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नई दिल्ली। लोकसेवकों को रिश्वत देने वाले अब सावधान हो जाएं, क्योंकि आने वाले नए कानून के तहत यदि वह रिश्वत देते हुए पकड़े जाएंगे तो उन्हें सात साल तक की सजा हो सकती है। राज्यसभा के बाद अब लोकसभा ने भी भ्रष्टाचार पर रोकथाम के लिए मंगलवार को भ्रष्टाचार निरोधक संशोधन विधेयक-2018 को मंजूरी दे दी। नए कानून के तहत अब रिश्वत देने वालों को भी सात साल तक की सजा या जुर्माना दोनों हो सकता है। इसमें अब रिश्वत देने और लेने वालों को बराबर सजा दी जाएगी। राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद अब रिश्वत देना भी अपराध माना जाएगा। इसमें रिश्वत देने वाले को भी परिभाषित किया गया है। इसमें भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और ईमानदार कर्मचारियों को संरक्षण देने का प्रावधान है। इस विधेयक में 1988 के मूल कानून को संशोधित करने का प्रावधान है।
इस बिल प्रावधान किया गया है कि लोकसेवकों पर भ्रष्टाचार का मामला चलाने से पहले केंद्र के मामले में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्तों से अनुमति लेनी होगी। रिश्वत देने वाले को अपनी बात रखने के लिए 7 दिन का समय दिया जाएगा, जिसे 15 दिन तक बढ़ाया जा सकता है। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि रिश्वत किन परिस्थितियों में दिया गया है। सरकारी कर्मचारी को रिश्वत लेने के लिए उकसाने को अपराध माना जाएगा। यदि किसी व्यावसायिक स्थान का कर्मचारी किसी सरकारी कर्मचारी को रिश्वत देने के मामले में संलिप्त पाया जाता है तो उसके वरिष्ठ अधिकारियों को भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा। भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को 2 साल में निपटाने का प्रावधान किया गया है।
वरिष्ठ वकील केटीएस तुलसी का कहना है कि , भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 के प्रावधान में रिश्वत की मांग करने और स्वीकार करने को ही अपराध माना गया था, लेकिन नए कानून में रिश्वत देने वाले को भी इसके दायरे लाया गया है। यही सबसे बड़ा बदलाव है।
नई दिल्ली। लोकसेवकों को रिश्वत देने वाले अब सावधान हो जाएं, क्योंकि आने वाले नए कानून के तहत यदि वह रिश्वत देते हुए पकड़े जाएंगे तो उन्हें सात साल तक की सजा हो सकती है। राज्यसभा के बाद अब लोकसभा ने भी भ्रष्टाचार पर रोकथाम के लिए मंगलवार को भ्रष्टाचार निरोधक संशोधन विधेयक-2018 को मंजूरी दे दी। नए कानून के तहत अब रिश्वत देने वालों को भी सात साल तक की सजा या जुर्माना दोनों हो सकता है। इसमें अब रिश्वत देने और लेने वालों को बराबर सजा दी जाएगी। राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद अब रिश्वत देना भी अपराध माना जाएगा। इसमें रिश्वत देने वाले को भी परिभाषित किया गया है। इसमें भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और ईमानदार कर्मचारियों को संरक्षण देने का प्रावधान है। इस विधेयक में 1988 के मूल कानून को संशोधित करने का प्रावधान है।
इस बिल प्रावधान किया गया है कि लोकसेवकों पर भ्रष्टाचार का मामला चलाने से पहले केंद्र के मामले में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्तों से अनुमति लेनी होगी। रिश्वत देने वाले को अपनी बात रखने के लिए 7 दिन का समय दिया जाएगा, जिसे 15 दिन तक बढ़ाया जा सकता है। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि रिश्वत किन परिस्थितियों में दिया गया है। सरकारी कर्मचारी को रिश्वत लेने के लिए उकसाने को अपराध माना जाएगा। यदि किसी व्यावसायिक स्थान का कर्मचारी किसी सरकारी कर्मचारी को रिश्वत देने के मामले में संलिप्त पाया जाता है तो उसके वरिष्ठ अधिकारियों को भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा। भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को 2 साल में निपटाने का प्रावधान किया गया है।
वरिष्ठ वकील केटीएस तुलसी का कहना है कि , भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 के प्रावधान में रिश्वत की मांग करने और स्वीकार करने को ही अपराध माना गया था, लेकिन नए कानून में रिश्वत देने वाले को भी इसके दायरे लाया गया है। यही सबसे बड़ा बदलाव है।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। बीपीएड अभ्यर्थियों ने अंशकालिक खेल अनुदेशक के पद पर नियुक्ति के लिए विधानसभा सचिवालय में उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान बीपीएड अभ्यर्थियों ने दिनेश शर्मा को 32022 अंशकालिक खेल अनुदेशक पद पर नियुक्ति के मामले की विस्तार से जानकारी दी। अभ्यर्थियों की पूरी बात सुनने के बाद दिनेश शर्मा ने कहा कि अब बताओ कि हम क्या करें कि आपकी भर्ती शुरू हो जाये ? इस सवाल पर अभ्यर्थियों का कहना था कि “सर यह 23 मार्च 2017 का आदेश जो हमारे लिए काल बन गया है, इसको हटवा दें । 23 मार्च 2017 हाईकोर्ट की तारीख है और न जाने अभी कितना तारीखें पड़ती रहेंगी, इसलिए हम आपके पास आए हैं, क्योंकि हमें कोर्ट से ज्यादा आप से उमीद है। हम बेरोजगार हैं, सरकार से नहीं लड़ सकते और न ही कोर्ट के दाव-पेंच समझते हैं। आप अंशकालिक खेल अनुदेशक पद पर भर्ती का आदेश करवा दें। हमारी भर्ती में किसी प्रकार की कोई गलती साबित नहीं हो सकी है”। बीपीएड अभ्यर्थियों की बातों को सुनने के बाद दिनेश शर्मा ने अपर मुख्य सचिव डा. प्रभात कुमार को पत्र लिखा। और विश्वास दिलाया कि वह इस मामले को लेकर स्वयं मुख्य सचिव से मिलेंगे। और जल्दी ही मामले को हल करवायेंगे।
वहीं इस मामले को लेकर अभ्यर्थियों ने कुशीनगर के कांग्रेस विधायक श्री अजय कुमार "लल्लू" से भी मुलाकात की । इस मुलकात के बाद विधायक ने अभ्यर्थियों को पूरा सहयोग करने और विधान सभा में अंशकालिक खेल अनुदेशक पद पर भर्ती के मुद्दे को मजबूती से उठाने का भरोसा दिया और अपने सचिव से प्रश्न बनवाने का आदेश दिया। इस दौरान बीपीएड अभ्यर्थी देवेन्द्र पाण्डेय, अर्पित शाही, सोनू मिश्रा, रवि भदौरिया मौजूद थे।
