Total: 1726 results found.
Page 61 of 87
लोकसभा चुनाव परिणाम 2019
लोकसभा में बहुमत के लिए चाहिए: 272
रुझान + जीत
एनडीए- 352
यूपीए- 86
अन्य- 104
कुल सीटें- 542
उत्तर प्रदेश में चुनाव परिणाम
उत्तर प्रदेश में 80 सीटों के रुझानों में एनडीए 21 सीटें जीतकर 42 सीटों पर आगे है। महागठबंधन को 16 सीटों पर बढ़त है। कांग्रेस केवल रायबरेली की सीट जीत पाई है।
बिहार में चुनाव परिणाम
राज्य की 40 सीटों में से 19 सीटों पर जीत के साथ एनडीए के प्रत्याशी 20 पर आगे चल रहे है। कांग्रेस केवल 1 सीट जीती है। गठबंधन बिहार में बुरी तरह परास्त हो गया है।
दिल्ली में चुनाव परिणाम
इस बार भी दिल्ली की सभी 7 सीटों पर बीजेपी आगे है। बीजेपी सभी सातों सीटें जीत रही है।
हिमाचल में चुनाव परिणाम
इसी तरह हिमाचल की सभी 4 सीटों पर बीजेपी आगे है। और सभी सीटों को जीत रही है।
उत्तराखंड में चुनाव परिणाम
उत्तराखंड की सभी 5 सीटों पर बीजेपी आगे है। और BJP का क्लीन स्वीप करने जा रही है।
राजस्थान में चुनाव परिणाम
इसी तरह राजस्थान की 25 में से बीजेपी 22 सीटें जीत चुकी है और 3 सीटों पर आगे है।
हरियाणा में चुनाव परिणाम
हरियाणा की 10 में से 6 सीटें बीजेपी जीत चुकी है और 4 पर उसके उम्मीदवार आगे चल रहे हैं।
मध्य प्रदेश में चुनाव परिणाम
मध्य प्रदेश की 29 में से 20 सीटें बीजेपी ने जीती हैं और 8 पर उनके उम्मीदवार आगे है, यहां कांग्रेस केवल छिंदवाड़ा सीट ही निकाल पाई है। यहां से कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ चुनाव मैदान में थे।
झारखंड में चुनाव परिणाम
झारखंड में भी बीजेपी सूबे की कुल 14 सीटों में से बीजेपी 12 सीटों पर आगे चल रही है । यूपीए महज 2 सीटों पर आगे है।
छत्तीसगढ़ में चुनाव परिणाम
प्रदेश की कुल 11 लोकसभा सीटों में से बीजेपी 9 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस सिर्फ 2 सीटों पर आगे है।
आपको बता दें कि 17वीं लोकसभा के लिए 542 सीटों पर कुल 7 चरणों में चुनाव हुए थे। तमिलनाडु के वेल्लौर लोकसभा चुनाव को रद्द कर दिया था। वेल्लौर में बड़े पैमाने पर कैश बरामद होने के बाद चुनाव आयोग ने वहां का चुनाव रद्द करने की घोषणा की थी।
चतरा (झारखंड)। प्रदेश के भ्रष्ट कर्मचारी केंद्र सरकार की योजनाओं को पलीता लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं । ताजा मामला चतरा जिले में सदर प्रखंड के दारियातु पंचायत का है, जहां के पंचायत सेवक महेश मिस्त्री को बीस हजार रुपए रिश्वत लेते हुए भ्रष्टाचार निरोधक शाखा की टीम ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। पंचायत सेवक पर मनरेगा से निर्मित होने वाले डोभा की योजना से रिश्वत लेने का आरोप है।
बताया जा रहा है कि चतरा जिले के सदर प्रखंड के असढिया गांव निवासी गणेश यादव मनरेगा से डोभा का निर्माण करवा रहे हैं। इस योजना के तहत गणेश यादव को आठ लाख रुपये मिलने हैं। गणेश यादव ने चार लाख रुपये की निकासी कर ली है। बाकी राशि की निकासी को लेकर मस्टर रॉल में हस्ताक्षर कराने के लिए गणेश यादव ने पंचायत सेवक महेश मिस्त्री से संपर्क किया। लेकिन उन्होंने मस्टर रॉल पर हस्ताक्षर करने के एवज में पांच प्रतिशत कमीशन की मांग की। इससे परेशान होकर गणेश यादव ने पंचायत सेवक के खिलाफ हजारीबाग स्थित एसीबी के कार्यालय में शिकायत की।
पंचायत सेवक के खिलाफ शिकायत मिलने के बाद एसीबी के अधिकारी ने मामले की सत्यता की जांच की। उसके बाद पंचायत सेवक को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ने के लिए मंगलवार को गणेश यादव के साथ मिलकर जाल बिछाया । इसके बाद टीम के अधिकारी के कहने पर गणेश यादव ने पंचायत सेवक को फोन किया और जतराहीबाग स्थित न्यू कॉलोनी में भाड़ा के आवास पर बुलाया। गणेश यादव ने जैसे ही पंचायत सेवक को बीस हजार रुपए रिश्वत की रकम दी वैसे ही एसीबी की टीम ने उसे रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान टीम का नेतृत्व डीएसपी इंदूभूषण ओझा कर रहे थे।
रायपुर (छत्तीसगढ़)। दंतेवाड़ा के पूर्व कलेक्टर और वर्तमान भाजपा नेता ओपी चौधरी के खिलाफ सुरभि कालोनी जमीन बंधक घोटाले की जांच शुरु हो गयी है। दंतेवाड़ा कलेक्टर ने सुरभि कालोनी मामले में अब तक हुई जांच की फाइल जांच अधिकारी से तलब की है। ओपी चौधरी पर सुरभि कालोनी की बंधक जमीन नियम विरूद्ध मुक्त करने का आरोप है। हालांकि इस मामले की जांच रमन सरकार के कार्यकाल में हुई थी, लेकिन मामले को दबा दिया गया था। अब कांग्रेस की सरकार आने के बाद ओपी चौधरी के जमीन घोटालों की जांच शुरू कर दी गयी है।
आपको बता दें कि रायपुर के पूर्व कलेक्टर ओमप्रकाश चौधरी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह व छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह की मौजूदगी में 2018 में भाजपा में शामिल हो गये थे। 2005 बैच के इस आईएएस अधिकारी ने 25 अगस्त को अपने पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद भाजपा के टिकट पर खरसिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन वह चुनाव हार गए थे। ओपी चौधरी पर आरोप है कि उन्होंने दंतेवाड़ा की सुरभि कालोनी में बंधक 41 प्लॉट नियम विरूद्ध मुक्त किए। जिसकी कीमत ढाई करोड़ रुपये से ज्यादा बतायी जा रही है। सुरभि कालोनी का निर्माण 8 एकड़ में हुआ है। 2005 में लाइसेंस लेते वक्त कालोनाइजर ने सात बिंदुओं पर कालोनी के आंतरिक विकास का अनुबंध किया था। जिसमें कालोनी की 15 फीसद भूमि गरीब वर्ग के लिए आरक्षित रखी गई थी। इसी 15 फीसद भूमि के 41 प्लाट नगर पालिका दंतेवाड़ा के पास बंधक थे। प्रशासन से शिकायत की गई कि फर्जी समिति और एनओसी के जरिए बंधक भूमि को मुक्त कराकर बेच दिया गया।
