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पटना (बिहार) । मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पटना के गांधी मैदान में राज्य के संविदा कर्मियों को शानदार तोहफा दिया है। नीतीश कुमार ने गांधी मैदान से ऐलान किया कि अब बिहार के सभी पांच लाख संविदा कर्मियों को स्थायी सरकारी कर्मियों की तरह लाभ मिलेगा। राज्य के सभी संविदाकर्मियों की सेवा स्थायी कर दी गई हैं। नीतीश ने कहा कि संविदाकर्मियों को सभी तरह का लाभ मिलेगा और उनकी सेवा शर्त अनुशंसा के अनुसार लागू होगी। इसके तहत छुट्टी, सेवा दिवस, नई भर्ती में मौका जैसी बातें शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि समिति द्वारा की गई अनुशंसा के अनुसार नियम लागू होंगे।
आपको बता दें कि संविदाकर्मियों के कल्याण के लिए बिहार के पूर्व मुख्य सचिव अशोक कुमार चौधरी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गयी थी। कमेटी ने सभी संविदाकर्मियों की सेवा 60 साल तक स्थायी करने और स्थायी कर्मचारियों की तरह बोनस, मेडिकल लीव, नई भर्ती में मौका और अन्य सुविधाएं देने की सिफारिश की थी। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सौंपी थी। बिहार के विभिन्न कार्यालयों में संविदा पर पांच लाख से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें कार्यालय सहायक से लेकर कंप्यूटर ऑपरेटर तक शामिल हैं। हालांकि अशोक चौधरी कमेटी की सिफारिशों को लागू करने से राज्य सरकार के खजाने पर बोझ पड़ेगा। वहीं राजनैतिक विश्लेषकों का कहना है कि नीतीश कुमार ने 2019 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए ये जबरदस्त दांव चला है। इस फैसले से करीब 20 लाख वोटरों को साधने की कोशिश की गयी है।
नई दिल्ली। बॉलीवुड स्टार अक्षय कुमार नए अवतार में देश के सामने आने वाले हैं। अक्षय कुमार ने मंगलवार को दिल्ली के ली मैरेडियन होटल में केंद्रीय सड़क परिवहन एंव राजमार्ग मंत्री नीतिन गड़करी के साथ 'सड़क सुरक्षा, जीवन रक्षा' जागरूकता अभियान की शुरूआत की है। केंद्रीय सड़क परिवहन एंव राजमार्ग मंत्रालय ने इस अभियान के लिए अक्षय कुमार को ब्रांड एम्बेसडर बनाया है। अक्षय कुमार लोगों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरुकता पैदा करेंगे। सरकार का मकसद देश में सड़क दुर्घटनाओं में मृ़तकों की बढ़ती संख्या में कमी लाना है और 14 अगस्त को इस कैम्पेन का नया वीडियो भी सामने आ चुका है।
'सड़क सुरक्षा, जीवन रक्षा' जागरूकता अभियान के उद्घाटन समारोह में नीतिन गड़करी और अक्षय कुमार ने 'सड़क सुरक्षा, जीवन रक्षा' अभियान के तहत बनाई गई तीनों लघु फिल्मों को रिलीज किया। तीनों लघु फिल्मों में अक्षय कुमार ने ट्रैफिक पुलिसकर्मी की भूमिका निभाई है। वीडियो में वह पुलिस की यूनिफार्म में अपने चिर-परिचित अंदाज में लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करते दिख रहे हैं। अक्षय कुमार ने ये वीडियो फेसबुक पर पोस्ट किया है। इस वीडियो में अक्षय मुंबई ट्रैफिक पुलिस के किरदार में नजर आ रहे हैं। उन्होंने वीडियो शेयर करते हुए रोड सेफ्टी के बारे में बताया और लिखा कि ''अपना और दूसरों का ख्याल रखे, क्योंकि रोड किसी के बाप की नहीं होती.'' इस वीडियो को देखकर आपको हंसी तो आएगी लेकिन एक अहम मैसेज भी मिलेगा। ट्रैफिक पुलिस बने अक्षय कुमार अलग अंदाज में लोगों को ट्रैफिक रूल तोड़ने पर सबक सिखा रहे हैं। अक्षय कुमार वीडियो में वह बिना हेलमेट पहने और बाइक पर ट्रिपलिंग करने वाले लड़के को अपने ही अंदाज में डांटते नजर आ रहे हैं। वहीं एक दूसरे वीडियो में गाड़ी में बिना सीटबेल्ट लगाए और फोन पर बात करने वाले शख्स को भी उसी स्टाइल में डांटते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो को काफी शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो में अक्षय ने ना सिर्फ दमदार एक्टिंग की बल्कि अच्छा मैसेज भी दिया है। इस मौके पर नितिन गड़करी ने कहा कि हमारा लक्ष्य देश में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना है। हमें उम्मीद है कि लोगों के पसंदीदा अभिनेता अक्षय कुमार के इस अभियान से जुड़ने के बाद सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ेगी। वहीं अक्षय कुमार का कहना है कि जैसे ही उन्हें हर वर्ष देश में होने वाले सड़क हादसों और उसके शिकार लोगों के आंकड़ों का पता चला वह हैरान रह गए। और उन्होंने तुरंत इस जागरूकता अभियान से जुड़ने का फैसला कर लिया।
नई दिल्ली। बॉलीवुड स्टार अक्षय कुमार नए अवतार में देश के सामने आने वाले हैं। अक्षय कुमार ने मंगलवार को दिल्ली के ली मैरेडियन होटल में केंद्रीय सड़क परिवहन एंव राजमार्ग मंत्री नीतिन गड़करी के साथ 'सड़क सुरक्षा, जीवन रक्षा' जागरूकता अभियान की शुरूआत की है। केंद्रीय सड़क परिवहन एंव राजमार्ग मंत्रालय ने इस अभियान के लिए अक्षय कुमार को ब्रांड एम्बेसडर बनाया है। अक्षय कुमार लोगों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरुकता पैदा करेंगे। सरकार का मकसद देश में सड़क दुर्घटनाओं में मृ़तकों की बढ़ती संख्या में कमी लाना है और 14 अगस्त को इस कैम्पेन का नया वीडियो भी सामने आ चुका है।
