Total: 1726 results found.
Page 68 of 87
नई दिल्ली । दिल्ली सरकार में जीएसटी असिस्टेंट कमिश्नर जीतेंद्र जून और जीएसटी कर्मचारी दिनेश खुराना को सीबीआई ने रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। और दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। फिर उन्हें कोर्ट में पेश कर दिया है।
सीबीआई को शिकायत मिली थी कि असिस्टेंट कमिश्नर जींतेंद्र जून दिनेश खुराना के जरिए दिल्ली के करोब बाग स्थित एक निजी फर्म से रिश्वत की मांग कर रहे हैं। इसकी शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने जाल बिछाकर 6 लाख रुपए की रिश्वत लेते दोनों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया । और इस मामले में दिल्ली-एनसीआर में कई ठिकानों पर छापेमारी की, जहां से 22 लाख रुपए बरामद किए गए हैं। इन ठिकानों में छापेमारी के बाद सीबीआई ने दोनों आरोपियों को दिल्ली की कोर्ट में पेश कर दिया है।
नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वालों के नामों का खुलासा नहीं करने पर केंद्रीय सूचना आयोग ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही केंद्रीय सूचना आयोग ने प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से कहा है कि पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का डूबे कर्ज पर लिखा पत्र सार्वजनिक किया जाए। आयोग ने इस संबंध में 16 नवंबर से पहले जवाब मांगा है।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद 50 करोड़ रूपये और उससे अधिक का कर्ज लेने और जानबूझकर उसे नहीं चुकाने वालों के नामों के संबंध में आरबीआई ने सूचना नहीं उपलब्ध करायी। इसको लेकर नाराज केंद्रीय सूचना आयोग ने गवर्नर उर्जित पटेल से ये बताने के लिए कहा है कि फैसले की ‘‘अनुपालना नहीं करने’’ को लेकर उन पर क्यों न अधिकतम जुर्माना लगाया जाए। वहीं सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलू का कहना है, कि आरटीआई नीति को लेकर जो आरबीआई गवर्नर और डिप्टी गवर्नर कहते हैं और जो उनकी वेबसाइट कहती है, उसमें कोई मेल नहीं है। जयंती लाल मामले में सीआईसी के आदेश की सुप्रीम कोर्ट की ओर से पुष्टि किए जाने के बावजूद सतर्कता रिपोर्टों और निरीक्षण रिपोर्टों में अत्यधिक गोपनीयता रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि इस अवज्ञा के लिए सीपीआईओ को दंडित करने से किसी उद्देश्य की पूर्ति नहीं होगी, क्योंकि उन्होंने शीर्ष प्राधिकारियों के निर्देश पर कार्य किया। आचार्युलू ने कहा, ‘आयोग गवर्नर को डीम्ड पीआईओ मानता है, जो कि खुलासा नहीं करने और सुप्रीम कोर्ट व सीआईसी के आदेशों को नहीं मानने के लिए जिम्मेदार हैं।
केंद्रीय सूचना आयोग के अनुसार, आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने गत 20 सितम्बर को केंद्रीय सतर्कता आयोग में कहा था कि सतर्कता पर केंद्रीय सतर्कता आयोग की ओर से जारी दिशानिर्देश का उद्देश्य अधिक पारर्दिशता, सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और सत्यनिष्ठा की संस्कृति को बढ़ावा देना तथा उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले संगठनों में समग्र सतर्कता प्रशासन को बेहतर बनाना है।
पटना (बिहार) । पटना पुलिस लाइन में एक महिला सिपाही की मौत पर सिपाही विद्रोह मामले में नीतीश सरकार 175 पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया। और 23 पुलिसकर्मियों को सेवा से निलंबित कर दिया है। इनमें हवलदार, एएएसआई और 3 पुलिसकर्मी ट्रैफिक भी शामिल हैं। पुलिसकर्मियों का आरोप था कि उन्हें छुट्टी तक नहीं दी जाती है। मृतका का भी छुट्टी न मिलने के कारण सही ढंग से इलाज नहीं हो पाया, जिससे उनकी मौत हो गई। इससे नाराज होकर उन्होंने यह कदम उठाया।
आपको बता दें कि शुक्रवार को पटना में 2 नवंबर को महिला सिपाही सविता पाठक की डेंगू से मौत हो गई थी। पुलिसकर्मियों का आरोप था कि महिला पुलिसकर्मी को इलाज के लिए पर्याप्त छुट्टी नहीं दी गई। इसी से नाराज पुलिसकर्मियों ने पटना की पुलिस लाइन में जमकर हंगामा किया। लाठी और डंडे से लैस पुलिसकर्मियों ने अधिकारियों को खदेड़ दिया और गाड़ियों को तोड़ डाला। हंगामे के दौरान ट्रेनी पुलिसवालों ने एसपी सिटी, सार्जेंट और डीएसपी की पिटाई की तो पुलिस लाइन पहुंचे एससपी को देखते ही पथराव किया। पुलिसवालों के हमले के दौरान सार्जेंट मेजर सह डीएसपी मसलाउद्दीन, एसपी सिटी और एसपी ग्रामीण को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। इस दौरान मीडियाकर्मियों को भी निशाना बनाया था। इस हमले के बाद सभी नामजद और अज्ञात पुलिसकर्मियों पर अपने अधिकारियों पर जानलेवा हमला करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का पटना के बुद्धा कालोनी थाना में केस दर्ज हुआ था।
इस सिपाही विद्रोह के बाद एसएसपी मनु महाराज ने इस मामले के दोषी लोगों पर कार्रवाई कराने की बात कही थी। और फिर जोनल आईजी नैयर हसनैन खां की अध्यक्षता में जांच कमिटी को दोषियों का पता लगाने और मामले की तफ्तीश करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद इस कमिटी ने रविवार को 170 से अधिक पुलिसकर्मियों को मामले में दोषी बताया, जिसके बाद रविवार को इन सभी पर कार्रवाई की गई। वहीं घटना में शामिल पुलिस लाइन में तैनात 23 को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई का आदेश दिया गया हैं। इनमें 3 पुलिसकर्मी ऐसे हैं, जिन्हें अनुशासन बनाये रखने की जिम्मेदारी दी गई थी। जोनल आईजी ने इसके साथ ही दस वर्षों से पुलिस लाइन में जमे 93 पुलिसकर्मी को स्थानांतरण की सिफारिश की है। एसएसपी मनु महाराज ने बताया कि सविता पाठक को छुट्टी नहीं देने पर तीन पुलिसकर्मियों को भी निलंबित कर दिया गया है।
