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नोट-
उत्तर प्रदेश में जनहित गारंटी अधिनियम के तहत राजस्व विभाग में किसान बही बनाने के लिए 20 कार्य दिवस निर्धारित किया गया है।
रायपुर (छत्तीसगढ़)। पुलिस ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के दामाद डॉ. पुनीत गुप्ता के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी कर दिया है। सरकारी मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल डीकेएस के पूर्व अधीक्षक रहे डॉ. पुनीत गुप्ता गुप्ता के विदेश भागने की आशंका है। इसी बात को ध्यान में रखकर शुक्रवार दोपहर को सर्कुलर आइबी को भेजा गया है, ताकि देश भर के सभी एयरपोर्ट पर लुक आउट सर्कुलर चस्पा किया जा सके। डॉ. पुनीत गुप्ता पर डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में 50 करोड़ रुपए के उपकरण खरीद घोटाले में गोलबाजार थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज है। पुलिस लुक आउट सर्कुलर जारी करने से पहले डीकेएस अस्पताल गयी थी, जहां डॉ. पुनीत गुप्ता के डिजिटल लॉकर की जांच की, लेकिन लॉकर में कुछ नहीं मिला।
पुलिस के अनुसार डीकेएस अस्पताल घोटाले में डॉ. पुनीत गुप्ता को मुख्य आरोपी नामजद किया गया है। उन्हें पूछताछ के लिए तीन बार नोटिस जारी कर तलब किया था, लेकिन वे हाजिर नहीं हुए। बल्कि अपने वकील के माध्यम से उन्होंने स्वास्थ्य ठीक नहीं होने का हवाला देकर पुलिस से 20 दिन की मोहलत मांगी थी, लेकिन पुलिस ने राहत देने से इंकार करते हुए उन्हें पूछताछ में सहयोग करने के लिए कहा था। लेकिन उन्होंने कोई पहल नहीं की। उनकी तलाश में पुलिस टीम ने पिछले महीने न्यू राजेंद्र नगर मेन रोड स्थित उनके पिता के जीबीजी किडनी सेंटर और घर पर छापेमारी की थी, लेकिन वहां भी वे नहीं मिले। पिता डॉ.जीबी गुप्ता भी पुलिस के सामने नहीं आए। उनके कमरों से डीकेएस से जुड़े कई अहम दस्तावेज जब्त कर पुलिस लौट आई थी। पुलिस का दावा है कि डॉ. पुनीत अभी देश में ही हैं।
वहीं स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव का कहना है कि डीकेएस अस्पताल घोटाले से जुड़ी 50 करोड़ रुपए की फाइलें नहीं मिली हैं । उन्होंने बताया कि अस्पताल के लिए 49 करोड़ के उपकरण खरीद की अनुमति थी, पर 120 करोड़ की खरीदी की गई। डॉ. पुनीत पर दान में दिए भवन को 70 करोड़ में गिरवी रखने का भी आरोप है। पुलिस इसकी भी जांच कर रही है।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। चुनाव आयोग की अनुमति मिलने के बाद बाराबंकी पुलिस अधीक्षक डॉ. सतीश कुमार को 65 लाख रुपए की वसूली कांड मामले में निलंबित कर दिया गया है। उन्हें डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। और वसूली कांड में डॉ. सतीश की संलिप्तता की विस्तृत जांच के निर्देश भी दिए गए हैं। नए पुलिस अधीक्षक की तैनाती के लिए तीन नए नामों का पैनल चुनाव आयोग को भेजा गया है।
आपको बता दें कि बाराबंकी के हैदरगढ़ कोतवाली क्षेत्र निवासी सांवले शर्मा ने विश्वास ट्रेडिंग कंपनी के पदाधिकारी कोलकता निवासी कंपनी संचालक प्रेसनजी सरदार, शंकर गायन व धीरज श्रीवास्तव के खिलाफ 10 जनवरी 2019 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सांवले का आरोप था कि कंपनी ने शेयर बाजार में पैसा लगावाकर मोटे मुनाफे का लालच देकर लोगों से ठगी की। वहीं पदाधिकारी शंकर गायन का आरोप है कि उन्हें व उनके साथियों को फर्जी मामले में साक्ष्यों के बगैर 11 जनवरी को जेल भेज दिया गया था। इतना ही नहीं लखनऊ स्थित उनका ऑफिस भी सील कर दिया गया था। जमानत पर छूटने के बाद उन्होंने डीजीपी को पूरे मामले की जानकारी दी और साइबर क्राइम सेल के दारोगा अनूप कुमार यादव पर विश्वास ट्रेडिंग कंपनी को सीज करने की धमकी देकर पदाधिकारियों से 65 लाख रुपये वसूलने का आरोप लगाया।
इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने गोपनीय जांच एसटीएफ को सौंपी। एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश ने पहले सीओ और फिर अपर पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी से जांच कराई तो आरोपों को पहली नजर में सही पाया गया। एसटीएफ ने अपनी रिपोर्ट डीजीपी ओम प्रकाश सिंह को सौंपी और डीजीपी ने 1 अप्रैल को इसे शासन को भेज दिया। शासन ने जांच रिपोर्ट का अध्ययन किया तो पाया कि पूरे प्रकरण में पुलिस अधीक्षक बाराबंकी डॉ. सतीश कुमार की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता, जिसकी गहन जांच की आवश्यकता है। इस मामले में पुलिस अधीक्षक को दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया गया है। जबकि डीजीपी ओपी सिंह के निर्देश पर प्रकरण की गोपनीय जांच में पुष्टि के बाद आरोपित दारोगा को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। और वहीं आरोपियों को गिरफ्तार करने वाली टीम में शामिल पुलिसकर्मियों अमरेश कुमार, अनूप यादव, रितेश कुमार पांडेय और अंकित की भूमिका की जांच की जा रही है।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। परिवहन विभाग ने ड्राइविंग लाइसेंस की नई व्यवस्था शुरू की है । इसके तहत अब प्रदेश भर के आरटीओ कार्यालय से जारी होने वाले ड्राइविंग लाइसेंस परिवहन आयुक्त मुख्यालय लखनऊ से जारी किए जाएंगे। और मुख्यालय से ही ड्राइविंग लाइसेंस डाक के जरिए आवेदकों के घर भेजे जाएंगे। इसकी शुरुआत लखनऊ से हो गयी है।
नई व्यवस्था में अब आवेदक को स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। और इसके बाद प्रिंट आउट लेकर आरटीओ कार्यालय जाना होगा। यहां पर सबसे पहले दिए गए लाइसेंस के प्रपत्रों की जांच होगी। और फिर फोटो और हस्ताक्षर की औपचारिकता पूरी की जाएगी । प्रपत्रों में किसी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए कैमरों से निगरानी की जा रही है। इसके लिए शुक्रवार को ही आरटीओ कार्यालय में कैमरे लगा दिए गए हैं। इसके बाद परिवहन कर्मचारी आवेदक की परीक्षा लेंगे। आवेदकों को दो टेस्ट से गुजरना होगा। पहला टेस्ट कम्प्यूटर पर 15 प्रश्नों का होगा। इसके बाद दूसरे टेस्ट में ट्रायल होगा। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद सारथी-4 के जरिए मुख्यालय में सभी जानकारी पहुंच जाएगी। इसके बाद अनुमोदन मिलने पर ड्राइविंग लाइसेंस मुख्यालय में प्रिंट हो जाएगा और दस दिन के भीतर आवेदक के घर पर पहुंचेगा। गौरतलब है कि लाइसेंस आवेदकों को अब आवेदन पत्र के साथ 22 रुपये का रजिस्टर्ड लिफाफा लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। परिवहन विभाग ने ड्राइविंग लाइसेंस की नई व्यवस्था शुरू की है । इसके तहत अब प्रदेश भर के आरटीओ कार्यालय से जारी होने वाले ड्राइविंग लाइसेंस परिवहन आयुक्त मुख्यालय लखनऊ से जारी किए जाएंगे। और मुख्यालय से ही ड्राइविंग लाइसेंस डाक के जरिए आवेदकों के घर भेजे जाएंगे। इसकी शुरुआत लखनऊ से हो गयी है।
नई व्यवस्था में अब आवेदक को स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। और इसके बाद प्रिंट आउट लेकर आरटीओ कार्यालय जाना होगा। यहां पर सबसे पहले दिए गए लाइसेंस के प्रपत्रों की जांच होगी। और फिर फोटो और हस्ताक्षर की औपचारिकता पूरी की जाएगी । प्रपत्रों में किसी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए कैमरों से निगरानी की जा रही है। इसके लिए शुक्रवार को ही आरटीओ कार्यालय में कैमरे लगा दिए गए हैं। इसके बाद परिवहन कर्मचारी आवेदक की परीक्षा लेंगे। आवेदकों को दो टेस्ट से गुजरना होगा। पहला टेस्ट कम्प्यूटर पर 15 प्रश्नों का होगा। इसके बाद दूसरे टेस्ट में ट्रायल होगा। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद सारथी-4 के जरिए मुख्यालय में सभी जानकारी पहुंच जाएगी। इसके बाद अनुमोदन मिलने पर ड्राइविंग लाइसेंस मुख्यालय में प्रिंट हो जाएगा और दस दिन के भीतर आवेदक के घर पर पहुंचेगा। गौरतलब है कि लाइसेंस आवेदकों को अब आवेदन पत्र के साथ 22 रुपये का रजिस्टर्ड लिफाफा लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
नई दिल्ली । तीस हजारी अदालत ने पुलिस हिरासत में युवक की मौत के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस के पांच पुलिसकर्मियों को 10 साल कारावास की सजा सुनाई है। जबकि अदालत ने एक अन्य दोषी को 3 साल की सजा सुनाई है। और साथ ही इन सभी दोषियों पर लाखों का जुर्माना भी ठोका है।
आपको बता दें कि यह मामला साल 2006 का है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर यह केस दिल्ली की तीस हजारी अदालत में चल रहा था। मृतक सोनू के पिता दलबीर सिंह के मुताबिक बुलदंशहर के खुर्जा के सिकरी का निवासी प्रॉपर्टी डीलर कुंवर पाल पांच लोगों के साथ 2 सितंबर 2006 को खुर्जा में गांव हजरतपुर स्थित उनके घर पहुंचा। और प्रॉपर्टी डीलर का काम करने वाले उसके बेटे सोनू को कोई जमीन दिखाने के लिए साथ ले गया। और फिर मोबाइल लूट में संदिग्ध मानकर कुंवरपाल और उसके साथी पुलिसकर्मियों ने सोनू को नोएडा की कोतवाली सेक्टर 20 की निठारी चौकी में लाकर बेरहमी से पीटा। जिससे उसकी मौत हो गयी । इसके बाद एसओजी टीम के इन पुलिसकर्मियों ने सोनू को लॉकअप में फांसी से लटका दिया। और थाने के रोजनामचा में दर्ज कर दिया कि सोनू ने आत्महत्या कर ली। मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, उसके शरीर के कई हिस्सों पर चोट के निशान थे। पिता का कहना है कि कुंवर पाल का सोनू के साथ पैसों की लेनदेन को लेकर विवाद था।