'सड़क सुरक्षा, जीवन रक्षा' जागरूकता अभियान के उद्घाटन समारोह में नीतिन गड़करी और अक्षय कुमार ने 'सड़क सुरक्षा, जीवन रक्षा' अभियान के तहत बनाई गई तीनों लघु फिल्मों को रिलीज किया। तीनों लघु फिल्मों में अक्षय कुमार ने ट्रैफिक पुलिसकर्मी की भूमिका निभाई है। वीडियो में वह पुलिस की यूनिफार्म में अपने चिर-परिचित अंदाज में लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करते दिख रहे हैं। अक्षय कुमार ने ये वीडियो फेसबुक पर पोस्ट किया है। इस वीडियो में अक्षय मुंबई ट्रैफिक पुलिस के किरदार में नजर आ रहे हैं। उन्होंने वीडियो शेयर करते हुए रोड सेफ्टी के बारे में बताया और लिखा कि ''अपना और दूसरों का ख्याल रखे, क्योंकि रोड किसी के बाप की नहीं होती.'' इस वीडियो को देखकर आपको हंसी तो आएगी लेकिन एक अहम मैसेज भी मिलेगा। ट्रैफिक पुलिस बने अक्षय कुमार अलग अंदाज में लोगों को ट्रैफिक रूल तोड़ने पर सबक सिखा रहे हैं। अक्षय कुमार वीडियो में वह बिना हेलमेट पहने और बाइक पर ट्रिपलिंग करने वाले लड़के को अपने ही अंदाज में डांटते नजर आ रहे हैं। वहीं एक दूसरे वीडियो में गाड़ी में बिना सीटबेल्ट लगाए और फोन पर बात करने वाले शख्स को भी उसी स्टाइल में डांटते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो को काफी शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो में अक्षय ने ना सिर्फ दमदार एक्टिंग की बल्कि अच्छा मैसेज भी दिया है। इस मौके पर नितिन गड़करी ने कहा कि हमारा लक्ष्य देश में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना है। हमें उम्मीद है कि लोगों के पसंदीदा अभिनेता अक्षय कुमार के इस अभियान से जुड़ने के बाद सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ेगी। वहीं अक्षय कुमार का कहना है कि जैसे ही उन्हें हर वर्ष देश में होने वाले सड़क हादसों और उसके शिकार लोगों के आंकड़ों का पता चला वह हैरान रह गए। और उन्होंने तुरंत इस जागरूकता अभियान से जुड़ने का फैसला कर लिया।
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) । छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोक पर्व ‘हरेली’ के अवसर पर राज्य स्तरीय पंचायत सचिव सम्मेलन में मुख्यमंत्री रमन सिंह ने पंचायत सचिवों को बढ़े हुए वेतनमान की सौगात दी। इस मौके पर रमन सिंह ने कहा कि जिन पंचायत सचिवों ने दस साल की सेवा पूरी कर ली है उन्हें अब 2400 रुपए के ग्रेड वेतनमान के साथ 5200-20200 वेतानमान दिया जाएगा। इस वर्ग में आने वाले पंचायत सचिवों को नए वेतनमान के तहत अब 35,000 से 40,000 रुपए वेतन दिया जाएगा। जबकि सरकार ने इससे पहले पंद्रह साल की सेवा पूरी कर चुके पंचायत सचिवों के लिए ही बढ़े हुए वेतनमान की घोषणा की थी।
हरेली पर्व पर राज्य स्तरीय पंचायत सचिव सम्मेलन में छत्तीसगढ़ ग्राम पंचायत सचिव संघ के प्रतिनिधि ने मुख्यमंत्री से अपील की। उन्होंने कहा कि इस मौके पर मुख्यमंत्री उनकी वेतनमान संबंधी मांग को पूरा करें। इस मांग का समर्थन वहां पर मौजूद पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री अजय चंद्राकर ने भी किया। जिसके बाद मुख्यमंत्री रमन सिंह ने पंचायत सचिवों के वेतनमान को बढ़ाने का एलान किया। रमन सिंह ने कहा कि ग्रामीण विकास की योजनाओं का लाभ जरुरतमंद लोगों तक पहुंचाने के लिए पंचायत सचिव कड़ी मेहनत करते हैं। उनकी मेहनत से ही प्रदेश के गांवों में विकास के कार्य तेजी से हो रहे हैं। इसलिए जिन पंचायत सचिवों ने दस साल की सेवा पूरी कर ली है उन्हें अब 2400 रुपए के ग्रेड वेतनमान के साथ 5200-20200 वेतानमान दिया जाएगा। इस सम्मेलन में सांसद अभिषेक सिंह भी मौजूद थे।
आपको बता दें कि राज्य सरकार ने इस एलान से पहले 15 साल पूरा कर चुके पंचायत सचिवों के लिए ही बढ़े हुए वेतनमान की घोषणा की थी। इस कारण से पंचायत सचिवों के बीच विभाजन हो गया था । क्योंकि 10 साल से अधिक सेवा वाले पंचायत सचिवों को 28 से 30 हजार ही वेतन मिल रहा था। इस कारण वे वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल पर चले गए थे।
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) । छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोक पर्व ‘हरेली’ के अवसर पर राज्य स्तरीय पंचायत सचिव सम्मेलन में मुख्यमंत्री रमन सिंह ने पंचायत सचिवों को बढ़े हुए वेतनमान की सौगात दी। इस मौके पर रमन सिंह ने कहा कि जिन पंचायत सचिवों ने दस साल की सेवा पूरी कर ली है उन्हें अब 2400 रुपए के ग्रेड वेतनमान के साथ 5200-20200 वेतानमान दिया जाएगा। इस वर्ग में आने वाले पंचायत सचिवों को नए वेतनमान के तहत अब 35,000 से 40,000 रुपए वेतन दिया जाएगा। जबकि सरकार ने इससे पहले पंद्रह साल की सेवा पूरी कर चुके पंचायत सचिवों के लिए ही बढ़े हुए वेतनमान की घोषणा की थी।
हरेली पर्व पर राज्य स्तरीय पंचायत सचिव सम्मेलन में छत्तीसगढ़ ग्राम पंचायत सचिव संघ के प्रतिनिधि ने मुख्यमंत्री से अपील की। उन्होंने कहा कि इस मौके पर मुख्यमंत्री उनकी वेतनमान संबंधी मांग को पूरा करें। इस मांग का समर्थन वहां पर मौजूद पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री अजय चंद्राकर ने भी किया। जिसके बाद मुख्यमंत्री रमन सिंह ने पंचायत सचिवों के वेतनमान को बढ़ाने का एलान किया। रमन सिंह ने कहा कि ग्रामीण विकास की योजनाओं का लाभ जरुरतमंद लोगों तक पहुंचाने के लिए पंचायत सचिव कड़ी मेहनत करते हैं। उनकी मेहनत से ही प्रदेश के गांवों में विकास के कार्य तेजी से हो रहे हैं। इसलिए जिन पंचायत सचिवों ने दस साल की सेवा पूरी कर ली है उन्हें अब 2400 रुपए के ग्रेड वेतनमान के साथ 5200-20200 वेतानमान दिया जाएगा। इस सम्मेलन में सांसद अभिषेक सिंह भी मौजूद थे।
आपको बता दें कि राज्य सरकार ने इस एलान से पहले 15 साल पूरा कर चुके पंचायत सचिवों के लिए ही बढ़े हुए वेतनमान की घोषणा की थी। इस कारण से पंचायत सचिवों के बीच विभाजन हो गया था । क्योंकि 10 साल से अधिक सेवा वाले पंचायत सचिवों को 28 से 30 हजार ही वेतन मिल रहा था। इस कारण वे वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल पर चले गए थे।