आपको बता दें कि गोरखपुर में अभ्यर्थियों से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भरोसा दिया था कि वह जल्दी ही अंशकालिक खेल अनुदेशक पद की भर्ती को करवाएंगे। इसके बाद लखनऊ पहुंचते ही उन्होंने अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा राज प्रताप सिंह से अतिरिक्त प्रभार ले लिया था। और उनकी जगह अवनीश अवस्थी को अपर मुख्य सचिव बना दिया था। राज प्रताप सिंह पर आरोप है कि उन्होंने धमकी दी थी कि जब तक हम इस कुर्सी पर हैं इस भर्ती को नहीं करेंगे। इससे ऐसा लगता है कि योगी सरकार में नौकरशाह बेलगाम हैं या फिर मुख्यमंत्री प्रदेश के नव जवानों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। वहीं बेसिक शिक्षा मंत्री का कहना था कि हम विश्वास दिला रहें कि हम सुप्रीम कोर्ट नहीं जायेंगे और भर्ती करने चल रहे हैं। हो सकता है जून में शुरू कर दें। हालांकि जून का महीना बात गया, लेकिन अभी तक भर्ती की कोई तारीख नहीं घोषित की गयी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बेसिक शिक्षामंत्री की कही गई बातें झूठी साबित होने के बाद अब बीपीएड अभ्यर्थी तीसरी बार इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण में गए। बीपीएड अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के आदेश की अवमानना की तारीख और 12 अप्रैल के आदेश को सरकार के न मानने पर दोबारा हाईकोर्ट की डबल बेंच में अवमानना का केस दायर किया। जिसकी सुनवाई आगामी तारीख को होनी है।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश के बेबस और मजबूर बीपीएड अभ्यर्थी अंशकालिक खेल अनुदेशक के पद पर नियुक्ति के इंतजार में अपनी जिंदगी को दांव पर लगाए हुए हैं। लेकिन योगी आदित्यनाथ की सरकार दो बार हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी इनकी नियुक्ति की बजाय सिर्फ आश्वासन की घुट्टी पिला रही है। जब ये अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर धरना देते हैं, तो पुलिस इन्हें दौड़ा-दौड़ाकर लाठियों से पीटती है, लेकिन ये जुझारु बीपीएड अभ्यर्थी हार मानने को तैयार नहीं हैं। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बेसिक शिक्षामंत्री की कही गई बातें झूठी साबित होने के बाद अब बीपीएड अभ्यर्थी तीसरी बार इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण में गए हैं। बीपीएड अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के आदेश की अवमानना की तारीख और 12 अप्रैल के आदेश को सरकार के न मानने पर दोबारा हाईकोर्ट की डबल बेंच में अवमानना का केस दायर किया है।
शशिकान्त दुबे, बीपीएड अभ्यर्थी की दर्द-व्यंग्य भरी कविता
"हर भर्ती फंसा देंगे केस में, आओ तो कभी उत्तर प्रदेश में।
नेता बैठे हैं भेड़ियों के भेष में, आओ तो कभी उत्तर प्रदेश में।
फेकेंगे जुमला इतने पेस में, आओ तो कभी उत्तर प्रदेश में।
बेरोजगारों को नौकरी, सुरक्षा, अधिकार नहीं इस देश में,
कुछ दिन तो गुजारो उत्तर प्रदेश में।
आज झूठ बोलने में इनके सामने कोई नहीं रेस में,
कुछ वर्ष तो बर्बाद करो उत्तर प्रदेश में।"
बीपीएड अभ्यर्थी देवेंद्र पाण्डेय का कहना है कि “हमारी भर्ती को लेकर सरकार की तरफ से रोज-रोज की उम्मीद हमारे जीवन को बेचैन कर रही है। वहीं हाईकोर्ट के आदेश को भी अनदेखा किया जा रहा है। जबकि हमारे पास वह सब कुछ पर्याप्त है, जो हमारी भर्ती को शुरू करने के लिए चाहिए। लेकिन फिर भी हमारी भर्ती नहीं की जा रही है।“ वहीं बीपीएड अभ्यर्थी त्रिवेणी प्रसाद द्विवेदी का आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 28 मार्च 2018 को अधिकारियों को आदेश दिया था कि 1 सप्ताह के अंदर भर्ती की प्रक्रिया को जल्दी से जल्दी बहाल किया जाए। इसको लेकर 4 अप्रैल 2018 को अधिकारियों के साथ अभ्यर्थियों की बैठक भी हुई थी। इस बैठक में अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि 1 सप्ताह के भर्ती प्रक्रिया शुरु कर दी जाएगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 12 अप्रैल 2018 को आदेश दिया था कि बीपीएड अभ्यर्थियों की भर्ती 2 महीने के अंदर कर दी जाए और कंप्लाइंस रिपोर्ट सबमिट की जाए। लेकिन इन तानाशाह अधिकारियों ने अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की है। सरकार पर आरोप है कि उसने 32022 खेल अनुदेशकों की भर्ती में धांधली की समीक्षा करने के नाम पर रोक दिया है।
गौरतलब है कि नवंबर 2016 में निकाली गयी 32022 खेल अनुदेशक भर्ती मेरिट के आधार पर है और कोई भी काउंसलिंग नहीं हुई है। इसलिए यह पूर्णतया सुरक्षित है। अक्सर संविदा की भर्ती में राज्य सरकार बजट का रोना रोती है, जबकि माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट के द्वारा पहले ही सिंगल बेंच में राज्य सरकार की यह दलील दलील ठुकरा दी गई और सुप्रीम कोर्ट का भी निर्देश है कि बजट के मामले में शिक्षक भर्तियों में राज्य सरकारें बहाने नहीं कर सकती, क्योंकि यह पूर्णतया कैबिनेट से पास होते हुए अनुपूरक बजट में पूर्व मुख्यमंत्री के द्वारा पहले ही पास करवा दिया गया था। इसलिए योगी सरकार राजनीतिक दुश्मनी के लिए इस वैकेंसी को निरस्त नहीं कर सकती। जब मामला न्यायालय में हो को निरस्त करने और भर्ती कराने का अधिकार केवल और केवल माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट के पास है । उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में एक खेल शिक्षक होना अनिवार्य है। उत्तर प्रदेश के 32022 स्कूल में अभी भी एक भी खेल शिक्षक नहीं हैं। माना जा रहा है कि प्रदेश में करीब 80 हजार युवा बीपीएड की डिग्री लेकर बैठे हुए हैं और खेल शिक्षक बनने का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन सरकार उन्हें नौकरी देने को तैयार नही है। ऐसी दशा में हताश-परेशान ये होनहार बच्चे पकौड़े बेच रहे हैं, चाय बेच रहे हैं, मंदिरों में फूल बेच रहे हैं। हालांकि इन नवजवानों का सपना है कि वह स्कूल के बच्चों को अच्छा खिलाड़ी बनाएं। आखिर इस देश के बच्चों का भविष्य कैसे बचेगा ?