सोनू के पिता मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले गए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले की दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। जब जांच की गयी तो मामले का खुलासा हुआ। अदालत ने अपने आदेश में अवैध हिरासत और गैर इरादतन हत्या सहित विभिन्न धाराओं में सब इंस्पेक्टर हिंदवीर सिंह, महेश मिश्रा और सिपाही प्रदीप, पुष्पेंद्र, हरिपाल को दस-दस साल की सजा सुनाई और उन पर 35-35 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि हिंदवीर सिंह और महेश मिश्रा पांच-पांच लाख रुपये बतौर मुआवजा मृतक के पिता को देंगे, जबकि अन्य तीन दोषी दो-दो लाख रुपये मुआवजा देंगे। इसके अलावा वारदात में बिचौलिये कुंवर पाल को तीन साल कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई। साथ ही एक लाख रुपये बतौर मुआवजा देने का आदेश दिया गया। गौरतलब है कि साल 2006 में इस घटना की चर्चा पूरे प्रदेश में थी।
ऊना (हिमाचल प्रदेश) । मैहतपुर कस्बे में विजिलेंस की टीम ने आरटीओ को दस लाख रुपए की रिश्वत देते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया है । आरटीओ रिश्वतखोरी के आरोप में हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत पर था। और वह अपने खिलाफ जारी रिश्वतखोरी के आरोप की जांच को रफा दफा करने के लिए विजिलेंस की टीम को रिश्वत देने जा रहा था। अब विजिलेंस की टीम आरटीओ को ऊना की अदालत में पेश करेगी ।
गौरतलब है कि ऊना के आरटीओ कार्यालय में अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे नालागढ़ के आरटीओ ओमप्रकाश पुरी के कार्यालय में रिश्वत लेते हुए 28 फरवरी को पांच वीडियो वायरल हुए थे। वहीं विजिलेंस विभाग ने बिना शिकायत मिले अपने स्तर पर इस मामले में मामला दर्ज करके कार्रवाई शुरु कर दी थी। इन वीडियोज में जो लोग दिखाई दे रहे थे, विजिलेंस ने उन सभी को थाने में तलब किया। छह लोगों से पूछताछ हुई। इनमें चार एजेंट और दो आरटीओ दफ्तर के कर्मचारी थे। जब विजिलेंस की टीम ने इस मामले की गहन जांच पड़ताल शुरु की तो आरटीओ ओमप्रकाश पुरी भूमिगत हो गए । और हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत ले ली। विजिलेंस टीम ने जब ऊना के बाद नालागढ़ में जाकर इस अधिकारी की जांच को आगे बढ़ाया तो कई तरह के अहम खुलासे हुए। उसके बाद टीम ने आरटीओ की आय से अधिक संपत्ति के मामले की भी जांच भी शुरु कर दी। इस जांच से घबड़ाए ओम प्रकाश पुरी ने अपने खिलाफ दर्ज मामले की जांच को हल्का करने तथा उसके विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति का मामला की जांच न करने के लिए विजिलेंस टीम को रिश्वत 10 लाख रुपए रिश्वत देने की पेशकश की। जिसके बाद ओमप्रकाश को रिश्वत देते हुए रंगेहाथ पकड़ने के लिए विजिलेंस के एडिशनल एसपी सागर चंद ने 10 लाख रुपए रिश्वत लेने पर सहमति जता दी। मंगलवार को मैहतपुर में सुबह दस लाख रुपए देना तय हुआ। मैहतपुर प्रवेश द्वार पर ही स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में जैसे ही ओमप्रकाश कार में पहुंचा और विजिलेंस ऊना की टीम को दस लाख रुपए दिए, वैसे ही टीम ने ओम प्रकाश पुरी को भ्रष्टाचार रोधक एक्ट की धारा 8 और 12 के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। ऊना के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सागर चंद्र शर्मा का कहना है कि अब आरोपी आरटीओ को ऊना की अदालत में पेश किया जाएगा ।
रायपुर (छत्तीसगढ़) पुलिस ने पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के दामाद पर 50 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता के आरोप में शुक्रवार को केस दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि रमन सिंह के दामाद पुनीत गुप्ता पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी डीकेएस अस्पताल के अधीक्षक पद पर रहते हुए 50 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता की है। अब इस मामले की जांच की जा रही है।