हालांकि ओपी चौधरी का जब दंतेवाड़ा से ट्रांसफर हो गया तो उसके बाद करीब 4 साल पहले तत्कालीन दंतेवाड़ा कलेक्टर केसी देवसेनापति ने सुरभि कालोनी बंधक मामले की जांच कराई। इस जांच रिपोर्ट को मंत्रालय में नगर प्रशासन के पास भेजा गया था, लेकिन उस समय कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। हालांकि इस जांच रिपोर्ट में कालोनाइजर पर एफआइआर दर्ज करने और नगरपालिका के तत्कालीन सीएमओ को निलंबित करने की सिफारिश की गई थी।
जयपुर (राजस्थान)। राज्य सरकार ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए बहुत ही अहम कदम उठाया है। अब प्रदेश में जिला स्तर पर एक नोडल अधिकारी पुलिस उपाधीक्षक (महिला सुरक्षा) नियुक्त किया जाएगा। जो महिलाओं, बालकों व बालिकाओं के प्रति प्रताड़ना तथा जघन्य अपराधों के प्रति प्रताड़ना तथा जघन्य अपराधों में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
अशोक गहलोत सरकार ने शुक्रवार को एक उच्च स्तरीय बैठक की । जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। अब जिले में पदस्थापित नोडल अधिकारी उप अधीक्षक पुलिस (अनुसूचित जाति-जनजाति) की तर्ज पर ही महिला व बच्चों के खिलाफ अपराधों के मामलों की निगरानी के लिए भी नोडल अधिकारी उप अधीक्षक पुलिस (महिला सुरक्षा) का पद सृजित करने के निर्देश दिए गए हैं। नोडल अधिकारी जिले में स्थित महिला थानों पर भी निगरानी रखेगा। इसके साथ ही सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग में स्थानीय स्तर पर समन्वय स्थापित कर महिलाओं के प्रति हो रहे अत्याचार के मामलों में पीड़ित पक्ष को सहायता, मार्गदर्शन एवं संबल प्रदान करने का काम करेगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि यदि थानेदार द्वारा संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज नहीं करने की फरियाद पुलिस अधीक्षक के पास पहुंचती है, तो पुलिस अधीक्षक जिला स्तर पर ही एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई सुनिश्चित करेगा तथा संबंधित थानेदार का उत्तरदायित्व निर्धारित करने की कार्यवाही भी करेगा। इतना ही नहीं महिला व बच्चों के विरुद्ध जघन्य यौन अपराधों को केस ऑफिसर स्कीम में लेकर संबंधित प्रकरण में एक पुलिस अधिकारी को अधिकृत किया जाए जो अभियोजन प्रक्रिया को तेज गति से संपन्न करवाकर पीड़ित को शीघ्र न्याय दिलवाए।
जयपुर (राजस्थान)। राज्य सरकार ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए बहुत ही अहम कदम उठाया है। अब प्रदेश में जिला स्तर पर एक नोडल अधिकारी पुलिस उपाधीक्षक (महिला सुरक्षा) नियुक्त किया जाएगा। जो महिलाओं, बालकों व बालिकाओं के प्रति प्रताड़ना तथा जघन्य अपराधों के प्रति प्रताड़ना तथा जघन्य अपराधों में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
अशोक गहलोत सरकार ने शुक्रवार को एक उच्च स्तरीय बैठक की । जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। अब जिले में पदस्थापित नोडल अधिकारी उप अधीक्षक पुलिस (अनुसूचित जाति-जनजाति) की तर्ज पर ही महिला व बच्चों के खिलाफ अपराधों के मामलों की निगरानी के लिए भी नोडल अधिकारी उप अधीक्षक पुलिस (महिला सुरक्षा) का पद सृजित करने के निर्देश दिए गए हैं। नोडल अधिकारी जिले में स्थित महिला थानों पर भी निगरानी रखेगा। इसके साथ ही सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग में स्थानीय स्तर पर समन्वय स्थापित कर महिलाओं के प्रति हो रहे अत्याचार के मामलों में पीड़ित पक्ष को सहायता, मार्गदर्शन एवं संबल प्रदान करने का काम करेगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि यदि थानेदार द्वारा संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज नहीं करने की फरियाद पुलिस अधीक्षक के पास पहुंचती है, तो पुलिस अधीक्षक जिला स्तर पर ही एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई सुनिश्चित करेगा तथा संबंधित थानेदार का उत्तरदायित्व निर्धारित करने की कार्यवाही भी करेगा। इतना ही नहीं महिला व बच्चों के विरुद्ध जघन्य यौन अपराधों को केस ऑफिसर स्कीम में लेकर संबंधित प्रकरण में एक पुलिस अधिकारी को अधिकृत किया जाए जो अभियोजन प्रक्रिया को तेज गति से संपन्न करवाकर पीड़ित को शीघ्र न्याय दिलवाए।
उत्तराखंड में खसरा की नकल प्राप्त करने के लिए आपको तहसील के चक्कर लगाने की जरुरत नहीं है । आप घर बैठे ही ऑनलाइन खसरा की नकल प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए आपको इंटरनेट से कनेक्ट कंप्यूटर पर कुछ प्रक्रिया का पालन करना होगा ।
सबसे पहले आप अपने कंप्यूटर में गूगल सर्च इंजन में devbhoomi टाइप करें और फिर इंटर की प्रेस कर दें। ऐसा करते ही आपके सामने devbhoomi यूआरएल devbhoomi.uk.gov.in के साथ खुल जाएगा। अब आप devbhoomi पर क्लिक करें।

