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मधुबनी (बिहार)। एससी-एसटी एक्ट के तहत बेगुनाह लोगों को जेल में बंद करने के मामलों के बारे में आपने बहुत सुना होगा। मधुबनी में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां अदालत ने एक बेगुनाह व्यक्ति को एससी-एसटी एक्ट एवं महिला से दुर्व्यवहार मामले में जेल में बंद करने के कारण थानेदार पर दो लाख रुपए का जुर्माना ठोक दिया। रुद्रपुर थाना के थानाध्यक्ष किशोर कुणाल झा को इस जुर्माने की राशि को हर माह अपने वेतन से भरनी पड़ेगी। इतना ही नहीं, उसे विभागीय कार्यवाही का भी सामना करना पड़ेगा।
गौरतलब है कि रुद्रपुर थाना क्षेत्र के बटसर सिसौनी निवासी अशोक सिंह को थानेदार ने एससी-एसटी एक्ट एवं महिला से दुर्व्यवहार मामले में एक झूठे मुकदमे में जेल में बंद कर दिया गया था। जब अशोक सिंह के अधिवक्ता ने न्यायालय में जमानत के लिए अर्जी दाखिल की तो पता चला कि 90 दिन के बाद भी अशोक सिंह के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट दायर नहीं किया। न्यायालय ने जब कार्यालय से रिपोर्ट मांगी तब पता चला कि एससी-एसटी एक्ट एवं महिला से दुर्व्यवहार मामले में जेल में बंद अशोक सिंह बेगुनाह है। उसे अनावश्यक जेल में बंद रखा गया है। इस खुलासे के बाद एससी-एसटी एक्ट के विशेष जज एडीजे इशरतुल्लाह ने रुद्रपुर थानाध्यक्ष किशोर कुणाल झा को फटकार लगाई और वेतन से दो लाख रुपये वसूल करने का आदेश पारित किया। अदालत ने इस आदेश से पुलिस अधीक्षक को अवगत कराने को भी कहा था। अदालत के आदेश के अनुपालन में पुलिस अधीक्षक ने थानाध्यक्ष किशोर कुणाल झा के वेतन से प्रतिमाह 10 हजार रुपये वसूल करने का आदेश जारी कर दिया है। जब तक दो लाख रुपये की जुर्माना राशि वसूल नहीं हो जाती है, तब तक प्रतिमाह दस हजार रुपये थानेदार किशोर कुणाल झा के वेतन से कटौती होती रहेगी। पुलिस अधीक्षक दीपक बरनवाल के अनुसार थानाध्यक्ष किशोर कुणाल झा के वेतन से प्रतिमाह दस हजार रुपये की दर से जुर्माना राशि वसूल करने का आदेश जारी कर दिया गया है। इसके अलावा इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही भी चलाई जाएगी। उम्मीद है कि पुलिसकर्मी आगे से ऐसी हरकत को अंजाम नहीं देंगे और अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाएंगे।
बक्सर (बिहार)। सरकार द्वारा मांग न मानने पर आत्महत्या कर लेने की धमकी भरे पत्रों के बारे में आपने पढ़ा और सुना होगा, लेकिन बक्सर में एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया है, जहां छुट्टी नहीं मिलने से परेशान एक बैंक प्रबंधक ने पत्नी की हत्या करने के नाम पर छुट्टी का आवेदन अपने अधिकारियों, मानवाधिकार आयोग, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भेज दिया। जैसे ही इस बात की जानकारी शीर्ष बैंक पदाधिकारियों को मिली, उन्होंने उक्त प्रबंधक की छुट्टी को तुरंत स्वीकार कर लिया।
आपको बता दें कि बिहार में बक्सर जिले के रहने वाले मुन्ना प्रसाद बिहार ग्रामीण बैंक की बकसड़ा शाखा में मैनेजर हैं। उनका कहना है कि उनकी पत्नी किडनी रोग से ग्रसित है। जिसका उन्हें सप्ताह में दो बार डायलिसिस कराना पड़ता है। लेकिन बैंक में अकेले कर्मी होने की वजह से उन्हें अपनी पत्नी का इलाज कराने के लिए छुट्टी नहीं मिल पा रही है। उनका आरोप है कि छुट्टी के लिए जब वह क्षेत्रीय बैंक अधिकारियों को फोन करते हैं तो उनका फोन रिसीव नहीं किया जाता है। हालांकि बार-बार मुख्य कार्यालय को छुट्टी के लिए आवेदन देने पर किसी महिला पदाधिकारी का फोन आया था। महिला पदाधिकारी ने कहा था कि छुट्टी नहीं मिलेगी। जब उनसे बहुत आग्रह किया तो उन्होंने झल्लाकर कहा कि सिर्फ दाह संस्कार के लिए ही छुट्टी दी जा सकती है। जिसके बाद अवसाद में आकर उसने प्रधान कार्यालय पटना को इस आशय का पत्र लिखते हुए इसकी प्रति राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और प्रधानमंत्री को भेज दिया।
इस पत्र में मुन्ना प्रसाद ने लिखा कि "मुझे अपनी बीमार पत्नी की हत्या कर उसका अंतिम संस्कार करने के लिए दो दिनों की विशेष छुट्टी दी जाए। मैं रोज-रोज घुटकर इस तरह से काम नहीं कर सकता हूं"। मुन्ना प्रसाद के इस पत्र की खबर लगते ही शीर्ष पदाधिकारियों में खलबली मच गई। और फिर आनन-फानन में मुन्ना प्रसाद को तत्काल छुट्टी दे दी गई। वहीं इस संबंध में ग्रामीण बैंक के अधिकारियों का कहना है कि एकल शाखा होने के कारण यहां कार्यरत कर्मी को छुट्टी देने से पहले दूसरे कर्मचारी को वहां विकल्प में देना होता है, जिससे शाखा का काम प्रभावित नहीं हो।
बेगूसराय (बिहार)। सुशासन बाबू की सरकार में पुलिस कानून व्यवस्था को छोड़कर शराब तस्करी में उतर आयी है। बेगूसराय में पुलिस अधीक्षक ने अपने ही महकमे के पांच जवानों को अवैध शराब की खेप के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए पुलिसकर्मियों में दो सैप के जवान तथा तीन होमगार्ड के जवान शामिल हैं।