इस अस्पताल में वित्तीय अनियमितता के बारे में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर का कहना है कि डीकेएस अस्पताल के अधीक्षक कमल किशोर सहारे की शिकायत के आधार पर पुनीत गुप्ता के खिलाफ ठगी और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। कमल किशोर सहारे ने अपनी शिकायत में कहा है कि पुनीत गुप्ता ने अपने कार्यकाल के दौरान 50 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता की है। वहीं इस अनियमितता के मामले में रायपुर के एसएसपी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच समिति का गठन किया गया था। जांच समिति ने मामले की रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी। जिसके बाद रिपोर्ट हमें मिली है। शुक्रवार को इस मामले में पुनीत गुप्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। और पूरे मामले की जांच चल रही है।
नई दिल्ली । दिल्ली में अब बदमाशों से पत्रकार भी सुरक्षित नहीं हैं। ताजा मामला दक्षिणी दिल्ली के न्यू फ्रैंड्स कालोनी थाना के पास का है, जहां 15.03.2019 को करीब 10.30 बजे शाम को टीवी पत्रकार वीरेंद्र प्रसाद द्विवेदी सड़क के किनारे अपने परिजनों से मोबाइल पर बात कर रहे तभी अचानक पीछे से दो बाइक सवार बदमाशों ने झपट्टा मारा और मोबााइल फोन छीनकर फरार हो गए।
इस घटना से परेशान टीवी पत्रकार जब न्यू फ्रैंड्स कालोनी के थाने पर पहुंचे और पुलिसकर्मियों से अपनी आप बीती बतायी तो उसके बाद उनके साथ दो पुलिसकर्मी घटना स्थल पर आए और मुआयना करके वापस चले गए। टीवी पत्रकार ने जब पुलिकर्मियों से मोबाइल छीननेी की एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा तो पुलिसकर्मी आनाकानी करने लगे । उनका कहना था कि यदि आप छिनैती की एफआईआर दर्ज कराएंगे तो आपको बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। हालांकि टीवी पत्रकार की जिद के चलते पुलिसवाले छिनैती की एफआईआर दर्ज करने के लिए तैयार हो गए, लेकिन इंटरनेट के सर्वर के ठीक से काम न करने का हवाला देकर पुलिसकर्मियों ने एफआईआर को टाल दिया और कल आने की सलाह दी । जब टीवी पत्रकार ने तुरंत एफआईआर दर्ज करने की जिद की तो पुलिसकर्मियों ने अपने सीनियर अधिकारी से बात करने के लिए सलाह दी । टीवी पत्रकार जब सब इंस्पेक्टर के केबिन में पहुंचे तो वहां पर मौजूद सब इंस्पेक्टर ने समझाया और भरोसा दिलाया कि वह चोरी की एफआईआर दर्ज करवा दें, उन्हें उनका मोबाइल खोजने में मदद की जाएगी । ऐसी दशा में टीवी पत्रकार को मजबूरन चोरी की एफआईआर के लिए सहमत होना पड़ा । अब पुलिकर्मियों द्वारा 16.03.2019 की सुबह को एफआईआर की कॉपी लेने के लिए थाने पर बुलाया है।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के प्रमुख सचिव रहे आईएएस अधिकारी नेतराम और उनके करीबियों के ठिकानों पर छापेमारी में अब तक 225 करोड़ रुपये की संपत्तियों का खुलासा हुआ है। इनमें लखनऊ, दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में प्रॉपर्टी, कई कंपनियों के दस्तावेज, बेनामी लग्जरी कारें और 50 लाख रुपये का मो ब्ला पेन जैसी संपत्तियां शामिल हैं। इसके अलावा करोड़ों की अघोषित संपत्तियों के दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। नेतराम बसपा से लोक सभा का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे।
इनकम टैक्स विभाग की टीमों ने सोमवार सुबह एक साथ दिल्ली, मुंबई और कोलकाता से लेकर लखनऊ तक के उनके दर्जन भर ठिकानों पर छापेमारी की। बताया जा रहा है कि आयकर विभाग द्वारा मुंबई की एक कंपनी पर हुई कार्रवाई के दौरान नेतराम से तार जुड़ने पर यह कार्रवाई की गयी। नेतराम के अमीनाबाद स्थित मशहूर कपड़ा शोरूम गाढ़ा भंडार के मालिक विष्णु वल्लभ रस्तोगी समेत अन्य कारोबारियों से गहरे ताल्लुकात मिले हैं। आयकर विभाग ने नेतराम के लखनऊ के चारबाग स्टेशन रोड के निकट चिंटल हाउस और गोमती नगर के विशाल खंड तीन में 3/175 पर छापा मारा, जहां से 18 लाख रुपए नगद मिले। आयकर विभाग के सूत्रों के अनुसार, नेतराम ने 95 करोड़ रुपये की फर्जी शेयर कैपिटल के जरिये छह प्रॉपर्टी खरीदी, जिनमें से एक दिल्ली की लुटियंस जोन में केजी मार्ग और दूसरी दक्षिण दिल्ली के पॉश इलाके जीके-1 में स्थित है। जीके-1 स्थित मकान से 86 लाख रुपये और उनसे जुड़े एक व्यक्ति से 60 लाख रुपये नकद मिले हैं। इसके अलावा 50 लाख रुपये एक लॉकर में रखे होने की सूचना भी मिली है। उनकी एक संपत्ति मुंबई और तीन कोलकाता में हैं। इसके अलावा 225 करोड़ रुपये की अतिरिक्त प्रॉपर्टी से संबंधित दस्तावेज भी मिले हैं। लखनऊ के विपुलखण्ड के एसबीआई शाखा में नेतराम के दो और उनके परिवार की सदस्य पूनम के एकाउंट सीज किए गए हैं।