devbhoomi पर क्लिक करते ही आपके सामने होम पेज खुल जाएगा । यहां पर आप बायीं ओर दिए गए ऑप्शन जिला और तहसील को सेलेक्ट करें। इसके बाद ओके बटन पर क्लिक कर दें।

ओके बटन पर क्लिक करने के बाद आपके सामने जनपद चुनें, तहसील चुनें, ग्राम चुनें, का ऑप्शन आ जाएगा । अब यहां पर आप एक-एक करके तीनों ऑप्शन को चुन लें।

ग्राम को चुनने के बाद आपके सामने नया पेज खुलकर आ जाएगा। यहां पर खसरा/गाटा संख्या द्वारा, खाता संख्या द्वारा, खातेदार के नाम द्वारा में से किसी भी एक ऑप्शन को सेलेक्ट करके, किसी भी व्यक्ति की जमीन के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आप चाहें तो खातेदार के नाम द्वारा जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए खोजें ऑप्शन में जाकर व्यक्ति का नाम टाइप करें। और उसे सेलेक्ट कर दें।

ऐसा करते ही आपके सामने नयी विंडो खुलकर आ जाएगी । जिसमें खातेदार और उसकी जमीन के बारे में विस्तृत विवरण दिखाई देने लगेगा। आप चाहें तो इस कॉपी का प्रिंट भी ले सकते हैं।

नोट- आपको बता दें कि ऑनलाइन प्राप्त की गयी यह कॉपी केवल सूचना के लिए होती है । आप इसको प्रमाण के रुप में कहीं प्रस्तुत नहीं कर सकते हैं। यदि आप प्रमाणिक कॉपी चाहते हैं तो आपको तहसील जाना होगा । वहां से प्राप्त प्रमाणिक कॉपी को आप प्रमाण के रुप में कहीं भी प्रस्तुत कर सकते हैं।
हरियाणा में जमाबंदी की नकल प्राप्त करने के लिए आपको तहसील के चक्कर लगाने की जरुरत नहीं है । आप घर बैठे ही ऑनलाइन जमाबंदी (खाता, खतौनी विवरण) की नकल प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए आपको इंटरनेट से कनेक्ट कंप्यूटर पर कुछ प्रक्रिया का पालन करना होगा ।
सबसे पहले आप अपने कंप्यूटर में गूगल सर्च इंजन में jamabandi टाइप करें और फिर इंटर की प्रेस कर दें। ऐसा करते ही आपके सामने jamabandi यूआरएल jamabandi.nic.in के साथ खुल जाएगा। अब आप jamabandi पर क्लिक करें।

jamabandi पर क्लिक करते ही आपके सामने होम पेज खुल जाएगा । इसमें ऊपर की ओर कई मीनू दिखाई दे रहे होंगे । आपको इसमें से Jamabandi Nakal के ऑप्शन को सेलेक्ट करना है। इसको सेलेक्ट करते ही आपके सामने जमाबंदी सर्च करने के लिए तीन ऑप्शन By Owner, By Khewat No, By Khasra No आ जाएंगे। अब आप चाहें तो इनमें से By Khasra No को सेलेक्ट कर लें।

By Khasra No को सेलेक्ट करते ही आपके सामने नयी विंडो खुलकर सामने आ जाएगी। यहां पर आपको अपना District, Tehsil/Sub-Tehsil, Village को सेलेक्ट करना होगा। इसके बाद आपको Submit बटन पर क्लिक करना होगा।

Submit बटन पर क्लिक करते ही आपके सामने नई विंडो खुलकर सामने आ जाएगी। अब यहां पर आपको Khasra नंबर सेलेक्ट करना होगा। खसरा नंबर को सेलेक्ट करते ही आपके सामने Khewat और Khatoni का नंबर खुलकर आ जाएगा । अब आप जमाबंदी की नकल प्राप्त करने के लिए Nakal के ऑप्शन पर क्लिक कर दें।

Nakal के ऑप्शन पर क्लिक करते ही आपके सामने जमाबंदी नकल की कॉपी निकलकर आ जाएगी। इसमें जमीन के मालिक और जमीन के बारे में पूरा विवरण होता है। इसके जरिए आप किसी भी जमीन से संबंधित सभी जानकारियों को प्राप्त कर सकते हैं।

नोट- आपको बता दें कि ऑनलाइन प्राप्त की गयी यह कॉपी केवल सूचना के लिए होती है । आप इसको प्रमाण के रुप में कहीं प्रस्तुत नहीं कर सकते हैं। यदि आप प्रमाणिक कॉपी चाहते हैं तो आपको तहसील जाना होगा । वहां पटवारी या तहसीलदार को एक प्रार्थनापत्र देना होगा और सरकारी तौर पर निर्धारित फीस देनी होगी। इसके बाद आप जमाबंदी की प्रमाणिक कॉपी उपलब्ध करवा दी जाएगी। जिसे आप प्रमाण के रुप में कहीं भी प्रस्तुत कर सकते हैं।
झारखंड में खातियान या जमीन की नकल प्राप्त करने के लिए आपको तहसील के चक्कर लगाने की जरुरत नहीं है । आप घर बैठे ही ऑनलाइन खातियान या जमीन की नकल प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए आपको इंटरनेट से कनेक्ट कंप्यूटर पर कुछ प्रक्रिया का पालन करना होगा ।
सबसे पहले आप अपने कंप्यूटर में गूगल सर्च इंजन में जाकर jharbhumi.nic.in यूआरएल टाइप करें और फिर इंटर की प्रेस कर दें। ऐसा करते ही आपके सामने राजस्व विभाग की आधिकारिक वेबसाइट का होम पेज आपके सामने खुल जाएगा ।

अब आप वेबसाइट की दाहिनी ओर दिए गए मीनू में से खाता एवं रजिस्टर-II पर क्लिक करना होगा।