सोनीपत (हरियाणा)। सरकार के तमाम दावों के बावजूद हरियाणा की ट्रैफिक पुलिस रिश्वतखोरी से बाज नहीं आ रही है। ताजा मामला सोनीपत का है, जहां रिश्वत मांगते हुए एक एसएसआई और सिपाही का सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ है। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि ये दोनों नेशनल हाइवे नंबर-1 पर वाहन चालकों से एंट्री के नाम पर रिश्वत मांग रहे थे। टैक्सी चालक का आरोप है कि एसएसआई और सिपाही चालान के एवज में 600 रुपये रिश्वत मांग रहे थे। हालांकि वीडियो के वायरल होने के बाद डीआईजी ने दोनों आरोपियों को सस्पेंड कर दिया गया है। डीआईजी का कहना है कि इस मामले की जांच डीएसपी को सौंप दी गयी है।
आपको बता दें कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो नेशनल हाइवे नंबर-1 पर मुरथल के पास का है। टैक्सी चालक का आरोप है कि एसएसआई जोगेंद्र और सिपाही रविंद्र ने उससे 300 रुपये एंट्री और 300 रुपये चालान के रूप में वसूले, लेकिन वसूले गए 600 रुपए की उन्होंने कोई पर्ची नहीं दी। वहीं इस दौरान चुपके से टैक्सी ड्राइवर के एक साथी ड्राइवर ने इस रिश्वतखोरी का वीडियो बना लिया। इस वीडियो में सिपाही रविंद्र टैक्सी चालक को बार-बार समझा रहा है कि उसने जुगाड़ कर दिया है, वे अम्बाला तक चले जाएं तो कोई दिक्कत नहीं होगी। हालांकि जब टैक्सी ड्राइवर ने सिपाही से पर्ची मांगी तो वह गाली गलौच पर उतर आया। और टैक्सी चालक को जमकर गालियां दी। वहीं सिपाही की इस करतूत को उसके साथी ने वीडियों को रिकॉर्ड करने के बाद ने सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। जब यह वीडियो शनिवार को डीआईजी सतेंद्र गुप्ता के मोबाइल पर दिखाई दिया तो वह हैरान रह गए। उन्होंने आनन-फानन में एएसआई जोगेंद्र व सिपाही रविंद्र को सस्पेंड कर दिया। और इसके बाद डीएसपी वीरेंद्र को इसकी जांच के आदेश दिए। लेकिन सबसे शर्मनाक बात यह है कि आए दिन पुलिसकर्मियों की रिश्वतखोरी का मामला सामने आता रहता है, फिर भी पुलिस प्रशासन कोई सख्त कदम नहीं उठाता, जिससे कि रिश्वतखोरी के इस सिलसिले को रोका जा सके।
इंदौर (मध्य प्रदेश)। छेड़छाड़ और पुलिस की मनमानी के चलते आत्महत्या करने वाली 10वीं छात्रा के परिजनों ने फूटी कोठी चौराहे पर चक्काजाम कर दिया। और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। नाराज लोगों ने आरोप लगाया कि आरोपी की मां उन्हें खुली धमकी देती है कि पुलिस को पैसा जाता है, वह मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती है। इसी के चलते ही पुलिस ने कार्रवाई नहीं की और छात्रा ने आत्महत्या कर ली। हालांकि पुलिस उप महानिरीक्षक हरिनारायण चारी मिश्रा ने कहा कि मृतका की शिकायत पर कार्रवाई नहीं करने पर एसआई ओंकार कुशवाह को निलंबित कर दिया गया है। और आरोपी युवक पर केस दर्ज कर उसे और उसके माता-पिता और भाई को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले की जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को सौंपी दी गई है।"
आपको बता दें कि द्वारका थाना क्षेत्र के प्रजापत नगर की रहने वाली 10वीं की नाबालिग छात्रा को कई दिनों से मिलन चौहान नाम का युवक परेशान कर रहा था। वह आए दिन उसका पीछा करता था और छेड़छाड़ करता था। जब छात्रा के परिजन युवक के घर समझाने गए तो युवक की मां माया ने उलटा उन पर तेजाब फेंकने की धमकी देते हुए कहा था कि चाहे कितनी ही पुलिस आ जाए। मेरे बेटे का कुछ नहीं कर सकती। पुलिस को पैसा जाता है। और पुलिस उसकी जेब में रहती है। इतना ही नहीं गुरुवार को मिलन ने अपहरण करने की धमकी दी तो छात्रा शाम चार बजे पिता के साथ थाने गई, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। पुलिस की इस मनमानी से परेशान होकर में रात 9.30 बजे छात्रा ने आत्महत्या कर ली। उसने सुसाइड नोट में मिलन चौहान द्वारा परेशान किए जाने का जिक्र किया है। छात्रा ने पिता से माफी मांगते हुए सुसाइड नोट में लिखा है कि आरोपी उसे सोशल साइट पर ब्लैकमेल करने की धमकी देता था।
मृतक छात्रा के भाई का कहना है कि उसकी बहन गुरुवार को शिकायत करने पिता के साथ थाने गई थी। पुलिस ने दोनों को दो घंटे तक थाने में बैठा रखा था। जब बहन ने आवेदन लिखने के लिए एएसआई संध्या उर्मलिया से पेन और कागज मांगा था तो उन्होंने कागज देने से मना कर दिया। कार्रवाई नहीं होने से निराश दोनों लोग घर लौट आए थे। उसके बाद बहन ने खुदकुशी कर ली। उसने आरोप लगाया कि पुलिस वक्त पर सख्ती दिखाकर कार्रवाई कर देती तो उसकी बहन जिंदा होती। जबकि एएसआई उर्मलिया ने बताया कि जब छात्रा शिकायत लेकर आई थी, तब ड्यूटी ऑफिसर ओंकारसिंह कुशवाह मौजूद थे। छात्रा के कहने पर दो पुलिसकर्मियों को आरोपित के घर भेजा गया था, लेकिन वह नहीं मिला, तो उसकी मां सोनम को बेटे के साथ थाने आने के लिए कहा गया। वहीं कागज उपलब्ध नहीं होने से छात्रा को वह दे नहीं पाए थे।
हालांकि मामले के तूल पकड़ने के बाद छात्रा की आत्महत्या के मामले में द्वारकापुरी पुलिस ने शुक्रवार को प्रजापत नगर निवासी आरोपित मिलन चौहान, मां सोनम, पिता विनोद सहित एक नाबालिग भाई को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। वहीं जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम कराने के बाद छात्रा के परिजन शव लेकर उदयपुर (राजस्थान) चले गए। अब देखना है यह कि पुलिस आरोपी युवक को सजा दिलवाती है या फिर मामला ठंडा होने के बाद इस केस को भी ठंडे बस्ते में डाल देती है।
