Total: 1726 results found.
Page 67 of 87
नई दिल्ली । सरकारी छूट का फायदा नहीं लेने वाले नागरिकों के लिए राहत की खबर है। देश के नागरिकों को जल्द ही आधार नंबर लौटाने यानी सरेंडर करने का अधिकार मिल सकता है। भारतीय विशिष्ट पहचान पत्र प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने आधार अधिनियम में संशोधन के लिए कैबिनेट नोट तैयार कर लिया है। इस बाबत एक प्रस्ताव को अंतिम रूप देने की कवायद अपने अंतिम चरण में है। इस संशोधन के बाद सभी नागरिकों को बायोमेट्रिक्स और डाटा समेत अपना आधार नंबर वापस लेने का विकल्प दिया जा सकेगा। ताजा संशोधन के बाद आधार कार्ड से अपना नाम हटवाने के बाद उपभोक्ता का डाटा भी हमेशा के लिए डिलीट कर दिया जाएगा।
भारत की विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा प्रारंभिक प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसमें कहा गया कि एक बार जब बच्चा 18 वर्ष का हो जाता है, तो उसे यह तय करने के लिए 6 महीने दिए जाएंगे कि वह आधार नंबर वापस लेना चाहता है या नहीं। यह प्रस्ताव कानून मंत्रालय को भेजा गया था। मंत्रालय ने इसे आगे सिफारिश की है कि सभी नागरिकों को आधार नंबर वापस लेने का विकल्प उपलब्ध कराया जाए और यह किसी विशेष समूह तक ही सीमित न हो। दूरसंचार कंपनियां इसके लिए विकल्प तैयार कर चुकी हैं, जबकि अन्य द्वारा भी इसका प्रयोग अब नहीं किया जा रहा है। ऐसे में सरकारी छूट नहीं ले रहे नागरिकों के लिए आधार नंबर रखना अनिवार्य नहीं होगा। इसी के मद्देनजर कानून मंत्रालय ने प्राधिकरण को आधार लौटाने का अधिकार सिर्फ बच्चों को नहीं, बल्कि सभी को मुहैया कराने की राय दी। प्राधिकरण ने मंत्रालय की राय पर कैबिनेट नोट तैयार कर लिया है। अगर कैबिनेट नागरिकों को आधार लौटाने की मंजूरी प्रदान कर देता है, तो कोई भी व्यक्ति यूआईडीएआई के सर्वर में सुरक्षित बायोमेट्रिक समेत अपना पूरा डाटा आधार से हटा सकेगा। यूआईडीएआई के एक अधिकारी के मुताबिक कैबिनेट द्वारा आधार लौटाने की व्यवस्था की मंजूरी मिलने के बाद अगर कोई आधार वापसी करेगा, तो वह सरकार से कोई सब्सिडी नहीं ले सकेगा। अगर भविष्य में वह सब्सिडी लेना चाहेगा, तो उसे फिर आधार में पंजीकरण कराना होगा। इसके बाद ही वह सरकार द्वारा किसी भी सेवा में मुहैया कराई जा रही छूट का अधिकारी होगा। यह फैसला सिर्फ उन लोगों को लाभ पहुंचाएगा, जिनके पास पैन कार्ड नहीं है, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने आधार के साथ पैन के संबंध को बरकरार रखा है।
नई दिल्ली । सरकारी छूट का फायदा नहीं लेने वाले नागरिकों के लिए राहत की खबर है। देश के नागरिकों को जल्द ही आधार नंबर लौटाने यानी सरेंडर करने का अधिकार मिल सकता है। भारतीय विशिष्ट पहचान पत्र प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने आधार अधिनियम में संशोधन के लिए कैबिनेट नोट तैयार कर लिया है। इस बाबत एक प्रस्ताव को अंतिम रूप देने की कवायद अपने अंतिम चरण में है। इस संशोधन के बाद सभी नागरिकों को बायोमेट्रिक्स और डाटा समेत अपना आधार नंबर वापस लेने का विकल्प दिया जा सकेगा। ताजा संशोधन के बाद आधार कार्ड से अपना नाम हटवाने के बाद उपभोक्ता का डाटा भी हमेशा के लिए डिलीट कर दिया जाएगा।
भारत की विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा प्रारंभिक प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसमें कहा गया कि एक बार जब बच्चा 18 वर्ष का हो जाता है, तो उसे यह तय करने के लिए 6 महीने दिए जाएंगे कि वह आधार नंबर वापस लेना चाहता है या नहीं। यह प्रस्ताव कानून मंत्रालय को भेजा गया था। मंत्रालय ने इसे आगे सिफारिश की है कि सभी नागरिकों को आधार नंबर वापस लेने का विकल्प उपलब्ध कराया जाए और यह किसी विशेष समूह तक ही सीमित न हो। दूरसंचार कंपनियां इसके लिए विकल्प तैयार कर चुकी हैं, जबकि अन्य द्वारा भी इसका प्रयोग अब नहीं किया जा रहा है। ऐसे में सरकारी छूट नहीं ले रहे नागरिकों के लिए आधार नंबर रखना अनिवार्य नहीं होगा। इसी के मद्देनजर कानून मंत्रालय ने प्राधिकरण को आधार लौटाने का अधिकार सिर्फ बच्चों को नहीं, बल्कि सभी को मुहैया कराने की राय दी। प्राधिकरण ने मंत्रालय की राय पर कैबिनेट नोट तैयार कर लिया है। अगर कैबिनेट नागरिकों को आधार लौटाने की मंजूरी प्रदान कर देता है, तो कोई भी व्यक्ति यूआईडीएआई के सर्वर में सुरक्षित बायोमेट्रिक समेत अपना पूरा डाटा आधार से हटा सकेगा। यूआईडीएआई के एक अधिकारी के मुताबिक कैबिनेट द्वारा आधार लौटाने की व्यवस्था की मंजूरी मिलने के बाद अगर कोई आधार वापसी करेगा, तो वह सरकार से कोई सब्सिडी नहीं ले सकेगा। अगर भविष्य में वह सब्सिडी लेना चाहेगा, तो उसे फिर आधार में पंजीकरण कराना होगा। इसके बाद ही वह सरकार द्वारा किसी भी सेवा में मुहैया कराई जा रही छूट का अधिकारी होगा। यह फैसला सिर्फ उन लोगों को लाभ पहुंचाएगा, जिनके पास पैन कार्ड नहीं है, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने आधार के साथ पैन के संबंध को बरकरार रखा है।
