले में दो लोगों पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया। और साथ ही दोनों को गिरफ्तार भी कर लिया गया। हालांकि, राजनैतिक माहौल गरमाने के पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दोनों के मामलों को वापस लेने का फैसला किया है। इसके साथ ही दोनों व्यक्तियों को जमानत मिल गई है।
आपको बता दें कि बिजली कटौती को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने का पहला मामला राजनांदगांव के मुसरा डोंगरगढ़ का है, जहां के रहने वाले मांगेलाल अग्रवाल को बिजली कंपनी की शिकायत पर आईपीसी के तहत राजद्रोह की धारा 124 ए और सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार की धारा 505/1/2 के तहत गिरफ्तार किया गया। वायरल वीडियो में मांगेलाल अग्रवाल कह रहे हैं, "एक इन्वर्टर कंपनी के साथ छत्तीसगढ़ सरकार की सेटिंग हो गई है। इसके लिए राज्य सरकार को पैसा दिया गया है। करार के मुताबिक घंटे- 2 घंटे में 10 से 15 मिनट के लिए लाईट कटौती होती रहेगी, तो इन्वर्टर बिक्री बढ़ेगी।" वीडियो पोस्ट होते ही धड़ल्ले से शेयर होने लगा। देखते ही देखते यह वीडियो पूरे राज्य में वायरल हो गया। हालांकि बाद में मुख्यमंत्री के निर्देश पर बिजली कंपनी ने शुक्रवार को मामला वापस लेने का आवेदन दिया। पुलिस ने केवल राष्ट्रद्रोह की धारा हटा दी, उसके बाद अग्रवाल को कोर्ट से जमानत मिल गई। वहीं महासमुंद के दिलीप शर्मा ने वेब मोर्चा पोर्टल पर 50 गांवों में 48 घंटे बिजली बंद होने होने की खबर चला दी थी। बिजली कंपनी के डीई एसके साहू की शिकायत पर गुस्र्वार रात 11 बजे पुलिस ने शर्मा को घर से बनियान-टॉवेल में उठा लिया था। पुलिस ने मिथ्या भ्रामक विषयवस्तु को जनमानस में प्रसारित करके जनाक्रोश फैलाने की कोशिश करने का मामला दर्ज किया। शुक्रवार सुबह 11 बजे कोर्ट में पेश किया, उसके बाद शर्मा को कोर्ट ने जमानत दे दी।
सोशल मीडिया पर इस पोस्ट के खिलाफ मामले दर्ज होने पर शुक्रवार को प्रदेश की राजनीति गरमा गई। भाजपा ने सीधे मुख्यमंत्री को निशाना बनाया। विपक्ष की बयानबाजी के बाद दोपहर दो बजे मुख्यमंत्री ने दोनों मामलों को संज्ञान में लिया। उन्होंने डीजीपी से बात की और कहा कि इस तरह की कार्रवाई तत्काल रोकी जाए। जहां मामले दर्ज हो चुके हैं, उन्हें तत्काल वापस लिया जाए। मुख्यमंत्री बोले-कांग्रेस और उसकी सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रबल पक्षधर हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता से अपील है कि वे अभिव्यक्ति के दौरान संयम बरतें। राजनांदगांव और महासमुंद जैसी घटना न हो, इसका पुलिस भी विशेष ध्यान रखें। वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी ने कहा कि सरकार ने बौखलाहट भरा घोर अलोकतांत्रिक कदम उठाया है। सरकार जब से सत्ता में आई है, राजनीतिक प्रतिशोध के साथ-साथ अब अभिव्यक्ति की आजादी को लहूलुहान करने पर उतारू हो गई है। पहले उन्होंने बिजली के मुद्दे पर अपनी नाकामी छिपाने के लिए बिजली अमले को भाजपा का एजेंट बता दिया और अब राजद्रोह का आरोप लगाते हुए गिरफ्तारी करके वे तानाशाही और आतंकराज कायम करने की दिशा में बढ़ रहे हैं।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश) । प्रदेश में तेजी से बढ़ते अपराध और बिगड़ती कानून-व्यवस्था से नाराज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को सभी जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों/पुलिस अधीक्षकों को तलब किया। यह बैठक लोकभवन में प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर बुलाई गयी थी। मुख्यमंत्री ने अफसरों से दो टूक कहा कि कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संयुक्त रूप से जिम्मेदार हैं। इस मोर्चे पर कोताही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अवैध शराब कांड पर बाराबंकी के पुलिस अधीक्षक, टप्पल कांड पर अलीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और वारदातों पर अंकुश न लगा पाने के कारण शामली के पुलिस अधीक्षक को खरी-खरी सुनाई।