पुलिस अधीक्षक अवकाश कुमार को सूचना मिली थी कि मुफस्सिल थाना के पुलिस बैरक में पुलिस जवान ने पीने के लिए शराब छुपाकर रखा है। इस सूचना के आधार पर एसपी ने पुलिस बैरक में छापेमारी की। छापेमारी में तीन कार्टन शराब बरामद हुआ। इसके अलावा पुलिस ने बाइक पर सवार दो सिपाहियों को दो कार्टन शराब लाते हुए हनुमानगढ़ी से गिरफ्तार कर लिया। इनमें सैप जवान रविंद्र कुमार, राजदेव सिंह, होमगार्ड के जवान सुरेंद्र कुंवर, प्रमोद कुमार सिंह तथा दीपक कुमार सिंह शामिल हैं। पांचों पुलिसकर्मी मुफस्सिल थाना में ही पदस्थापित थे। एसपी ने बताया कि उक्त पांचों आरोपी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध उत्पाद अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जा रहा है। एसपी ने कहा कि शराब के मामले में वह किसी को बख्शने वाले नहीं हैं।
गौरतलब है कि चार दिन पहले मुफ्फसिल थाना की पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर हनुमानगढ़ी गांव स्थित सरकारी स्कूल से पंजाब से लाई गई रॉयल स्टैग ब्रांड की 414 कार्टन अवैध विदेशी शराब से भरा एक ट्रक पकड़ा था। मुफस्सिल थाना अध्यक्ष राजबिंदु प्रसाद के अनुसार जिस समय शराब जब्त की गई थी, उसी समय उक्त पांचों पुलिसकर्मियों ने वरिष्ठ पदाधिकारियों की आंखों में धूल झोंक कर पांच कार्टन शराब गायब कर वहीं झाडिय़ों में छुपा कर रख दिया था। जिसे बाद में एक-एक करके थाना परिसर स्थित अपने पुलिस बैरक में लाए थे। वहीं थाने के कुछ पुलिसकर्मियों ने बताया कि पकड़े गए सैप एवं होमगार्ड के जवान इसी प्रकार से छापेमारी के दौरान शराब बरामदगी के क्रम में शराब की पेटियों की चोरी कर छिपाकर रखते थे। और बाद में उन शराब की बोतलों को ऊंची कीमत पर बेचकर काली कमाई करते थे।
वाहन के कागजी दस्तावेज से आजादी
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आप अपने दस्तावेजों को इस एप के जरिए आसानी से अपने स्मार्टफोन या अन्य डिजिटल उपकरण पर दिखा सकते हैं।
इन डिजिटल दस्तावेजों को पहचान या पते के प्रमाण के तौर पर अन्य विभागों के साथ भी साझा किया जा सकता है।
जयपुर (राजस्थान)। कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार ने लड़कियों को सरकारी कालेजों में नि:शु्ल्क शिक्षा उपलब्ध कराने की नीति का एलान कर दिया है। अब सरकारी कॉलेजों में लड़कियों से विकास शुल्क और लाइब्रेरी शुल्क आदि जैसे शुल्कों के नाम पर फीस नहीं ली जाएगी। हालांकि कालेजों में शिक्षा शुल्क पहले से ही नहीं लिया जा रहा है।
राज्य के उच्च शिक्षा राज्यमंत्री भंवर सिंह भाटी का कहना है कि सरकार ने लड़कियों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान करने के लिए 252 सरकारी कॉलेजों को चिन्हित कर लिया है। उन्होंने बताया कि अगले चरण में इसे राज्य के विश्वविद्यालयों में भी लागू कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि प्रदेश में 8वीं कक्षा तक की बालिकाओं को नि:शुल्क शिक्षा दी जाती है, लेकिन कक्षा 9वीं में पहुंचते ही उनसे शिक्षा शुल्क को छोड़कर विकास शुल्क, लाइब्रेरी शुल्क और साइकिल स्टैंड आदि के नाम पर फीस की वसूली की जाती है। इसके चलते कई गरीब परिवारों की बालिकाएं 9वीं के बाद अपनी पढ़ाई को जारी नहीं रख पाती हैं।
जयपुर (राजस्थान)। कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार ने लड़कियों को सरकारी कालेजों में नि:शु्ल्क शिक्षा उपलब्ध कराने की नीति का एलान कर दिया है। अब सरकारी कॉलेजों में लड़कियों से विकास शुल्क और लाइब्रेरी शुल्क आदि जैसे शुल्कों के नाम पर फीस नहीं ली जाएगी। हालांकि कालेजों में शिक्षा शुल्क पहले से ही नहीं लिया जा रहा है।
राज्य के उच्च शिक्षा राज्यमंत्री भंवर सिंह भाटी का कहना है कि सरकार ने लड़कियों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान करने के लिए 252 सरकारी कॉलेजों को चिन्हित कर लिया है। उन्होंने बताया कि अगले चरण में इसे राज्य के विश्वविद्यालयों में भी लागू कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि प्रदेश में 8वीं कक्षा तक की बालिकाओं को नि:शुल्क शिक्षा दी जाती है, लेकिन कक्षा 9वीं में पहुंचते ही उनसे शिक्षा शुल्क को छोड़कर विकास शुल्क, लाइब्रेरी शुल्क और साइकिल स्टैंड आदि के नाम पर फीस की वसूली की जाती है। इसके चलते कई गरीब परिवारों की बालिकाएं 9वीं के बाद अपनी पढ़ाई को जारी नहीं रख पाती हैं।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश) । मध्य प्रदेश में फर्जी डिग्री एवं मार्कशीट के जरिए पटवारी की नौकरी प्राप्त करने वाले 12 आरोपियों पर 10-10 हजार रुपए का ईनाम घोषित हुआ है। फर्जीवाड़ा करने वाले सभी आरोपी मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिले के निवासी हैं।