इतना ही नहीं नेतराम की 30 मुखौटा कंपनियां थीं, जिसमें उनके करीबी रिश्तेदार शेयरधारक और निदेशक थे। उन्होंने अपने रिश्तेदारों को इन कंपनियों के शेयर उपहार में दिए थे। उनके बच्चे इन कंपनियों के बैंक खातों का परिचालन करते थे। नेतराम ने इन कंपनियों के माध्यम से कोलकाता के हवाला ऑपरेटरों के माध्यम से 95 करोड़ रुपये की एंट्री भी ली थीं। कालेधन को सफेद करने के बाद इसी राशि से बाद में प्रॉपर्टी खरीदीं। इसके अलावा कई हाथ से लिखी हुईं डायरियां मिली हैं, जिनमें लिखा है कि किस तरह मुखौटा कंपनियां खरीदी गईं और प्रॉपर्टी में निवेश किया गया। छापेमारी के दौरान नेतराम के ठिकानों से चार बेनामी लग्जरी कारें मिली हैं, जिनमें एक मर्सिडीज और दो फार्चूनर भी शामिल हैं। इसके अलावा 50 लाख रुपये कीमत का मोंट ब्लांक पैन भी मिला है। हालांकि टैक्स चोरी के मामले में फंसे नेतराम पर अभी और शिकंजा कसा जा सकता है। इनकम टैक्स की तफ्तीश के बाद कई अन्य केंद्रीय जांच एजेंसी भी कार्रवाई कर सकती हैं।
रायपुर (छत्तीसगढ़) । पुलिसकर्मियों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। पुलिस महानिदेशक डी. एम. अवस्थी ने प्रदेश के सभी पुलिसकर्मियों को हर हफ्ते एक दिन छुट्टी देने का एलान किया है। पुलिसकर्मियों को अभी तक करीब 40 से 45 दिनों की वार्षिक विशेष छुट्टी मिलती थी, लेकिन इस फैसले के बाद अब सिपाही से लेकर निरीक्षक स्तर तक के पुलिसकर्मी काम के तनाव से मुक्ति पा सकेंगे।
पुलिस महानिदेशक की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि सिपाही से लेकर निरीक्षक स्तर तक के सभी पुलिसकर्मियों को हर हफ्ते एक दिन की छुट्टी मिलेगी। हालांकि आपातकालीन स्थितियों में वीवीआईपी मूवमेंट के मामले में अगर साप्ताहिक अवकाश नहीं दिए जाते हैं तो पुलिसकर्मियों को उसी महीने बाद में लंबित छुट्टी मिल जाएगी। आदेश के मुताबिक, नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात पुलिसकर्मियों को तीन महीने के अंतराल पर सामूहिक रूप से आठ दिनों की छुट्टी दी जाएगी। सुरक्षा कारणों से साप्ताहिक अवकाश को रद्द भी किया जा सकता है और इस पर निर्णय लेने का अधिकार पूरी तरह से इकाई प्रमुख को होगा। आदेश के अनुसार, साप्ताहिक अवकाश को रद्द करने की आधिकारिक अनुमति पुलिस अधीक्षक, कमांडेंट की होगी और इसकी औपचारिक सूचना रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) और पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) को भेजने की जरूरत है। इसी तरह के नियम छत्तीसगढ़ सशस्त्र बलों (सीएएफ) के कर्मियों के लिए भी लागू होंगे। सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि साप्ताहिक अवकाश को अन्य छुट्टियों के साथ नहीं जोड़ा जा सकता है और न तो इसे आगे बढ़ाया जाएगा, न ही इसके बदले भुगतान किया जाएगा।
दरअसल पुलिसकर्मी का काम काफी तनावपूर्ण होता है। इसके बावजूद अभी तक इन्हें हफ्ते में एक भी छुट्टी नहीं मिलती है। पुलिसकर्मी केवल अपने सीनियरों से पूछकर छुट्टी ले सकते हैं, यह उनका हक नहीं है। छुट्टी नहीं मिलने की भरपाई उन्हें एक्सट्रा एक महीने की सैलरी देकर की जाती है। एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी का कहना है कि ब्रिटिश शासन के समय बने पुलिस एक्ट (1861) का अभी तक पालन हो रहा है। इसके मुताबिक सभी पुलिसकर्मी हफ्ते के हर दिन चौबीस घंटे ड्यूटी पर रहेंगे। इसके लिए निरीक्षक, उप निरीक्षक , हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल को एक महीने की सैलरी अतिरिक्त देने का प्रावधान किया गया है।
रायपुर (छत्तीसगढ़) । पुलिसकर्मियों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। पुलिस महानिदेशक डी. एम. अवस्थी ने प्रदेश के सभी पुलिसकर्मियों को हर हफ्ते एक दिन छुट्टी देने का एलान किया है। पुलिसकर्मियों को अभी तक करीब 40 से 45 दिनों की वार्षिक विशेष छुट्टी मिलती थी, लेकिन इस फैसले के बाद अब सिपाही से लेकर निरीक्षक स्तर तक के पुलिसकर्मी काम के तनाव से मुक्ति पा सकेंगे।