लोकभवन में अलीगढ़, हमीरपुर और कुशीनगर में बच्चियों से दुष्कर्म की घटनाओं का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चाहे जितने विकास कार्य करा दे, लेकिन ऐसी घटनाएं उसकी छवि पर दाग लगा देती हैं। प्रदेश की सभी 18 पुलिस रेंज और जिलों में पॉक्सो एक्ट और बाल अपराधों से जुड़े 10-10 मामलों को चिह्नित कर फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से अपराधियों को सजा दिलाई जाए। मुख्यमंत्री ने अलीगढ़ की घटना पर नाराजगी जताई और अफसरों से अपराध न रुक पाने का कारण पूछा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एंटी रोमियो स्क्वायड को और प्रभावी बनाया जाए।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक रोज अनिवार्य रूप से सुबह नौ से दस बजे तक लोगों की समस्याएं सुनें। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वह हर रोज निरीक्षण करने के लिए विद्यालयों, अस्पतालों व अलग-अलग ब्लॉक में जाएं और लोगों की शिकायतें सुनें। अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए फुट पैट्रोलिंग और यूपी 100 के वाहनों के रूट को नए सिरे से निर्धारित करने के लिए कहा। हर थाने में टॉप 10 अपराधियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि एसडीएम, तहसीलदार, बीडीओ, क्षेत्राधिकारी, थानाध्यक्ष सरीखे अधिकारी रात में अपनी तैनाती स्थल पर ही रुकेंगे। यदि उनके तैनाती स्थल पर सरकारी आवास नहीं बने हैं तो वे किराये पर मकान लेकर रहें, नहीं तो हटने के लिए लिखकर दे दें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जो सरकारी भूमि अवैध कब्जे से खाली करायी जाए उन पर खेल के मैदान या चरागाह विकसित किये जाएं। शहरों में सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराकर उन पर पार्क और ओपेन जिम विकसित करने का निर्देश दिया। सड़कों पर अवैध अतिक्रमण के लिए यातायात समस्या के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को शहरों में वेंडिंग जोन को चिन्हित कर सभी रेहड़ी-खोमचे वालों को उनमें जगह आवंटित करने के लिए कहा। गौरतलब है कि लोकभवन में बुलाई गई इस बैठक से पहले सभी अधिकारियों के मोबाइल फोन बाहर ही रखवा लिये गए थे।
उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ते अपराध और बिगड़ती कानून-व्यवस्था के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 16 जून से सभी महत्वपूर्ण जिलों का दौरा करेंगे, जहां वह ग्रामीणों के साथ ‘चौपाल’ बैठक करेंगे और पुलिस थानों, अस्पतालों, तहसीलों और प्राथमिक विद्यालयों का निरीक्षण करेंगे। वह राज्य के दूरदराज के कस्बों, क्षेत्रों में किए जा रहे विकास कार्यों की भी समीक्षा करेंगे।
इंदौर (मध्य प्रदेश)। देशभर में हर रोज पुलिस के शर्मनाक कारनामे सामने आते ही रहते हैं। ताजा मामला इंदौर का है, जहां लापता भाई की एफआईआर दर्ज करवाने गए युवक को टीआई और एसआई ने थाने से डांटकर भगा दिया और बोले कि पुलिस के पास बहुत काम है, स्वयं जाकर ढूंढ लो। इस घटना के चौथे दिन उसके भाई की लाश ग्राम छापरी में मिट्टी में दबी हुई सड़ी हालत में मिली।