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित डॉक्टर भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में फर्जी डिग्री और मार्कशीट के बहुत बड़े मामले का खुलासा हुआ था। जिसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर एसआईटी ने वर्ष 2014 में मामले की जांच शुरू की थी। जांच में सामने आया था कि बीएड परीक्षा सत्र 2005 में भारी अनियमितता हुई थी। इस पर एसआइटी ने धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी। एसआइटी के अधिकारियों के मुताबिक जांच में सामने आया था कि मध्य प्रदेश के अशोकनगर निवासी रानू सिंह रघुवंशी, परमाल सिंह रघुवंशी, भूपेंद्र सिंह, देवेन्द्र सिंह रघुवंशी, सत्येंद्र सिंह रघुवंशी, शिवकुमार रघुवंशी, विनोद सोनी, शशि काले, अभिलाषा काले, रामकुमार, श्वेता श्रीवास्तव व अनिल यादव को भी आरोपित बनाया गया है। शशि व अभिलाषा बहनें हैं। इस जांच में बताया गया कि आरोपितों ने विवि की बीसीए व पीजीडीसीए की फर्जी मार्कशीट व डिग्री के जरिये मध्य प्रदेश में वर्ष 2008 में पटवारी की ट्रेनिंग कर ली थी। एसआइटी की रिपोर्ट पर मध्य प्रदेश पुलिस ने इंदौर व खरगौन में कुछ आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की थी, लेकिन अशोकनगर के आरोपितों के खिलाफ अब तक कार्रवाई नहीं हो सकी थी। एसआइटी ने पूर्व में आरोपितों के खिलाफ कोर्ट से कुर्की का आदेश भी हासिल किया था। आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जांच एजेंसी ने मध्य प्रदेश पुलिस से संपर्क भी साधा था। डीजीपी मध्य प्रदेश को इस बाबत पत्र भी लिखा गया था।
एसआइटी की जांच में सामने आया था कि आगरा के डॉ.भीमराव अंबेडकर विवि के बीएड सत्र 2005 की अंकतालिका में 3517 फर्जी छात्रों का समावेश करते हुए उन्हें अंक प्रदान किए गए थे। वे अभ्यर्थी किसी भी महाविद्यालय के छात्र नहीं थे। जबकि 1053 छात्रों को अंक वृद्धि की हुई मार्कशीट प्रदान की गई। इस तरह कुल 4570 छात्रों को फर्जी अंक तालिकाएं वितरित की गईं। जांच में अन्य कोर्स की फर्जी मार्कशीट व डिग्री बनाये जाने की बात भी सामने आई थी। जांच एजेंसी ने 4570 फर्जी छात्रों की सूची भी विवि को भेजी थी। मामले में एसआइटी ने पूर्व में उत्तर प्रदेश में विवि के चार कर्मचारियों सहित छह आरोपितों को गिरफ्तार किया था। प्रकरण में एसआइटी विवि के कुछ अन्य कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। अब देखना यह होगा कि आरोपितों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। खनन घोटाले के मामले में सीबीआई की एफआईआर के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आइएएस अधिकारी बी चंद्रकला और सपा एमएलसी रमेश मिश्रा समेत 11 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह एफआईआर प्रवर्तन निदेशालय ने धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत दर्ज की गयी है। प्रवर्तन निदेशालय अब तत्कालीन खनन मंत्री रहे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव व गायत्री प्रजापति के 2012-2016 के दौरान उनकी भूमिका की जांच करेगा।
सीबीआइ की भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत दर्ज एफआईआर में कई नाम शामिल हैं। इनमें आइएएस अधिकारी बी. चंद्रकला, खनिक आदिल खान, भूवैज्ञानिक/खनन अधिकारी मोइनुद्दीन, समाजवादी पार्टी के नेता रमेश कुमार मिश्रा, उनके भाई दिनेश कुमार मिश्रा, राम आश्रय प्रजापति, हमीरपुर के खनन विभाग के पूर्व क्लर्क संजय दीक्षित, उनके पिता सत्यदेव दीक्षित और रामअवतार सिंह के नाम शामिल हैं। इनमें से आरोपी संजय दीक्षित ने 2017 विधानसभा चुनाव बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर लड़ा था।
गौरतलब है कि 2012 से जून 2013 तक खनन विभाग का अतरिक्त प्रभार अखिलेश यादव के पास ही था। प्रवर्तन निदेशालय ने सभी आरोपियों को नोटिस भेजा है। आपको बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय की यह कार्रवाई समाजवादी पार्टी के शासन के दौरान बुंदेलखंड क्षेत्र के हमीपुर, बांदा आदि जिलों में हुए खनन घोटाले के सिलसिले में की गई है। आईएएस बी. चंद्रकला पर आरोप है कि उन्होंने जुलाई 2012 के बाद समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं को हमीरपुर में मौरंग के खनन के 60 पट्टे अवैध रूप से आवंटित किए थे। इस आवंटन में उन्होंने ई-टेंडर के जरिये पट्टा स्वीकृत करने के नियमों की अनदेखी की थी। जिसके बाद वर्ष 2015 में अवैध रूप से जारी मौरंग खनन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने 16 अक्तूबर 2015 को हमीरपुर में जारी मौरंग खनन के सभी 60 पट्टे अवैध घोषित करते हुए रद्द कर दिए। हाईकोर्ट ने 28 जुलाई 2016 को इस मामले की जांच सीबीआई से कराने का निर्देश दिया था।
रायपुर (छत्तीसगढ़)। राजनीतिक पार्टियों द्वारा ईवीएम में छेड़छाड़ को लेकर जताई जा रही आशंका को देखते हुए छत्तीसगढ़ निर्वाचन आयोग ने एक ऐसा मोबाइल एप्लीकेशन (एप) तैयार किया है, जिसके जरिए मतदान के लिए जाने वाले निर्वाचन अधिकारियों को बड़ी आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा।
दरअसल नेताओं द्वारा चुनाव से पहले आरोप लगाया जाता रहा है कि मतदान से ठीक पहले चुनाव अधिकारी ईवीएम के साथ नेताओं के घरों या उनके होटल में ठहरते हैं। जिससे ईवीएम में हेराफेरी की आशंका बनी रहती है। इस शिकायत को दूर करने और चुनाव प्रक्रिया भेदभाव रहित बनाने के लिए छत्तीसगढ़ निर्वाचन आयोग ने इस एप को तैयार किया। इस साल होने वाले आम चुनाव से पहले राज्यों के चुनाव अधिकारियों की बैठक में इस एप को दिखाया गया। बैठक में मध्य प्रदेश निर्वाचन आयोग ने इस एप की विस्तृत जानकारी दी। बैठक में मौजूद मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा कि चुनाव आयोग देश में निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है। अब मतदान से पहले या बाद में चुनाव अधिकारी की लोकेशन इस एप के जरिये ट्रैक की जा सकेगी, जिससे ईवीएम को लेकर किसी प्रकार की शिकायत नहीं रहेगी।