नई दिल्ली। हमारा देश अंग्रेजों से सात दशक पहले ही आजाद हो चुका है, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय में आज भी बहस और फैसले अंग्रेजी में ही सुनाए जाते हैं। लेकिन रंजन गोगोई के नये मुख्य न्यायाधीश बनने के बाद एक नई उम्मीद जगी है। मुख्य न्यायाधीश का कहना है कि विभिन्न राज्यों से आने वाले हजारों लोगों को अंग्रेजी नहीं आती है ऐसे में उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का अंग्रेजी आदेश व फैसला समझ में नहीं आता है, जबकि कई मामलों के फैसले बेहद गंभीर होते हैं इसलिए इन फैसलों को हिंदी में अनुवाद करके देने पर विचार हो रहा है। इसके बाद इसका क्षेत्रीय भाषाओं में भी अनुवाद करने की कोशिश की जाएगी। इतना ही नहीं बड़े फैसलों को संक्षिप्त करके एक या दो पन्नों में किया जाएगा। जिससे आम लोग भी कोर्ट के फैसले को समझ सकें।
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने शुक्रवार को पत्रकारों के साथ हुई अनौपचारिक बातचीत में कहा कि अगर कोई व्यक्ति 35 साल तक मुकदमा लड़ता है और अपनी जमीन हार जाता है, तो उसके हाथ में अंग्रेजी का फैसला पकड़ाया जाता है, जिसमें उसके जमीन हारने की बात होती है, लेकिन वह उस फैसले को नहीं समझ सकता, क्योंकि उसे अंग्रेजी नहीं आती। वह अगर फैसला समझने के लिए वकील के पास जाता है तो वकील पैसे लिए बगैर फैसला समझाता नहीं है। ऐसे लोगों के लिए फैसलों का अनुवाद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह फैसलों का हिंदी में अनुवाद कराने पर विचार कर रहे हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय भाषाओं में भी अनुवाद करने की कोशिश की जाएगी। वहीं मुख्य न्यायाधीश द्वारा बनाया गया थिंक टैंक सर्वोच्च न्यायालय के सैकड़ों पेज के तकनीकी कानूनी भाषा के फैसलों की आम जनता की समझ में आने वाली सीधी साधी भाषा में समरी तैयार करेगा। जिससे जो फैसले सर्वोच्च न्यायालय देता है वह वादी की समझ में आ सके।
नई दिल्ली। हमारा देश अंग्रेजों से सात दशक पहले ही आजाद हो चुका है, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय में आज भी बहस और फैसले अंग्रेजी में ही सुनाए जाते हैं। लेकिन रंजन गोगोई के नये मुख्य न्यायाधीश बनने के बाद एक नई उम्मीद जगी है। मुख्य न्यायाधीश का कहना है कि विभिन्न राज्यों से आने वाले हजारों लोगों को अंग्रेजी नहीं आती है ऐसे में उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का अंग्रेजी आदेश व फैसला समझ में नहीं आता है, जबकि कई मामलों के फैसले बेहद गंभीर होते हैं इसलिए इन फैसलों को हिंदी में अनुवाद करके देने पर विचार हो रहा है। इसके बाद इसका क्षेत्रीय भाषाओं में भी अनुवाद करने की कोशिश की जाएगी। इतना ही नहीं बड़े फैसलों को संक्षिप्त करके एक या दो पन्नों में किया जाएगा। जिससे आम लोग भी कोर्ट के फैसले को समझ सकें।
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने शुक्रवार को पत्रकारों के साथ हुई अनौपचारिक बातचीत में कहा कि अगर कोई व्यक्ति 35 साल तक मुकदमा लड़ता है और अपनी जमीन हार जाता है, तो उसके हाथ में अंग्रेजी का फैसला पकड़ाया जाता है, जिसमें उसके जमीन हारने की बात होती है, लेकिन वह उस फैसले को नहीं समझ सकता, क्योंकि उसे अंग्रेजी नहीं आती। वह अगर फैसला समझने के लिए वकील के पास जाता है तो वकील पैसे लिए बगैर फैसला समझाता नहीं है। ऐसे लोगों के लिए फैसलों का अनुवाद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह फैसलों का हिंदी में अनुवाद कराने पर विचार कर रहे हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय भाषाओं में भी अनुवाद करने की कोशिश की जाएगी। वहीं मुख्य न्यायाधीश द्वारा बनाया गया थिंक टैंक सर्वोच्च न्यायालय के सैकड़ों पेज के तकनीकी कानूनी भाषा के फैसलों की आम जनता की समझ में आने वाली सीधी साधी भाषा में समरी तैयार करेगा। जिससे जो फैसले सर्वोच्च न्यायालय देता है वह वादी की समझ में आ सके।
अमेठी (उत्तर प्रदेश) । चोरी और सीनाजोरी करने वाले प्राथमिक स्कूल के एक सहायक शिक्षक समेत पांच सहायक शिक्षक बर्खास्त कर दिए गए हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने प्रमाणपत्रों की सत्यापन रिपोर्ट मिलने के बाद इन सहायक शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की है। और एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही वेतन की राशि की रिकवरी का भी आदेश दे दिया है।