दिल्ली । देश की राजधानी की दिल्ली पुलिस की रिश्वतखोरी की हैरतंगेज करतूत सामने आयी है। ऑनलाइन ठगों को छोड़ने के एवज में एक करोड़ की रिश्वत मांगने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने एक एएसआई समेत चार पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया है । इस मामले का पता तब चला जब रिश्वतखोरी की पहली किश्त के बंटवारे को लेकर पुलिसवालों और पीड़ित महिला के बीच विवाद हो गया और फिर पूरे मामले का भंडाफोड़ हो गया।
आपको बता दें कि 28 सितंबर को छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन ठगी का एक केस दर्ज हुआ था। इस मामले के छह आरोपी थे, जिनमें से पांच पकड़े जा चुके हैं। छठवें आरोपी दिल्ली के कंझावला निवासी प्रदीप प्रधान को तीनों पुलिस वालों ने पकड़ा लिया। और फिर उसे उत्तमनगर स्थित सचिन के घर पर बंधक बनाकर रखा। इसके बाद उन्होंने प्रदीप प्रधान की पत्नी नेहा से संपर्क किया और उसके पति को छोड़ने के एवज में डेढ़ करोड़ रुपए की मांग की । हालांकि बातचीत के बाद यह डील एक करोड़ में हुई। नेहा ने रविवार को 11 लाख की पहली किस्त भी दे दी। बाकी रकम का भुगतान मंगलवार दोपहर मौर्या एंक्लेव में बताई जगह पर होना था। नेहा यहां दो लोगों के साथ पहुंची। नेहा ने रकम देने से पहले प्रदीप प्रधान को सामने लाने की बात कही। इस पर सादे कपड़ों में आए पुलिसवालों और नेहा के साथ आए लोगों के बीच कहासुनी हो गई। जिसके बाद दोनों के बीच मारपीट होने लगी। किसी ने इस घटना की पीसीआर को सूचना दे दी। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आरोपी पुलिसकर्मियों को पकड़ लिया। पीसीआर सभी को लेकर थाने पहुंची तो एक करोड़ रुपये की रिश्वतखोरी का पूरा मामला उजागर हो गया। पीड़ित नेहा ने पुलिस के सामने पूरी कहानी बयान कर दी। पुलिस ने एक व्यक्ति को बंधक बनाकर रखने व जबरन वसूली के मामले में तीन पुलिसकर्मियों, असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर सुबे सिंह, हेड कांस्टेबल इंदू परमार व कांस्टेबल अजय को गिरफ्तार कर लिया। चौथी गिरफ्तारी इनके सचिन नाम के साथी की हुई। गिरफ्तारी के बाद रणहौला थाने के एसएचओ को भी लाइन हाजिर कर जांच के आदेश दिए गए हैं।
आगरा (उत्तर प्रदेश)। पुलिस ने फर्जी मदरसों के नाम पर भारतीय स्टेट बैंक की शाखा से चालीस लाख रुपए की स्कॉलरशिप निकालने वाले गैंग का पर्दाफाश किया है। थाना एत्माद्दौला पुलिस और साइबर क्राइम सेल ने दो ग्राहक सेवा केंद्रों के संचालकों सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से बड़ी संख्या में पासबुक, एटीएम कार्ड सहित खाता खोलने के उपकरण, कंप्यूटर बरामद किए गए हैं।
पुलिस अधीक्षक क्राइम मनोज कुमार सोनकर ने प्रेस वार्ता में गुरुवार को बताया कि आरोपियों में नितिन चौहान नई आबादी, राम बिहार कालोनी, टेढ़ी बगिया, राकेश कुमार धौरऊ, हसनपुर, खंदौली, रवींद्र शर्मा न्यू जनता कालोनी, सदर, उमाकांत नंदनी विहार, नंदलालपुर और आदित्य प्रताप सिंह नई आबादी, टेढ़ी बगिया का रहने वाले हैं। आरोपियों के पास से एक सीपीयू, एक एलसीडी मॉनीटर, एक पावर एडेप्टर, दो बायोमेट्रिक स्कैनर, एक पीओएस/ईडीसी मशीन, 254 एसबीआई कियोस्क कस्टमर कार्ड, 9 एटीएम कार्ड, 593 सील पैक एटीएम कार्ड, एसबीआई की 187 पासबुक , तीन चेकबुक , एक कीबोर्ड, एक पावर केबल, एक क्लोन फिंगरप्रिंट (सिलीकॉन) बरामद हुए हैं।
पुलिस ने बताया कि मुख्य आरोपी नितिन चौहान ने भारतीय स्टेट बैंक की फाउंड्री नगर शाखा का ग्राहक सेवा केंद्र (सीएसपी) कालिंदी विहार में खोल रखा है। इस कारण वह बैंक में जाता था। बैंक के पूर्व प्रबंधक पंकज कुलश्रेष्ठ की सहमति से बैंक के ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी उमाकांत की लॉग इन आईडी से खाताधारकों की जानकारी प्राप्त कर लेता था। नितिन लंबे समय से कोई लेन देन न हो रहे खातों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर को बदल देता था और खातों से रकम निकाल लेता था। आरोपी नितिन तकरीबन पांच साल से यह काम कर रहा था। इतना ही नहीं रकम निकालने के लिए खातों के नए एटीएम कार्ड भी जारी करा लेता था। वहीं एक और आरोपी राकेश, जो पोस्टमैन है। वह एटीएम आने पर खाताधारकों को न देकर नितिन को उपलब्ध करा देता था। इसके बाद नितिन का पड़ोसी आदित्य एटीएम केबिन में जाकर ओटीपी जेनरेट करके पासवर्ड जारी कर लेता था और फिर खाते से रकम निकाल लेते थे। इसके बाद खातों से रकम निकालकर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर को पहले की ही तरह दर्ज कर देते थे, जिससे फर्जीवाड़े का पता न तो ग्राहक को चलता था और न ही बैंक के कर्मियों को चलता था। वहीं जब ग्राहक राशि निकाले जाने की शिकायत करने बैंक आता था तो उसे कर्मचारी एटीएम से पैसा निकलने की जानकारी देते थे। हालांकि कई बार चुप बैठ जाते थे। जबिक कई लोगों ने पुलिस को शिकायत भी दर्ज कराई थी।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार एक अभियुक्त रविंद्र शर्मा भी बैंक ऑफ इंडिया, आगरा कैंट की शाखा का ग्राहक सेवा केंद्र चलाता है। दो साल पहले मदरसा संचालक मोहम्मद इलियास और मोहम्मद सफी ने रविंद्र से संपर्क किया। दो मदरसों के लिए फर्जी तरीके से खाते खोलने के लिए कहा। रविंद्र ने नितिन से संपर्क किया। नितिन चौहान ने 500 रुपये प्रति खाते के हिसाब से कमीशन लेकर बिना केवाईसी के खाते खोल दिए। इस तरीके से एक हजार खाते खोले गए। खाते खोलने के लिए नया ग्राहक सेवा केंद्र भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में खोला गया। इसमें आदित्य का आधार कार्ड लगाया गया। उसकी फिंगरप्रिंट के लिए सिलीकॉन की फिंगरप्रिंट बनाई गई। 2016-2017 में तकरीबन एक हजार खाते मदरसों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के नाम पर खोल लिए गए। इनमें आधार कार्ड नहीं लगा था। एक खाते के लिए तकरीबन चार हजार रुपये आने थे। इस हिसाब से केंद्र सरकार से मिली 40 लाख रुपये की स्कालरशिप फरवरी 2017 में निकाल ली गई।