रायपुर (छत्तीसगढ़)। राजनीतिक पार्टियों द्वारा ईवीएम में छेड़छाड़ को लेकर जताई जा रही आशंका को देखते हुए छत्तीसगढ़ निर्वाचन आयोग ने एक ऐसा मोबाइल एप्लीकेशन (एप) तैयार किया है, जिसके जरिए मतदान के लिए जाने वाले निर्वाचन अधिकारियों को बड़ी आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा।
दरअसल नेताओं द्वारा चुनाव से पहले आरोप लगाया जाता रहा है कि मतदान से ठीक पहले चुनाव अधिकारी ईवीएम के साथ नेताओं के घरों या उनके होटल में ठहरते हैं। जिससे ईवीएम में हेराफेरी की आशंका बनी रहती है। इस शिकायत को दूर करने और चुनाव प्रक्रिया भेदभाव रहित बनाने के लिए छत्तीसगढ़ निर्वाचन आयोग ने इस एप को तैयार किया। इस साल होने वाले आम चुनाव से पहले राज्यों के चुनाव अधिकारियों की बैठक में इस एप को दिखाया गया। बैठक में मध्य प्रदेश निर्वाचन आयोग ने इस एप की विस्तृत जानकारी दी। बैठक में मौजूद मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा कि चुनाव आयोग देश में निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है। अब मतदान से पहले या बाद में चुनाव अधिकारी की लोकेशन इस एप के जरिये ट्रैक की जा सकेगी, जिससे ईवीएम को लेकर किसी प्रकार की शिकायत नहीं रहेगी।
नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने मतदाताओं के लिए एक नई सुविधा की शुरुआत की है। आयोग ने आगामी चुनाव से पहले 'वोटर हेल्पलाइन' मोबाइल एप्लीकेशन लांच किया है। जिसे प्लेस्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। इस एप्लीकेशन की खास बात यह है कि इसके जरिये मतदाता एक ही स्थान से निर्वाचन आयोग की वेबसाइट, स्वीप, एनवीएसपी, मतदाता सर्च एवं एनजीएसपी (शिकायत पोर्टल) का इस्तेमाल कर सकते हैं।
निर्वाचन आयोग ने अपनी वेबसाइट www.nvsp.in पर मतदाताओं की सुविधा के लिए वोटर सर्च (Voter Search) का विकल्प भी उपलब्ध करा दिया है। इसके माध्यम से मतदाता अपनी डिटेल्स सर्च कर सकते हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुब्रत साहू ने बताया कि लोकसभा चुनाव के पूर्व आयोग दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष एप्लीकेशन भी लांच करने जा रहा है। लोकसभा चुनाव के लिए मतदाता अपना नाम आयोग से सीधे ऑनलाइन जुड़वा सकते हैं। साहू ने बताया कि मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम पूरे प्रदेश में जारी है, जो 25 जनवरी तक चलेगा। बूथ स्तर पर मतदाता सूची पुनरीक्षण, बूथ लेवल ऑफिसरों (बीएलओ) द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा आयोग की वेबसाइट www.nvsp.in से मतदाता अपना नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए आवेदन कर सकते हैं। वे मतदाता सूची में अपनी भाग संख्या और सरल क्रमांक भी जान सकते हैं। आयोग के मुताबिक, ऑनलाइन माध्यम अधिक आसान, विश्वसनीय तथा त्रुटिरहित है। मतदाता को कहीं बाहर जाने की भी आवश्यकता नहीं है। मतदाता इसमें नाम जुड़वाने के साथ ही विधानसभा क्षेत्र में बदलाव, एक ही विधानसभा क्षेत्र में बूथ के बदलाव तथा मतदाता सूची में दी गई जानकारी में सुधार का भी आवेदन कर सकते हैं। वेबसाइट में नाम जुड़वाने तथा विधानसभा क्षेत्र में स्थानांतरण के लिए फार्म नंबर-6, नाम हटवाने के लिए फार्म नंबर-7, मतदाता सूची में किसी अन्य सुधार के लिए फार्म नंबर-8 तथा एक ही विधानसभा क्षेत्र में मतदान केंद्र बदले जाने के लिए फार्म नंबर-8A भरा जा सकेगा। इस प्रकार मतदाताओं को अब घर बैठे सभी सुविधाएं प्राप्त कर सकेंगे।
नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने मतदाताओं के लिए एक नई सुविधा की शुरुआत की है। आयोग ने आगामी चुनाव से पहले 'वोटर हेल्पलाइन' मोबाइल एप्लीकेशन लांच किया है। जिसे प्लेस्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। इस एप्लीकेशन की खास बात यह है कि इसके जरिये मतदाता एक ही स्थान से निर्वाचन आयोग की वेबसाइट, स्वीप, एनवीएसपी, मतदाता सर्च एवं एनजीएसपी (शिकायत पोर्टल) का इस्तेमाल कर सकते हैं।
निर्वाचन आयोग ने अपनी वेबसाइट www.nvsp.in पर मतदाताओं की सुविधा के लिए वोटर सर्च (Voter Search) का विकल्प भी उपलब्ध करा दिया है। इसके माध्यम से मतदाता अपनी डिटेल्स सर्च कर सकते हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुब्रत साहू ने बताया कि लोकसभा चुनाव के पूर्व आयोग दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष एप्लीकेशन भी लांच करने जा रहा है। लोकसभा चुनाव के लिए मतदाता अपना नाम आयोग से सीधे ऑनलाइन जुड़वा सकते हैं। साहू ने बताया कि मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम पूरे प्रदेश में जारी है, जो 25 जनवरी तक चलेगा। बूथ स्तर पर मतदाता सूची पुनरीक्षण, बूथ लेवल ऑफिसरों (बीएलओ) द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा आयोग की