इंदौर के हरसूद का रहने वाला रामनिवास(20) पिता गजराज चौहान इंदौर शहर में शादी समारोह में कैटरिंग के लिए लड़के सप्लाई करने के ठेके लेता था। रामनिवास द्वारकापुरी में किराए के मकान में रहता था। लेकिन दो जून से वह किराए के मकान से गायब था। विजयनगर क्षेत्र में रहने वाले उसके भाई 24 वर्षीय प्रहलाद चौहान ने द्वारकापुरी थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज करवाई थी। प्रह्लाद एक एडवाइजरी कंपनी में काम करता है। उसने बताया कि राम केटरर कालू ठेकेदार के लिए काम करता था। उसको कालू से 30 हजार रुपए लेने थे। उसने 1 जून को झाबुआ में रहने वाली महिला मित्र को फोन कर बताया था कि वह कालू से रुपए लेने जा रहा है। करीब 11 बजे महिला मित्र ने जब राम को वीडियो कॉल किया तो वह कालू के कमरे में ही कालू और एक अन्य के साथ शराब पी रहा था। इसके बाद उसका फोन बंद हो गया। वो उसी दिन से गायब है। चार दिन ढूंढने के बाद जब भाई नहीं मिला तो प्रह्लाद द्वारकापुरी थाने गया। वहां टीआई आरएनएस भदौरिया से कालू के फोन लोकेशन की जानकारी निकलवाने की विनती की लेकिन उन्होंने उसे यह कहकर वापस कर दिया कि पुलिस के पास बहुत काम है। वह जब एसआई के पास गया तो उन्होंने कहा- कॉल डिटेल और लोकेशन के लिए फाइल भेजी है। जैसे ही आएगी तो बता दूंगा। इसके बाद वह राज्य साइबर सेल(पिपल्याहाना) गया। यहां से बताया गया कि कंट्रोल रूम स्थित एसएसपी ऑफिस जाना पड़ेगा। फिर एसएसपी ऑफिस आया, लेकिन किसी ने भी मदद नहीं की। जब रविवार को राजेंद्रनगर पुलिस को एक शव मिला तो टीआई सुनील शर्मा ने प्रहलाद को बुलाकर शिनाख्त करवाई तो उसने अपने भाई को पहचान लिया। शव के गले पर निशान दिखाई दे रहे थे। द्वारकापुरी थाने के एसआई एनएस राठौर का कहना था कि प्रहलाद और मकान मालिक दुर्गाशंकर के बयान के आधार पर कईं स्थानों पर छानबीन की थी। लेकिन पूरी जानकारी नहीं होने के कारण ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचे। हालांकि पुलिस को आशंका है कि लेन देन की वजह से युवक की हत्या हुई होगी।
बीकानेर (राजस्थान)। चुनाव का मौसम आते ही नेता छाती पीट-पीटकर किसानों के शुभचिंतक होने का दावा करते हैं। लेकिन जैसे ही उन्हें सत्ता मिल जाती है। वह किसानों का दु:ख दर्ज भूल जाते हैं। जिसका खामियाजा किसान को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है। ऐसे ही एक मामला बीकानेर में सामने आया है, जहां लाखों के कर्ज डूबे किसान ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली । मृतक किसान के परिजनों ने बैंक अधिकारियों और व्यापारियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है और उनके खिलाफ केस भी दर्ज करवाया है।
बताया जा रहा है कि बीकानेर जिले में स्वरूपदेसर गांव निवासी मानाराम उर्फ हड़मानाराम जाट ने मरुधरा ग्रामीण बैंक से 15 लाख रुपये का लोन और कृषि उपज मंडी के व्यापारियों से 20 लाख रुपये का कर्जा ले रखा था। इसके अलावा भी अन्य लोगों से 20 लाख रुपये उधार ले रखे थे। जिसके चलते बैंक के अधिकारी और व्यापारी कर्ज वापस करने को लेकर लगातार परेशान कर रहे थे और घर आकर धमकी भी देते थे, जिससे मानाराम तनाव में रहने लगे थे। उन्होंने सारा कर्ज चुकाने के लिए अपनी जमीन बेचने का भी प्रयास किया, लेकिन उन्हें कोई ग्राहक नहीं मिला। इस विकट परिस्थिति से परेशान होकर मानाराम ने दो दिन पहले खेत के झोपड़े में जहर खा लिया। जब उनकी तबीयत बिगड़ने लगी तो परिजनों ने उन्हें पीबीएम अस्पताल में भर्ती करवाया। लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी । नाल पुलिस थाना अधिकारी अशोक बिश्नोई ने बताया कि मृतक किसान मानाराम के पुत्र शिवरतन जाट ने अपने पिता को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगाते हुए बैंक अधिकारियों और व्यापारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया है।