खाते खोलने में एक विद्यार्थी के फोटो का इस्तेमाल पांच से सात खातों में किया गया। इसके साथ ही इलियास, सफी, नितिन और आदित्य अपनी फिंगर प्रिंट लगाते थे। आधार लिंक न होने के कारण इन फिंगरप्रिंट का मिलान नहीं होने के कारण फर्जीवाड़ा पकड़ में नहीं आ रहा था। वहीं इस फर्जीवाड़े से बैंक बेखबर था। आरोपी नितिन ने बताया कि एक खाता खोलने के लिए उसने मदरसा संचालकों से 500 रुपये तय किए थे। इसके साथ ही जब खातों में रकम आ गई तो हर दिन दो लाख रुपये वह बैंक से निकालकर आया। इसके बदले में उसने 15000 रुपये मदरसा संचालकों से लिए। उन्होंने 20 दिन में 40 लाख रुपये निकाल लिए। आदित्य का सिलीकॉन फिंगर प्रिंट ग्राहक सेवा केंद्र को लाग इन करने में इस्तेमाल करता था।
पुलिस अधिकारी का कहना है कि बैंक के पूर्व के प्रबंधक पंकज कुलश्रेष्ठ का ट्रांसफर पलवल, हरियाणा में हो चुका है। उनकी भूमिका संदिग्ध है। पहले तो उनके समय में बैंक के चपरासी का लागइन आईडी बनाया गया। इस पर प्रबंधक ने नितिन को इस्तेमाल करने के लिए दे दिया। ऐसे में उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। इसलिए एक टीम को पलवल भेजा गया है। पुलिस को आशंका है कि जिन मदरसों के विद्यार्थियों के लिए स्कॉलरशिप आई थी वह भी फर्जी हो सकते हैं। क्योंकि पकड़े गए आरोपी नितिन और आदित्य को मदरसों का पता तक नहीं मालूम है। उनके मोबाइल नंबर तक नहीं हैं। आशंका है कि मदरसे सिर्फ कागजों में ही चल रहे थे। पुलिस को बड़ा घपला सामने आने की आशंका है। पुलिस के सामने कई पीड़ित आए हैं। जिनके खातों से यह रकम निकाली गई है। इनमें कई के मुकदमे तक दर्ज नहीं है। पूर्व में एक पीड़ित सरोज देवी के खाते से 45 हजार रुपये निकाल लिए गए थे। वह भी सामने आईं हैं। हालांकि आगे की कार्रवाई के बाद ही पता चल सकेगा कि अभी तक इन्होंने और कितनी राशि की धोखाधड़ी की है।
पटना (बिहार) बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम (बुडको) में 13 अरब से अधिक के भ्रष्टाचार ने सभी को हैरानी में डाल दिया है। नियंत्रक एवं लेखा महापरीक्षक (सीएजी) ने अब तक पांच निरीक्षण रिपोर्ट्स को सरकार और लोक लेखा समिति को सौंपा है। इस रिपोर्ट्स में सीएजी ने 13 अरब से अधिक के वित्तीय अनियमितता की ओर ध्यान दिलाया है। सीएजी की ऑडिट के अनुसार बुडको की 2009 में स्थापना से लेकर जून 2017 के बीच भारी वित्तीय अनियमितता हुई है। इस घोटाले का खुलासा होने के बाद नीतीश सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री रहे तेजस्वी यादव ने कहा कि घोटालों की सरकार है बिहार में बहार है। तेजस्वी यादव कहा कि बिहार में घोटालों की बहार के बीच ऐसी स्थिति आ गई है कि हम सीबीआई की विश्वसनीयता भी सवालों के घेरे में है। ऐसे में हमारा दल मांग करता है कि बिहार विधानसभा की कमेटी बनाई जाए जो बुडको घोटाला मामले के साथ-साथ दूसरे घोटालों की भी जांच करवाई जाए।
आपको बता दें कि बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम (बुडको) की स्थापना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर 16 जून 2009 को की गई थी। 1956 की कम्पनी एक्ट के तहत बुडको के गठन का उद्येश्य शहरी विकास को गति देना था। लेकिन शहरी लोगों को तेजी से विकास करने के सपने दिखाकर सरकार के पैसे का पिछले आठ सालों से बंदरबाट किया जाता रहा है। सीएजी ने इस मामले में सबसे पहले साल 2011-12 में बुडको का ऑडिट किया था और फिर वर्ष 2013-14 और 2015-16, 2016-17 और 2017-18 का ऑडिट किया। इन सभी ऑडिट रिपोर्ट में सीएजी ने बुडको के भ्रष्टाचार को पकड़ा और अपनी रिपोर्ट सरकार और लोक लेखा समिति को सौंपी। सीएजी ने पहले तीन ऑडिट में ही 10 अरब 50 करोड़ से अधिक की वित्तीय अनियमितता पकड़ी थी। सरकार को इसकी जानकारी देने के बावजूद इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और इस बीच आरटीआइ कार्यकर्ता ने बिहार के तत्कालीन राज्यपाल को 19 सितम्बर 2016 को कारवाई के लिए लिखित शिकायत भी की, लेकिन कोई जांच नहीं कराई गई। इतना ही नहीं सीएजी की आपत्तियों का बुडको ने भी कोई जवाब नहीं दिया। सीएजी ने 2016-17 और 2017-18 के दो ऑडिट रिपोर्ट में और दो अरब 52 करोड़ से अधिक के वित्तीय गड़बड़ियों को पकड़ा और इस बीच सीएजी ने इस बात पर भी आपत्ति जताई है कि पिछली गड़बड़ियों पर बुडको ने कोई जवाब नहीं दिया है, लेकिन इस बार भी कुछ नहीं हुआ।