भागलपुर (बिहार) । भागलपुर जिले के शाहकुंड थाना क्षेत्र की पुलिस ने अमानवीयता की सारी हदें पार कर दी। यहां के थानाध्यक्ष ने पचास हजार रुपए की रिश्वत न मिलने पर व्यापारी को थाने में बंद करके उसके गुप्तांग में पेट्रोल डाला और फिर उसकी बेरहमी से पिटाई की। इस बात का खुलासा पीड़ित व्यापारी रमेश कुमार ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (एसडीजेएम) एसके सिंह की अदालत में किया। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने मामले का तुरंत संज्ञान लेते हुए पीड़ित की मेडिकल जांच करने के आदेश दिए हैं।
पीड़ित व्यापारी रमेश ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एस के सिंह की अदालत में बताया कि मारपीट के एक पुराने मामले में 9 अगस्त की शाम को थानाध्यक्ष अपनी टीम के साथ उसे गिरफ्तार करने आए थे। इस दौरान थानाध्यक्ष सुनील कुमार उसकी दुकान के गल्ले से जबरदस्ती पांच हजार रुपए निकाल लिए । इसके बाद उसे कॉलर पकड़कर घसीटते हुए थाने ले गए। थाने पहुंचने पर थानाध्यक्ष ने उसका मोबाइल छीनकर उसे हवालात में बंद कर दिया। इसके बाद देर रात को थानाध्यक्ष सुनील कुमार हवालात में आए उसकी बेरहमी से पिटाई की। उनका इतने से भी दिल नहीं भरा तो उन्होंने दो सिपाहियों को बुलाकर उसके कपड़े उतरवाकर गुप्तांग में पेट्रोल डलवा दिया। इस दौरान वह दर्द से तड़पता रहा, लेकिन उन्हें जरा भी दया नहीं आयी। रमेश कुमार का कहना है कि उनकी बर्बरता यहीं खत्म नहीं हुई। उन्होंने धमकी देते हुए कहा कि यदि उसने पुलिस के खिलाफ केस किया तो उसे जान से मार देंगे।
व्यापारी रमेश कुमार ने अपने साथ घटित हुई घटना की पूरी कहानी मुख्यमंत्री, उप-मुख्यमंत्री, आईजी और मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर बताई है। जिसके बाद डीआईजी ने जांच के आदेश दे दिए हैं। उनका कहना है कि आरोप साबित होने पर आरोपी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। डीआईजी ने एसपी से इस मामले की पूरी रिपोर्ट मांगी है। वहीं मानवाधिकार संगठन ने इस मामले में पुलिस को दोषी ठहराया है। उनका कहना है कि पुलिस के आला अधिकारियों ने पहले इस मामले को संज्ञान में क्यों नहीं लिया। इसका उन्हें जवाब देना चाहिए।
इंदौर (मध्य प्रदेश)। एटीएम कार्ड क्लोन करके बैंक खातों से रुपए निकालने की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं । ताजा मामला इंदौर के तुकोगंज इलाके के एक होटल का है। जहां पुलिस ने एटीएम कार्ड और डेबिट कार्ड का क्लोन करके बैंक खातों से पैसे निकालने वाले जालसाज को गिरफ्तार किया है। यह जालसाज अब तक लोगों को पचास लाख रुपए तक का चूना लगा चुका है।
इंदौर के एएसपी वाहनी सिंह का कहना है कि उन्हें सूचना मिली थी कि मालवा मिल स्थित एक होटल में पंजाब से फरार जालसाज सौरभ जायसवाल ठहरा हुआ है, जो उत्तर प्रदेश में वाराणसी जिले के हरहुआ पिंडरा का रहना वाला है। सूचना मिलने के बाद पुलिस बुधवार की रात होटल में पहुंची और जालसाज सौरभ जायसवाल को पकड़ लिया। एएसपी के अनुसार सौरभ जायसवाल के खिलाफ एचडीएफसी बैंक के असिस्टेंट वाइस प्रेसीडेंट रिस्क इंटेलीजेंस कंट्रोल यूनिट के अमिताभ शर्मा की शिकायत पर पंजाब सायबर क्राइम विंग सास नगर ने पांच अगस्त को धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था। सौरभ को पकड़ने वाले टीआई पंकज द्विवेदी का कहना है कि आरोपी से स्किमिंग डिवाइस बरामद हुई है। पुलिस की पूछताछ में सौरभ ने बताया कि वह दो दिन पहले इंदौर आया था। यहां बार व रेस्तरां में नौकरी तलाश रहा था। नौकरी मिलने पर वह इसी तरह लोगों के खातों से रुपए निकाल कर फरार होने की साजिश रच रहा था।
शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि आरोपी सौरभ पंजाब के मोहाली के एक बड़े होटल में ब्रू मास्टर की नौकरी करता था। होटल में शराब भी परोसी जाती थी। सौरभ ग्राहकों से शराब का ऑर्डर भी लेता था। कई बड़े कारोबारी शराब के नशे में सौरभ को भुगतान के लिए एटीएम व डेबिट/क्रेडिट कार्ड देते थे। सौरभ कार्ड स्वैप करने के दौरान स्किमिंग डिवाइस से कार्ड की क्लोनिंग कर लेता था। और फिर कार्ड का डेटा और पासवर्ड लेने के बाद वह एक साथी की मदद से ग्राहकों के खातों से रुपए निकाल लेता था। पंजाब पुलिस के इंस्पेक्टर समरपालसिंह का कहना है कि आरोपी सौरभ काफी समय से जालसाजी कर रहा था। वह करीब 50 लाख रुपए निकाल चुका था। केस दर्ज होने के बाद सौरभ पंजाब से फरार होकर इंदौर आ गया था। हालांकि इस जालसाज को पंजाब पुलिस ने दोपहर को जिला कोर्ट पेश किया और ट्रांजिट रिमांड पर लेकर पंजाब रवाना हो गई है। अब आरोपी के खिलाफ आगे की कार्रवाई मोहाली में होगी।
नई दिल्ली। वाहन चालकों को अपने दस्तावेजों के खोने या खराब होने की चिंता करने की जरुरत नहीं है। क्योंकि अब उन्हें वाहनों की अब हार्ड कॉपी रखना अनिवार्य नहीं है। वाहन चालक दस्तावेजों की ई-कॉपी मोबाइल एप में स्टोर करके रख सकते हैं। इसके संबंध में बुधवार को केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशक और परिवहन आयुक्त को एक आदेश जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि अब वाहन मालिक डीजी लॉकर या एम परिवहन एक पर अपने दस्तावेज सेव कर सकते हैं और जरुरत पड़ने पर ई- कॉपी के रुप में इन्हें दिखा भी सकते हैं। इस ई –कॉपी को कोई भी पुलिस अधिकारी या परिवहन विभाग का अधिकारी स्वीकार करेगा।
केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा है कि मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार किसी भी वाहन चालक को पुलिस या अन्य अधिकृत एजेंसी द्वारा मांगने पर अपने लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन कार्ड आदि दस्तावेज दिखाना अनिवार्य होता है। हालांकि कई बार लोग दस्तावेजों के खोने या खराब होने के डर से अपने पास नहीं रखते हैं। लेकिन अब उन्हें चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। वे लोग अपने दस्तावेज डीजी लॉकर या एम परिवहन एप पर सेव करके रख सकते हैं। यदि कहीं पर इन दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ती है तो इन्हें दिखाया जा सकता है।