कानपुर (उत्तर प्रदेश)। देश में जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) लागू होने के बाद अब तक की सबसे बड़ी धोखाधड़ी कानपुर में सामने आयी है। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) के लखनऊ यूनिट ने बुधवार को कानपुर के दो व्यापारियों को 60 करोड़ की टैक्स चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया। जीएसटी लागू होने के एक साल बाद पकड़ी गई यह सबसे बड़ी टैक्स चोरी कही जा रही है। जीएसटी महानिदेशालय की लखनऊ यूनिट के मुताबिक, इन शातिर व्यापरियों ने पिछले एक साल के दौरान 400 करोड़ रुपए का फर्जी चालान जारी किया। GST रिटर्न में ITC के माध्यम से उस भुगतान को दिखाया जो कभी किया ही नहीं गया था।
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस के लखनऊ यूनिट की छापेमारी के दौरान पता चला कि आरोपी मनोज कुमार जैन और चंद्र प्रकाश तायल बहुत ही शातिर तरीके से GST की चोरी कर रहे थे। इन दोनों ने एक साल में विभिन्न फर्मों से जुड़े करीब 400 करोड़ रुपये के बोगस बिल जारी कर 60 करोड़ रुपये के आइटीसी का लाभ गलत तरीके से हासिल किया। इस दौरान सीमेंट, तारकोल, रॉ हाइड्स, प्लास्टिक ग्रेन्युल्स, बीओपीपी फिल्म्स व मेटल के बिल तो बनाए गए, पर कोई सामान सप्लाई नहीं किया गया। अधिकारियों के मुताबिक व्यापारियों को केवल आइटीसी का लाभ दिलाने के लिए ही यह बोगस बिल जारी किए गए थे। इन दोनों कारोबारियों ने अपने जीएसटी रिटर्न में जिन वस्तुओं की खरीद दिखाते हुए आइटीसी क्लेम किया है, वास्तव में वह खरीद भी कभी नहीं की गई।
इसके लिए फर्जी ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बनाया गया। ट्रांसपोर्ट मालिकों के साथ मिलकर माल ढुलाई के लिए गलत तारीख में फर्जी ई-वे बिल बनाया गया। माल ढुलाई के बदले ट्रांसपोर्ट मालिकों को RTGS के जरिए पेमेंट किया जाता था। और बाद में वह अपना कमीशन लेकर कैश में रिटर्न कर देता था। मनोज कुमार जैन ने लगभग 300 करोड़ रूपए की बोगस बिलिंग कर सरकार को लगभग 44 करोड़ रूपए का चूना लगाया। वहीं चंद्र प्रकाश तायल ने लगभग 100 करोड़ की फर्जी बिलिंग करते हुए 16 करोड़ की हेराफेरी की है। अधिकारियों का दावा है कि इन कारोबारियों का एक बड़ा गिरोह सक्रिय है जो बोगस बिलिंग कर जीएसटी में हेराफेरी कर रहे हैं।
आपको बता दें कि जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) में अब तक की सबसे बड़ी धोखाधड़ी के पूरे सर्च ऑपरेशन को अंजाम डीजीजीआई लखनऊ जोनल यूनिट के अपर महानिदेशक राजेंद्र सिंह के निर्देश के बाद दिया गया। जबकि डीजीजीआई, लखनऊ जोनल यूनिट के उप निदेशक कमलेश कुमार की देखरेख में छापेमारी की गईं। तब कहीं जाकर इस धोखाधड़ी का पर्दाफाश हुआ।
चंडीगढ़ (हरियाणा)। हरियाणा सरकार ने अपने कर्मचारियों, पेंशनरों एवं पारिवारिक पेंशनरों को दोगुना चिकित्सा भत्ते का तोहफा दिया है। सरकार ने निर्धारित चिकित्सा भत्ते की दर को 500 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रतिमास करने का निर्णय लिया है। इस तोहफे से सेवानिवृत्त कर्मचारियों समेत करीब पांच लाख कर्मचारियों, पेंशनर्स और पारिवारिक पेंशनर्स को फायदा होगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बताया कि निर्धारित चिकित्सा भत्ते की यह बढ़ी हुई दर पहली मई 2018 से लागू होगी।
आपको बता दें कि हरियाणा में 2 लाख 60 हजार कर्मचारी, 2 लाख पेंशनर्स और 25 से 30 हजार पारिवारिक पेंशनर्स हैं। 1 हजार रुपये चिकित्सा भत्ता करने का फायदा राज्य सरकार के बोर्डों, निगमों, पालिकाओं, विश्वविद्यालयों, विपणन कमेटियों और अन्य स्वायत्त निकायों के कर्मचारियों, पेंशनरों एवं पारिवारिक पेंशनरों को भी मिलेगा। वहीं सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव सुभाष लांबा ने राज्य सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही उनका कहना है कि सातवें वेतन आयोग में एक जनवरी 2016 से चिकित्सा भत्ते में बढ़ोतरी की राशि देय है, मगर केंद्र ने इसे 1जुलाई 2017 से अपने कर्मचारियों को दिया है।
चंडीगढ़ (हरियाणा)। हरियाणा सरकार ने अपने कर्मचारियों, पेंशनरों एवं पारिवारिक पेंशनरों को दोगुना चिकित्सा भत्ते का तोहफा दिया है। सरकार ने निर्धारित चिकित्सा भत्ते की दर को 500 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रतिमास करने का निर्णय लिया है। इस तोहफे से सेवानिवृत्त कर्मचारियों समेत करीब पांच लाख कर्मचारियों, पेंशनर्स और पारिवारिक पेंशनर्स को फायदा होगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बताया कि निर्धारित चिकित्सा भत्ते की यह बढ़ी हुई दर पहली मई 2018 से लागू होगी।
आपको बता दें कि हरियाणा में 2 लाख 60 हजार कर्मचारी, 2 लाख पेंशनर्स और 25 से 30 हजार पारिवारिक पेंशनर्स हैं। 1 हजार रुपये चिकित्सा भत्ता करने का फायदा राज्य सरकार के बोर्डों, निगमों, पालिकाओं, विश्वविद्यालयों, विपणन कमेटियों और अन्य स्वायत्त निकायों के कर्मचारियों, पेंशनरों एवं पारिवारिक पेंशनरों को भी मिलेगा। वहीं सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव सुभाष लांबा ने राज्य सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही उनका कहना है कि सातवें वेतन आयोग में एक जनवरी 2016 से चिकित्सा भत्ते में बढ़ोतरी की राशि देय है, मगर केंद्र ने इसे 1जुलाई 2017 से अपने कर्मचारियों को दिया है।