पटना (बिहार) । पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता सुरेश कुमार सिंह को राज्य निगरानी ब्यूरो ने 14 लाख रुपए रिश्वत लेते उसके घर से गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के दौरान सवा दो करोड़ रुपए की नगदी भी बरामद हुई है। रिश्वतखोर इंजीनियर के साथ उसके एक लेखा लिपिक को भी हिरासत में लिया गया है।
राज्य निगरानी ब्यूरो के डीएसपी गोपाल पासवान ने बताया कि कॉन्ट्रैक्टर अखिलेश कुमार जायसवाल की कंपनी सड़क निर्माण के क्षेत्र में काम करती है। अखिलेश कुमार जायसवाल ने शिकायत दर्ज कराई थी कि इंजीनियर सुरेश प्रसाद सिंह और उनके कार्यालय में तैनात लेखा लिपिक शशिभूषण विक्रम वाया गोड़वा मोड़ से अम्हारा मोड़ तक सड़क निर्माण कार्य के लिए सड़क की कुल लागत का एक प्रतिशत (32 लाख रुपए ) रिश्वत के रूप में मांग रहे हैं। हालांकि बाद में बात 28 लाख पर तय हुई। तय समय के मुताबिक शनिवार को जब शिकायतकर्ता इंजीनियर सुरेश प्रसाद सिंह और लेखा लिपिक को रिश्वत की रकम 14 लाख देने पहुंचा तो निगरानी टीम ने मौके पर ही इंजीनियर को गिरफ्तार कर लिया। सड़क निर्माण की कुल लागत 44 करोड़ रुपए है। आरोपी के घर हुई तलाशी में ब्यूरो को पटना में उसके तीन फ्लैट, एक मकान, नोएडा में एक फ्लैट, रूपसपुर पटना में दो फ्लैट और बिहटा में 14 कट्ठा जमीन एग्रीमेंट के कागजात, 26 एलआईसी पॉलिसी में निवेश से संबंधित कागजात मिले हैं। इसके अलावा आरोपी के पास एक स्कार्पियो और एक डस्टर गाड़ी भी बरामद की गई है। बिहार में किसी सरकारी कर्मी के घर से अब तक की यह सबसे बड़ी बरामदगी है। इतनी बड़ी रकम किसी भी छापेमारी में बरामद नहीं हुई है।
रांची (झारखंड) । प्रधानमंत्री आवास योजना में झारखंड में सरकारी प्रतिनिधियों की मिलीभगत से पच्चीस हजार लाभुकों ने करोड़ों रुपए की राशि का घपला किया है। इन लाभुकों ने आवास का पैसा तो लिया, लेकिन आवास का निर्माण ही नहीं किया। ऐसे कई घपलेबाजों के खिलाफ प्रशासन ने एफआईआर दर्ज करवायी है। और नोटिस देकर पूछा है कि उन्होंने रुपए लेने के बावजूद अपने आवास का निर्माण क्यों नहीं किया है। इसके अलावा काम पूरे करने के लिए एक निश्चित समय सीमा तय कर थाने में इनसे बॉंड भी भरवाया जा रहा है।
इस घपले में सबसे हैरानी की बात यह है कि सरकार के प्रतिनिधियों ने बिना जांच के जीईओ टैगिंग की। इस टैगिंग के आधार पर ही लाभुकों को आवास की किश्त जारी होती है। इससे पता चलता है कि प्रतिनिधियों की मिलीभगत के बिना करोड़ों की राशि में गड़बड़ी संभव नहीं है। मामले का खुलासा होने के बाद ग्रामीण विकास विभाग मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा ने सभी जिलों से रिपोर्ट तलब की है और कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि में गड़बड़ी करने वाले लाभुकों को नोटिस देने का काम सभी जिलों में शुरू हो गया है। जब बार-बार की नोटिस के बाद भी लाभुकों ने आवास निर्माण का काम पूरा नहीं किया तो प्रशासन ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। चतरा, जमशेदपुर, हजारीबाग, साहिगंज और कोडरमा में सैकड़ों लाभुकों पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है। इसके साथ ही एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद काम पूरे करने के लिए एक निश्चित समय सीमा तय कर थाने में इनसे बॉंड भी भरवाया जा रहा है। झारखंड में लगभग एक तिहाई लाभुक हर साल किसी न किसी कारण से आवासों का काम या तो अधूरा छोड़ रहे हैं या काम ही शुरू नहीं करा रहे हैं। राजधानी रांची में केवल शहरी क्षेत्र में 2000 से अधिक आवासों के लाभुकों ने पैसे लेने के बाद भी मकान बनाने का काम शुरू नहीं किया, जबकि ग्रामीण इलाकों में भी करीब इतनी ही संख्या है।