पानीपत (हरियाणा) हरियाणा के एचआईवी पीड़ित लोगों के लिए खुशी की खबर है। हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसायटी और सामाजिक न्याय एवं सशक्तीकरण विभाग ने एचआइवी पीड़ितों को पेंशन और आहार भत्ता के रूप में 2300 रुपये मासिक देने का निर्णय लिया है। इसके लिए सोसाइटी ने सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण विभाग को पत्र भेजकर आग्रह किया था। विभाग के प्रस्ताव को सरकार ने मंजूरी दे दी है। रोगियों को मिलने वाली धनराशि समाज कल्याण विभाग के माध्यम से सीधे रोगी के बैंक खाते में जाएगी।
हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसायटी के जिला नोडल अधिकारी डॉ. मुनीष गोयल का कहना है कि सरकार के निर्देश पर सभी मरीजों को सूचना दी गई है कि वे अपने इलाज कार्ड, आधार कार्ड, बैंक पासबुक की प्रतिलिपि कार्यालय में जमा कराएं। जब भी डाटा मांगा जाएगा, भिजवा दिया जाएगा। निजी चिकित्सकों को सख्त निर्देश हैं कि एचआइवी पॉजिटिव की डिटेल स्वास्थ्य विभाग को दें। सोसाइटी के निर्देश पर जिले के रोगियों से एआरटी नंबर, आधार कार्ड, बैंक खाता संख्या आदि डाटा जुटाना शुरू कर दिया है। सोसायटी के परामर्शदाता रविंद्र सिंह ने बताया कि रोगियों में अधिकांश निम्न तबके के लोग, ट्रक-बस और टैक्सी चालक, स्लम एरियावासी, ईंट भट्ठों और कंस्ट्रक्शन साइट्स पर काम करने वाले महिला-पुरुष मजदूर शामिल हैं। जिन्हें हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसायटी और सामाजिक न्याय एवं सशक्तीकरण विभाग के इस अहम कदम का लाभ मिलेगा।
पानीपत (हरियाणा) हरियाणा के एचआईवी पीड़ित लोगों के लिए खुशी की खबर है। हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसायटी और सामाजिक न्याय एवं सशक्तीकरण विभाग ने एचआइवी पीड़ितों को पेंशन और आहार भत्ता के रूप में 2300 रुपये मासिक देने का निर्णय लिया है। इसके लिए सोसाइटी ने सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण विभाग को पत्र भेजकर आग्रह किया था। विभाग के प्रस्ताव को सरकार ने मंजूरी दे दी है। रोगियों को मिलने वाली धनराशि समाज कल्याण विभाग के माध्यम से सीधे रोगी के बैंक खाते में जाएगी।
हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसायटी के जिला नोडल अधिकारी डॉ. मुनीष गोयल का कहना है कि सरकार के निर्देश पर सभी मरीजों को सूचना दी गई है कि वे अपने इलाज कार्ड, आधार कार्ड, बैंक पासबुक की प्रतिलिपि कार्यालय में जमा कराएं। जब भी डाटा मांगा जाएगा, भिजवा दिया जाएगा। निजी चिकित्सकों को सख्त निर्देश हैं कि एचआइवी पॉजिटिव की डिटेल स्वास्थ्य विभाग को दें। सोसाइटी के निर्देश पर जिले के रोगियों से एआरटी नंबर, आधार कार्ड, बैंक खाता संख्या आदि डाटा जुटाना शुरू कर दिया है। सोसायटी के परामर्शदाता रविंद्र सिंह ने बताया कि रोगियों में अधिकांश निम्न तबके के लोग, ट्रक-बस और टैक्सी चालक, स्लम एरियावासी, ईंट भट्ठों और कंस्ट्रक्शन साइट्स पर काम करने वाले महिला-पुरुष मजदूर शामिल हैं। जिन्हें हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसायटी और सामाजिक न्याय एवं सशक्तीकरण विभाग के इस अहम कदम का लाभ मिलेगा।
नई दिल्ली । अब वाहन चलाते समय आपको ड्राइविंग लाइसेंस या गाड़ी के पंजीकरण का कागजात रखने के झंझट से मुक्ति मिल गयी है। केंद्र सरकार ने मौजूदा नियमों में बदलाव करते हुए इसके इलेक्ट्रॉनिक (डिजिटल) कागजात की अनुमति दे दी है। सरकार ने कहा है कि इलेक्ट्रानिक कागजात उतने ही मान्य और वैध हैं, जितने कि कागजी दस्तावेज मान्य हैं । इसलिए कोई भी ट्रैफिक पुलिस अधिकारी कागजी दस्तावेजों के लिए वाहन चालक को बाध्य नहीं कर सकता है।
इलेक्ट्रॉनिक (डिजिटल) कागजात के संबंध में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों तथा परिवहन सचिवों को एडवाइजरी भेजी है। इसमें कहा गया है कि सरकार ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 139 में संशोधन कर दिया है। इस संबंध में 2 नवंबर, 2018 को गजट अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है। संशोधित नियम के अनुसार अब वाहन चालक ट्रैफिक पुलिस अधिकारी के मांगने पर उसे रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस, फिटनेस व परमिट, ड्राइविंग लाइसेंस, पीयूसी अथवा किसी भी अन्य सर्टिफिकेट को कागजी अथवा इलेक्ट्रानिक (डिजिटल) किसी भी रूप में दिखा सकता है।
यदि आप डिजिटल कॉपी प्राप्त करना चाहते हैं तो इसके लिए केंद्र सरकार के DigiLocker ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह सुविधा पाने के लिए बस आपके पास आधार कार्ड होना चाहिए। इसमें आधार का नंबर डालकर आप डिजीटल लॉकर अकाउंट खोल सकते हैं। आप लॉकर खोलने के लिए digitallocker.gov.in लॉगइन करें, उसके बाद आपनी आईडी बनाएं। और फिर आधार कार्ड नंबर लॉग इन करें। उसके बाद आपसे जुड़े कुछ सवाल आपसे पूछे जायेंगे, जिसके बाद आपका अकाउंट बन जायेगा और उसके बाद आप उसमें सारे निजी दस्तावेज डाउनलोड कर दीजिये, जो हमेशा के लिए उसमें लोड हो जायेगा।
आपको बता दें कि वाहनों के दस्तावेजों का डिजटलीकरण हो जाने के बाद आप अपने वाहन के कागजात को अपने घर पर सुरक्षित रख सकते हैं। यदि छोटी सी लापरवाही के चलते आपका वाहन चोरी हो जाए या कोई अन्य दुर्घटना हो जाए तो भी आपके कागजात आपके घर पर सुरक्षित रहेंगे।