छतरपुर (मध्य प्रदेश)। प्रदेश में लोकायुक्त की कार्रवाई में आए दिन सरकारी कर्मचारियों के ठिकानों से करोड़ों की अवैध संपत्ति का खुलासा होता रहता है। इसके बावजूद सरकारी कर्मचारी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। लोकायुक्त की टीम ने इस बार छतरपुर में एक पटवारी को किसान से रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों गिरफ्तार किया है। पटवारी राम प्रसाद पटेल पर आरोप है कि वह किसान से पैतृक भूमि के बंटवारे के नामांतरण के एवज में 10 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा था। इससे परेशान होकर किसान अभिनेंद्र सिंह परमार ने लोकायुक्त पुलिस सागर से शिकायत की थी।
आपको बता दें कि छतरपुर जिले में बिजावर क्षेत्र के कदवारा गांव के रहने वाले किसान अभिनेंद्र सिंह परमार की पैतृक जमीन का बंटवारा हुआ था। अभिनेंद्र सिंह अपने हिस्से की जमीन के नामांतरण के लिए बिजावर क्षेत्र के कदवारा हल्का नंबर 56 के पटवारी राम प्रसाद पटेल से मिले। पटवारी ने उसने जमीन के नामांतरण के एवज में 10 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की। जब अभिनेंद्र सिंह ने रिश्वत देने में असमर्थता जतायी तो राम प्रसाद पटेल ने उनके काम को ठंडे बस्ते में डाल दिया। और कहा कि जब वह रिश्वत की रकम देंगे तभी उनका काम होगा। पटवारी की इस मनमानी से परेशान अभिनेंद्र सिंह ने किसी तरह नामांतरण के लिए यह सौदा 10 हजार रुपए की बजाय 5 हजार में तय किया। और सारे सबूतों का साथ सागर में लोकायुक्त पुलिस के पास जाकर शिकायत की। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने अपने स्तर पर मामले की पुष्टि की और फिर पटवारी को रंगेहाथ पकड़ने के लिए जाल बिछाया। लोकायुक्त पुलिस ने सोमवार को अभिनेंद्र सिंह को नामांतरण के लिए पटवारी को 5 हजार रुपए रिश्वत देने के लिए मोहनगंज स्थित पटवारी के कार्यालय में भेजा। पटवारी ने जैसे ही अभिनेंद्र सिंह के हाथ से कैमिकल लगे 5 हजार लिए वैसे ही लोकायुक्त पुलिस सागर के निरीक्षक बीएन द्विवेदी के नेतृत्व में टीम ने पटवारी राम प्रसाद पटेल को रंगेहाथ गिफ्तार कर लिया। लोकायुक्त पुलिस ने पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया। और बाद में निजी मुचलके पर पटवारी को छोड़ दिया। अब मामले पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
गौरतलब है कि पटवारी राम प्रसाद पटेल मोहनगंज मुहल्ले में ही किराए पर रहता है। और यहीं पर सरकारी काम के एवज में लोगों से रिश्वत की लेन-देन की बात करता है। इस मामले से पहले भी पटवारी राम प्रसाद पटेल के खिलाफ रिश्वतखोरी की शिकायत की जा चुकी है, लेकिन वह विभागीय कार्रवाई से हर बार बच जा रहा था।
नई दिल्ली। आप यदि किसी दुकानदार से बिना बिल के सामान खरीदते हैं तो सावधान हो जाएं। आप कोई भी खरीददारी करते समय दुकानदार से बिल लेना बिल्कुल न भूलें, क्योंकि यह हर ग्राहक का अधिकार है। बिल न लेने पर आपको रिटर्न फाइल करते समय अपने खर्च दिखाने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। वित्त मंत्री पियूष गोयल ने एलान किया है कि यदि कोई दुकानदार बिल देने से मना करता है तो अब आप उसके खिलाफ जीएसटी हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके शिकायत कर सकते हैं। यह हेल्पलाइन 15 दिन में शुरु हो जाएगी।
जीएसटी के एक वर्ष पूरे होने पर वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने आम लोगों से कहा कि यदि सभी ग्राहक सामान खरीदते समय दुकानदार से बिल की मांग करते हैं तो इससे टैक्स की चोरी रुकेगी और सामान की कीमतें चार से पांच प्रतिशत तक कम हो सकती है। उन्होंने कहा कि जो भी व्यापारी बिल नहीं दे रहे हैं, खरीददार उनकी शिकायत हेल्पलाइन पर कर सकेंगे। सरकार जल्द ही तीन अंक का एक हेल्पलाइन नंबर जारी करेगी। गोयल ने कहा कि सरकार क्रिकेट खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर सहित कई सेलेब्रिटी से संपर्क कर जल्द ही एक व्यापक जागरुकता अभियान चलाने की दिशा में कदम उठाएगी ताकि लोग खरीददारी करते समय बिल जरूर मांगे। आगे उन्होंने कहा कि अगर कोई दुकानदार किसी ग्राहक को बिल न देने के ऐवज में सामान की कीमत कम करने का प्रलोभन देता है तो ग्राहकों को सीधे ही हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत कर सकेंगे।
आपको बता दें कि गोयल ने आश्वस्त किया है कि छोटे व्यापारियों को जीएसटी में किसी भी तरह की कठिनाई नहीं होगी। उन्होंने कहा कि अगर किसी भी व्यापारी को कोई दिक्कत हो रही है तो वे सीधे वित्त मंत्री को पत्र लिख सकते हैं। उन्होंने कहा कि छोटे कारोबारी हमारी अर्थव्यवस्था का अमूल्य अंग हैं। छोटे कारोबारियों की सुविधा के लिए सरकार कंपोजीशन स्कीम के लिए सालाना टर्नओवर की सीमा वर्तमान में एक करोड़ रुपये को बढ़ाकर डेढ़ करोड़ करने के लिए मानसून सत्र में जीएसटी कानून में संशोधन के लिए एक विधेयक पेश करेगी।
वहीं आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि बिल के लिए दुकानदार मना नहीं कर सकते हैं, लेकिन फिर भी छोटे दुकानदारों को यह छूट होती है कि वह 25 रुपए से कम की खरीददारी पर किसी कारण वश बिल देने से बच सकते हैं। हालांकि यदि ग्राहक 25 रुपए से अधिक के सामान की खरीददारी करता है तो फिर पक्का बिल लेना ग्राहक का कानूनी अधिकार है। ऐसे में कोई भी दुकानदार ग्राहक को बिल देने से मना नहीं कर सकता है।