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री आवास योजना के वर्टिकल - 4 के तहत गरीबों को आवास के लिए राशि दिए जाने की व्यवस्था है। शहरी क्षेत्र के लोगों को अपनी जमीन पर आवास बनाने के लिए 2 लाख 25 हजार रुपये सरकार की ओर से दिए जाते हैं, जबकि लगभग एक लाख रुपये या चाहें तो उससे अधिक लाभुक को खर्च करने हैं। इसी तरह ग्रामीण इलाकों में आवास के लिए एक लाख 20 हजार और नक्सल प्रभावित इलाकों में एक लाख 30 हजार रुपये लाभुकों को दिए जाने का प्रावधान है। सरकार की ओर से दी जाने वाली रकम का 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करती है। इसमें पहली किस्त के रूप में लाभुक को 45 हजार और 25 हजार रुपये दिए जाते हैं। बाकी किस्तें काम के आगे बढऩे के निर्धारित क्रम में दिए जाने का प्रावधान है। योजना में जीईओ टैगिंग भी अनिवार्य है।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। प्रदेश के निजी माध्यमिक स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है। योगी सरकार ने एक अहम फैसला लेने जा रही है, इसके तहत अब निजी स्कूलों के शिक्षकों को अंशकालिक की जगह अब पूर्णकालिक कहा जाएगा। सरकार के इस फैसले के बाद शिक्षक को निकालना आसान नहीं होगा। ऐसा करने से पहले स्कूल के प्रबंधक को शिक्षक को निकालने का कारण ऑनलाइन फॉर्म के माध्यम से जिला विद्यालय निरीक्षक को बताना होगा। इतना ही नहीं स्कूलों में भर्ती किए गए शिक्षकों का भी पूरा ब्यौरा देना होगा। इन शिक्षकों के सेवा अनुभव का अनुभव प्रमाणपत्र स्कूल प्रबंधन और डीआइओएस संयुक्त जारी करेंगे।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनय कुमार पांडेय ने बताया कि निजी स्कूलों के शिक्षकों की सेवा नियमावली में कई ऐसे महत्वपूर्ण अधिकार जोड़े गए हैं, जिससे वह मजबूती के साथ नौकरी कर सकेंगे। यही नहीं 15 हजार रुपये वेतन भी स्कूल को देना होगा। प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों की सेवा नियमावली के लिए माध्यमिक शिक्षा एक्ट में बदलाव किया जा रहा है। सेवा नियमावली के लिए एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। संशोधन के बाद इसे लागू किया जाएगा। इस फैसले पर लखनऊ शिक्षक खंड के एमएलसी व माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष उमेश द्विवेदी कहना है कि इससे वित्त विहीन स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी। वित्तविहीन शिक्षकों ने इसके लिए काफी लंबी लड़ाई लड़ी है।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। प्रदेश के निजी माध्यमिक स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है। योगी सरकार ने एक अहम फैसला लेने जा रही है, इसके तहत अब निजी स्कूलों के शिक्षकों को अंशकालिक की जगह अब पूर्णकालिक कहा जाएगा। सरकार के इस फैसले के बाद शिक्षक को निकालना आसान नहीं होगा। ऐसा करने से पहले स्कूल के प्रबंधक को शिक्षक को निकालने का कारण ऑनलाइन फॉर्म के माध्यम से जिला विद्यालय निरीक्षक को बताना होगा। इतना ही नहीं स्कूलों में भर्ती किए गए शिक्षकों का भी पूरा ब्यौरा देना होगा। इन शिक्षकों के सेवा अनुभव का अनुभव प्रमाणपत्र स्कूल प्रबंधन और डीआइओएस संयुक्त जारी करेंगे।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनय कुमार पांडेय ने बताया कि निजी स्कूलों के शिक्षकों की सेवा नियमावली में कई ऐसे महत्वपूर्ण अधिकार जोड़े गए हैं, जिससे वह मजबूती के साथ नौकरी कर सकेंगे। यही नहीं 15 हजार रुपये वेतन भी स्कूल को देना होगा। प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों की सेवा नियमावली के लिए माध्यमिक शिक्षा एक्ट में बदलाव किया जा रहा है। सेवा नियमावली के लिए एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। संशोधन के बाद इसे लागू किया जाएगा। इस फैसले पर लखनऊ शिक्षक खंड के एमएलसी व माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष उमेश द्विवेदी कहना है कि इससे वित्त विहीन स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी। वित्तविहीन शिक्षकों ने इसके लिए काफी लंबी लड़ाई लड़ी है।