नई दिल्ली । अब वाहन चलाते समय आपको ड्राइविंग लाइसेंस या गाड़ी के पंजीकरण का कागजात रखने के झंझट से मुक्ति मिल गयी है। केंद्र सरकार ने मौजूदा नियमों में बदलाव करते हुए इसके इलेक्ट्रॉनिक (डिजिटल) कागजात की अनुमति दे दी है। सरकार ने कहा है कि इलेक्ट्रानिक कागजात उतने ही मान्य और वैध हैं, जितने कि कागजी दस्तावेज मान्य हैं । इसलिए कोई भी ट्रैफिक पुलिस अधिकारी कागजी दस्तावेजों के लिए वाहन चालक को बाध्य नहीं कर सकता है।
इलेक्ट्रॉनिक (डिजिटल) कागजात के संबंध में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों तथा परिवहन सचिवों को एडवाइजरी भेजी है। इसमें कहा गया है कि सरकार ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 139 में संशोधन कर दिया है। इस संबंध में 2 नवंबर, 2018 को गजट अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है। संशोधित नियम के अनुसार अब वाहन चालक ट्रैफिक पुलिस अधिकारी के मांगने पर उसे रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस, फिटनेस व परमिट, ड्राइविंग लाइसेंस, पीयूसी अथवा किसी भी अन्य सर्टिफिकेट को कागजी अथवा इलेक्ट्रानिक (डिजिटल) किसी भी रूप में दिखा सकता है।
यदि आप डिजिटल कॉपी प्राप्त करना चाहते हैं तो इसके लिए केंद्र सरकार के DigiLocker ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह सुविधा पाने के लिए बस आपके पास आधार कार्ड होना चाहिए। इसमें आधार का नंबर डालकर आप डिजीटल लॉकर अकाउंट खोल सकते हैं। आप लॉकर खोलने के लिए digitallocker.gov.in लॉगइन करें, उसके बाद आपनी आईडी बनाएं। और फिर आधार कार्ड नंबर लॉग इन करें। उसके बाद आपसे जुड़े कुछ सवाल आपसे पूछे जायेंगे, जिसके बाद आपका अकाउंट बन जायेगा और उसके बाद आप उसमें सारे निजी दस्तावेज डाउनलोड कर दीजिये, जो हमेशा के लिए उसमें लोड हो जायेगा।
आपको बता दें कि वाहनों के दस्तावेजों का डिजटलीकरण हो जाने के बाद आप अपने वाहन के कागजात को अपने घर पर सुरक्षित रख सकते हैं। यदि छोटी सी लापरवाही के चलते आपका वाहन चोरी हो जाए या कोई अन्य दुर्घटना हो जाए तो भी आपके कागजात आपके घर पर सुरक्षित रहेंगे।
भोपाल (मध्य प्रदेश)। अगर आपको चुनाव के दौरान लाइन लगाकर मतदान करने में परेशानी महसूस होती है तो अब आपको परेशान होने की कोई जरुरत नहीं है। इस झंझट से मुक्ति दिलाने के लिए चुनाव आयोग देश में पहली बार लाइन रहित (ई क्यू लेस) मतदान केंद्र बनाने जा रहा है। इस योजना के तहत मतदान केंद्र पर लाइन रहित पंजीकृत मतदाता को मतदान के लिए समय आवंटित हो जाएगा। जिसके बाद वो निर्धारित अवधि में आकर बिना लाइन में लगे अपना पंजीयन दिखाकर मतदान कर सकेगा।
आपको बता दें कि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने मतदान का प्रतिशत बढ़ाने के लिए मतदाताओं को सुविधा देने की रणनीति बनाई है। देश में पहली बार घर बैठे मतदान के लिए समय तय करने की व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके लिए ई-क्यू लेस मतदान केंद्र बनेगा। इस सुविधा के लिए मतदाता को क्यूलेस एप पर पंजीयन कराना होगा। इस व्यवस्था के तहत मतदान के लिए टोकन दिए जाएंगे। जिन्हें टोकन मिलेंगे, उन्हें बाकायदा मतदान केंद्र के प्रतीक्षालय में बिठाया जाएगा और बारी-बारी से दिव्यांग, गर्भवती, ई-क्यू लैस पंजीकृत, सामान्य टोकन प्राप्त, बिना टोकन सामान्य मतदाता को मतदान का मौका मिलेगा। इसके अलावा दिव्यांग, गर्भवती और धात्री माताओं को बिना लाइन में लगे मतदान का मौका दिया जाएगा। पंजीयन के दौरान मतदाता से आने का समय पूछा जाएगा। जो समय वह नियत करेगा, उस अवधि के लिए उसका पंजीयन कर प्राथमिकता टोकन दे दिया जाएगा। तय अवधि आधे घंटे की रहेगी। यदि इस अवधि में मतदाता नहीं पहुंचता है तो उसे सामान्य मतदाता की तरह लाइन में लगकर मतदान के लिए अपनी बारी का इंतजार करना होगा। क्यू लेस और सामान्य मतदाता के लिए आधा-आधा घंटे का चक्र चलेगा। घर के अलावा मतदान केंद्र के बाहर बूथ लेवल ऑफिसर भी मौजूद रहेगा, जो टोकन देने का काम करेगा। पंजीयन 24 और 25 नवंबर को होगा। यदि प्रयोग सफल रहता है तो लोकसभा चुनाव में इसका दायरा बढ़ाया जाएगा। इसके लिए अभी तक साढ़े तीन लाख पंजीयन भी हो चुके हैं। हर जिले में क्यू लैस मतदान केंद्र भी बनाए जा रहे हैं। भोपाल में इनकी संख्या पांच तक हो सकती है। संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विकास नरवाल ने बताया कि देश में क्यू लैस मतदान केंद्र बनाने का प्रयोग 2013 के विधानसभा चुनाव में हुआ था।
यदि कोई शिकायत हो तो पहले आप कंट्रोल रूम, सी विजिल एप, डायल 100 एवं पुलिस स्टेशन के जरिए शिकायत दर्ज कराएं।
भोपाल (मध्य प्रदेश)। अगर आपको चुनाव के दौरान लाइन लगाकर मतदान करने में परेशानी महसूस होती है तो अब आपको परेशान होने की कोई जरुरत नहीं है। इस झंझट से मुक्ति दिलाने के लिए चुनाव आयोग देश में पहली बार लाइन रहित (ई क्यू लेस) मतदान केंद्र बनाने जा रहा है। इस योजना के तहत मतदान केंद्र पर लाइन रहित पंजीकृत मतदाता को मतदान के लिए समय आवंटित हो जाएगा। जिसके बाद वो निर्धारित अवधि में आकर बिना लाइन में लगे अपना पंजीयन दिखाकर मतदान कर सकेगा।