वेबसाइट www.nvsp.in से मतदाता अपना नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए आवेदन कर सकते हैं। वे मतदाता सूची में अपनी भाग संख्या और सरल क्रमांक भी जान सकते हैं। आयोग के मुताबिक, ऑनलाइन माध्यम अधिक आसान, विश्वसनीय तथा त्रुटिरहित है। मतदाता को कहीं बाहर जाने की भी आवश्यकता नहीं है। मतदाता इसमें नाम जुड़वाने के साथ ही विधानसभा क्षेत्र में बदलाव, एक ही विधानसभा क्षेत्र में बूथ के बदलाव तथा मतदाता सूची में दी गई जानकारी में सुधार का भी आवेदन कर सकते हैं। वेबसाइट में नाम जुड़वाने तथा विधानसभा क्षेत्र में स्थानांतरण के लिए फार्म नंबर-6, नाम हटवाने के लिए फार्म नंबर-7, मतदाता सूची में किसी अन्य सुधार के लिए फार्म नंबर-8 तथा एक ही विधानसभा क्षेत्र में मतदान केंद्र बदले जाने के लिए फार्म नंबर-8A भरा जा सकेगा। इस प्रकार मतदाताओं को अब घर बैठे सभी सुविधाएं प्राप्त कर सकेंगे।
रायपुर (उत्तर प्रदेश)। नई कांग्रेस सरकार आने के साथ ही गांवों की सरकारों के काम करने के तौर तरीकों में अमूलचूक परिवर्तन होने जा रहा है। इसकी प्रशासनिक स्तर पर तैयारी कर ली गयी है। इसके तहत अब सभी विकासखंडों में विशेष ग्राम सभाएं लगेंगी। जिसमें ग्राम सभा के बैठकों की फोटोग्राफी की जाएगी। रायपुर के जिलाधिकारी डॉक्टर बसवराजु एस का कहना है कि विशेष ग्राम सभा आयोजन 23 जनवरी से किया जाएगा। गांवों के विकास कार्यों के क्रियांवयन को ध्यान में रखते हुए इस बार प्लानिंग की गई है। इसके लिए प्रशासन की ओर से गाइड लाइन भी जारी कर दी गई है।
इस विशेष ग्राम सभा की बैठक से पहले भी ग्राम सभा की बैठकें होती रही हैं। लेकिन इसमें ज्यादातर बैठकें सिर्फ कागजों पर ही दिखा दी जाती थी। अब ग्राम सभा के बैठकों की बकाएदा फोटोग्राफी होगी। इस बैठक में ग्रामीणों की मौजूदगी में राजस्व सहित अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहेंगे। सभी ग्रामीण आपसी सहमति से अपने गांव के विकास का खाका भी खीचेंगे। सरपंच और अधिकारी विकास के खाके को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान करेंगे। इसके साथ ही गांवों के सभी विवादास्पद मामले भी निपटाए जाएंगे। विशेष ग्राम सभाओं के अलावा सामान्य दिनों में ग्राम सभा की बैठकों में नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। बैठक के होने के पुख्ता सबूत होंगे। ग्रामीण अपने सरपंच के साथ ही प्रत्येक निर्माण कार्यों की समीक्षा भी करेंगे। इसमें किसी भी प्रकार की खामी पाए जाने की आशंका से इंजीनियरों और अधिकारियों से जांच कराएंगे।
विशेष ग्राम सभा की बैठक में पहले आयोजित किए गई बैठक में पारित संकल्पों और कार्यों के क्रियान्वयन संबंधी पालन प्रतिवेदन का प्रस्तुत किया जाएगा। पंचायत के तिमाही के आय-व्यय की समीक्षा के साथ ही चालू वित्तीय वर्ष में विभिन्न योजनाओं से स्वीकृत कार्य के नाम, प्राप्त राशि, स्वीकृत राशि, व्यय राशि एवं कार्य की अद्यतन स्थिति का वाचन किया जाएगा। छत्तीसगढ़ ग्राम पंचायत (बजट अनुमान) नियम 1997 अंतर्गत ग्राम पंचायत के बजट अनुमान के प्रारूप पर विचार और अनुमोदन और विभिन्न कार्यक्रमों के तहत ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने के लिए घरों में निर्मित व निर्माणाधीन शौचालय की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी जाएंगी।
रायपुर (उत्तर प्रदेश)। नई कांग्रेस सरकार आने के साथ ही गांवों की सरकारों के काम करने के तौर तरीकों में अमूलचूक परिवर्तन होने जा रहा है। इसकी प्रशासनिक स्तर पर तैयारी कर ली गयी है। इसके तहत अब सभी विकासखंडों में विशेष ग्राम सभाएं लगेंगी। जिसमें ग्राम सभा के बैठकों की फोटोग्राफी की जाएगी। रायपुर के जिलाधिकारी डॉक्टर बसवराजु एस का कहना है कि विशेष ग्राम सभा आयोजन 23 जनवरी से किया जाएगा। गांवों के विकास कार्यों के क्रियांवयन को ध्यान में रखते हुए इस बार प्लानिंग की गई है। इसके लिए प्रशासन की ओर से गाइड लाइन भी जारी कर दी गई है।
इस विशेष ग्राम सभा की बैठक से पहले भी ग्राम सभा की बैठकें होती रही हैं। लेकिन इसमें ज्यादातर बैठकें सिर्फ कागजों पर ही दिखा दी जाती थी। अब ग्राम सभा के बैठकों की बकाएदा फोटोग्राफी होगी। इस बैठक में ग्रामीणों की मौजूदगी में राजस्व सहित अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहेंगे। सभी ग्रामीण आपसी सहमति से अपने गांव के विकास का खाका भी खीचेंगे। सरपंच और अधिकारी विकास के खाके को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान करेंगे। इसके साथ ही गांवों के सभी विवादास्पद मामले भी निपटाए जाएंगे। विशेष ग्राम सभाओं के अलावा सामान्य दिनों में ग्राम सभा की बैठकों में नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। बैठक के होने के पुख्ता सबूत होंगे। ग्रामीण अपने सरपंच के साथ ही प्रत्येक निर्माण कार्यों की समीक्षा भी करेंगे। इसमें किसी भी प्रकार की खामी पाए जाने की आशंका से इंजीनियरों और अधिकारियों से जांच कराएंगे।