देहरादून (उत्तराखंड) । यदि आप बार-बार अपने आधार कार्ड को अपडेट करवा रहे हैं तो आपके लिए यह बहुत ही आवश्यक सूचना है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) का कहना है कि यदि आप आधार में एक से अधिक बार जन्मतिथि, नाम, पता और जेंडर अपडेट करवाते हैं तो आपको भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के दिल्ली स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में जाना पड़ेगा। वहां पर आपके सभी दस्तावेजों को चेक किया जाएगा। इसके बाद ही आपका आधार कार्ड अपडेट होगा।
आपको बता दें कि यूआईडीएआई दिल्ली के क्षेत्रीय अधिकारी प्रदीप कुमार सोमवार को देहरादून पहुंचे, जहां उन्होंने आधार अपडेशन से संबंधित जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जन्मतिथि में केवल एक बार ही संशोधन कराया जा सकता है। नाम, जेंडर में भी एक बार ही संशोधन कराया जा सकता है। यदि जन्मतिथि, नाम और जेंडर में किसी में भी इससे अधिक बार संशोधन कराने का प्रयास किया जाएगा तो इसके लिए अब वेरिफिकेशन की प्रक्रिया लागू कर दी गई है। यदि आप निर्धारित सीमा से अधिक बार संशोधन करवाते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको यूआईडीएआई के दिल्ली स्थित क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचना होगा। वहां आपको अपने सभी दस्तावेज दिखाने पड़ेंगे । इसके बाद ही आपके आधार अपडेशन पर फैसला होगा। साथ ही उन्होंने बताया कि यदि किसी भी फील्ड में आधार अपडेट कराना है तो उसके लिए ओरिजनल दस्तावेज होने जरूरी हैं।
देहरादून (उत्तराखंड) । यदि आप बार-बार अपने आधार कार्ड को अपडेट करवा रहे हैं तो आपके लिए यह बहुत ही आवश्यक सूचना है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) का कहना है कि यदि आप आधार में एक से अधिक बार जन्मतिथि, नाम, पता और जेंडर अपडेट करवाते हैं तो आपको भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के दिल्ली स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में जाना पड़ेगा। वहां पर आपके सभी दस्तावेजों को चेक किया जाएगा। इसके बाद ही आपका आधार कार्ड अपडेट होगा।
आपको बता दें कि यूआईडीएआई दिल्ली के क्षेत्रीय अधिकारी प्रदीप कुमार सोमवार को देहरादून पहुंचे, जहां उन्होंने आधार अपडेशन से संबंधित जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जन्मतिथि में केवल एक बार ही संशोधन कराया जा सकता है। नाम, जेंडर में भी एक बार ही संशोधन कराया जा सकता है। यदि जन्मतिथि, नाम और जेंडर में किसी में भी इससे अधिक बार संशोधन कराने का प्रयास किया जाएगा तो इसके लिए अब वेरिफिकेशन की प्रक्रिया लागू कर दी गई है। यदि आप निर्धारित सीमा से अधिक बार संशोधन करवाते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको यूआईडीएआई के दिल्ली स्थित क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचना होगा। वहां आपको अपने सभी दस्तावेज दिखाने पड़ेंगे । इसके बाद ही आपके आधार अपडेशन पर फैसला होगा। साथ ही उन्होंने बताया कि यदि किसी भी फील्ड में आधार अपडेट कराना है तो उसके लिए ओरिजनल दस्तावेज होने जरूरी हैं।