पुलिस महानिदेशक की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि सिपाही से लेकर निरीक्षक स्तर तक के सभी पुलिसकर्मियों को हर हफ्ते एक दिन की छुट्टी मिलेगी। हालांकि आपातकालीन स्थितियों में वीवीआईपी मूवमेंट के मामले में अगर साप्ताहिक अवकाश नहीं दिए जाते हैं तो पुलिसकर्मियों को उसी महीने बाद में लंबित छुट्टी मिल जाएगी। आदेश के मुताबिक, नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात पुलिसकर्मियों को तीन महीने के अंतराल पर सामूहिक रूप से आठ दिनों की छुट्टी दी जाएगी। सुरक्षा कारणों से साप्ताहिक अवकाश को रद्द भी किया जा सकता है और इस पर निर्णय लेने का अधिकार पूरी तरह से इकाई प्रमुख को होगा। आदेश के अनुसार, साप्ताहिक अवकाश को रद्द करने की आधिकारिक अनुमति पुलिस अधीक्षक, कमांडेंट की होगी और इसकी औपचारिक सूचना रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) और पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) को भेजने की जरूरत है। इसी तरह के नियम छत्तीसगढ़ सशस्त्र बलों (सीएएफ) के कर्मियों के लिए भी लागू होंगे। सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि साप्ताहिक अवकाश को अन्य छुट्टियों के साथ नहीं जोड़ा जा सकता है और न तो इसे आगे बढ़ाया जाएगा, न ही इसके बदले भुगतान किया जाएगा।
दरअसल पुलिसकर्मी का काम काफी तनावपूर्ण होता है। इसके बावजूद अभी तक इन्हें हफ्ते में एक भी छुट्टी नहीं मिलती है। पुलिसकर्मी केवल अपने सीनियरों से पूछकर छुट्टी ले सकते हैं, यह उनका हक नहीं है। छुट्टी नहीं मिलने की भरपाई उन्हें एक्सट्रा एक महीने की सैलरी देकर की जाती है। एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी का कहना है कि ब्रिटिश शासन के समय बने पुलिस एक्ट (1861) का अभी तक पालन हो रहा है। इसके मुताबिक सभी पुलिसकर्मी हफ्ते के हर दिन चौबीस घंटे ड्यूटी पर रहेंगे। इसके लिए निरीक्षक, उप निरीक्षक , हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल को एक महीने की सैलरी अतिरिक्त देने का प्रावधान किया गया है।
भिवानी (हरियाणा) । बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। अब उन्हें बिजली के बिल का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम एक नई पहल की है । अब मीटर रीडर उपभोक्ता के पास एक प्रिंटर लेकर आएगा । उस प्रिंटर की सहायता से वह उसी समय उपभोक्ता को तुरंत बिल दे देगा।
बिजली बिल वितरण को लेकर उपभोक्ताओं को अधिक से अधिक सुविधाएं देने के लिए निजी कंपनी ने यह नई पहल की है। अब बिल जनरेट होने के बाद उपभोक्ता को बिल जमा कराने के लिए कम से कम 10 दिन का समय दिया जाएगा। और साथ ही बिल जमा कराने के लिए अंतिम तारीख भी अलग-अलग होंगी। कंपनी इसके लिए 15 मार्च से ट्रायल शुरू कर देगी। नई पहल के तहत अब नए बिल में कितनी मीटर रीडिंग होंगी इसका मैसेज भी दिया जाएगा। यह मैसेज मीटर रीडिंग लेते ही उसी समय उपभोक्ता के मोबाइल पर आ जाएगा। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम ने निजी कंपनी को बिल वितरण और मीटर रीडिंग लेने की जिम्मेदारी सौंपी है। सबसे पहले इसे शहरी क्षेत्र से ही शुरू किया जाएगा। इसके बाद इसे ग्रामीण क्षेत्रों में यह सुविधा सुलभ कराई जाएगी। अब देखना है कि उपभोक्ताओं को इस पहल से कितना लाभ मिलता है।
भिवानी (हरियाणा) । बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। अब उन्हें बिजली के बिल का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम एक नई पहल की है । अब मीटर रीडर उपभोक्ता के पास एक प्रिंटर लेकर आएगा । उस प्रिंटर की सहायता से वह उसी समय उपभोक्ता को तुरंत बिल दे देगा।
बिजली बिल वितरण को लेकर उपभोक्ताओं को अधिक से अधिक सुविधाएं देने के लिए निजी कंपनी ने यह नई पहल की है। अब बिल जनरेट होने के बाद उपभोक्ता को बिल जमा कराने के लिए कम से कम 10 दिन का समय दिया जाएगा। और साथ ही बिल जमा कराने के लिए अंतिम तारीख भी अलग-अलग होंगी। कंपनी इसके लिए 15 मार्च से ट्रायल शुरू कर देगी। नई पहल के तहत अब नए बिल में कितनी मीटर रीडिंग होंगी इसका मैसेज भी दिया जाएगा। यह मैसेज मीटर रीडिंग लेते ही उसी समय उपभोक्ता के मोबाइल पर आ जाएगा। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम ने निजी कंपनी को बिल वितरण और मीटर रीडिंग लेने की जिम्मेदारी सौंपी है। सबसे पहले इसे शहरी क्षेत्र से ही शुरू किया जाएगा। इसके बाद इसे ग्रामीण क्षेत्रों में यह सुविधा सुलभ कराई जाएगी। अब देखना है कि उपभोक्ताओं को इस पहल से कितना लाभ मिलता है।