आपको बता दें कि केंद्रीय परिवहन मंत्रालय को आम जनता से लगातार शिकायतें मिल रही थी कि केन्द्र सरकार के डीजी लॉकर और परिवहन मंत्रालय के एम परिवहन एप पर सुरक्षित रखी गई ई-कॉपी को ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग मान्य नहीं कर रहा है। ऐसी जानकारी मिलने के बाद केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने आदेश दिया कि वाहन चालक डीजी लॉकर या एम परिवहन एप पर अपलोड दस्तावेजों की ई-कॉपी दिखाता है तो अफसरों को उसे मूल दस्तावेजों की तरह ही मान्य करना होगा। साथ ही वाहनों के नए बीमा और बीमा रिन्युअल का डाटा को भी प्रतिदिन के आधार पर वेबसाइट पर लोड करना होगा। जिससे वाहन मालिकों को समस्याओं का सामना न करना पड़े।
नई दिल्ली। वाहन चालकों को अपने दस्तावेजों के खोने या खराब होने की चिंता करने की जरुरत नहीं है। क्योंकि अब उन्हें वाहनों की अब हार्ड कॉपी रखना अनिवार्य नहीं है। वाहन चालक दस्तावेजों की ई-कॉपी मोबाइल एप में स्टोर करके रख सकते हैं। इसके संबंध में बुधवार को केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशक और परिवहन आयुक्त को एक आदेश जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि अब वाहन मालिक डीजी लॉकर या एम परिवहन एक पर अपने दस्तावेज सेव कर सकते हैं और जरुरत पड़ने पर ई- कॉपी के रुप में इन्हें दिखा भी सकते हैं। इस ई –कॉपी को कोई भी पुलिस अधिकारी या परिवहन विभाग का अधिकारी स्वीकार करेगा।
केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा है कि मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार किसी भी वाहन चालक को पुलिस या अन्य अधिकृत एजेंसी द्वारा मांगने पर अपने लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन कार्ड आदि दस्तावेज दिखाना अनिवार्य होता है। हालांकि कई बार लोग दस्तावेजों के खोने या खराब होने के डर से अपने पास नहीं रखते हैं। लेकिन अब उन्हें चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। वे लोग अपने दस्तावेज डीजी लॉकर या एम परिवहन एप पर सेव करके रख सकते हैं। यदि कहीं पर इन दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ती है तो इन्हें दिखाया जा सकता है।
आपको बता दें कि केंद्रीय परिवहन मंत्रालय को आम जनता से लगातार शिकायतें मिल रही थी कि केन्द्र सरकार के डीजी लॉकर और परिवहन मंत्रालय के एम परिवहन एप पर सुरक्षित रखी गई ई-कॉपी को ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग मान्य नहीं कर रहा है। ऐसी जानकारी मिलने के बाद केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने आदेश दिया कि वाहन चालक डीजी लॉकर या एम परिवहन एप पर अपलोड दस्तावेजों की ई-कॉपी दिखाता है तो अफसरों को उसे मूल दस्तावेजों की तरह ही मान्य करना होगा। साथ ही वाहनों के नए बीमा और बीमा रिन्युअल का डाटा को भी प्रतिदिन के आधार पर वेबसाइट पर लोड करना होगा। जिससे वाहन मालिकों को समस्याओं का सामना न करना पड़े।
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में हैरान कर देने वाले भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। यहां पर मुर्दे, गुमशुदा और दिल्ली से पलायन कर चुके लोग हर महीने राशन खा रहे हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नाक के नीचे हुए इस बड़े भ्रष्टाचार के खुलासे से दिल्ली सरकार में हड़कंप मचा हुआ है। इसका खुलासा किसी विपक्षी दल के नेता नहीं बल्कि आप पार्टी के ही मुंडका से विधायक सुखबीर सिंह दलाल ने किया है।
आप पार्टी के विधायक सुखबीर सिंह दलाल ने विशेष उल्लेख नियम 280 के तहत विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल को शिकायत दी है। इसमें उन्होंने लिखा है कि 2011 से राशन कार्डों की वस्तुस्थिति जांच का कोई सर्वे नहीं हुआ है। जबकि हर साल हजारों लोगों की मौत हो जाती है। हजारों लड़किया शादी करके हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों में चली जाती हैं। हजारों लोग ऐसे भी हैं, जो रोजगार की तलाश में दिल्ली में आए थे। 2011 में राष्ट्रीय खाद्य योजना के तहत इनके भी राशन कार्ड बने थे, जबकि कुछ साल बाद ही ये लोग दिल्ली छोड़ वापस या किसी और शहर चले गए। सुखबीर सिंह ने कहा कि पिछले आठ वर्षों के दौरान हजारों लोग ईडब्ल्यूएस और बीपीएल की श्रेणी से भी बाहर हो गए हैं, लेकिन उनके राशन कार्ड भी निरस्त नहीं किए गए हैं। और काफी लोग ऐसे हैं जो बहादुरगढ़ में रहते हुए राशन दिल्ली से ले रहे हैं।
सुखबीर सिंह के अनुसार दिल्ली में इस समय तकरीबन 19 लाख राशन कार्ड हैं। प्रति कार्ड चार से 10 सदस्यों के हिसाब से लगभग 72 लाख लोग राशन ले रहे हैं। लेकिन अभी तक इनका सर्वे नहीं हुआ है, जिसकी वजह से यह गड़बड़ी जारी है। सुखबीर सिंह ने अपनी शिकायत में विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि 2011 से 2018 के बीच जितने भी प्रकार के राशन कार्ड बने हैं, उनका पूरी तरह से सर्वे कराया जाए। सुखबीर सिंह का आरोप है कि यदि सर्वे कराया गया तो कम से कम चार से पांच लाख नाम कट जाएंगे। इस कार्रवाई से करीब आठ साल से जारी भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और राशन का दुरुपयोग बंद होगा। और जरूरतमंद लोगों का नाम राशन कार्ड में जोड़ा जा सकेगा। हालांकि सुखबीर सिंह की शिकायत मिलने के बाद विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने शिकायत खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को भेज दिया है । आपको बता दें कि नियम के अनुसार दिल्ली में राशन कार्ड केवल पांच साल के लिए बनता है। और उसका हर पांच साल के बाद नवीनीकरण होता है। अब देखना यह है कि अरविंद केजरीवाल की सरकार इस घोटाले की निष्पक्षता से जांच करवाते हैं या फिर मामले को ठंडे बस्ते डाल देते हैं।