आपको बता दें कि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने मतदान का प्रतिशत बढ़ाने के लिए मतदाताओं को सुविधा देने की रणनीति बनाई है। देश में पहली बार घर बैठे मतदान के लिए समय तय करने की व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके लिए ई-क्यू लेस मतदान केंद्र बनेगा। इस सुविधा के लिए मतदाता को क्यूलेस एप पर पंजीयन कराना होगा। इस व्यवस्था के तहत मतदान के लिए टोकन दिए जाएंगे। जिन्हें टोकन मिलेंगे, उन्हें बाकायदा मतदान केंद्र के प्रतीक्षालय में बिठाया जाएगा और बारी-बारी से दिव्यांग, गर्भवती, ई-क्यू लैस पंजीकृत, सामान्य टोकन प्राप्त, बिना टोकन सामान्य मतदाता को मतदान का मौका मिलेगा। इसके अलावा दिव्यांग, गर्भवती और धात्री माताओं को बिना लाइन में लगे मतदान का मौका दिया जाएगा। पंजीयन के दौरान मतदाता से आने का समय पूछा जाएगा। जो समय वह नियत करेगा, उस अवधि के लिए उसका पंजीयन कर प्राथमिकता टोकन दे दिया जाएगा। तय अवधि आधे घंटे की रहेगी। यदि इस अवधि में मतदाता नहीं पहुंचता है तो उसे सामान्य मतदाता की तरह लाइन में लगकर मतदान के लिए अपनी बारी का इंतजार करना होगा। क्यू लेस और सामान्य मतदाता के लिए आधा-आधा घंटे का चक्र चलेगा। घर के अलावा मतदान केंद्र के बाहर बूथ लेवल ऑफिसर भी मौजूद रहेगा, जो टोकन देने का काम करेगा। पंजीयन 24 और 25 नवंबर को होगा। यदि प्रयोग सफल रहता है तो लोकसभा चुनाव में इसका दायरा बढ़ाया जाएगा। इसके लिए अभी तक साढ़े तीन लाख पंजीयन भी हो चुके हैं। हर जिले में क्यू लैस मतदान केंद्र भी बनाए जा रहे हैं। भोपाल में इनकी संख्या पांच तक हो सकती है। संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विकास नरवाल ने बताया कि देश में क्यू लैस मतदान केंद्र बनाने का प्रयोग 2013 के विधानसभा चुनाव में हुआ था।
यदि कोई शिकायत हो तो पहले आप कंट्रोल रूम, सी विजिल एप, डायल 100 एवं पुलिस स्टेशन के जरिए शिकायत दर्ज कराएं।
चंडीगढ़ (हरियाणा) । हरियाणा सरकार ने दागी लोगों को सरकारी नौकरियों से दूर रखने के लिए एक अहम कदम उठाया है। हरियाणा सरकार के प्रवक्ता का कहना है कि सरकारी नौकरी पाने वाले युवाओं को अब दो महीने के भीतर चरित्र प्रमाण पत्र जमा कराना होगा। उसके बाद इन प्रमाण पत्रों की जांच की जाएगी। और फिर उन्हें सेवा में रखा जाएगा।
आपको बता दें कि हरियाणा सरकार ने हरियाणा लोक सेवा आयोग व हरियाणा राज्य कर्मचारी आयोग द्वारा सिफारिश किये गए उम्मीदवारों के विषय में अहम फैसला लिया है। जिसके तहत किसी भी पद पर उम्मीदवारों की नियुक्ति 31 दिसंबर, 2018 तक बिना चरित्र प्रमाण की जांच किये प्रोविजनल आधार पर की जाएगी। और फिर प्रोविजनल आधार पर नियुक्त ऐसे उम्मीदवारों के चरित्र प्रमाण पत्र की जांच दो माह की अवधि के दौरान की जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की कोई खामी पाई जाती है तो ऐसे उम्मीदवार को सेवा में नहीं रखा जाएगा।
चंडीगढ़ (हरियाणा) । हरियाणा सरकार ने दागी लोगों को सरकारी नौकरियों से दूर रखने के लिए एक अहम कदम उठाया है। हरियाणा सरकार के प्रवक्ता का कहना है कि सरकारी नौकरी पाने वाले युवाओं को अब दो महीने के भीतर चरित्र प्रमाण पत्र जमा कराना होगा। उसके बाद इन प्रमाण पत्रों की जांच की जाएगी। और फिर उन्हें सेवा में रखा जाएगा।
आपको बता दें कि हरियाणा सरकार ने हरियाणा लोक सेवा आयोग व हरियाणा राज्य कर्मचारी आयोग द्वारा सिफारिश किये गए उम्मीदवारों के विषय में अहम फैसला लिया है। जिसके तहत किसी भी पद पर उम्मीदवारों की नियुक्ति 31 दिसंबर, 2018 तक बिना चरित्र प्रमाण की जांच किये प्रोविजनल आधार पर की जाएगी। और फिर प्रोविजनल आधार पर नियुक्त ऐसे उम्मीदवारों के चरित्र प्रमाण पत्र की जांच दो माह की अवधि के दौरान की जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की कोई खामी पाई जाती है तो ऐसे उम्मीदवार को सेवा में नहीं रखा जाएगा।
भोपाल (मध्य प्रदेश)। मंगलवार को लोकायुक्त पुलिस ने एक बार फिर एक भ्रष्टचार आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार किया। वाणिज्यिक कर में सहायक आयुक्त विशाल मेधा पेट्रोल पंप संचालक से 50 हजार रुपए की रिश्वत ले रहे थे, तभी लोकायुक्त पुलिस ने उन्हें रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। और मामले में आगे की कार्रवाई शुरु कर दी।
बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता सीहोर निवासी दीपक कोरी का अष्टा में एक पेट्रोल पंप है। जिसकी ऑडिट रिपोर्ट को स्वीकृत करके टैक्स का निर्धारण होना था। इसके लिए दीपक कोरी ने वाणिज्यिक कर विभाग में सहायक आयुक्त विशाल मेधा से मुलाकात की और टैक्स के निर्धारण की मांग की। लेकिन ऐसा करने के लिए विशाल मेधा ने दीपक से 02 लाख रुपए की रिश्वत की मांगी। हालांकि दोनों के बीच बातचीत के बाद रिश्वत की राशि किश्तों में देने की बात तय हुई। लेकिन दीपक कोरी ने रिश्वत की बजाय विशाल मेधा को सबक सिखाने का निश्चय किया और भोपाल लोकायुक्त पुलिस में शिकायत कर दी । जिसके बाद अधीक्षक राजेश मिश्रा के मार्गदर्शन में लोकायुक्त पुलिस ने सहायक आयुक्त को रंगेहाथ गिरफ्तार करने के लिए जाल बिझाया। और तय योजना के मुताबिक जैसे ही दीपक कोरी ने सहायक आयुक्त को 50 हजार रुपए की एक किश्त दी, वैसे ही लोकायुक्त पुलिस सहायक आयुक्त मेधा को उनके ऑफिस में रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों गिरफ्तार कर लिया और उन्हें अपने साथ ले गयी।