पटना (बिहार)। शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में सरकार ने राज्यकर्मियों को शानदार तोहफा देने का एलान किया। सरकार ने एक सितंबर 2005 के बाद सरकारी सेवा आने वाले कर्माचारियों को विशेष पारिवारिक पेंशन योजना देने की घोषणा की। इसमें आतंकवाद, उग्रवाद, हिंसक घटनाओं और चुनावी कार्य के दौरान मृत्यु होने पर सरकारी सेवकों के परिवारों को 10 लाख रुपये देने का प्रावधान रखा गया है।
मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने बताया कि वित्त विभाग के तहत एक सितंबर, 2005 या उसके बाद नियुक्त सरकारी सेवकों को नई पेंशन योजना का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि कार्य करने के दौरान उग्रवादी अथवा अन्य हिंसक गतिविधियों में मौत होने पर उनके परिजनों को विशेष पारिवारिक पेंशन की सुविधा के तहत 10 लाख रुपये दिए जाने का प्रावधान रखा गया है।
पटना (बिहार)। शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में सरकार ने राज्यकर्मियों को शानदार तोहफा देने का एलान किया। सरकार ने एक सितंबर 2005 के बाद सरकारी सेवा आने वाले कर्माचारियों को विशेष पारिवारिक पेंशन योजना देने की घोषणा की। इसमें आतंकवाद, उग्रवाद, हिंसक घटनाओं और चुनावी कार्य के दौरान मृत्यु होने पर सरकारी सेवकों के परिवारों को 10 लाख रुपये देने का प्रावधान रखा गया है।
मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने बताया कि वित्त विभाग के तहत एक सितंबर, 2005 या उसके बाद नियुक्त सरकारी सेवकों को नई पेंशन योजना का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि कार्य करने के दौरान उग्रवादी अथवा अन्य हिंसक गतिविधियों में मौत होने पर उनके परिजनों को विशेष पारिवारिक पेंशन की सुविधा के तहत 10 लाख रुपये दिए जाने का प्रावधान रखा गया है।
नई दिल्ली । दिल्ली में बढ़ती हुई दुर्घटनाओं को देखते हुए दिल्ली सरकार ने ड्राइविंग की एक स्वचालित और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था शुरु की है। बुधवार को परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने मयूर विहार के स्वचालित परीक्षा केंद्र में पहुंचकर रिमोट के जरिए अऩ्य केंद्रों की शुरुआत की। और झंडी दिखाकर परीक्षा के लिए आवेदकों को परीक्षा ट्रैक पर भेजा, जहां सीसीटीवी ने उनकी परीक्षा ली। जिसमें आवेदक के फेल या पास की जानकारी तुरंत मिल गयी।
दरअसल दिल्ली में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को लेकर दिल्ली सरकार काफी चिंतित है। इसलिए दुर्घटनाओं में कमी लाने और लाइसेंस बनवाने में पारदर्शिता लाने के लिए पहली बार दिल्ली में स्वचालित परीक्षा केंद्रों की शुरुआत की गयी है । इसमें ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अब ड्राइविंग की परीक्षा परिवहन विभाग के अधिकारियों को नहीं, बल्कि सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में देना पड़ेगा । परीक्षा देने के बाद सीसीटीवी कैमरा आवेदक को पास और फेल के बारे में तुरंत बता देगा। इस परीक्षा में रिवर्स, यातायात जंक्शन, ओवर टेकिंग समेत कई चीजों को देखा जाएगा। यदि कोई आवेदक अपनी ड्राइविंग परीक्षा का वीडियो देखना चाहता है तो उसे कंट्रोल रूम में लगे स्क्रीन पर देख सकता है। ये केंद्र मयूर विहार फेज-1, विश्वास नगर, सराय काले खां और शकूरबस्ती में बनाए गए हैं। इतना ही नहीं लाइसेंस की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। आपको लाइन में लगने की कोई जरुरत नहीं है । प्रतिदन 300 आवेदकों की परीक्षा होगी, यदि आवेदक ज्यादा हुई तो संख्या बढ़ाई भी सकती है। गहलोत ने भरोसा दिलाया है कि जल्दी ही इसी तरह के आठ अन्य केंद्र भी खोल जाएंगे। उन्होंने कहा यदि कोई आवेदक परीक्षा में फेल हो जाता है तो वह घबराए नहीं उसे कुछ दिन बाद दोबारा सीसीटीवी की निगरानी में परीक्षा देने का मौका मिलेगा।
नई दिल्ली । दिल्ली में बढ़ती हुई दुर्घटनाओं को देखते हुए दिल्ली सरकार ने ड्राइविंग की एक स्वचालित और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था शुरु की है। बुधवार को परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने मयूर विहार के स्वचालित परीक्षा केंद्र में पहुंचकर रिमोट के जरिए अऩ्य केंद्रों की शुरुआत की। और झंडी दिखाकर परीक्षा के लिए आवेदकों को परीक्षा ट्रैक पर भेजा, जहां सीसीटीवी ने उनकी परीक्षा ली। जिसमें आवेदक के फेल या पास की जानकारी तुरंत मिल गयी।