जयपुर (राजस्थान) । पुलिसवालों की रिश्वतखोरी थमने का नाम नहीं ले रही है, ताजा मामला जयपुर के शिप्रापथ पुलिस थाने का है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने मंगलवार को उप निरीक्षक बबीता को पांच लाख की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया। एसीबी ने उप निरीक्षक के साथ ही उसके पति अमरदीप झाझड़िया को भी पकड़ा है। एसीबी का कहना है कि वह पत्नी द्वारा ली जाने वाली रिश्वत को लेने के लिए आया हुआ था। एसीबी उसके पति से भी पूछताछ कर रही है।
एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरोत्तम वर्मा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी उप निरीक्षक बबीता जयपुर कमिश्नरेट के दक्षिण जिले में शिप्रापथ थाने में तैनात है। दिल्ली की एक रजिस्टर्ड कंपनी की फर्म संचालक ने एसीबी में शिकायत दर्ज करवाई थी। जिसमें बताया कि बिटकाइन के जरिए मनी ट्रांजेक्शन के एक मामले में आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने की धमकियां देकर महिला उप निरीक्षक सबइंस्पेक्टर बबीता 50 लाख रुपए की रिश्वत मांग रही है। हालांकि कंपनी के अधिकारियों ने पहले तो बबीता से बातचीत कर मामला सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन जब वह नहीं मानी तो कंपनी के अधिकारी रिश्वत की रकम देने को तैयार हो गए। आपसी बातचीत में 45 लाख रुपए में सौदा तय हुआ था। रिश्वत की यह रकम किश्तों में दी जानी थी। वहीं एसीबी के अधिकारियों को इस बारे में मुखबिर से सूचना मिल गई थी। जब मंगलवार को पहली किश्त पांच लाख लेने उप निरीक्षक बबिता एक रेस्त्रां में पहुंची तो एसीबी ने उसे रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया । हालांकि जब एसीबी अधिकारियों से रिश्वत देने वाली कंपनी के बारे में जानकारी मांगी गयी तो उन्होंने कंपनी के बारे में जानकारी देने से इंकार कर दिया।
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने कई दिनों से टोल फ्री नंबर- 1800-300-1947 को लेकर देशभर में जारी भय के माहौल पर सफाई दी है। यूआईडीएआई ने कहा कि गूगल की एक गलती से उसका पुराना हेल्पलाइन नंबर 18003001947 कई मोबाइल फोन उपयोगकर्ताओं की कांटैक्ट सूची में आ गया था। इसी मौके का फायदा उठाकर अफवाह फैलाने वालों ने आधार की छवि खराब करने की कोशिश की। प्राधिकरण का कहना है कि किसी फोन के कांटैक्ट की सूची में दर्ज नंबर के जरिये उस फोन की सूचनाएं नहीं चुरायी जा सकती है। प्राधिकरण ने कहा कि वह ऐसे निहित स्वार्थी तत्वों की कोशिशों की ‘निंदा’ करता है। यदि लोग चाहें तो बिना डरे इस टोल फ्री नंबर- 1800-300-1947 को मिटा सकते हैं, क्योंकि इससे कोई नुकसान नहीं है। यदि लोग चाहें तो, वे उसकी जगह यूआईएडीआई के नये हेल्पलाइन नंबर 1947 को अपने स्मार्ट फोन में सेव कर सकते हैं।
आपको बता दें कि टोल फ्री नंबर- 1800-300-1947 के स्मार्ट फोन में अपने आप सेव होने को लेकर देशभर फैलाई गयी अफवाह का कारण फ्रांस के एक तथाकथित साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इलियट एल्डरसन को माना जा रहा है। इस साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ ने ट्विटर पर पिछले सप्ताह ट्वीट कर इस अफवाह को जन्म दिया था। उसने आईडीएआई को संबोधित करते हुए इस ट्वीट में कहा था, ‘‘अलग-अलग मोबाइल फोन सेवा कंपनियों के ग्राहक जिनके पास आधार कार्ड है या नहीं और जिन्होंने एमआधार एप का इस्तेमाल भी नहीं किया है, उनके भी फोन की कांटैक्ट सूची में आपका हेल्पलाइन नंबर उन्हें बताये बिना क्यों दर्ज कर दिया गया है?’’ इसके बाद सोशल मीडिया पर आधार के खिलाफ अफवाहों का दौर चलने लगा था, जिसके कारण सरकार भी हरकत में आयी और गूगल को बयान जारी कर अपनी भूल को माना और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील भी की।
नई दिल्ली। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के प्रमुख आरएस शर्मा की आधार से जुड़ी जानकारी हैक करने की घटना के बाद एक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। ताजा मामले में हैकर ने केंद्रीय कार्यवाहक वित्तमंत्री पीयूष गोयल के बैंक खाते को हैक कर लिया। और फर्जी तरीके से कुछ रुपए निकाल लिए। हालांकि जब उन्होंने आइसीआइसीआइ बैंक के प्रबंधन से शिकायत की तो उनके खाते से निकाले गए रुपयों की छतिपूर्ति कर दी गयी।
आपको बता दें कि शुक्रवार को पीयूष गोयल लोकसभा में सार्वजनिक डेटा की सुरक्षा के संबंध में एक प्रश्न का जवाब दे रहे थे। इसी जवाब के दौरान उन्होंने इस घटना की जानकारी सदन में दी। उन्होंने डेटा की सुरक्षा के संबंध में कहा कि सरकार और बैंक निजता को सुरक्षित रखने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। डेटा को अंतर्राष्ट्रीय सर्वर पर नहीं डाला जाता है। लेकिन हैकर्स हमेशा हैक करने की नई तरकीब निकाल लेते हैं। इस पर विपक्ष ने सदन में शोर मचाना शुरु कर दिया। इसी दौरान उन्होंने अपने बैंक खाते को हैक करने के बारे में बताया और कहा कि ऐसी घटनाएं बहुत बड़े स्तर पर नहीं हो रही हैं।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ट्राई के प्रमुख आर एस शर्मा ने ख़ुद ही हैकर्स को चुनौती दी थी कि वे उनकी आधार से जुड़ी जानकारियां हैक कर के दिखाएं। इसके लिए उन्होंने अपना आधार नंबर भी सार्वजनिक किया । इसके कुछ ही घंटों बाद ही एथिकल हैकर्स ने ट्विटर के जरिए दावा किया उसने शर्मा के आधार से जुड़ी 14 जानकारियां हासिल कर चुके हैं। इनमें उनके बैंक खाते की जानकारी भी शामिल है। हैकर्स ने इस दावे को पुख़्ता करने के लिए शर्मा के ख़ाते में एक-एक रुपया भी जमा कराया और इस लेन-देन का स्क्रीन शॉट भी पोस्ट किया।