आपको बता दें कि वर्ष 2016 में 16,448 सहायक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया के तहत अमेठी जिले में 434 अभ्यर्थियों को अलग-अलग तिथि में नियुक्ति दी गई थी। इन सहायक शिक्षकों की नियुक्ति होने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी के शैक्षिक अभिलेखों का सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान कई शिक्षकों के अंकपत्र व प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। इसकी जानकारी मिलने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने संबंधित शिक्षकों से जवाब मांगा और इसके बाद उन्हें व्यक्तिगत तौर पर बुलाकर सुनवाई भी की। अंकपत्र व प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विनोद मिश्र के आदेश से जिला स्तरीय कमेटी ने प्राथमिक स्कूलों में दो वर्ष से कार्यरत पांच सहायक शिक्षकों की सेवा समाप्त कर दी। जिन शिक्षकों के अंकपत्र व प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं, उनमें शुकुल बाजार के प्राथमिक विद्यालय तेंदुआ खास में तैनात नयन कुमार व इसी ब्लॉक के पीएस किशनी में तैनात अखिलेश कुमार यादव, जामों के पीएस पूरे पवरमेश्वरी में तैनात सरोज कुमार भारती, भादर के पीएस भदांव में तैनात अखिलेश कुमार सिंह व सिंहपुर ब्लॉक के पीएस शुक्लपुर में तैनात रामदेव शामिल हैं। बर्खास्त शिक्षकों के खिलाफ केस दर्ज कराने और अब तक लिए गए वेतन की रिकवरी करने का आदेश संबंधित ब्लॉकों के खंड शिक्षाधिकारी को दिया है।
वहीं बेसिक शिक्षा अधिकारी की इस कार्रवाई से नाराज बर्खास्त सहायक शिक्षक नयन कुमार ने चोरी और सीनाजोरी वाले अंदाज में एक धमकी भरा पत्र लिख डाला। इस पत्र का उल्लेख बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सहायक शिक्षक के बर्खास्तगी आदेश में किया है। नयन कुमार ने 03 अक्टूबर को बेसिक शिक्षा अधिकारी को भेजे गए पत्र में धमकाते हुए लहजे में लिखा था कि यदि उसके खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई, रिकवरी व एफआईआर की गयी तो, ऐसी स्थिति में उन्हें जान से हाथ धोना पड़ सकता है। इतना ही नहीं चेतवनी भरे लहजे में लिखा था कि मेरी सलाह को अन्यथा लेने की गलती मत कीजिएगा। बताया जा रहा है कि कई अन्य सहायक शिक्षकों के खिलाफ भी जांच चल रही है। फर्जी अंकपत्र व प्रमाणपत्र पाए जाने पर जल्द ही उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
नई दिल्ली । सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 1 जनवरी, 2019 से पंजीकृत होने वाले सभी सार्वजनिक वाहनों में जीपीएस के साथ इमरजेंसी बटन लगाना जरूरी कर दिया है। लेकिन रिक्शा और ई-रिक्शा को इससे बाहर रखा गया है। ये नियम 'केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम 1989' के अंतर्गत आने वाले सभी पब्लिक सर्विस वाले वाहनों पर लागू होगा। सभी वाहन निर्माताओं को इस बारे में आदेश जारी कर दिए गए हैं। मंत्रालय ने यात्रियों, खासकर महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया गया है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को परामर्श देते हुए कहा है कि 31 दिसंबर, 2018 तक रजिस्टर होने वाले सभी पुराने सार्वजनिक वाहनों को व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम और पैनिक बटन अलग से इंस्टॉल करना होगा। मंत्रालय ने अपने नोटिफिकेशन में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग कम पैनिक बटन लगाने की प्रक्रिया को बताया है। इसमें राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा गया है कि फिटनेस सर्टिफिकेशन की चैकिंग के दौरान सार्वजनिक वाहनों में वीएलटी डिवाइस के इंस्टॉलेशन को सुनिश्चित करें।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार वीएलटी उपकरण बनानेवाली कंपनियां निगरानी के लिए जरूरी सेवा मुहैया कराएंगी। साथ ही सड़क परिवहन मंत्रालय, परिवहन विभाग और स्थानीय परिवहन कार्यालयों से एजेंसी, डिवाइस निर्माता और उनके अथरॉइज्ड डीलर की नियुक्ति करने के लिए कहा गया है। ये सेंटर वाहनों की ओवर स्पीडिंग, डिवाइस का स्टेटस भी वाहन डेटाबेस को भेजेंगे। मंत्रालय ने कहा है कि संबंधित राज्य या वीएलटी निर्माता या राज्य सरकार की तरफ से अधिकृत एजेंसी कमांड और कंट्रोल सेंटरों की स्थापना करेगी। यह केंद्र राज्यों के इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर, परिवहन विभाग या आरटीओ दफ्तरों, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, अपनी संबंधित एजेंसियों, उपकरण निर्माताओं, उनके अधिकृत डीलरों, टेस्टिंग एजेंसियों और परमिट धारकों जैसे हितधारकों को सूचनाएं उपलब्ध कराएंगे। इसके अलावा यह केंद्र ओवर स्पीड और उपकरणों के रखरखाव के संबंध में भी राज्य के वाहन डाटा बेस या प्रासंगिक डाटा बेस मुहैया कराएंगे।
आपको बता दें, सरकार की योजना है कि भविष्य में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग के जरिए सार्वजनिक वाहनों पर रियलटाइम नजर रखी जाए। जिससे यात्रियों, खासकर महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।
नई दिल्ली । सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 1 जनवरी, 2019 से पंजीकृत होने वाले सभी सार्वजनिक वाहनों में जीपीएस के साथ इमरजेंसी बटन लगाना जरूरी कर दिया है। लेकिन रिक्शा और ई-रिक्शा को इससे बाहर रखा गया है। ये नियम 'केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम 1989' के अंतर्गत आने वाले सभी पब्लिक सर्विस वाले वाहनों पर लागू होगा। सभी वाहन निर्माताओं को इस बारे में आदेश जारी कर दिए गए हैं। मंत्रालय ने यात्रियों, खासकर महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया गया है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को परामर्श देते हुए कहा है कि 31 दिसंबर, 2018 तक रजिस्टर होने वाले सभी पुराने सार्वजनिक वाहनों को व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम और पैनिक बटन अलग से इंस्टॉल करना होगा। मंत्रालय ने अपने नोटिफिकेशन में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग कम पैनिक बटन लगाने की प्रक्रिया को बताया है। इसमें राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा गया है कि फिटनेस सर्टिफिकेशन की चैकिंग के दौरान सार्वजनिक वाहनों में वीएलटी डिवाइस के इंस्टॉलेशन को सुनिश्चित करें।