नई दिल्ली। आप यदि किसी दुकानदार से बिना बिल के सामान खरीदते हैं तो सावधान हो जाएं। आप कोई भी खरीददारी करते समय दुकानदार से बिल लेना बिल्कुल न भूलें, क्योंकि यह हर ग्राहक का अधिकार है। बिल न लेने पर आपको रिटर्न फाइल करते समय अपने खर्च दिखाने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। वित्त मंत्री पियूष गोयल ने एलान किया है कि यदि कोई दुकानदार बिल देने से मना करता है तो अब आप उसके खिलाफ जीएसटी हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके शिकायत कर सकते हैं। यह हेल्पलाइन 15 दिन में शुरु हो जाएगी।
जीएसटी के एक वर्ष पूरे होने पर वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने आम लोगों से कहा कि यदि सभी ग्राहक सामान खरीदते समय दुकानदार से बिल की मांग करते हैं तो इससे टैक्स की चोरी रुकेगी और सामान की कीमतें चार से पांच प्रतिशत तक कम हो सकती है। उन्होंने कहा कि जो भी व्यापारी बिल नहीं दे रहे हैं, खरीददार उनकी शिकायत हेल्पलाइन पर कर सकेंगे। सरकार जल्द ही तीन अंक का एक हेल्पलाइन नंबर जारी करेगी। गोयल ने कहा कि सरकार क्रिकेट खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर सहित कई सेलेब्रिटी से संपर्क कर जल्द ही एक व्यापक जागरुकता अभियान चलाने की दिशा में कदम उठाएगी ताकि लोग खरीददारी करते समय बिल जरूर मांगे। आगे उन्होंने कहा कि अगर कोई दुकानदार किसी ग्राहक को बिल न देने के ऐवज में सामान की कीमत कम करने का प्रलोभन देता है तो ग्राहकों को सीधे ही हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत कर सकेंगे।
आपको बता दें कि गोयल ने आश्वस्त किया है कि छोटे व्यापारियों को जीएसटी में किसी भी तरह की कठिनाई नहीं होगी। उन्होंने कहा कि अगर किसी भी व्यापारी को कोई दिक्कत हो रही है तो वे सीधे वित्त मंत्री को पत्र लिख सकते हैं। उन्होंने कहा कि छोटे कारोबारी हमारी अर्थव्यवस्था का अमूल्य अंग हैं। छोटे कारोबारियों की सुविधा के लिए सरकार कंपोजीशन स्कीम के लिए सालाना टर्नओवर की सीमा वर्तमान में एक करोड़ रुपये को बढ़ाकर डेढ़ करोड़ करने के लिए मानसून सत्र में जीएसटी कानून में संशोधन के लिए एक विधेयक पेश करेगी।
वहीं आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि बिल के लिए दुकानदार मना नहीं कर सकते हैं, लेकिन फिर भी छोटे दुकानदारों को यह छूट होती है कि वह 25 रुपए से कम की खरीददारी पर किसी कारण वश बिल देने से बच सकते हैं। हालांकि यदि ग्राहक 25 रुपए से अधिक के सामान की खरीददारी करता है तो फिर पक्का बिल लेना ग्राहक का कानूनी अधिकार है। ऐसे में कोई भी दुकानदार ग्राहक को बिल देने से मना नहीं कर सकता है।
बहराइच (उत्तर प्रदेश)। प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री आवास योजना को सरकारी अधिकारी, प्रधान और बैंककर्मी पलीता लगाने में लगे हुए हैं। बहराइच जिले में खुलासा हुआ है कि सरकारी अधिकारी और ग्राम प्रधान ने मिलीभगत से प्रधानमंत्री आवास योजना के 67 लाख रुपए पर हाथ साफ कर दिया है। इस महाघोटाले को अंजाम देने में विकास विभाग से लेकर एनआईसी और बैंककर्मियों की मिलीभगत सामने आयी है। बहराइच जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना में जांच के खुलासे ने अधिकारियों की नींद उड़ा दी है।
बहराइच के विकास खंड बलहा के ताजपुर गांव की ग्राम प्रधान अनीसा बेगम ने अधिकारियों की मिलीभगत से पीएम आवास योजना में बहुत बड़ा भ्रष्टाचार किया है। इस मामले की जांच में पता चला है कि पीएम आवाज योजना का धन ताजपुर गांव के लाभार्थियों के बैंक खाते की बजाय फर्जी फोटो लगाकर ग्राम प्रधान की बहू, बेटी और रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर किया गया। इस फर्जीवाड़े में 01.20 लाख रुपए प्रति केस के हिसाब से 56 पात्र लाभार्थियों का धन हड़पा गया। खास बात यह है कि पीएम आवास योजना के तहत ताजपुर गांव के 78 पात्र लाभार्थियों का चयन 2016 और 2017 में नियमानुसार 21 आवास देने के लिए किया गया था। और इन 78 लाभार्थियों की सूची एनआईसी द्वारा ऑनलाइन भी कर दी गयी थी। लेकिन इनमें से 56 लाभार्थियों के खाते में अभी तक एक रुपया ट्रांसफर नहीं गया। जबकि शासन की तरफ से काफी पहले ही सभी लाभार्थियों के लिए बजट जारी किया जा चुका है। पीएम आवास योजना में चयन के बाद जब लाभार्थियों को पैसा नहीं मिला तो उन्होंने रुपए के बारे में बैंक में जाकर पता किया । वहां पता चला कि उनके नाम से पैसा तो पहले ही जारी किया जा चुका है। इसका पता चलते ही लाभार्थी सदमे आ गए, कि आखिर क्या करें । हालांकि बाद में वे लोग तहसील दिवस के मौके पर तहसील गए और जिलाधिकारी से अपनी आपबीती सुनाई। उनकी इस बात को सुनकर जिलाधिकारी भी सन्न रह गयी। इसके बाद उऩ्होंने तुंरत सीडीओ के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम का गठन किया और पूरे मामले के जांच के आदेश दे दिए।
सीडीओ के नेतृत्व में गठित टीम ने जांच में पाया कि गांव की प्रधान ने बड़ी ही चालाकी से पहले नियमानुसार पात्रों का चयन किया और फिर उनका नाम एनआईसी में ऑनलाइन फीड करवा दिया। और बाद में पात्र लाभार्थियों की फोटो के स्थान पर अपने रिश्तेदारों की फोटो लगवाकर ग्राहक सेवा केंद्र में खाता भी खुलवा दिया। ऐसे में पीएम आवास योजना के पात्र 56 लाभार्थियों की 67 लाख रुपए की राशि लाभार्थियों की बजाय प्रधान के रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर हो गयी। और वहीं पात्र लाभार्थी राशि के इंतजार में बैठे रह गए, लेकिन जब उन्हें इस गड़बड़ी की जानकारी मिली तो उन्होंने मामले की शिकायत की। हालांकि अभी इस घोटाले की जांच जारी है। ऐसी संभावना है कि इस घोटाले में अभी और भी नामों के खुलासे हो सकते हैं।