विशेष ग्राम सभा की बैठक में पहले आयोजित किए गई बैठक में पारित संकल्पों और कार्यों के क्रियान्वयन संबंधी पालन प्रतिवेदन का प्रस्तुत किया जाएगा। पंचायत के तिमाही के आय-व्यय की समीक्षा के साथ ही चालू वित्तीय वर्ष में विभिन्न योजनाओं से स्वीकृत कार्य के नाम, प्राप्त राशि, स्वीकृत राशि, व्यय राशि एवं कार्य की अद्यतन स्थिति का वाचन किया जाएगा। छत्तीसगढ़ ग्राम पंचायत (बजट अनुमान) नियम 1997 अंतर्गत ग्राम पंचायत के बजट अनुमान के प्रारूप पर विचार और अनुमोदन और विभिन्न कार्यक्रमों के तहत ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने के लिए घरों में निर्मित व निर्माणाधीन शौचालय की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी जाएंगी।
नई दिल्ली। राज्यसभा ने सामान्य वर्ग के गरीब वर्गों को सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थाओं में 10 फीसद आरक्षण पर 07 के मुकाबले 165 मतों से मुहर लगा दी है। लोकसभा में 03 मतों के मुकाबले 323 मतों से बिल पारित के होने के बाद राज्यसभा ने भी बुधवार को सामान्य वर्ग के गरीबों के आरक्षण संबंधी 124वें संविधान संशोधन विधेयक को पारित कर दिया। यह संशोधन संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 के तहत किया गया है और इसीलिए इसे राज्यों की विधानसभा से पारित कराने की जरूरत नहीं होगी। अब केवल राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद 10 फीसद आरक्षण की यह व्यवस्था लागू हो जाएगी।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सरकारी नौकरियों एवं शिक्षण संस्थाओं में 10 फीसदी आरक्षण देने के प्रावधान वाले संविधान संशोधन विधेयक पर राज्यसभा में जोरदार बहस हुई थी। सत्ता पक्ष और विपक्ष ने तर्कों के जरिए अपनी बात सदन के सामने रखा था। राज्यसभा ने आरक्षण संबंधी संविधान संबंधी इस बिल को पारित करने से पहले इसे सिलेक्ट कमिटी में भेजने की द्रमुक सांसद कनीमोरी के प्रस्ताव को भी 18 के मुकाबले 155 मतों से खारिज कर दिया। राज्यसभा में 10 घंटे तक बिल पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए सामाजिक न्याय मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि सामान्य वर्ग के गरीबी लोगों को इसके जरिए सरकारी नौकरियों और शिक्षण में संस्थानों आरक्षण का लाभ मिलेगा। बिल को ऐतिहासिक बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की इसको लेकर यह गंभीरता ही रही कि संविधान संशोधन के जरिये आरक्षण का यह प्रावधान किया जा रहा है। इसीलिए उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट भी संविधान संशोधन की इस प्रक्रिया को मान्य करेगा। आर्थिक रुप से कमजोर तबकों का ख्याल रखने की पंडित जवाहर लाल नेहरू की संविधान सभा में कही गई बात का आनंद शर्मा की ओर से किए गए उल्लेख का जवाब देते हुए गहलोत ने कहा कि यह भारत की परंपरा रही है। अगड़ी जाति के हमारे नेताओं ने दलित-आदिवासी और पिछड़ों को आरक्षण दिया। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पिछड़े समुदाय से होने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगड़ी जाति के गरीबों के लिए आरक्षण किया है।
कांग्रेस की ओर से आनंद शर्मा ने चर्चा की शुरुआत करते हुए सवर्ण गरीबों को आरक्षण देने के बिल का समर्थन किया। हालांकि सरकार की अंतिम बेला में बिल लाने की पहल को पांच राज्यों के चुनाव में हार के बाद सरकार का अचानक लिया गया फैसला बताया। उन्होंने कहा कि 2014 में सब्जबाग दिखाते हुए तमाम वादे किए गए थे मगर इसमें कोई पूरा नहीं हुआ और पांच राज्यों के चुनाव में जनता ने इन्हें रास्ता दिखा दिया। इसी घबराहट में सत्ता से बाहर होने के डिपारचर लाउंज में खड़ी सरकार ने यह कदम उठाया है। शर्मा ने कहा कि कांग्रेस बिल का समर्थन इसलिए कर रही कि पार्टी ने भी अपने चुनाव घोषणापत्र में इसका वादा किया था। बिल में आरक्षण के लिए शर्तो की चर्चा करते हुए शर्मा ने कहा कि 8 लाख रुपये तक की आय और 5 एकड़ जमीन के साथ जो मानक तय किए हैं उसमें करीब 98 फीसद आबादी आएगी। इसका अर्थ यह होगा कि इतनी आबादी को 10 फीसद कोटे में ही संघर्ष करना होगा।
सपा के रामगोपाल यादव ने सवर्ण गरीबों के आरक्षण का समर्थन करते हुए मांग उठाई कि ओबीसी का आरक्षण उसकी जनसंख्या के हिसाब से बढ़ाते हुए 54 फीसद किया जाना चाहिए। उन्होंने मुसलमानों के लिए भी इसी आधार पर आरक्षण की मांग उठाई।
बसपा के सतीश चंद्र मिश्र ने अगड़ी जाति के गरीबों के आरक्षण का समर्थन किया मगर एससी व एसटी को प्रमोशन में आरक्षण देने संबंधी बिल पारित नहीं करने को लेकर मोदी सरकार पर सवाल उठाए। खासतौर पर केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान पर मिश्र ने इसको लेकर निशाना साधा और कहा कि आरक्षण का सरकार का यह छक्का बाउंड्री पार करने वाला नहीं है।
आरक्षण बिल पर राज्यसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि मंडल कमीशन में आर्थिक आधार पर 10 फीसद आरक्षण की व्यवस्था की गई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने उसे असंवैधानिक करार दिया था। ऐसे में आप संविधान में संशोधन कैसे कर सकते हैं।