खाता एवं रजिस्टर-II पर क्लिक करते ही आपके सामने एक नया पेज खुला जाएगा । यहां पर मौजूद कुछ सूचनाएं भरनी होंगी । यहां पर सबसे पहले पहले खतियान या रजिस्टर 2 में से खतियान को चुनें। इसके बाद जिला, अंचल नाम, हल्का नाम, मौजा नाम (गांव), खाता नंबर (जमाबंदी) और किस्म जमीन को सेलेक्ट करें। अब अंतिम में आप खतियान बटन पर क्लिक कर दें।

खतियान बटन पर क्लिक करते ही आपके सामने खतियान खुलकर सामने आ जाएगा। इस खातियान में खाता नंबर, खेसरा नंबर, चौहद्दी, जमीन की किस्म, कैफियत, लगान या सेस, आदि जनकारियां दर्ज मिलेंगी।

आप चाहें तो इस खातियान का प्रिंट भी ले सकते हैं। इसके लिए आपको पेज के ऊपर दाहिनी ओर प्रिंट के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा। जैसे ही आप प्रिंट ऑप्शन पर क्लिक करेंगे वैसे ही खातियान की कॉपी का प्रिंट आपके सामने आ जाएगा।

नोट- आपको बता दें कि यह कंप्यूटर द्वारा प्राप्त प्रति है, और यह प्रपत्र केवल प्रार्थी की जानकारी के लिए है। इसलिए इसका उपयोग किसी भी न्यायालय में साक्ष्य के रुप में नहीं किया जा सकता है। यदि खातियान की प्रमाणिक कॉपी चाहिए तो इसके लिए आपको तहसील में लेखपाल या तहसीलदार से संपर्क करना होगा।
नवादा (बिहार)। प्रधान डाकघर नवादा में ढाई करोड़ रुपये का घोटाला करने वाले खजांची अम्बिका चौधरी एवं डाकपाल कपिलदेव यादव पर प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज हो गयी है। पुलिस आरोपी खजांची और डाकपाल को गिरफ्तार करने के लिए उनके ठिकानों पर छापे मार रही है। इस घोटाले का खुलासा तीन सदस्यीय जांच कमेटी की जांच में हुआ।
आपको बता दें कि नवादा प्रधान डाकघर का खाता स्टेट बैंक की मुख्य शाखा से संचालित होता है। लेकिन स्टेट बैंक से जो रुपये डाकघर को उपलब्ध कराए जाते थे, उसे सही तरीके से क्रेडिट नहीं किया जाता था। इस घोटाले का मामला तब सामने आया जब करीब 4 वर्षों तक कैशियर के पद पर जमे रहे खजांची अम्बिका चौधरी का तबादला हुआ। सितम्बर 18 में तबादला होने के बाद अंम्बिका चौधरी पर प्रभार सौपने का दवाब बढ़ा तो वे आफिस से गायब हो गए। इस बीच कर्मियों के बीच यह बात सार्वजनिक हो गई कि कैश में हेराफेरी हुई है। जिसके बाद फरवरी 19 में डाक अधीक्षक के स्तर से डाक उपाधीक्षक नवीन कुमार, डाक निरीक्षक सुरेश कुमार सहित तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई। जांच में करीब ढाई करोड़ रुपये की हेराफेरी मिली। हालांकि जांच के दौरान रुपये जमा करने का मौका आरोपितों को दिया गया, लेकिन खजांची लगातार फरार रहे। इसके बाद खजांची अम्बिका चौधरी व प्रधान डाकपाल कपिल देव यादव के खिलाफ गुरुवार को नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। डाक उपाधीक्षक नवीन कुमार ने यह प्राथमिकी दर्ज कराई है। जिसके बाद नगर थाना व बुंदेलखंड थाना की पुलिस ने खजांची अम्बिका के पार नवादा डोभरा पर मोहल्ला स्थित घर पर छापेमारी की। छापेमारी में एएसपी अभियान कुमार आलोक, टाउन इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार, बुंदेलखंड पुलिस और अन्य सैप जवान शामिल थे। लेकिन आरोपित खजांची समेत परिवार के सभी सदस्य नहीं मिले। इसके बाद पुलिस ने आरोपित के घर को सील कर दिया। जबकि विभाग स्तर पर शुरू हुई जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद दो दिनों पूर्व प्रधान डाकपाल और खजांची को निलंबित कर दिया गया था।
सरगुजा (छत्तीसगढ़)। देश में चुनाव का समय आते ही नेता लोकतंत्र के नाम पर जनता की सेवा का झूठा राग अलापना शुरु कर देते हैं और जनता को अपना मालिक बताकर उन्हें बेवकूफ बनाते हैं। पर जैसे ही उन्हें सत्ता मिल जाती है, वह तथाकथित मालिक को मुड़कर देखना भी गवारा नहीं करते हैं। नेताओं और अधिकारियों का ऐसा ही कारनामा सरगुजा में बतौली क्षेत्र के दूरस्थ ग्राम बांसाझाल में देखने को मिला है, जहां अधिकारियों ने ग्रामीण वीरन राम के घर तक सड़क बनाने की मांग को ठुकरा दिया । लेकिन इरादे के पक्के वीरन राम उनके इस व्यवहार से हारे नहीं और दो साल की अथक परिश्रम के बाद अपने घर तक 2 किलोमीटर सड़क बना डाली ।
आपको बता दें कि सरगुजा जिले के बतौली क्षेत्र के दूरस्थ ग्राम बांसाझाल के पहाड़ी क्षेत्र के रहने वाले ग्रामीण वीरन राम के लिए दो साल पहले प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत किया गया था, लेकिन इस पहाड़ी गांव में उसके घर तक निर्माण सामग्री पहुंचाने के लिए सड़क नहीं थी । इस समस्या के निदान के लिए वीरन राम ने पंचायत पदाधिकारियों के अलावा स्थानीय जनपद के अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन किसी ने उसकी गुहार नहीं सुनी । बल्कि पंचायत पदाधिकारियों ने उसे धमकाकर भगा दिया । ऐसी दशा में उन्होंने थक हारकर परिवार सहित खुद कुदाली उठा ली और अपने घर तक दो किलोमीटर सड़क बनाने का बीड़ा उठाया। हालांकि शुरुआत में उसके परिवार ने भी साथ दिया, लेकिन बाद में उनके परिवार वालों ने भी उसका साथ छोड़ दिया। लेकिन वीरन ने अपने दृढ़ संकल्प के बलबूते दो सालों में दो किलोमीटर सड़क अपने घर से लेकर गांव के निचले हिस्से तक बना दी। उसके बाद निर्माण सामग्री से भरी हुई गाड़ियां, ट्रैक्टर इत्यादि उसके निर्माण स्थल तक पहुंचने लगी और प्रधानमंत्री आवास के तहत उनका घर बनकर तैयार हो गया। वीरन राम के 5 बच्चे हैं। उनका बड़ा लड़का 12वीं कक्षा में पढ़ता है। लेकिन अभी भी वीरन राम के सपनों के घर में उजाला होना बाकी है। अभी तक उनके घर तक विद्युत विभाग बिजली नहीं पहुंचा पाया है। अब देखने वाली बात है कि वीरन राम के घर में कब उजाला होता है।
सेवा में,
केन्द्रीय/ राज्य मुख्य सूचना आयुक्त
केन्द्रीय/राज्य सूचना आयोग
...............................................
...............................................
विषय: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 19/18 के तहत द्वितीय अपील/शिकायत।
क्रमांक
वांछित सूचनाएं
आवेदक द्वारा भरा जाये
1.आवेदक/ शिकायतकर्ता का नाम एवं पता
(ख) आवेदन जमा करने की तिथि