दरअसल दिल्ली में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को लेकर दिल्ली सरकार काफी चिंतित है। इसलिए दुर्घटनाओं में कमी लाने और लाइसेंस बनवाने में पारदर्शिता लाने के लिए पहली बार दिल्ली में स्वचालित परीक्षा केंद्रों की शुरुआत की गयी है । इसमें ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अब ड्राइविंग की परीक्षा परिवहन विभाग के अधिकारियों को नहीं, बल्कि सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में देना पड़ेगा । परीक्षा देने के बाद सीसीटीवी कैमरा आवेदक को पास और फेल के बारे में तुरंत बता देगा। इस परीक्षा में रिवर्स, यातायात जंक्शन, ओवर टेकिंग समेत कई चीजों को देखा जाएगा। यदि कोई आवेदक अपनी ड्राइविंग परीक्षा का वीडियो देखना चाहता है तो उसे कंट्रोल रूम में लगे स्क्रीन पर देख सकता है। ये केंद्र मयूर विहार फेज-1, विश्वास नगर, सराय काले खां और शकूरबस्ती में बनाए गए हैं। इतना ही नहीं लाइसेंस की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। आपको लाइन में लगने की कोई जरुरत नहीं है । प्रतिदन 300 आवेदकों की परीक्षा होगी, यदि आवेदक ज्यादा हुई तो संख्या बढ़ाई भी सकती है। गहलोत ने भरोसा दिलाया है कि जल्दी ही इसी तरह के आठ अन्य केंद्र भी खोल जाएंगे। उन्होंने कहा यदि कोई आवेदक परीक्षा में फेल हो जाता है तो वह घबराए नहीं उसे कुछ दिन बाद दोबारा सीसीटीवी की निगरानी में परीक्षा देने का मौका मिलेगा।
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) । प्रशासन की कारगुजारियां अक्सर आप पढ़ते ही रहते हैं, लेकिन बिलासपुर जिला प्रशासन का एक हैरान कर देने वाला कारनामा सामने आया है। जिला प्रशासन के कर्माचारियों ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक की विधानसभा क्षेत्र के तिरैया गांव के गरीबों का नाम ही गायब कर दिया। जिसके चलते यहां के गरीब केंद्र व राज्य शासन की योजनाओं के लाभ से वंचित हो गए हैं। और सरकार भी प्रशासन की इस लापरवाही पर आंखें मूंदे हुए है।
छत्तीसगढ़ में बिल्हा ब्लॉक के 2 हजार 560 की आबादी वाले तिरैया गांव में वर्ष 2011 में केंद्र सरकार के निर्देश पर आर्थिक जनगणना का कार्य किया गया था। जिला प्रशासन ने इस गांव में जनगणना कार्य के लिए शिक्षकों और पटवारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। इन कर्मचारियों ने जनगणना तो किया पर डेटा उपडेशन में जमकर लापरवाही बरती। नतीजा यह हुआ कि केंद्र सरकार के पास इस गांव के गरीबों की सूची ही नहीं पहुंची। और केंद्र सरकार की सूची में तिरैया के गरीबों का नाम ही दर्ज नहीं हुआ। इसकी वजह से इस गांव के 1500 गरीब केंद्र और राज्य सरकार की सभी योजनाओं से वंचित हो गए। वहीं झोपड़ी में रहने वाले गरीब भी इन योजनाओं का लाभ नहीं उठा सके ।
वहीं इस मामले के तूल पकड़ने के बाद बिलासपुर के कलेक्टर डॉक्टर संजय अलंग ने कहा कि ग्रामीणों का नाम सर्वे सूची में नही होना गंभीर बात है। सर्वे के दौरान किन-किन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी, इसकी जानकारी मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सारण (बिहार)। मनरेगा में भ्रष्टाचार को लेकर आए दिन मामले सामने आते ही रहते हैं। ताजा मामला बिहार के सारण के इसुआपुर बाजार में आया है, जहां निगरानी टीम ने मनरेगा के कार्यक्रम पदाधिकारी (पीओ) को प्रखंड प्रमुख के पति से रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। टीम ने आरोपी पदाधिकारी को गिरफ्तार करने के बाद पटना की विशेष कोर्ट में पेश किया।
निगरानी टीम के इंस्पेक्टर संजीव कुमार का कहना है कि मशरक प्रखंड के मनरेगा भवन में प्रमुख सरोज कुमारी और उनके पति अजय कुमार राय ने 28 फरवरी को शिकायत की थी। जिसमें कहा गया था कि कार्यक्रम पदाधिकारी एजाज अहसन मनरेगा योजना को एमआइएस पर लोड करने के लिए एक लाख रिश्वत मांग रहे हैं। इसके बाद निगरानी टीम ने रिश्वतखोर अधिकारी को रंगेहाथ पकड़ने के लिए जाल बिछाया और टीम शुक्रवार सुबह 8 बजे उस स्थान पर पहुंच गयी, जहां लेन देन की बात तय हुई थी। तय योजना के मुताबिक एजाज हसन जैसे ही प्रमुख पति अजय राय से रिश्वत की रकम लेने इसुआपुर लालदास मठिया पहुंचे। अजय राय ने अपनी गाड़ी में एजाज अहसन को बैठा लिया और तय की गई रकम एक लाख रुपये उनके हाथ में दे दिया। इसी दौरान डीएसपी गोपाल पासवान के नेतृत्व में नजदीक ही मौजूद निगरानी टीम कार पर धावा बोल दिया और मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी एजाज एहसन को रंगेहाथ पकड़ लिया।