नई दिल्ली। राज्यसभा ने सामान्य वर्ग के गरीब वर्गों को सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थाओं में 10 फीसद आरक्षण पर 07 के मुकाबले 165 मतों से मुहर लगा दी है। लोकसभा में 03 मतों के मुकाबले 323 मतों से बिल पारित के होने के बाद राज्यसभा ने भी बुधवार को सामान्य वर्ग के गरीबों के आरक्षण संबंधी 124वें संविधान संशोधन विधेयक को पारित कर दिया। यह संशोधन संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 के तहत किया गया है और इसीलिए इसे राज्यों की विधानसभा से पारित कराने की जरूरत नहीं होगी। अब केवल राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद 10 फीसद आरक्षण की यह व्यवस्था लागू हो जाएगी।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सरकारी नौकरियों एवं शिक्षण संस्थाओं में 10 फीसदी आरक्षण देने के प्रावधान वाले संविधान संशोधन विधेयक पर राज्यसभा में जोरदार बहस हुई थी। सत्ता पक्ष और विपक्ष ने तर्कों के जरिए अपनी बात सदन के सामने रखा था। राज्यसभा ने आरक्षण संबंधी संविधान संबंधी इस बिल को पारित करने से पहले इसे सिलेक्ट कमिटी में भेजने की द्रमुक सांसद कनीमोरी के प्रस्ताव को भी 18 के मुकाबले 155 मतों से खारिज कर दिया। राज्यसभा में 10 घंटे तक बिल पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए सामाजिक न्याय मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि सामान्य वर्ग के गरीबी लोगों को इसके जरिए सरकारी नौकरियों और शिक्षण में संस्थानों आरक्षण का लाभ मिलेगा। बिल को ऐतिहासिक बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की इसको लेकर यह गंभीरता ही रही कि संविधान संशोधन के जरिये आरक्षण का यह प्रावधान किया जा रहा है। इसीलिए उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट भी संविधान संशोधन की इस प्रक्रिया को मान्य करेगा। आर्थिक रुप से कमजोर तबकों का ख्याल रखने की पंडित जवाहर लाल नेहरू की संविधान सभा में कही गई बात का आनंद शर्मा की ओर से किए गए उल्लेख का जवाब देते हुए गहलोत ने कहा कि यह भारत की परंपरा रही है। अगड़ी जाति के हमारे नेताओं ने दलित-आदिवासी और पिछड़ों को आरक्षण दिया। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पिछड़े समुदाय से होने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगड़ी जाति के गरीबों के लिए आरक्षण किया है।
कांग्रेस की ओर से आनंद शर्मा ने चर्चा की शुरुआत करते हुए सवर्ण गरीबों को आरक्षण देने के बिल का समर्थन किया। हालांकि सरकार की अंतिम बेला में बिल लाने की पहल को पांच राज्यों के चुनाव में हार के बाद सरकार का अचानक लिया गया फैसला बताया। उन्होंने कहा कि 2014 में सब्जबाग दिखाते हुए तमाम वादे किए गए थे मगर इसमें कोई पूरा नहीं हुआ और पांच राज्यों के चुनाव में जनता ने इन्हें रास्ता दिखा दिया। इसी घबराहट में सत्ता से बाहर होने के डिपारचर लाउंज में खड़ी सरकार ने यह कदम उठाया है। शर्मा ने कहा कि कांग्रेस बिल का समर्थन इसलिए कर रही कि पार्टी ने भी अपने चुनाव घोषणापत्र में इसका वादा किया था। बिल में आरक्षण के लिए शर्तो की चर्चा करते हुए शर्मा ने कहा कि 8 लाख रुपये तक की आय और 5 एकड़ जमीन के साथ जो मानक तय किए हैं उसमें करीब 98 फीसद आबादी आएगी। इसका अर्थ यह होगा कि इतनी आबादी को 10 फीसद कोटे में ही संघर्ष करना होगा।
सपा के रामगोपाल यादव ने सवर्ण गरीबों के आरक्षण का समर्थन करते हुए मांग उठाई कि ओबीसी का आरक्षण उसकी जनसंख्या के हिसाब से बढ़ाते हुए 54 फीसद किया जाना चाहिए। उन्होंने मुसलमानों के लिए भी इसी आधार पर आरक्षण की मांग उठाई।
बसपा के सतीश चंद्र मिश्र ने अगड़ी जाति के गरीबों के आरक्षण का समर्थन किया मगर एससी व एसटी को प्रमोशन में आरक्षण देने संबंधी बिल पारित नहीं करने को लेकर मोदी सरकार पर सवाल उठाए। खासतौर पर केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान पर मिश्र ने इसको लेकर निशाना साधा और कहा कि आरक्षण का सरकार का यह छक्का बाउंड्री पार करने वाला नहीं है।
आरक्षण बिल पर राज्यसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि मंडल कमीशन में आर्थिक आधार पर 10 फीसद आरक्षण की व्यवस्था की गई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने उसे असंवैधानिक करार दिया था। ऐसे में आप संविधान में संशोधन कैसे कर सकते हैं।
नई दिल्ली । नरेंद्र मोदी की सरकार ने लोकसभा चुनाव 2019 से पहले विपक्ष को चौंकाते हुए मंगलवार को बहुत बड़ा एतिहासिक दांव चल दिया है। सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए सरकारी नौकरी और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण के प्रस्ताव को लोकसभा से मंजूरी मिल गयी है। '124वें संविधान संशोधन विधेयक' के तहत संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन कर आर्थिक रूप से पिछड़ों को शिक्षण संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में 10 फीसद आरक्षण का प्रावधान जोड़ा जाएगा। लोकसभा में मौजूद 326 सांसदों में से पक्ष में 323 ने मतदान किया और विरोध में तीन ने मतदान किया। इस आरक्षण के अंतर्गत सभी धर्मों (हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई) के सामान्य वर्गों को शामिल किया गया है। यह आरक्षण देश की 95 फीसदी आबादी को प्रभावित करेगा। अब कल बिल को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। जहां इस पर चर्चा होगी। इसके लिए राज्यसभा के कार्यकाल को एक दिन के लिए बढ़ाया गया है। ज्यादातर सांसदों का मत है कि कल राज्यसभा में भी आरक्षण बिल पास हो जाएगा। गौरतलब है कि सोमवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को पास किया गया था। हालांकि गरीब सवर्णों को आरक्षण की बात काफी सालों से हो रही थी।