यहां पर हम आपको बताएंगे कि आप माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान की (हाईस्कूल और इंटरमीडिएट) पिछले वर्षों की डुप्लीकेट मार्कशीट कैसे डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए आपको सबसे पहले माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। और नीचे दिए गयी प्रक्रिया को फॉलो करना होगा। ऐसा करने पर आप बड़ी आसानी से अपनी डुप्लीकेट मार्कशीट को डाउनलोड कर सकेंगे। यदि आप चाहें तो उसका प्रिंट आउट भी ले सकते हैं।
आप अपनी डुप्लीकेट मार्कशीट प्राप्त करने के लिए सबसे पहले आप इंटनेट ब्राउजर पर जाएं और वहां पर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान की आधिकारिक वेबसाइट का यूआरएल rajeduboard.rajasthan.gov.in टाइप करें। और फिर Enter की पर क्लिक कर दें।
Enter की पर क्लिक करने के बाद माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान की आधिकारिक वेबसाइट खुल जाएगी।

अब आपको वेबसाइट के बांयी ओर नीचे की तरफ "Old Results Verification" पर क्लिक करना होगा।
"Old Results Verification" पर क्लिक करते ही आपके सामने एक नया फॉर्म खुल जाएगा। इस फॉर्म में आपको डुप्लीकेट मार्कशीट का Year, Exam और Roll No. भरना होगा। और इसके बाद Submit बटन पर क्लिक करना होगा।

Submit बटन पर क्लिक करते ही आपके सामने आपकी डुप्लीकेट मार्कशीट खुलकर सामने आ जायेगी। अब आप चाहें तो इस मार्कशीट का प्रिंट आउट भी ले सकते हैं। इसके लिए आप दाहिनी तरफ ऊपर की ओर Print के बटन पर क्लिक करें।

Print के बटन पर क्लिक करते ही मार्कशीट के Print होने का ऑप्शन बांयी तरफ खुलकर आ जाएगा। अब आप Print ऑप्शन के बटन पर क्लिक करें। इस पर क्लिक करते ही । आपकी डुप्लीकेट मार्कशीट की कॉपी प्रिंट होकर आपके सामने आ जाएगी।
आपको हम बहुत ही आसान तरीके से बताएंगे कि आप माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान का हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का परीक्षाफल कैसे देख सकते हैं। इसके लिए आपको सबसे पहले माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। और नीचे दिए गयी प्रक्रिया को फालो करना होगा। ऐसा करने पर आपको अपना परीक्षाफल देखने को मिल जाएगा।
अपना परीक्षाफल देखने के लिए सबसे पहले आप ब्राउजर पर जाएं और वहां पर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान की आधिकारिक वेबसाइट का यूआरएल rajeduboard.rajasthan.gov.in टाइप करें। और फिर इंटर की पर क्लिक कर दें।

इंटर की पर क्लिक करने के बाद माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान की वेबसाइट खुल जाएगी। अब आपको वेबसाइट के दाहिनी ओर "RESULTS 2018" पर क्लिक करना होगा।

"RESULTS 2018" पर क्लिक करते ही आपके सामने (जो परीक्षाफल घोषित हो गया है) "Senior Secondary (Arts) - 2018 Result" , "Alternate Link Senior Secondary (Arts) - 2018 Result", "Senior Secondary (Science) - 2018 Result" "Senior Secondary (Commerce) - 2018 Result" अब आप जिस परीक्षाफल को जानना चाहते हैं उस पर क्लिक करें।

यदि आप "Senior Secondary (Science) - 2018 Result" पर क्लिक करते हैं तो आपके सामने एक नयी विंडो खुलती है।

यहां आपको अपना रोल नंबर टाइप करना होगा। रोल नंबर टाइप करने के बाद Submit बटन पर क्लिक करना होगा। Submit बटन पर क्लिक करते ही आपके परीक्षाफल का एक नया पेज खुल जाएगा। इस पेज को आप डाउनलोड भी कर सकते हैं।
सीकर (राजस्थान)। एक विवाह के दौरान लड़की के पिता ने हेलमेट को लेकर अनोखी पहल की। पेशे से शिक्षक पिता ने अपनी बेटी की शादी में दूल्हे और बारातियों को हेलमेट देकर सड़क सुरक्षा की शपथ दिलाई। 150 बारातियों को उपहार मे हेलमेट देने वाले किशोर कुमार ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं की खबरें रोजाना अखबारों में पढ़ने को मिलती है। अधिकांश सड़क दुर्घटनाओं में मौत का कारण दुपहिया वाहन चालक द्वारा हेलमेट नहीं पहनने की बात सामने आती है। इसीलिए उन्होंने तय किया को वह अपनी बेटी के विवाह में दूल्हे समेत सभी बारातियों को हेलमेट भेंट करेंगे, और उन्हें शपथ दिलाएंगे, जिससे उनका जीवन सुरक्षित रहे।
आपको बता दें कि सीकर जिले में धाननी गांव के शिक्षक किशोर कुमार की बेटी शकुंतला का विवाह मंगलवार को सम्पन्न हुआ। विवाह तय करने के दौरान ही किशोर कुमार ने वर पक्ष से उपहार में हेलमेट देने की बात निश्चित कर ली थी। इसी वचन के तहत उन्होंने मंगलवार को बेटी और दामाद के वरमाला होने के बाद स्टेज पर पहले तो दूल्हे को हेलमेट उपहार दिया। और इसके बाद प्रत्येक बाराती को भी हेलमेट का उपहार प्रदान किया। और साथ ही सभी बारातियों को सड़क सुरक्षा की शपथ भी दिलाई।
गौरलतब है कि हमारे देश में दोपहिया वाहन चलाने और बैठने दोनों के लिए हेलमेट लगाना जरूरी है, लेकिन अकसर देखा यह जाता है कि लोग बिना हेलमेट लगाये ही मोटरसाईकिल या किसी दोपहिया वाहन को चलाते हैं। जिसकी वजह से आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं। इस दुर्घटना में किसी की जान चली जाती है तो कोई गंभीर रुप से घायल हो जाता है। इसलिए आप किसी लोकल मार्केट या कहीं भी थोड़ी दूर जा रहें हो तो भी हेलमेट लगायें, क्योंकि दुर्घटना कहीं भी और कभी भी हो सकती हैं।