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार वीएलटी उपकरण बनानेवाली कंपनियां निगरानी के लिए जरूरी सेवा मुहैया कराएंगी। साथ ही सड़क परिवहन मंत्रालय, परिवहन विभाग और स्थानीय परिवहन कार्यालयों से एजेंसी, डिवाइस निर्माता और उनके अथरॉइज्ड डीलर की नियुक्ति करने के लिए कहा गया है। ये सेंटर वाहनों की ओवर स्पीडिंग, डिवाइस का स्टेटस भी वाहन डेटाबेस को भेजेंगे। मंत्रालय ने कहा है कि संबंधित राज्य या वीएलटी निर्माता या राज्य सरकार की तरफ से अधिकृत एजेंसी कमांड और कंट्रोल सेंटरों की स्थापना करेगी। यह केंद्र राज्यों के इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर, परिवहन विभाग या आरटीओ दफ्तरों, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, अपनी संबंधित एजेंसियों, उपकरण निर्माताओं, उनके अधिकृत डीलरों, टेस्टिंग एजेंसियों और परमिट धारकों जैसे हितधारकों को सूचनाएं उपलब्ध कराएंगे। इसके अलावा यह केंद्र ओवर स्पीड और उपकरणों के रखरखाव के संबंध में भी राज्य के वाहन डाटा बेस या प्रासंगिक डाटा बेस मुहैया कराएंगे।
आपको बता दें, सरकार की योजना है कि भविष्य में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग के जरिए सार्वजनिक वाहनों पर रियलटाइम नजर रखी जाए। जिससे यात्रियों, खासकर महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।
चंडीगढ़ (हरियाणा) । हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने सभी आइएएस, आइपीएस, एचसीएस और एचपीएस अधिकारियों के संबंध में एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अब हरियाणा में कार्यरत सभी आइएएस, आइपीएस, एचसीएस और एचपीएस अधिकारियों को अपनी संपत्ति का ब्योरा देना होगा। 1 अप्रैल से अधिकारियों की संपत्तियों का विवरण ऑनलाइन मौजूद रहेगा। राजपत्रित राज्य सिविल सेवा नियम- 2016 की धारा-24 के तहत सभी अधिकारियों के लिए यह जानकारी देना अनिवार्य होगा और जानकारी न देने वाले अफसरों के खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, बल्कि इसके लिए उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) में भी एंट्री की जाएगी।
इस आशय का फैसला हरियाणा राज्य सूचना आयोग की हेमंत अत्री और शिवरमन गौड़ पर आधारित दो सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को पौने नौ साल पुराने चार मामलों का एक साथ निपटारा करते हुए किया। पीठ ने संबंधित विभागों को समयबद्ध ढंग से फैसला लागू करने का आदेश दिया है। एनआइसी को अधिकारियों की संपत्तियों का विवरण जारी करने के लिए नया पोर्टल अगले सौ दिनों के भीतर तैयार करने को कहा गया है। मुख्य सचिव कार्यालय इस संबंध में जरूरी कदम उठाने के लिए सुनवाई के दौरान ही एनआईसी को पत्र लिख चुका है।
हेमंत अत्री के अनुसार पहली मार्च से 31 मार्च के बीच प्रदेश के सभी राजपत्रित अधिकारियों की संपत्तियों का विवरण हरियाणा सिविल सेवा नियमावली 2016 की धारा 24 के तहत संबंधित विभागों में जमा करवाने के बाद पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा, ताकि आम लोग जिस भी अधिकारी के बारे में जानकारी लेना चाहें, उन्हें वह घर बैठे ही आसानी से मुहैया हो सके।
आपको बता दें कि अभी तक सरकारी कर्मचारियों व अफसरों को हर साल निर्धारित प्रपत्र में अपनी संपत्ति की जानकारी विभागाध्यक्षों को देनी होती थी। नई व्यवस्था में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को छोड़कर सभी सरकारी मुलाजिमों को 31 अप्रैल तक चल-अचल संपत्ति की ऑनलाइन जानकारी देनी पड़ेगी। मुख्य सचिव कार्यालय ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। सभी महकमों को एचआरएमएस नोडल अधिकारी मनोनीत करने के निर्देश दिए गए है, ताकि ऑनलाइन ब्योरा देने में मुश्किल आने पर कर्मचारी मदद ले सकें।
चंडीगढ़ (हरियाणा) । हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने सभी आइएएस, आइपीएस, एचसीएस और एचपीएस अधिकारियों के संबंध में एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अब हरियाणा में कार्यरत सभी आइएएस, आइपीएस, एचसीएस और एचपीएस अधिकारियों को अपनी संपत्ति का ब्योरा देना होगा। 1 अप्रैल से अधिकारियों की संपत्तियों का विवरण ऑनलाइन मौजूद रहेगा। राजपत्रित राज्य सिविल सेवा नियम- 2016 की धारा-24 के तहत सभी अधिकारियों के लिए यह जानकारी देना अनिवार्य होगा और जानकारी न देने वाले अफसरों के खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, बल्कि इसके लिए उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) में भी एंट्री की जाएगी।
इस आशय का फैसला हरियाणा राज्य सूचना आयोग की हेमंत अत्री और शिवरमन गौड़ पर आधारित दो सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को पौने नौ साल पुराने चार मामलों का एक साथ निपटारा करते हुए किया। पीठ ने संबंधित विभागों को समयबद्ध ढंग से फैसला लागू करने का आदेश दिया है। एनआइसी को अधिकारियों की संपत्तियों का विवरण जारी करने के लिए नया पोर्टल अगले सौ दिनों के भीतर तैयार करने को कहा गया है। मुख्य सचिव कार्यालय इस संबंध में जरूरी कदम उठाने के लिए सुनवाई के दौरान ही एनआईसी को पत्र लिख चुका है।