लोकसभा में चर्चा के दौरान सांसदों ने क्या कहा:-
सामान्य वर्ग में किसे मिलेगा आरक्षण का लाभ:-
नई दिल्ली । नरेंद्र मोदी की सरकार ने लोकसभा चुनाव 2019 से पहले विपक्ष को चौंकाते हुए मंगलवार को बहुत बड़ा एतिहासिक दांव चल दिया है। सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए सरकारी नौकरी और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण के प्रस्ताव को लोकसभा से मंजूरी मिल गयी है। '124वें संविधान संशोधन विधेयक' के तहत संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन कर आर्थिक रूप से पिछड़ों को शिक्षण संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में 10 फीसद आरक्षण का प्रावधान जोड़ा जाएगा। लोकसभा में मौजूद 326 सांसदों में से पक्ष में 323 ने मतदान किया और विरोध में तीन ने मतदान किया। इस आरक्षण के अंतर्गत सभी धर्मों (हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई) के सामान्य वर्गों को शामिल किया गया है। यह आरक्षण देश की 95 फीसदी आबादी को प्रभावित करेगा। अब कल बिल को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। जहां इस पर चर्चा होगी। इसके लिए राज्यसभा के कार्यकाल को एक दिन के लिए बढ़ाया गया है। ज्यादातर सांसदों का मत है कि कल राज्यसभा में भी आरक्षण बिल पास हो जाएगा। गौरतलब है कि सोमवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को पास किया गया था। हालांकि गरीब सवर्णों को आरक्षण की बात काफी सालों से हो रही थी।
लोकसभा में चर्चा के दौरान सांसदों ने क्या कहा:-
सामान्य वर्ग में किसे मिलेगा आरक्षण का लाभ:-
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा परिषद की सहायक शिक्षक परीक्षा में पुख्ता इंतजाम के दावे के बावजूद नकल रुकने का नाम नहीं ले रही है। एसटीएफ ने लखनऊ, प्रयागराज, कानपुर और मुरादाबाद से सॉल्वर गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इसी बीच मेरठ व मुरादाबाद में पेपर व उत्तर परीक्षा के दौरान ही वाट्सएप पर वायरल होने से सूचना से अधिकारियों में खलबली मच गई। इसकी सूचना मिलने पर तुरंत सक्रिय एसटीएफ ने इस संबंध में कुछ लोगों को पकड़कर पूछताछ की। प्रदेश भर में 27 अभ्यर्थियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। इनमें सबसे ज्यादा नकलची लखनऊ में पकड़े गये।
आपको बता दें कि परीक्षा नियामक प्राधिकारी के आंकड़ों के मुताबिक लखनऊ में 9, प्रयागराज में 5, कानपुर में 2, मिर्जापुर में 1, आजमगढ़ में 2, अयोध्या में 1, मुरादाबाद में 4 और अलीगढ़ में 3 मामलों में एफआरई दर्ज करवाई गई है। इनमें लखनऊ, प्रयागराज और आजमगढ़ में सॉल्वर भी पकड़े गये हैं। जिन अभ्यर्थियों के खिलाफ एफआईआर की गई है यदि उन पर न्यायालय से आरोप सिद्ध हो जाते हैं तो वे अभ्यर्थी फिर कभी शिक्षक भर्ती में शामिल नहीं हो पाएंगे। उन्हें ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा। मुरादाबाद में पुलिस ने छापामार कर सॉल्वर गैंग के एक महिला समेत चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से फर्जी आइडी कार्ड, मोबाइल और इलेक्ट्रोनिक्स डिवाइस समेत अन्य उपकरण मिले हैं। हालांकि 04 आरोपितों के खिलाफ मझोला थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस परीक्षा का परिणाम 22 जनवरी को आएगा।
चंडीगढ़ (हरियाणा)। आप यदि शहर में मकान बनाने जा रहे हैं तो आपके लिए राहत की खबर है। आवेदकों को अब नगर पालिकाओं के धक्के नहीं खाने पड़ेंगे। बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम के जरिये नक्शा प्लान का आवेदन करने के कुछ घंटों के भीतर मंजूरी दे दी जाएगी। हरियाणा बिल्डिंग कोड के अनुरूप नक्शे को अप्रूवल मिल जायेगा तो इसके बाद ईमेल के जरिए इसकी सूचना आवेदक को मिल जाएगी। सिस्टम खुद ही पहले से फीड दिशानिर्देश के अनुसार नक्शे का शुल्क भी निर्धारित कर देगा।
शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन का कहना है कि यमुनानगर, टोहाना, पानीपत में विभाग से जुड़े आर्किटेक्चर ने आवेदनों पर काम शुरू कर दिया है। इसके अलावा बड़े स्ट्रेक्चर डिजाइनर को भी विभाग अपने साथ जोड़ेगा ताकि आम लोगों को परेशानी न उठानी पड़े। मंत्री कविता जैन ने कहा कि पारदर्शी व्यवस्था से लोगों को घर बैठे नक्शे हासिल करने की सुविधा मिलेगी। कुछ लोग भ्रम फैलाकर ऑनलाइन सिस्टम के प्रति दुष्प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था से दलाल तंत्र खत्म हो जाएगा और अधिकारी व कर्मचारी भी किसी आवेदक को परेशान नहीं कर पाएंगे। अब देखना यह होगा कि इस नई व्यवस्था से लोगों को लेटलतीफी और दलाली से मुक्ति मिलती है या नहीं मिलती है।