(ग) लोक सूचना अधिकारी से प्राप्त जवाब की तिथि
3.(क) प्रथम अपील अधिकारी का नाम एवं पता
(ख) प्रथम अपील जमा करने की तिथि
(ग) प्राप्त जवाब की तिथि
4.आदेशों का विवरण, यदि कोई हो
5.अपील किये जाने से पहले तक के तत्थों का संक्षिप्त विवरण
6.यदि अपील डिम्ड रिफयजल के विरूद्व किया जाना है तो जिस लोक सूचना अधिकारी के यहां आवेदन किया गया था उसका नाम एवं पता और तिथि एवं नम्बर सहित आवेदन का संक्षिप्त विवरण दें।
7.आयोग से निवेदन व प्रार्थना
लोक सूचना अधिकारी को मेरे आवेदन में मांगी गई सूचना बिना किसी शुल्क के तुरन्त सात दिनों में प्रदान करने का आदेश दें। साथ ही आयोग से यह भी निवेदन है कि लोक सूचना अधिकारी के विरुद्व कानून की धारा 20(1) के तहत ज़ुर्माना लगाएं और धारा 20(2) के तहत लोक सूचना अधिकारी के विरुद्व अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिये सिफारिश भी करें आयोग से निवेदन है कि मै इस मामले की सुनवाई में स्वयं या अपने प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित रहना चाहता हूं। अत: मुझे सभी सुनवाइयों की अगि्रम सूचना अवश्य प्रदान करें। साथ ही में यह भी निवेदन करना चाहता हूं कि इस मामले पर फैसला सुनवाई करने के बाद ही करें।
8.निवेदन व प्रार्थना का आधार
लोक सूचना अधिकारी ने सूचनाएं अब तक नही उपलब्ध् कराई है इसलिए सुचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 19/18 के तहत अपील/शिकायत दायर की जा रही है। सुचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 7(6) का संज्ञान लेते हुए लोक सूचना अधिकारी को आदेश दें कि सभी सूचनाएं मुफ्त में उपलब्ध् कराई जाये। साथ ही सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 20(1) एवं (2) के तहत लोक सूचना अधिकारी पर 250 रू0 प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाये और अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिये सिफारिश भी करें।
9.अन्य सूचनाएं (यदि है तो)
10.सत्यापन
उपरोक्त अपील/ शिकायत के तथ्यों को दिनांक...........को सत्यापित किया गया है।
मैं ..........................उपरोक्त अपील/ शिकायत के तथ्यों को दिनांक....................को सत्यापित किया गया है।
मैं ....................................... सत्यापित करता हूं कि उपरोक्त मामले की सुनवाई किसी अन्य न्यायालय, अधिकरण अथवा किसी अन्य प्राधिकरण में नहीं की गई है अथवा विचाराधीन नहीं है। इस अपील में प्रदान की गई सूचनाएं मेरी जानकारी में सही हैं।
संलग्न सूची:
1- आवेदन की प्रति (Annexure A)
2- शूल्क रसीद का प्रति (Annexure B)
3- आवेदन पत्र को डाक द्वारा भेजे जाने की रसीद (Annexure C) (यदि हो)
4- प्रथम अपील की प्रति (Annexure D) (यदि हो)
5- प्रथम अपील को डाक द्वारा भेजे जाने की रसीद (Annexure E) (यदि हो)
6- द्वितीय अपील की प्रति को लोक सूचना अधिकारी एवं प्रथम अपील अधिकारी को भेजे जाने की रसीद
नाम: ....................................
पता: ....................................
स्थान:
तिथि:
नोट: (केवल केन्द्रीय सूचना आयोग के लिए)
सेवा में,
लोक सूचना अधिकारी
(विभाग का नाम)
(विभाग का पता)
विषय : सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत आवेदन।
महोदय,
मैने आपके विभाग में ............ तारीख को .................. के लिए आवेदन किया था। (आवेदन की प्रति संलग्न है) लेकिन अब तक मेरे आवेदन पर सन्तोषजनक कदम नहीं उठाया गया है।
कृपया इसके सन्दर्भ में निम्नलिखित सूचना उपलब्ध् कराएं
मैं आवेदन फीस के रूप में 10रू अलग से जमा कर रहा /रही हूं।
या
मैं बी.पी.एल. कार्ड धारी हूं इसलिए सभी देय शुल्कों से मुक्त हूं। मेरा बी.पी.एल. कार्ड नं..............है।
यदि मांगी गई सूचना आपके विभाग/कार्यालय से सम्बंधित नहीं हो तो सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6 (3) का संज्ञान लेते हुए मेरा आवेदन सम्बंधित लोक सूचना अधिकारी को पांच दिनों के समयाविध् के अन्तर्गत हस्तान्तरित करें। साथ ही अधिनियम के प्रावधानों के तहत सूचना उपलब्ध् कराते समय प्रथम अपील अधिकारी का नाम व पता अवश्य बतायें।
आवेदक
नाम:
पता:
फोन नं:
संलग्नक:
(यदि कुछ हो)
भोपाल (मध्य प्रदेश)। चुनाव आयोग की अनुमति के बाद प्रदेश सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (सवर्ण) के आरक्षण के लिए अहम कदम उठाया है। सरकार ने कलेक्टरों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (सवर्ण) के युवाओं के आय प्रमाणपत्र बनाने के अधिकार दे दिए हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय को प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन आचार संहिता के चलते मामला चुनाव आयोग में लंबित था।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव ने इस बात की पुष्टि की है कि सामान्य प्रशासन विभाग ने जिलों से आ रही आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (सवर्ण) का आय प्रमाणपत्र बनाए जाने की मांग के मद्देनजर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय को प्रस्ताव भेजा था। कार्यालय ने आचार संहिता के मद्देनजर इस पर चुनाव आयोग से मार्गदर्शन मांगा था। इसके बाद रविवार को प्रमाणपत्र बनाए जाने की अनुमति दी गई।
चुनाव आयोग की अनुमति के बाद केंद्रीय शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (सवर्ण) आरक्षण का प्रावधान होने के बाद प्रदेश के युवाओं को इसका फायदा मिल सकेगा। इसके लिए निर्धारित प्रपत्र में प्रमाणपत्र बनाकर देने के अधिकार जिलों को दे दिए। इस आरक्षण का लाभ आठ लाख रुपए तक सालाना आय वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (सवर्ण) युवाओं को मिलेगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि कलेक्टरों ने प्रमाणपत्र बनाने अनुविभागीय अधिकारी और तहसीलदार को अधिकृत किया है। वे प्रमाण पत्र केंद्र सरकार की गाइडलाइन और प्रारूप के मुताबिक बनाएंगे। जैसे-
आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में अभी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (सवर्ण) आरक्षण लागू नहीं हुआ है।