मधुबनी (बिहार) । प्रदेश में फर्जी डीग्री के जरिए नौकरी करने वाले शिक्षकों का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ है कि ऐसा ही एक और मामला बिहार के मधुबनी जिले में सामने आया है। जहां के राजनगर प्रखंड में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय में एनआईओएस के परीक्षा में अंक देने के नाम पर रिश्वतखोरी का वीडियो वायरल हुआ है।
इस वीडियो के वायरल होने के बाद जब मामले की जांच-पड़ताल की गयी तो पता चला कि प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय में बिना रिश्वतखोरी के शिक्षा से संबंधित कोई कार्य नहीं होता है। वहीं सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बदस्तूर जारी इस रिश्वतखोरी को रोकने की बजाय शिक्षा विभाग के अधिकारी भी इसे बढ़ावा देने में मशगूल हैं। इस मामले पर जब शिक्षा विभाग के कर्मचारियों से ऑफ द रिकॉर्ड राय पूछी गयी तो उनका कहना था कि अगर हमलोग रिश्वत नहीं लेंगे तो ऊपर के ऑफिसर को क्या देंगे । कर्माचारियों के इस बयान से जाहिर होता है जिले के शिक्षा पदाधिकारी भी इस भ्रष्टाचार में शामिल हैं। वीडियो ये साफ जाहिर होता है कि शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार कितने चरम पर जारी है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इन कार्मचारियों में रिश्वतखोरी को लेकर किसी प्रकार का डर नहीं दिखाई देता है।
रायपुर (छत्तीगढ़)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का खुमार अब लोगों के दिल से उरतरने लगा है। नरेंद्र मोदी की अपील पर दूसरों के लिए गैस सब्सिडी छोड़ने वाले एलपीजी उपभोक्ता सब्सिडी दोबारा पाने के लिए गैस एजेंसियों व कंपनियों की ऑनलाइन साइट पर आवेदन करने लगे हैं। देश में गैस सिलेंडर के दाम लगातार बढ़ते दाम से लोग बहुत परेशान हैं। ऐसा लग रहा है कि आने वाले दिनों में सिलेंडर के दाम और भी बढ़ सकते हैं। रायपुर में इन दिनों गैस सिलेंडर के दाम 1019 रुपए पहुंच गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर कई लोगों ने घरेलू गैस पर मिलने वाली सब्सिडी छोंड़ दी थी। लेकिन सिलेंडर के आसमान छूते दामों के बाद अपने फैसले पर पछता रहे हैं। हालांकि गैस कंपनियां ऐसे उपभोक्ताओं को राहत देने का एलान कर चुकी हैं। गैस कंपनियां उपभोक्ताओं से कह चुकी हैं कि जिन्हें गैस सब्सिडी वापस चाहिए उन्हें सिर्फ आवेदन देना होगा। फिर अगली डिलीवरी में सब्सिडी मिलनी शुरू हो जाएगी। कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि सब्सिडी चाहने वाले यह ध्यान रखें कि उनकी आय 10 लाख से अधिक न हो।
उपभोक्ताओं को घरेलू सब्सिडी को दोबारा प्राप्त करने के लिए गैस एजेंसी पर जाकर हाथ से लिखकर प्रार्थना पत्र देना होगा। इसमें गैस कनेक्शन नंबर, बैंक खाता नंबर, आधार नंबर व पैन कार्ड की प्रति भी जमा करनी होगी। इसके अलावा उपभोक्ताओं को एजेंसी पर एक फार्म भी भरना होगा। इसमें दी गई सूचना सही है, या कोई बात छुपाई गयी है तो संबंधित कंपनी कार्रवाई करने को स्वतंत्र हैं। उपभोक्ता द्वारा आवेदन करने के एक सप्ताह में गैस कंपनी के क्षेत्रीय प्रभारी द्वारा जांच की जाएगी। फिर सप्ताह भर में जांच होने के बाद उपभोक्ता की सब्सिडी बहाल कर दी जाएगी। उपभोक्ता आपातकालीन स्थिति में गैस कंपनियों के हेल्प लाइन नंबर 1906 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा हेल्प लाइन नंबर 1800-2333-555 पर फोन कर जानकारी या मदद प्राप्त कर सकते हैं।
पटना (बिहार) । दानापुर नगर परिषद कार्यालय में हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां शनिवार को राज्य निगरानी विभाग की टीम ने प्रधान लिपिक उमाशंकर प्रसाद और सहयोगी रमाशंकर भारतीय को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया और साथ ही अलमारी में बोरे में भरकर रखे गए 24 लाख 441 रुपये भी बरामद कर लिए। इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद टीम इस बात की जांच कर रही है बोरे में भरा नोट किसका है ? राज्य निगरानी विभाग की टीम दोनों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कर लिया है।
राज्य निगरानी टीम के डीएसपी जमीरउद्दीन ने बताया कि विद्यानंद सिंह नाम के एक ठेकेदार ने प्रधान लिपिक उमाशंकर प्रसाद के खिलाफ शिकायत की थी। जिसका सत्यापन करने पर शिकायत को सही पाया गया। इसके बाद टीम ने जाल बिछाकर गोला रोड स्थित राजधानी फ्यूल नाम के एक पेट्रोल पंप पर 1 लाख 67 हजार रिश्वत लेते प्रधान लिपिक उमाशंकर प्रसाद और सहयोगी रमाशंकर भारतीय को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद राज्य निगरानी विभाग की टीम ने दानापुर के नगर परिषद कार्यालय में छापेमारी की। वहां के प्रधान लिपिक के अलमीरा से 22 लाख 90 हजार रुपए नगद बरामद किया गया। ये पैसे अगल-अलग बोरों में छुपाकर रखे गए थे। डीएसपी के अनुसार प्रधान लिपिक उमाशंकर प्रसाद इन पैसों का कोई लेखा-जोखा नहीं दे रहे हैं। इस छापेमारी में कई और दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। डीएसपी के मुताबिक प्रधान लिपिक उमाशंकर पर रिश्वत लेने के मामले के साथ-साथ आय से अधिक संपत्ति का मामला भी बनेगा और दोनों मामलों में उनपर केस दर्ज किया जाएगा। फिलहाल, उन्हें और उनके सहयोगी को जेल भेजा जा रहा है।