हेमंत अत्री के अनुसार पहली मार्च से 31 मार्च के बीच प्रदेश के सभी राजपत्रित अधिकारियों की संपत्तियों का विवरण हरियाणा सिविल सेवा नियमावली 2016 की धारा 24 के तहत संबंधित विभागों में जमा करवाने के बाद पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा, ताकि आम लोग जिस भी अधिकारी के बारे में जानकारी लेना चाहें, उन्हें वह घर बैठे ही आसानी से मुहैया हो सके।
आपको बता दें कि अभी तक सरकारी कर्मचारियों व अफसरों को हर साल निर्धारित प्रपत्र में अपनी संपत्ति की जानकारी विभागाध्यक्षों को देनी होती थी। नई व्यवस्था में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को छोड़कर सभी सरकारी मुलाजिमों को 31 अप्रैल तक चल-अचल संपत्ति की ऑनलाइन जानकारी देनी पड़ेगी। मुख्य सचिव कार्यालय ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। सभी महकमों को एचआरएमएस नोडल अधिकारी मनोनीत करने के निर्देश दिए गए है, ताकि ऑनलाइन ब्योरा देने में मुश्किल आने पर कर्मचारी मदद ले सकें।
छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश)। लोकायुक्त पुलिस की लगातार हो रही कार्रवाई के बावजूद प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की रिश्वतखोरी रुकने का नाम ले रही है। ताजा मामला छिंदवाड़ा नगर निगम का है, जहां के सहायक राजस्व निरीक्षक शेरसिंह मोखलगाय को लोकायुक्त पुलिस की टीम ने 25 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।
इस संबंध में फरियादी महेश साहू का कहना है कि वर्ष 2013 में उसने छिंदवड़ा के तिगरा गांव में मकान बनवाया था। लेकिन अब यह गांव नगर निगम की सीमा के वार्ड 40 में आ गया है। जिसकी वजह से नगर निगम ने उसके मकान के सामने निर्माण कार्य न करने का नोटिस चस्पा कर दिया था। जब इस नोटिस के सबंध में उसने नगर निगम के सहायक राजस्व निरीक्षक शेरसिंह मोखलगाय बात की तो उन्होंने कहा कि वह अगर 25 हजार रुपए रिश्वत दे दे तो उसके घर के सामने से नोटिस हटा लिया जाएगा और उसे घर के सामने निर्माण की अनुमति दे दी जाएगी। सहायक राजस्व निरीक्षक शेरसिंह मोखलगाय की हरकत से परेशान महेश ने मामले की शिकायत लोकायुक्त कर दी। लोकायुक्त टीम के बिछाए जाल के अनुसार जैसे ही पूजा लॉज के सामने सहायक राजस्व निरीक्षक शेरसिंह मोखलगाय ने महेश साहू से रिश्वत ली, वैसे ही डीसीपी सुनील झरबड़े के नेतृत्व में लोकायुक्त टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। और इसके बाद उसे नगर निगम कार्यालय ले गए। जहां फरियादी महेश और आरोपित शेरसिंह मोखलगाय के बयान लिए गए। और मामले में आगे की कार्रवाई शुरु कर दी। सुनील झरबड़े, डीएसपी लोकायुक्त का कहना है कि फिलहाल मामले में जांच जारी है। जिसके बाद इस मामले से जुड़ी अन्य कड़ियों को जोड़ा जाएगा। यदि इस मामले में और भी कोई संलिप्त पाया गया तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह होगा कि लोकायुक्त पुलिस आरोपित के खिलाफ क्या कार्रवाई करती है।
नई दिल्ली । भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआइडीएआइ) ने आधार के इस्तेमाल को लेकर जनता में जारी भ्रम को दूर करने के लिए बैंकों को दिशानिर्देश जारी किया है। यूआइडीएआइ ने अपने पत्र में बैंको को निर्देश दिया है कि वो प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के जरिए सब्सिडी और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं की शिनाख्त आधार ईकेवाईसी से करें। हालांकि सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं लेने वाले उपभोक्ताओं को बैंक में अपनी पहचान के लिए आधार उपलब्ध कराना आवश्यक नहीं है।
यूआइडीएआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि जो उपभोक्ता सरकारी सब्सिडी और कल्याणकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली राशि का हस्तांतरण सीधे अपने खाते में करना चाहते हैं। बैंक उन उपभोक्ताओं का बैंक खाता खोलने के क्रम में पहचान के लिए आधार ईकेवाईसी का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि सरकारी सब्सिडी और काल्याणकारी योजनाओं का लाभ न लेने वाले ग्राहकों का खाता खोलने के लिए बैंक आधार ईकेवाईसी का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। लेकिन यदि ग्राहक अपना आधार कार्ड स्वेच्छा से खाता खोलने के लिए बैंक को देता है तो बैंक उसका इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन बैंक इसके लिए उन्हें बाध्य नहीं कर सकते हैं। यूआइडीएआइ ने बैंकों को पत्र लिखकर आधार के इस्तेमाल को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। और इस पत्र की एक प्रति रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को भी भेज दी है।
आपको बता दें कि पिछले माह आधार मामले पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना आधार को संवैधानिक रूप से वैध करार दिया था। लेकिन कोर्ट ने बैंक खाते, मोबाइल फोन और स्कूल दाखिले में आधार अनिवार्य करने सहित कुछ प्रावधानों को रद्द कर दिया था। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने फैसले में आधार को आयकर रिटर्न भरने और पैन कार्ड बनाने के लिए अनिवार्य बताया था। हालांकि अब आधार कार्ड को बैंक खाते से लिंक करना जरूरी नहीं है और मोबाइल सिम का कनेक्शन देने के लिए टेलीकॉम कंपनियां आपसे आधार नहीं मांग सकती हैं।