भोपाल (मध्य प्रदेश)। चुनाव आयोग की अनुमति के बाद प्रदेश सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (सवर्ण) के आरक्षण के लिए अहम कदम उठाया है। सरकार ने कलेक्टरों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (सवर्ण) के युवाओं के आय प्रमाणपत्र बनाने के अधिकार दे दिए हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय को प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन आचार संहिता के चलते मामला चुनाव आयोग में लंबित था।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव ने इस बात की पुष्टि की है कि सामान्य प्रशासन विभाग ने जिलों से आ रही आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (सवर्ण) का आय प्रमाणपत्र बनाए जाने की मांग के मद्देनजर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय को प्रस्ताव भेजा था। कार्यालय ने आचार संहिता के मद्देनजर इस पर चुनाव आयोग से मार्गदर्शन मांगा था। इसके बाद रविवार को प्रमाणपत्र बनाए जाने की अनुमति दी गई।
चुनाव आयोग की अनुमति के बाद केंद्रीय शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (सवर्ण) आरक्षण का प्रावधान होने के बाद प्रदेश के युवाओं को इसका फायदा मिल सकेगा। इसके लिए निर्धारित प्रपत्र में प्रमाणपत्र बनाकर देने के अधिकार जिलों को दे दिए। इस आरक्षण का लाभ आठ लाख रुपए तक सालाना आय वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (सवर्ण) युवाओं को मिलेगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि कलेक्टरों ने प्रमाणपत्र बनाने अनुविभागीय अधिकारी और तहसीलदार को अधिकृत किया है। वे प्रमाण पत्र केंद्र सरकार की गाइडलाइन और प्रारूप के मुताबिक बनाएंगे। जैसे-
आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में अभी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (सवर्ण) आरक्षण लागू नहीं हुआ है।
रतलाम (मध्य प्रदेश)। भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस की लगातार हो रही कार्रवाइयों बावजूद प्रदेश में भ्रष्टाचार रुकने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला उज्जैन के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का है। जहां लोकायुक्त पुलिस ने जिला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर चौहान को स्कूल संचालक से 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया । जिला शिक्षा अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने जावरा तहसील के ग्राम बन्नाखेड़ा स्थित निजी स्कूल की मान्यता रद्द करने की धमकी देकर रिश्वत मांगी थी।
आपको बता दें कि उज्जैन जिले की जावरा तहसील के ग्राम बन्नाखेड़ा स्थित सांई पब्लिक स्कूल के संचालक सुखदेव पांचाल ने 2 मई को लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक उज्जैन को शिकायत की थी। अपनी शिकायत में सुखदेव पांचाल ने बताया था कि जिला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर चौहान ने उनके स्कूल की मान्यता रद्द करने की धमकी देकर पहले 50 हजार रुपए की मांग कर रहे थे। हालांकि दोनों के बीच बातचीत के बाद 30 हजार रुपए देने की बात तय हुई थी। लेकिन उन्होंने रामेश्वर चौहान को रिश्वत देने की बजाय मामले की शिकायत लोकायुक्त पुलिस उज्जैन से कर दी । शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस की टीम डीएसपी शैलेंद्रसिंह ठाकुर के नेतृत्व में शनिवार दोपहर जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय पहुंची। और सुखदेव पांचाल से रामेश्वर चौहान को 15 हजार रुपए देने के लिए कहा। सुखदेव पांचाल ने जैसे ही रामेश्वर चौहान को 15 हजार रुपए दिए, वैसे ही इशारा मिलते ही लोकायुक्त पुलिस टीम ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और 15 रुपए जब्त कर लिए । हालांकि कुछ देर बाद रामेश्वर चौहान को जमानत पर रिहा कर दिया। लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर मामले की जांच आरंभ कर दी है।
छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश)। अमरवाड़ा के शासकीय पशु चिकित्सालय के प्रभारी पशु चिकित्सक को जबलपुर की लोकायुक्त पुलिस टीम ने 4 हजार रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। मवेशी का बीमा कराने के लिए स्वास्थ्य प्रमाण पत्र बनाने के एवज में किसान से रिश्वत मांगने का आरोप है।
आपको बता दें कि अमरवाड़ा थाना क्षेत्र के ग्राम पिपरिया गुमान निवासी हरिओम साहू ने अपने पालतू पशु का बीमा करवाया था। उनका कहना है कि उन्हें विभागीय योजना के तहत उसे लोन पर मवेशी मिले थे। जिनका बीमा कराने के लिए स्वास्थ्य प्रमाण पत्र की आवश्यकता थी। जब वह इसके लिए पशु चिकित्सालय प्रभारी डॉ. अनिल केवट के पास गए तो वह उनसे 5 हजार रुपए रिश्वत की मांग करने लगे। इससे परेशान होकर उन्होंने जबलपुर लोकायुक्त से मामले की शिकायत कर दी । लोकायुक्त पुलिस टीम ने जब मामले की जांच की तो शिकायत सही पायी गयी । इसके बाद टीम ने पशु चिकित्सक को रंगेहाथ पकड़ने के लिए हरिओम साहू को रिश्वत देने की सलाह दी। इसके बाद शनिवार को हरिओम साहू पशु चिकित्सालय पहुंचे। और जैसे ही पशु चिकित्सक डॉ. अनिल केवट को चार हजार रुपए रिश्वत देने लगे तभी मौके पर मौजूद लोकायुक्त पुलिस की टीम ने आरोपी पशु चिकित्सक को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर लिया।
राजस्थान में खसरा,खतौनी या नक्शा प्राप्त करने के लिए आपको तहसील के चक्कर लगाने की जरुरत नहीं है । आप घर बैठे ही ऑनलाइन जमाबंदी (खाता, खतौनी विवरण) की नकल प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए आपको इंटरनेट से कनेक्ट कंप्यूटर पर कुछ प्रक्रिया का पालन करना होगा ।
सबसे पहले आप अपने कंप्यूटर में गूगल सर्च इंजन में apnakhata टाइप करें और फिर इंटर की प्रेस कर दें। ऐसा करते ही आपके सामने apnakhata यूआरएल apnakhata.raj.nic.in के साथ खुल जाएगा। अब आप apnakhata पर क्लिक करें।