मुरैना (मध्य प्रदेश)। एक दुकानदार को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किया गया दस रुपए का सिक्का लेने से मना करना मंहगा पड़ गया। मुरैना जिले की जौरा अदालत ने एक दुकानदार को ग्राहक से दस रुपए के सिक्के लेने मना करने का दोषी पाए जाने पर अदालत खत्म होने तक वहीं बने रहने और दो हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। जबकि जिले के कलेक्टर ने आदेश दिया था कि कोई भी व्यक्ति दस रुपए के सिक्कों को लेने से इनकार नहीं कर सकता है। इसके बावजूद दुकानदार ने दस रुपए के सिक्के को लेने से मना कर दिया था।
आपको बता दें कि मुरैना जिले के जौरा कस्बे में बनियापार स्थित दुकानदार अरुण जैन की दुकान से ग्राहक आकाश ने दो रुमाल खरीदे। और उसने रुमाल की कीमत के एवज में दुकानदार को दस-दस रुपए के दो सिक्के दिए, लेकिन दुकानदार ने सिक्कों के चलन में न होने की बात कहकर वापस कर दिया। हालांकि आकाश ने उसे बताया कि जिले के कलेक्टर ने आदेश दिए हैं कि कोई भी व्यक्ति दस का सिक्का लेने से इनकार नहीं कर सकता है। इसके बावजूद दुकानदार अपनी बात पर अड़ा रहा और बहुत समझाने के बावजूद दस के सिक्कों को लेने से इनकार कर दिया। दुकानदार की इस मनमानी से परेशान आकाश जौरा के पुलिस थाने पहुंचे और दुकानदार के खिलाफ दस के सिक्के न लेने की शिकायत दर्ज करायी। पुलिस ने दुकानदार के खिलाफ कलेक्टर द्वारा सिक्के स्वीकार करने के संबंध में जारी आदेश का उल्लंघन कारने का मामला दर्ज कर दुकानदार को कर लिया और फिर मामले की जांच के बाद प्रकरण का चालान न्यायालय में पेश किया। जौरा के न्यायिक मजिस्ट्रेट जेपी चिडार ने इस मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी दुकानदार अरुण जैन को आईपीसी की धारा 188 के तहत कलेक्टर के आदेश की अवहेलना करने का दोषी पाया और उसे अदालत उठने तक वहीं बने रहने की सजा तथा 200 रुपए जुर्माना भरने का आदेश दिया।
इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) । बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने संशोधित आदेश में उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को गैर जमानती गिरफ्तारी से राहत देते हुए अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में साढ़े बारह हजार टीचर्स की भर्ती के मामले में अदालत द्वारा बार - बार जवाब मांगे जाने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नही देने पर ऐसा सख्त कदम उठाया। दरअसल अदालत के कई बार आदेश के बावजूद इस मामले में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। जिसके बाद अदालत ने योगीराज में सरकारी अफसरों के रवैये पर तल्ख़ टिप्पणी भी की। वहीं एक अन्य मामले में अंशकालिक खेल अनुदेशक पद पर भर्ती को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बेसिक शिक्षामंत्री की वादाखिलाफी के खिलाफ बीपीएड अभ्यर्थी तीसरी बार इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण में गए हैं। बीपीएड अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के आदेश की अवमानना की तारीख और 12 अप्रैल के आदेश को सरकार के न मानने पर दोबारा हाईकोर्ट की डबल बेंच में अवमानना का केस दायर किया है। जिसकी सुनवाई आगामी 06 अगस्त को होगी।
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश की तत्कालीन अखिलेश सरकार ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में सहायक अध्यापक 12460 पदों पर भर्ती का विज्ञापन निकाला था। लेकिन चुनाव के दौरान प्रक्रिया रुक गयी। वहीं योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही शिक्षा विभाग की दूसरी भर्तियों की तरह इस मामले में भी मौखिक आदेश से भर्तियों पर रोक लगा दी। जब लम्बे समय तक रोक जारी रही तो कई अभ्यर्थियों ने भर्ती शुरु करने के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस साल अप्रैल महीने में भर्तियों पर लगी रोक हटाते हुए योगी सरकार को प्रक्रिया दो महीने में पूरी किए जाने का आदेश दिया।
वहीं इस बीच मई महीने में अवनीश कुमार नाम के व्यक्ति ने उत्तर प्रदेश प्राइमरी टीचर्स सर्विस रूल्स 1981 के आधार पर हाईकोर्ट में भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देते हुए इस पर रोक लगाए जाने की मांग की। उत्तर प्रदेश प्राइमरी टीचर्स सर्विस रूल्स के मुताबिक़ बीटीसी प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को अपने जिलों की भर्ती में वरीयता मिलती है, जबकि जारी हुए विज्ञापन में किसी भी जिले के अभ्यर्थी को सभी जिलों में आवेदन करने की छूट दी गई है। हाईकोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगते हुए अगले आदेश तक के लिए भर्तियों पर रोक लगा दी थी।
जब इस मामले में अदालत के कई बार जवाब मांगने के बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रतिक्रिया नहीं दी तो अदालत ने 18 जुलाई को हुई सुनवाई में गहरी नाराज़गी जताई और उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को 30 जुलाई को व्यक्तिगत तौर कोर्ट में पेश होकर सरकार की तरफ से हलफनामा दाखिल करने को कहा था। प्रमुख सचिव को भर्तियों में नियम तोड़ने के मामले में जवाब दाखिल करना था। साथ ही पिछली सुनवाइयों में सरकार का जवाब दाखिल न होने पर भी हलफनामा पेश करना है। मामले की सुनवाई मंगलवार को जस्टिस एसपी केसरवानी की बेंच में हुई तो न तो प्रमुख सचिव स्वयं अदालत में हाजिर हुए और न ही सरकार की तरफ से किसी ने कोई जवाब दाखिल किया। अदालत ने इस पर गहरी नाराज़गी जताई और बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को एक अगस्त को अदालत में पेश होने का आदेश दिया। अदालत ने इस मामले में योगी सरकार को फटकार लगाई और अफसरों की लापरवाही पर सवाल भी उठाए। अब देखना है कि योगी सरकार अदालत के सामने क्या जवाब दाखिल करती है।
इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) । मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी आदित्यनाथ की सरकार की लापरवाही के खिलाफ सख्त आदेश दिया। हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करते हुए, उन्हें तुरंत गिरफ्तार करके एक अगस्त को अदालत में पेश करने का आदेश दिया है। दरअसल प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में साढ़े बारह हजार टीचर्स की भर्ती के मामले में अदालत द्वारा बार - बार जवाब मांगे जाने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नही देने पर हाईकोर्ट ने ऐसा सख्त कदम उठाया है। अदालत के कई बार आदेश के बावजूद इस मामले में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। जिसके बाद अदालत ने योगी सरकार को कड़ी फटकार लगायी। अदालत ने योगीराज में सरकारी अफसरों के रवैये पर तल्ख़ टिप्पणी भी की। वहीं एक अन्य मामले में अंशकालिक खेल अनुदेशक पद पर भर्ती को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बेसिक शिक्षामंत्री की वादाखिलाफी के खिलाफ बीपीएड अभ्यर्थी तीसरी बार इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण में गए हैं। बीपीएड अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के आदेश की अवमानना की तारीख और 12 अप्रैल के आदेश को सरकार के न मानने पर दोबारा हाईकोर्ट की डबल बेंच में अवमानना का केस दायर किया है। जिसकी सुनवाई आगामी तारीख को होनी है।
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश की तत्कालीन अखिलेश सरकार ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में सहायक अध्यापक 12460 पदों पर भर्ती का विज्ञापन निकाला था। लेकिन चुनाव के दौरान प्रक्रिया रुक गयी। वहीं योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही शिक्षा विभाग की दूसरी भर्तियों की तरह इस मामले में भी मौखिक आदेश से भर्तियों पर रोक लगा दी। जब लम्बे समय तक रोक जारी रही तो कई अभ्यर्थियों ने भर्ती शुरु करने के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस साल अप्रैल महीने में भर्तियों पर लगी रोक हटाते हुए योगी सरकार को प्रक्रिया दो महीने में पूरी किए जाने का आदेश दिया।
वहीं इस बीच मई महीने में अवनीश कुमार नाम के व्यक्ति ने उत्तर प्रदेश प्राइमरी टीचर्स सर्विस रूल्स 1981 के आधार पर हाईकोर्ट में भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देते हुए इस पर रोक लगाए जाने की मांग की। उत्तर प्रदेश प्राइमरी टीचर्स सर्विस रूल्स के मुताबिक़ बीटीसी प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को अपने जिलों की भर्ती में वरीयता मिलती है, जबकि जारी हुए विज्ञापन में किसी भी जिले के अभ्यर्थी को सभी जिलों में आवेदन करने की छूट दी गई है। हाईकोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगते हुए अगले आदेश तक के लिए भर्तियों पर रोक लगा दी थी।
जब इस मामले में अदालत के कई बार जवाब मांगने के बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रतिक्रिया नहीं दी तो अदालत ने 18 जुलाई को हुई सुनवाई में गहरी नाराज़गी जताई और उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को 30 जुलाई को व्यक्तिगत तौर कोर्ट में पेश होकर सरकार की तरफ से हलफनामा दाखिल करने को कहा था। प्रमुख सचिव को भर्तियों में नियम तोड़ने के मामले में जवाब दाखिल करना था। साथ ही पिछली सुनवाइयों में सरकार का जवाब दाखिल न होने पर भी हलफनामा पेश करना है। मामले की सुनवाई मंगलवार को जस्टिस एसपी केसरवानी की बेंच में हुई तो न तो प्रमुख सचिव स्वयं अदालत में हाजिर हुए और न ही सरकार की तरफ से किसी ने कोई जवाब दाखिल किया। अदालत ने इस पर गहरी नाराज़गी जताई और बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करते हुए उन्हें गिरफ्तार किए जाने और एक अगस्त को कस्टडी में पेश किए जाने के सख्त आदेश दिए। अदालत ने इस मामले में योगी सरकार को फटकार लगाई और अफसरों की लापरवाही पर सवाल भी उठाए। अब देखना है कि योगी सरकार अदालत के सामने क्या जवाब दाखिल करती है।
नई दिल्ली। रविवार को शराब की दुकान बंद कराने कि लिए आयोजित जनता दरबार में उप मुख्यमंत्री सिसोदिया को जनता की नाराजगी महंगी पड़ गयी। दिल्ली के मंडावली इलाके में मंगलवार को भूख से हुई तीन बच्चों की मौत से नाराज लोगों ने जमकर हंगामा किया और मनीष सिसोदिया से कई सवाल दागे। लोगों ने मनीष सिसोदिया से सवाल किया कि उनके क्षेत्र में लोगों के राशन कार्ड आज तक क्यों नहीं बन सके हैं ? वहीं लोगों से आधारकार्ड बनवाने के भी पांच-पांच सौ रुपये तक रिश्वत मांगी जा रही है। ऐसी दशा में उन्हें सरकार की योजनाओं का लाभ कैसे मिलेगा ? मंडवाली इलाके के लोगों का कहना था कि यदि मंगल के परिवार का राशन कार्ड बना होता तो आज बच्चों की मौत न हुई होती।
वहीं जनता के हंगामे से नाराज मनीष सिसोदिया भड़क गए और फिर उन्होंने जनता पर ही रौब झाड़ना शुरु कर दिया। उन्होंने कहा कि आप सब शांत होकर एक तरफ बैठो । नारे क्यों लगा रहे हो ? कहां रहते हो ? अपना पता बताओ ? यदि आपको अपनी बात रखनी है, तो चुपचाप अपनी बात रखिए। एक्साइज डिपार्टमेंट के अफसर सुनवाई करने आए हैं। लेकिन अगर आप दूसरों को बोलने से चुप कराने आए हो, तो फिर आपको चुप कराना हमें भी आता है। उनके ऐसे बरताव से लोग नाराज हो गए और जमकर हंगामा शुरु कर दिया। सरकार विरोधी नारे लगाना शुरू कर दिए। जनता का विरोध देखते हुए मनीष सिसोदिया कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर चले जाना पड़ा।