नई दिल्ली । भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआइडीएआइ) ने आधार के इस्तेमाल को लेकर जनता में जारी भ्रम को दूर करने के लिए बैंकों को दिशानिर्देश जारी किया है। यूआइडीएआइ ने अपने पत्र में बैंको को निर्देश दिया है कि वो प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के जरिए सब्सिडी और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं की शिनाख्त आधार ईकेवाईसी से करें। हालांकि सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं लेने वाले उपभोक्ताओं को बैंक में अपनी पहचान के लिए आधार उपलब्ध कराना आवश्यक नहीं है।
यूआइडीएआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि जो उपभोक्ता सरकारी सब्सिडी और कल्याणकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली राशि का हस्तांतरण सीधे अपने खाते में करना चाहते हैं। बैंक उन उपभोक्ताओं का बैंक खाता खोलने के क्रम में पहचान के लिए आधार ईकेवाईसी का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि सरकारी सब्सिडी और काल्याणकारी योजनाओं का लाभ न लेने वाले ग्राहकों का खाता खोलने के लिए बैंक आधार ईकेवाईसी का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। लेकिन यदि ग्राहक अपना आधार कार्ड स्वेच्छा से खाता खोलने के लिए बैंक को देता है तो बैंक उसका इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन बैंक इसके लिए उन्हें बाध्य नहीं कर सकते हैं। यूआइडीएआइ ने बैंकों को पत्र लिखकर आधार के इस्तेमाल को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। और इस पत्र की एक प्रति रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को भी भेज दी है।
आपको बता दें कि पिछले माह आधार मामले पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना आधार को संवैधानिक रूप से वैध करार दिया था। लेकिन कोर्ट ने बैंक खाते, मोबाइल फोन और स्कूल दाखिले में आधार अनिवार्य करने सहित कुछ प्रावधानों को रद्द कर दिया था। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने फैसले में आधार को आयकर रिटर्न भरने और पैन कार्ड बनाने के लिए अनिवार्य बताया था। हालांकि अब आधार कार्ड को बैंक खाते से लिंक करना जरूरी नहीं है और मोबाइल सिम का कनेक्शन देने के लिए टेलीकॉम कंपनियां आपसे आधार नहीं मांग सकती हैं।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश) । झांसी की एक कर्मठ महिला सिपाही और छह माह की बच्ची की मां को डीजीपी ने सराहनीय तोहफा दिया। महिला सिपाही अर्चना सिंह का काम के प्रति समर्पण को देखते हुए डीजीपी ओपी सिंह ने झांसी से उसके गृह जनपद आगरा के पास पोस्टिंग देने का आदेश दे दिया। डीजीपी ने उन्हें 21वीं सदी की महिला का बेहतरीन उदाहरण बताया। डीजीपी ने रविवार को अर्चना से बात की और उसका हौसला बढ़ाया। उन्होंने ट्वीट किया कि इस मां ने हमें हर पुलिस लाइंस में पालना घर खोलने के लिए प्रेरित किया है।
सोशल मीडिया पर झांसी कोतवाली में बतौर सिपाही तैनात अर्चना सिंह को छह महीने के बच्चे को डेस्क पर लिटा कर काम करते हुए तस्वीर वायरल हो गई थी। अर्चना की इस कर्तव्य निष्ठा को देखकर लोगों ने काफी तारीफ की थी। वहीं डीआईजी सुभाष सिंह ने महिला सिपाही की कर्तव्य निष्ठा को देखते हुए एक हजार रुपए का नगद पुरस्कार भी दिया।
आपको बता दें कि झांसी में अर्चना के के साथ कोई नहीं है, इसलिए वह अपनी छह माह की बच्ची को अपने साथ कोतवाली ड्यूटी पर ले जाती हैं। अर्चना के पति गुड़गांव में प्राइवेट नौकरी करते हैं। एक और बड़ी बेटी है, जो कानपुर में दादा-दादी के साथ रहकर पढ़ाई कर रही है। अर्चना का कहना है कि इसमें उन्हें काफी परेशानी आती है। सुबह-सुबह घर में काम करना पड़ता है। अगर थोड़ा भी लेट हो जाए तो उन्हें डर सताता है। अर्चना ने बताया कि पिछले महीने ही उन्होंने छह माह की छुट्टी पूरी होने के बाद ड्यूटी ज्वाइन की है। अर्चना अपनी छह माह की बेटी को लेकर नाइट ड्यूटी भी करती हैं। इसके लिए उन्होंने एक बैग तैयार किया है, जिसमें सभी जरुरत की चीजें पहले से मौजूद होती हैं, बस उसमें दूध की बोतल रखनी होती है। लेकिन स्टाफ के सहयोग के कारण उनके नौकरी के घंटे आसानी से कट जाते हैं।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश) । झांसी की एक कर्मठ महिला सिपाही और छह माह की बच्ची की मां को डीजीपी ने सराहनीय तोहफा दिया। महिला सिपाही अर्चना सिंह का काम के प्रति समर्पण को देखते हुए डीजीपी ओपी सिंह ने झांसी से उसके गृह जनपद आगरा के पास पोस्टिंग देने का आदेश दे दिया। डीजीपी ने उन्हें 21वीं सदी की महिला का बेहतरीन उदाहरण बताया। डीजीपी ने रविवार को अर्चना से बात की और उसका हौसला बढ़ाया। उन्होंने ट्वीट किया कि इस मां ने हमें हर पुलिस लाइंस में पालना घर खोलने के लिए प्रेरित किया है।
सोशल मीडिया पर झांसी कोतवाली में बतौर सिपाही तैनात अर्चना सिंह को छह महीने के बच्चे को डेस्क पर लिटा कर काम करते हुए तस्वीर वायरल हो गई थी। अर्चना की इस कर्तव्य निष्ठा को देखकर लोगों ने काफी तारीफ की थी। वहीं डीआईजी सुभाष सिंह ने महिला सिपाही की कर्तव्य निष्ठा को देखते हुए एक हजार रुपए का नगद पुरस्कार भी दिया।