apnakhata पर क्लिक करते ही आपके सामने होम पेज खुल जाएगा । जिसमें राजस्थान का मैप दिखाई देगा। इस मैप में सभी जिलों का नक्शा बना हुआ होगा। जिसमें आप अपने जिले अलवर को सेलेक्ट करें।

जिला को सेलेक्ट करते ही आपके सामने सभी तहसीलों का नक्शा खुलकर सामने आ जाएगा। अब आप अपनी तहसील नीमराना को सेलेक्ट करें।

तहसील को सेलेक्ट करते ही जिला अलवर, तहसील नीमराना खुलकर आपके सामने आ जाएगा । यहां आप गत (पिछला) या चालू(वर्तमान) समय में किसी एक को सेलेक्ट कर सकते हैं । आप चाहें चालू(वर्तमान) को सेलेक्ट कर सकते हैं। इसके बाद आप अपने गांव को सेलेक्ट करें।

गांव को सेलेक्ट करते ही आपके सामने खाता/खसरे का चयन करें का ऑप्शन खुलकर आ जाएगा। यहां पर चार विकल्प विकल्प हैं।
इन विकल्पों में से आप किसी भी विकल्प को सेलेक्ट करके जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। हम यहां पर खाता से ऑप्शन को सेलेक्ट करेंगे। फिर खाता संख्या डालेंगे और चयन करें बटन पर क्लिक कर देंगे। इसके बाद दाहिनी तरफ भूमि के मालिक का विवरण दिखाई देने लगेगा।

यदि आप इसकी नकल लेना चाहते हैं तो आप नीचे दिए गे नकल प्राप्त करें बटन पर क्लिक करें।

नकल प्राप्त करें बटन पर क्लिक करते ही आपके सामने जमाबंदी (खेवट/खतौनी) की नकल खुलकर सामने आ जाएगी। जिसमें भूस्वामी और उसकी भूमि का पूरा विवरण होगा।
नोट- आपको बता दें कि ऑनलाइन प्राप्त की गयी यह कॉपी केवल सूचना के लिए होती है । आप इसको प्रमाण के रुप में कहीं प्रस्तुत नहीं कर सकते हैं। यदि आप प्रमाणिक कॉपी चाहते हैं तो आपको तहसील जाना होगा । वहां पटवारी को एक प्रार्थनापत्र देना होगा और सरकारी तौर पर निर्धारित फीस देनी होगी। इसके बाद आप जमाबंदी की प्रमाणिक कॉपी उपलब्ध करवा दी जाएगी। जिसे आप प्रमाण के रुप में कहीं भी प्रस्तुत कर सकते हैं।
छ्त्तीसगढ़ में खसरा,खतौनी या नक्शन प्राप्त करने के लिए आपको तहसील के चक्कर लगाने की जरुरत नहीं है । आप घर बैठे ही ऑनलाइन खसरा, खतौनी और नक्शा प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए आपको इंटरनेट से कनेक्ट कंप्यूटर पर कुछ प्रक्रिया का पालन करना होगा ।
इसके लिए सबसे पहले आप अपने कंप्यूटर स्क्रीन पर cgbhuiyan टाइप करें और फिर Enter Key क्लिक कर दें। Enter Key प्रेस करते ही आपके सामने भुइयां का (bhuiyan.cg.nic.in) पहला लिंक आएगा। इस लिंक पर आप क्लिक कर दें।

अब आपके सामने एक नया पेज खुल जाएगा। इस पेज के दायीं और नागरिक सुविधा के नीचे खसरा पांचसाला & खतौनी (B1) का संक्षिप्त विवरण देखें, पर क्लिक करें।

इसके बाद आपके सामने दूसरा नया पेज खुलकर सामने आ जायेगा। यहां पर खसरा पांचसाला & खतौनी (B1) का संक्षिप्त विवरण देखें, के नीचे दिए गए तीनों तरीकों में से किसी भी तरीके से आप विवरण प्राप्त कर सकते हैं।
यहां पर खसरा व विक्रेता वार को सेलेक्ट कर लीजिए।

खसरा व विक्रेता वार को सेलेक्ट करते ही आपके सामने तीसरा पेज खुलकर सामने आ जाएगा । यहां आप ग्राम चुनें या ग्राम क्रमांक दें में से किसी को भी सेलेक्ट कर सकते हैं, अब आप यहां पर ग्राम चुनें को सेलेक्ट करें। इसके बाद नीचे दिए गए
इन तीनों को सेलेक्ट करें। इसके बाद आपके सामने खसरा वार या नाम वार सेलेक्ट करने का आप्शन सामने आ जाएगा। यदि आपके पास खसरा नंबर है तो आप खसरा वार को सेलक्ट करें। अब आप चाहें तो खसरा क्रमांक प्रविष्ठ करें या फिर खसरा क्रमांक चुनें को सेलेक्ट कर सकते हैं। खसरा क्रमांक है तो खसरा क्रमांक चुनें ।