आपको बता दें कि मनीष सिसोदिया शराब की दुकान बंद कराने के लिए आयोजित जनता दरबार में पहुंचे थे। इस जनता दरबार में लोगों को उपस्थित होकर इस क्षेत्र में शराब की दुकान होनी चाहिए या नहीं होनी चाहिए। इस विषय पर अपनी राय रखनी थी। इसके बाद कार्यक्रम में मनीष सिसोदिया से यह मांग की जानी थी कि सरकार इस शराब की दुकान को बंद करे।
गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)। शारीरिक शिक्षक अनुदेशक भर्ती (32022 पद) को लेकर प्रदेश के बीपीएड अभ्यर्थियों के लिए खुशखबरी है। गोरखपुर में बीपीएड अभ्यर्थी देवेन्द्र पाण्डेय से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शारीरिक शिक्षक अनुदेशक भर्ती के बारे में कहा कि “आपका कार्य हो रहा है एक सप्ताह में आपको आदेश मिल जायेगा”। इस मुलाकात के दौरान योगी आदित्यनाथ ने देवेंद्र पाण्डेय के माथे पर तिलक लगाकर आशीर्वाद भी दिया।
आपको बता दें कि बीपीएड अभ्यर्थियों ने अपर प्रमुख सचिव डॉ.प्रभात कुमार से लखनऊ सचिवालय में मुलाकात कर शारीरिक शिक्षक अनुदेशक भर्ती (32022) के बारे में जानकारी दी थी। अभ्यर्थी डॉ. प्रभात कुमार से पहले विधानसभा सचिवालय में उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा से भी मुलाकात कर चुके हैं। इस मुलाकात के दौरान बीपीएड अभ्यर्थियों ने दिनेश शर्मा को 32022 शारीरिक शिक्षक अनुदेशक पद पर नियुक्ति के मामले की विस्तार से जानकारी दी थी। अभ्यर्थियों की पूरी बात सुनने के बाद दिनेश शर्मा ने कहा कि अब बताओ कि हम क्या करें कि आपकी भर्ती शुरू हो जाये ? इस सवाल पर अभ्यर्थियों का कहना था कि “सर यह 23 मार्च 2017 का आदेश जो हमारे लिए काल बन गया है, इसको हटवा दें । 23 मार्च 2017 हाईकोर्ट की तारीख है और न जाने अभी कितना तारीखें पड़ती रहेंगी, इसलिए हम आपके पास आए हैं, क्योंकि हमें कोर्ट से ज्यादा आप से उमीद है। हम बेरोजगार हैं, सरकार से नहीं लड़ सकते और न ही कोर्ट के दाव-पेंच समझते हैं। आप शारीरिक शिक्षक अनुदेशक पद पर भर्ती का आदेश करवा दें। हमारी भर्ती में किसी प्रकार की कोई गलती साबित नहीं हो सकी है”। बीपीएड अभ्यर्थियों की बातों को सुनने के बाद दिनेश शर्मा ने अपर प्रमुख सचिव डा. प्रभात कुमार को पत्र लिखा था। और विश्वास दिलाया कि वह इस मामले को लेकर स्वयं मुख्य सचिव से मिलेंगे। और जल्दी ही मामले को हल करवायेंगे।
रायपुर (छत्तीसगढ़)। प्रदेश के भ्रष्ट अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पहले की तरह इन अधिकारियों के खिलाफ छापेमारी की बजाय अब सीधे एफआईआर दर्ज की जा रही है। ईओडब्ल्यू ने अब तक प्रदेश के पंद्रह भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी है। आय से अधिक संपत्ति के मामले में सबसे ज्यादा अधिकारी जलसंसाधन और राजस्व विभाग के फंसे हैं। इनमें जल संसाधन विभाग के चार और राजस्व विभाग के तीन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गयी है। इओडब्ल्यू ने अधिकारियों के विभागध्यक्ष और सचिव को पत्र भेजकर कार्रवाई की जानकारी भी दे दी है।
इओडब्ल्यू ने अब इन दागी अधिकारियों की गिरफ्तारी की तैयारी शुरू कर दी है। इओडब्ल्यू के अधिकारी का कहना है कि सभी अधिकारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत मिली थी। शिकायत की जांच करने के बाद सीधे एफआइआर की कार्रवाई की जा रही है।
आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ में अब तक आय से अधिक संपत्ति मामले में पहले छापे मारे जाते थे, फिर बैंक अकाउंट और लॉकर की जांच की जाती थी। लेकिन अब इस तरीके में बदलाव करते हुए सीधे एफआइआर दर्ज की जा रही है। जिससे दागी अफसरों को बचने की गुंजाइश कम हो रही है। कई बार छापे की कार्रवाई की अधिकारियों को भनक लग जाती थी और वे गहने-कैश को ठिकाने लगा देते थे। अब एफआइआर दर्ज करने से पहले बैंक और रजिस्ट्री आफिस में वेरिफाई किया जा रहा है। जिससे दागी अधिकारियों के बच निकलने के रास्ते बंद हो गए हैं।
रायपुर (छत्तीसगढ़)। प्रदेश के भ्रष्ट अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पहले की तरह इन अधिकारियों के खिलाफ छापेमारी की बजाय अब सीधे एफआईआर दर्ज की जा रही है। ईओडब्ल्यू ने अब तक प्रदेश के पंद्रह भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी है। आय से अधिक संपत्ति के मामले में सबसे ज्यादा अधिकारी जलसंसाधन और राजस्व विभाग के फंसे हैं। इनमें जल संसाधन विभाग के चार और राजस्व विभाग के तीन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गयी है। इओडब्ल्यू ने अधिकारियों के विभागध्यक्ष और सचिव को पत्र भेजकर कार्रवाई की जानकारी भी दे दी है।
इओडब्ल्यू ने अब इन दागी अधिकारियों की गिरफ्तारी की तैयारी शुरू कर दी है। इओडब्ल्यू के अधिकारी का कहना है कि सभी अधिकारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत मिली थी। शिकायत की जांच करने के बाद सीधे एफआइआर की कार्रवाई की जा रही है।
आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ में अब तक आय से अधिक संपत्ति मामले में पहले छापे मारे जाते थे, फिर बैंक अकाउंट और लॉकर की जांच की जाती थी। लेकिन अब इस तरीके में बदलाव करते हुए सीधे एफआइआर दर्ज की जा रही है। जिससे दागी अफसरों को बचने की गुंजाइश कम हो रही है। कई बार छापे की कार्रवाई की अधिकारियों को भनक लग जाती थी और वे गहने-कैश को ठिकाने लगा देते थे। अब एफआइआर दर्ज करने से पहले बैंक और रजिस्ट्री आफिस में वेरिफाई किया जा रहा है। जिससे दागी अधिकारियों के बच निकलने के रास्ते बंद हो गए हैं।