आपको बता दें कि झांसी में अर्चना के के साथ कोई नहीं है, इसलिए वह अपनी छह माह की बच्ची को अपने साथ कोतवाली ड्यूटी पर ले जाती हैं। अर्चना के पति गुड़गांव में प्राइवेट नौकरी करते हैं। एक और बड़ी बेटी है, जो कानपुर में दादा-दादी के साथ रहकर पढ़ाई कर रही है। अर्चना का कहना है कि इसमें उन्हें काफी परेशानी आती है। सुबह-सुबह घर में काम करना पड़ता है। अगर थोड़ा भी लेट हो जाए तो उन्हें डर सताता है। अर्चना ने बताया कि पिछले महीने ही उन्होंने छह माह की छुट्टी पूरी होने के बाद ड्यूटी ज्वाइन की है। अर्चना अपनी छह माह की बेटी को लेकर नाइट ड्यूटी भी करती हैं। इसके लिए उन्होंने एक बैग तैयार किया है, जिसमें सभी जरुरत की चीजें पहले से मौजूद होती हैं, बस उसमें दूध की बोतल रखनी होती है। लेकिन स्टाफ के सहयोग के कारण उनके नौकरी के घंटे आसानी से कट जाते हैं।
देवघर, (झरखंड)। साइबर अपराधियों के गढ़ देवघर व जामताड़ा ने झारखंड पुलिस की नींद उड़ा दी है। साइबर अपराधी देशभर में साइबर वारदातों को अंजाम देने के बाद प्रमुख रुप से देवघर और जामताड़ा को अपनी शरणगाह बनाए हुए हैं। ये शातिर अपराधी अपने दिमाग और तकनीक की सटीक जुगलबंदी करके धनकुबेर बन गए हैं। इन गांवों के साइबर अपराधी साइबर ठगी के माध्यम से देशभर के लोगों को चूना लगा रहे हैं और इन पैसों से ऐश-मौज कर रहे हैं। इन्होंने आलीशान मकान भी बना रखे हैं। इन्हें परिजनों का भी संरक्षण प्राप्त है। अगर पुलिस पकड़ने पहुंचती है तो उन पर सभी ग्रामीण हमला कर देते हैं। पुलिस भी इन गांवों में आने से कतराती है। झारखंड देश में साइबर अपराधियों का गढ़ बन गया है। देश भर की पुलिस इन्हें गिरफ्तार करने के लिए झारखंड पहुंच रही है।
पुलिस ने झारखंड के छह जिले, जिसमें रांची, गिरिडीह, देवघर, जामताड़ा, दुमका और धनबाद में अभियान चला कर 428 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जो हाल की सबसे बड़ी उपलब्धि है। छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली समेत कई राज्यों की पुलिस टीम साइबर अपराधी के तलाश में यहां पहुंची है। इनके पास से करोड़ों की संपत्ति जब्त की गई । साइबर अपराधियों का रहन-सहन और संपत्ति देख पुलिस अधिकारी भी भौचक हैं। जग्गाडीह नाम के एक गांव में करीब 50 नये ढलाई घर बन गये हैं। अब भी कई घर बन रहे हैं। 150 से अधिक कीमती बाइक और बोलेरो, स्कार्पियो, ट्रैक्टर व मालवाहक वाहनों की भरमार हो गयी है। कई लोगों ने जमीन समेत अन्य संपत्ति में भी साइबर अपराध का पैसा लगाया है। वहीं गांव के अन्य युवाओं को भी साइबर अपराध का प्रशिक्षण दिया जा रहा है ।
हाल ही में देवघर के मोहनपुर थाना क्षेत्र के घोरमारा में पुलिस ने छापेमारी कर सुभाष मंडल व संतोष मंडल को गिरफ्तार किया। इनके छह अन्य साथियों की तलाश जारी है। इनके घर से पुलिस ने तीन चार पहिया वाहन, चार दो पहिया वाहन व अन्य संपत्ति बरामद की है। इनका घर की भव्यता देख अधिकारियों के होश फाख्ता थे। घर की कीमत 70 लाख से अधिक आंकी जा रही है। हर कमरे में टीवी, एससी व ऐशोआराम की सुविधाएं थीं। घर में सीसीटीवी कैमरे तक लगे थे। पुलिस ने मधुपुर थाना क्षेत्र के जगदीशपुर के दरवे गांव में छापेमारी में सीताराम मंडल, उमेश मंडल व राम प्रसाद मंडल को गिरफ्तार किया। इनके भी आलीशान मकान हैं। पुलिस ने हाल में पालोजोरी थाना क्षेत्र के डुमरकोला गांव निवासी विकास मंडल व मोहनपुर थाना क्षेत्र के खडग़डिहया गांव निवासी योगेन्द्र मंडल को गिरफ्तार किया था। इन पर मध्यप्रदेश के रीवा निवासी एक व्यक्ति के खाता से 13 लाख रुपया उड़ाने का आरोप है। विकास मंडल की संपत्ति की पुलिस जांच कर रही है।
आगरा (उत्तर प्रदेश) । आगरा में जिलाधिकारी रहे चर्चित आईएएस अधिकारी जुहैर बिन सगीर भ्रष्टाचार के मामले में फंस गए हैं। उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) बरेली सेक्टर के इंस्पेक्टर ने फतेहाबाद थाने में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। जुहैर बिन सगीर पर जमीन की खरीद में भ्रष्टाचार करने का आरोप है। विजिलेंस की खुली जांच में पाया गया है कि उन्होंने आगरा के जिलाधिकारी पद पर तैनाती के दौरान अपनी मौसेरी बहन खालिदा रहमान को 20 लाख का अनुचित लाभ पहुंचाया। उस समय प्रदेश में सपा की सरकार थी। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे बनाने के लिए योजना बनाई जा रही थी। जुहेर बिन सगीर 20 फरवरी 2013 से पांच फरवरी 2014 तक आगरा के जिलाधिकारी रहे थे। वर्तमान में कृषि उत्पादन शाखा, लखनऊ में विशेष सचिव हैं।
जुहैर बिन सगीर के खिलाफ विजिलेंस बरेली सेक्टर के इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार शर्मा ने मुकदमा दर्ज कराया। मुकदमा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की तीन धाराओं के तहत बुधवार को दर्ज किया गया। मुकदमे में लिखाया गया है कि मुरादाबाद में जिलाधिकारी पद पर तैनात रहे जुहैर बिन सगीर के खिलाफ 4 जुलाई 2017 को दुष्यंत शर्मा ने शिकायत की थी। तत्कालीन एसपी सिटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने जुलाई 2017 को खुली जांच के आदेश दिए थे। 11 मई 2018 को विजिलेंस ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन के सुपुर्द की। 17 जुलाई 2018 को जुहैर बिन सगीर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए। उनके खिलाफ एक मुकदमा मुरादाबाद में भी लिखाया गया है।