खसरा क्रमांक चुनने के बाद आपके सामने चौथा पेज खुल जाएगा । जिसमें भूस्वामी की खतौनी की संक्षिप्त जानकारी खुलकर सामने आ जाएगी ।

आप चाहें तो इस पेज के अंतिम में नीचे की ओर दिए गए ऑप्शन देखें पर क्लिक करके नक्शा और नामांतरण के पूर्व के भूस्वामी का विवरण भी देख सकते हैं ।

यदि आप खसरा डाउनलोड करना चाहते हैं तो दोबारा होम पेज पर जाएं और नागरिक सुविधा के नीचे दिए गए दूसरे ऑप्शन खसरा पंचसाला & खतौनी (B1) हेतु आवेदन पर क्लिक करें।

अब आपके सामने एक नया पेज खुलकर सामने आ जाएगा । यहां पर आप ग्राम चुनें को सेलेक्ट करें। और इसके बाद
इन तीनों को चुनें। इसके बाद खसरा वार को सेलेक्ट करें। फिर खसरा क्रमांक प्रविष्ठ करें या फिर खसरा क्रमांक चुनें में से खसरा क्रमांक चुनें को सेलेक्ट करें।

अब आपके सामने बी-I खतौनी रिपोर्ट या पी-II खसरा रिपोर्ट का ऑप्शन खुलकर आ जाएगा। आप दोनों में से किसी को भी सेलेक्ट करके डाउनलोड कर सकते हैं। अब आप बी-I खतौनी रिपोर्ट पर क्लिक कर दें।

इस पर क्लिक करने के बाद आपके सामने नाम, मोबाइल नंबर और ईमेल टाइप करने का ऑप्शन आ जाएगा। अब आप यहां पर अपना नाम लिखें और रिपोर्ट के बटन पर क्लिक कर दें।

रिपोर्ट बटन पर क्लिक करते ही B-I pdf फाइल डाउनलोड करें और P-II pdf फाइल डाउनलोड करें का ऑप्शन आ जाएगा।

अब आप एक-एक करके दोनों फाइलों को डाउनलोड कर सकते हैं। और इसे अपने कंप्यूटर में सेव (सुरक्षित) भी कर सकते हैं।


दतिया (मध्य प्रदेश)। राज्य सरकार द्वारा भ्रषटाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के दावों के बावजूद प्रदेश के भ्रष्ट अधिकारी बेईमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला दतिया जिले के जनपद पंचायत भांडेर का है, जहां लोकायुक्त पुलिस ने मनरेगा के संविदा उपयंत्री को 8 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया । संविदा उपयंत्री पर आरोप है कि उसने आंगनबाड़ी भवन बनने के बाद गुणवत्ता सर्टिफिकेट जारी करने के एवज में सरपंच के पति से रिश्वत मांगी थी।
आपको बता दें कि दतिया जिले की ग्राम पंचायत की सरपंच अंगूरी देवी के पति गंभीर सिंह ने 30 अप्रैल को लोकायुक्त ग्वालियर में शिकायत की थी। अपनी शिकायत में सरपंच पति ने कहा था कि जनपद पंचायत भांडेर में मनरेगा विभाग में संविदा पर पदस्थ उपयंत्री विजय तिवारी ने गांव में साढ़े चार लाख रुपए की लागत से निर्मित आंगनबाड़ी भवन का गुणवत्ता सर्टिफिकेट जारी करने के एवज में 8 हजार रुपए मांग की है। इसके बाद लोकायुक्त पुलिस ने उपयंत्री को रंगेहाथ पकड़ने के लिए जाल बिछाया और शिकायतकर्ता सरपंच पति को केमिकल युक्त 8 हजार रुपए दिए। लोकायुक्त पुलिस की तय योजना के अनुसार गुरुवार को जैसे ही सरपंच पति ने आरोपित उपयंत्री को रुपए दिए तभी मौके पर मौजूद लोकायुक्त टीम ने उसे रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। इसके बाद आरोपी विजय तिवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज कर लिया। और आगे की कार्यवाही शुरु कर दी।
चंबा (हिमाचल प्रदेश)। पुलिस कर्मियों से बदसलूकी करना अब लोगों को मंहगा पड़ सकता है। इसके लिए चंबा शहर की पुलिस तकनीकि का सहारा लेने जा रही है। पुलिस विभाग पुलिसकर्मियों की वर्दी में बॉडी वार्न कैमरे लगवा रही है। इसमें पुलिसकर्मी और जनता की हर गतिविधि रिकॉर्ड होगी। जिससे पुलिसकर्मी या जनता एक दूसरे पर बदसलूकी का झूठा आरोप नहीं लगा सकेंगे।
आपको बता दें कि पुलिसकर्मियों से आए दिन बदसलूकी और जनता के आरोपों से परेशान होकर चंबा शहर के पुलिस विभाग ने सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट के तहत कैमरों की खरीददारी की है । जीपीएस के जरिए वर्दी में लगे इन बॉडी वार्न कैमरों का कंट्रोल रुम पुलिस अधीक्षक के पास रहेगा। बॉडी वार्न कैमरे 4जी, वाईफाई और जीपीएस सुविधा से लैस होंगे। एक कैमरे की कीमत 12 से 25 हजार रुपये के बीच बतायी जा रही है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत 18 कैमरे ट्रैफिक पुलिस को दिए हैं। 31 दिन बाद कैमरे से वीडियो फुटेज स्वयं ही डिलीट हो जाएगी। इसलिए अब यदि कोई भी व्यक्ति पुलिसकर्मी से बदतमीजी करता है तो उसकी गतिविधि इस कैमरे में कैद हो जाएगी। इतना ही नहीं यदि पुलिसकर्मी भी जनता से गलत व्यवहार करता है तो उसकी गतिविधि भी इस कैमरे में कैद हो जाएगी। इसके जरिए पेट्रोलिंग और मौका-ए-वारदात पर भी रिकार्डिंग हो सकेगी। किसी केस की जांच में पूछताछ के दौरान रिकार्डिंग की सुविधा हो सकेगी। ट्रैफिक पुलिस कर्मचारी भी इसका इस्तेमाल करेंगे। धरने, प्रदर्शनों की समीक्षा तथा सबूत जुटाने में आसानी होगी। पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतें और आरोप कम होंगे। पुलिसकर्मियों से दुर्व्यवहार और हमलों के मामले में कमी आएगी। और इससे कानून व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।