आपको बता दें कि ठेकेदार विद्यानद सिंह ने रामजयपाल नगर में नाले और सड़क निर्माण का काम किया था । इसी काम का बिल दानापुर नगर परिषद से क्लियर होना था। नगर परिषद के प्रधान लिपिक उमाशंकर प्रसाद इसी काम के बिल को क्लियर करने के लिए ठेकेदार विद्यानंद सिंह से 1 लाख 67 हजार रिश्वत के तौर पर मांग रहे थे। जिसकी शिकायत मिलने के बाद राज्य निगरानी विभाग की टीम ने कार्रवाई की।
जबलपुर (मध्य प्रदेश) । देशभर में सड़क हादसों में तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा न मिलने से अक्सर कई घायलों की मौत हो जाती है। इसको ध्यान में रखते हुए जबलपुर की पुलिस ने एक सराहनीय कदम उठाया है। अब पुलिस सड़क हादसा होने या मारपीट के मामले में घायलों को तुरंत राहत देने के लिए मरहम-पट्टी करेगी। इसके लिए वह अपने वाहनों में फर्स्ट एड किट रखेगी। इस योजना के तहत पहले चरण में राजपत्रित पुलिस अधिकारियों व थाना प्रभारियों के वाहनों को इस किट के लिए चिन्हित किया गया है।
पुलिस अधीक्षक अमित कुमार सिंह का कहना है कि मारपीट या हादसों में घायलों तक सबसे पहले पुलिस पहुंचती है। अक्सर मौके पर एम्बुलेंस पहुंचने या अस्पताल तक पहुंचाने में घायलों के शरीर से काफी मात्रा में खून बह चुका होता है, जिससे जान जाने का जोखिम बढ़ जाता है। और उनके इलाज की कोई सुविधा नहीं रहती है। ऐसी स्थिति में पुलिस वाहनों में किट उपलब्ध होने से घायलों को राहत मिलेगी। पुलिस वाहनों में मौजूद फर्स्ट एड किट में दर्द व बुखार की दवा के साथ एंटीबायोटिक, मलहम, पट्टी, एंटीसेप्टिक भी सुविधा उपलब्ध करायी गयी है। इसके लिए फिलहाल 50 फर्स्ट एड किट की खरीदी की गई है।
जबलपुर (मध्य प्रदेश) । देशभर में सड़क हादसों में तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा न मिलने से अक्सर कई घायलों की मौत हो जाती है। इसको ध्यान में रखते हुए जबलपुर की पुलिस ने एक सराहनीय कदम उठाया है। अब पुलिस सड़क हादसा होने या मारपीट के मामले में घायलों को तुरंत राहत देने के लिए मरहम-पट्टी करेगी। इसके लिए वह अपने वाहनों में फर्स्ट एड किट रखेगी। इस योजना के तहत पहले चरण में राजपत्रित पुलिस अधिकारियों व थाना प्रभारियों के वाहनों को इस किट के लिए चिन्हित किया गया है।
पुलिस अधीक्षक अमित कुमार सिंह का कहना है कि मारपीट या हादसों में घायलों तक सबसे पहले पुलिस पहुंचती है। अक्सर मौके पर एम्बुलेंस पहुंचने या अस्पताल तक पहुंचाने में घायलों के शरीर से काफी मात्रा में खून बह चुका होता है, जिससे जान जाने का जोखिम बढ़ जाता है। और उनके इलाज की कोई सुविधा नहीं रहती है। ऐसी स्थिति में पुलिस वाहनों में किट उपलब्ध होने से घायलों को राहत मिलेगी। पुलिस वाहनों में मौजूद फर्स्ट एड किट में दर्द व बुखार की दवा के साथ एंटीबायोटिक, मलहम, पट्टी, एंटीसेप्टिक भी सुविधा उपलब्ध करायी गयी है। इसके लिए फिलहाल 50 फर्स्ट एड किट की खरीदी की गई है।
हैदराबाद (तेलंगाना)। ऐसा लगता है कि भ्रष्टाचार के दीमक ने देश के हर सरकारी विभाग को खोखला करके रख दिया है। ताजा भ्रष्टाचार का आरोप एक अतिरिक्त जिला न्यायधीश पर लगा है। जिसके खिलाफ भ्रटाचार विरोधी ने ब्यूरो आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप का मामला दर्ज कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
आपको बता दें कि अतिरिक्त जिला न्यायाधीश वैद्य वारा प्रसाद के खिलाफ हैदराबाद में स्थित उच्च न्यायालय को शिकायत याचिका मिली थी कि उन्होंने कथित रूप से अकूत संपत्ति जमा कर रखी है। जिसके बाद उच्च न्यायालय ने इन आरोपों के प्रारंभिक सत्यापन कराया और फिर भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो को उनके खिलाफ आगे कार्यवाही करने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद एसीबी ने वैद्य वारा प्रसाद के तेलंगाना और महाराष्ट्र के कई ठिकानों की तलाशी ली थी। और फिर मंगलवार को उच्च न्यायालय के निर्देश पर रंगारेड्डी जिला अदालत के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश वैद्य वारा प्रसाद के खिलाफ मामला दर्ज किया था। एसीबी अधिकारियों ने कहा था कि न्यायाधीश, उनके रिश्तेदारों तथा सहयोगियों के घरों पर तलाशी में संपत्ति तथा अन्य से संबंधित कई दस्तावेजों का पता चला है। जिसकी कीमत करीब तीन करोड़ रुपए है। एसीबी के एक शीर्ष अधिकारी के मुताबिक रांगा रेड्डी जिला अदालत के 14वें अतिरिक्त जिला न्यायाधीश वैद्य वारा प्रसाद को एसीबी न्यायाधीश के समक्ष पेश किया गया, जिन्होंने उन्हें 28 नवम्बर तक उन्हें चंचलगुडा के केंद्रीय कारागार में न्यायिक हिरासत में भेज दिया।