जुहेर बिन सगीर को जानकारी थी कि एक्सप्रेस के लिए जमीन का अधिगृहण किया जाना है। इसकी सूचना जारी किए जाने से पहले ही उन्होंने अधिगृहण की जद में आने जा रही जमीन मौसेरी बहन खालिदा को खरीदवा दी। फतेहाबाद तहसील के ग्राम तिबाहा में .6915 हेक्टेयर और स्वारा .3640 हेक्टेयर जमीन 820000 में खरीदी गई। इसके तुरंत बाद 13 अक्तूबर 2013 को जमीन अधिगृहण की अधिसूचना जारी कर दी गई। जुलाई 2014 में जमीन का अधिगृहण हुआ तो 2865000 मुआवजा मिला। इस तरह 2045000 का लाभ हुआ।
तत्कालीन जिलाधिकारी जुहैर बिन सगीर ने अपने पद का दुरुपयोग करके मौसेरी बहन को लाभ पहुंचाया। जुहेर बिन सगीर के खिलाफ कुछ दिन पहले ही मुरादाबाद में भी विजिलेंस ने दो रिपोर्ट दर्ज कराई हैं। वहां दो घोटाले हुए। विकास प्राधिकरण के कब्जे वाली अर्बन सीलिंग की जमीन फर्जी दस्तावेज के जरिए निजी खाताधारकों को सौंप दी गई। दूसरा, जेल की जमीन में घोटाला किया गया।
जयपुर (राजस्थान)। वसुंधरा राजे सरकार ने प्रदेश के आठ लाख कर्मचारियों को दिवाली से पहले बोनस का तोहफा देने का एलान किया है। चुनाव आयोग से अनुमति मिलने के बाद राज्य के वित्त विभाग ने लेवल-12 तक के कर्मचारियों को बोनस देने के आदेश जारी कर दिए हैं। यह बोनस राजस्थान में 4800 ग्रेड पे तक के कर्मचारियों को मिलेगा। सरकार के इस फैसले से सरकारी खजाने पर 400 करोड़ रुपये का वित्तीय भार पड़ने का अनुमान है।
राज्य के आठ लाख कर्मचारियों को बोनस के रूप में 6,774 रुपये मिलेंगे। इसमें पंचायती राज संस्थाओं, स्थानीय निकाय एवं बोर्ड और निगम के कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है। हालांकि उन कर्मचारियों को बोनस का लाभ नहीं मिलेगा, जो 31 मार्च ,2018 तक सेवानिवृत हो गए या फिर जिन्होंने अनिवार्य सेवानिवृति ले ली है।
आपको बता दें कि सरकार ने कर्मचारियों को बोनस देने का निर्णय करीब दो सप्ताह पहले ही ले लिया था, लेकिन इसी बीच विधानसभा चुनाव का आचार संहिता लागू हो गई। आचार संहिता लागू होने के कारण सरकार ने चुनाव आयोग से अनुमति मांगी। अनुमति मिलने के बाद मंगलवार शाम को वित्त विभाग ने आदेश जारी कर दिए।
जयपुर (राजस्थान)। वसुंधरा राजे सरकार ने प्रदेश के आठ लाख कर्मचारियों को दिवाली से पहले बोनस का तोहफा देने का एलान किया है। चुनाव आयोग से अनुमति मिलने के बाद राज्य के वित्त विभाग ने लेवल-12 तक के कर्मचारियों को बोनस देने के आदेश जारी कर दिए हैं। यह बोनस राजस्थान में 4800 ग्रेड पे तक के कर्मचारियों को मिलेगा। सरकार के इस फैसले से सरकारी खजाने पर 400 करोड़ रुपये का वित्तीय भार पड़ने का अनुमान है।
राज्य के आठ लाख कर्मचारियों को बोनस के रूप में 6,774 रुपये मिलेंगे। इसमें पंचायती राज संस्थाओं, स्थानीय निकाय एवं बोर्ड और निगम के कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है। हालांकि उन कर्मचारियों को बोनस का लाभ नहीं मिलेगा, जो 31 मार्च ,2018 तक सेवानिवृत हो गए या फिर जिन्होंने अनिवार्य सेवानिवृति ले ली है।
आपको बता दें कि सरकार ने कर्मचारियों को बोनस देने का निर्णय करीब दो सप्ताह पहले ही ले लिया था, लेकिन इसी बीच विधानसभा चुनाव का आचार संहिता लागू हो गई। आचार संहिता लागू होने के कारण सरकार ने चुनाव आयोग से अनुमति मांगी। अनुमति मिलने के बाद मंगलवार शाम को वित्त विभाग ने आदेश जारी कर दिए।
नई दिल्ली। अगर अभी तक आपके घर में बिजली का कनेक्शन नहीं लगा है तो आपको चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। डाक विभाग के कर्मचारी ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर बिजली विहीन घरों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे और उसकी रिपोर्ट बिजली विभाग को देंगे, जिससे उन परिवारों को सौभाग्य योजना से जोड़कर बिजली उपलब्ध करायी जा सके। केंद्र सरकार के आदेश पर डाक विभाग द्वारा 25 अक्टूबर तक इस कार्य को पूरा किया जाना है।
गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली विहीन गांवों के घरों का सर्वे करने का काम अब तक बिजली विभाग के पास था। विभाग अपने हिसाब से घरों का सर्वे करके बिजली का कनेक्शन दे रहा था। लेकिन जब केंद्र सरकार को इसमें कई खामियों की जानकारी मिली तो सरकार ने सर्वे करने की जिम्मेदारी बिजली विभाग से लेकर डाक विभाग के डाकिया को दिया। ताकि किस घर में बिजली का कनेक्शन है और किस में नहीं है, इसकी सही जानकारी मिल सके । इस सर्वे के तहत डाक सेवकों को जिम्मेदारी दी गयी कि वो कुछ निर्धारित बिंदुओं पर जानकारी जुटाएं और फिर उसे बिजली निगम को ऑनलाइन भेजें। शासन की तरफ से सर्वे की तिथि 25 अक्तूबर तक रखी गई है। इसी को आधार मानकर केन्द्र सरकार 2019 में अपने आंकड़ों को जनता तक पहुंचाने का काम करेगी। दूसरा भविष्य में डाक विभाग को बिजली बिल वसूली से लेकर अन्य काम से विभाग को जोड़ा जा सके।
आपको बता दें कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी गरीबी रेखा के नीचे एवं गरीबी रेखा से ऊपर जीवन निर्वाह करने वाले परिवार बिना विद्युत कनेक्शन के रह रहे हैं। कई योजनाओं के बाद भी गरीबों को विद्युत कनेक्शन नहीं मिल पा रहा है। वहीं अफसरों द्वारा गलत रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दी गई। जिसके बाद ग्रामीण क्षेत्र में विद्युत कनेक्शन की सत्यता जांचने के लिए केंद्र सरकार के आदेश पर शासन द्वारा डाक विभाग को जिम्मेदारी सौंपी ।