हेलमेट लगाने से फायदे-
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के ओवरटाइम भत्ते को लेकर एक अहम फैसला लिया है। अब परिचालन कर्मियों को छोड़कर बाकी कर्मचारियों का ओवरटाइम भत्ता नहीं दिया जाएगा। कार्मिक मंत्रालय ने यह आदेश सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर जारी किया। केंद्रीय कर्मचारियों की संख्या करीब 48.41 लाख है। यह आदेश भारत सरकार के सभी मंत्रालयों, विभागों, उनसे संबद्ध और अधीन आने वाले कार्यालयों पर लागू होगा।
हालांकि सरकार की तरफ से यह भी कहा गया है कि ऑपरेशनल स्टाफ और औद्योगिक कर्मचारियों को इससे अलग रखा जाएगा। इस आदेश को केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों में लागू किया जाएगा। परिचालन कर्मियों में ऐसे सभी गैर-मंत्रालयी अराजपत्रित केंद्रीय कर्मी शामिल हैं जो सीधे तौर पर कार्यालयों के सुचारू संचालन में शामिल हैं। इनमें वे कर्मी भी शामिल हैं जिन पर विद्युत और यांत्रिक उपकरणों के संचालन की जिम्मेदारी है।
कार्मिक मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों एवं विभागों की संबंधित प्रशासनिक शाखा को सभी परिचालन कर्मियों की सूची तैयार करने का आदेश दिया गया है। इसमें किसी श्रेणी विशेष के कर्मचारियों को परिचालन कर्मियों की सूची में शामिल करने का कारण भी बताना होगा। सरकार ने ओवरटाइम प्रदान करने के लिए इसे बायोमेट्रिक अटेंडेंस से जोड़ने का फैसला भी किया है। इसके अलावा ओवरटाइम की दरों को संशोधित भी नहीं किया जाएगा। इसका भुगतान 1991 में जारी आदेश के मुताबिक ही किया जाएगा। कार्मिक मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा है कि ओवरटाइम का भुगतान तभी किया जाएगा जबकि संबंधित कर्मचारी को उसके वरिष्ठ अधिकारी ने किसी अत्यावश्यक कार्य के लिए लिखित में कार्यालय में अतिरिक्त समय तक रुकने का आदेश दिया हो।
नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट सेवाओं के सरलीकरण की दिशा में एक और अहम कदम उठाते हुए मंगलवार से मोबाइल फोन से भी आवेदन करने की सुविधा शुरू कर दी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर पासपोर्ट सेवा ऐप लॉन्च करके सेवा की शुरुआत की। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि पासपोर्ट के लिए अब लोगों को अब दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इस एप के जरिए देश के किसी हिस्से में पासपोर्ट के लिए आवेदन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह एप पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को और भी सरल बनाएगा। एप पर दिए गए पते पर ही पुलिस वेरिफिकेशन होगा। इस मौके पर संचार मंत्री मनोज सिन्हा और विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह भी उपस्थित थे।
विदेश मंत्री का कहना था कि अब पासपोर्ट के लिए आवेदन करते वक्त महिला और पुरुषों को मैरिज सर्टिफिकेट देने की जरूरत नहीं होगी। ज्यादातर तलाकशुदा महिलाओं की शिकायत थी कि उन्हें अपने पूर्व पति यानी ऐसे व्यक्ति की जानकारी देनी पड़ती है, जो बच्चों के लिए अजनबी होते हैं। अब उन्हें ऐसा नहीं करना पड़ेगा।
विदेश मंत्री ने कहा कि इसके जरिए पासपोर्ट बनवाना और आसान हो गया है। एप के मुख्य मेन्यु में फीस, पासपोर्ट का स्टेटस, सेंटर, एफिडेविड और अपाइंटमेंट संबंधी उपलब्धता है। इसमें उपलब्ध सेवाओं का ब्योरा, आवेदन कहां करना है, आवेदन पत्र, फीस के भुगतान, पुलिस वेरिफिकेशन, पोस्टल डिस्पैच एवं कॉल सेंटर की जानकारी भी रहेगी। हालांकि इसके पूर्व भी मंत्रालय ने , इस तरह का एप बनाया था, लेकिन उसमें कुछ दिक्कतें थीं। इसलिए नए सिरे से यह एप विकसित किया है। इसमें आवेदक अपने स्मॉर्टफोन मोबाईल पर एप को डाउनलोड कर पासपोर्ट हेतु आवेदन कर सकते हैं। पासपोर्ट सेवा केंद्र, शुल्क का भुगतान, आवेदन की स्थिति, संपर्क तथा अन्य संबंधित जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही मुलाकात हेतु उपलब्ध समय की स्थिति, पासपोर्ट हेतु आवश्यक दस्तावेज एवं भारत के बाहर के मिशन/पोस्टों आदि के बारे में भी एप के माध्यम से जानकारियां प्राप्त की जा सकती है । इससे पासपोर्ट संबंधी आवेदन में पारदर्शिता एवं समय की बचत तो होगी ही साथ ही जरूरी जानकारी लेने में भी आसानी होगी।
विदेश मंत्री के मुताबिक, देश में फिलहाल 260 पासपोर्ट केंद्र हैं। सरकार हर लोकसभा क्षेत्र में पासपोर्ट केंद्र खोलने की योजना पर काम कर रही है। पहले दो चरणों में 251 नए पासपोर्ट केंद्र खोलने की योजना बनाई गई थी, जिसमें से 212 केंद्र बन चुके हैं। तीसरे चरण में हमने 38 केंद्र खोलने की बात कही थी, इनमें से 2 शुरू हो गए हैं।
नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट सेवाओं के सरलीकरण की दिशा में एक और अहम कदम उठाते हुए मंगलवार से मोबाइल फोन से भी आवेदन करने की सुविधा शुरू कर दी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर पासपोर्ट सेवा ऐप लॉन्च करके सेवा की शुरुआत की। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि पासपोर्ट के लिए अब लोगों को अब दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इस एप के जरिए देश के किसी हिस्से में पासपोर्ट के लिए आवेदन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह एप पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को और भी सरल बनाएगा। एप पर दिए गए पते पर ही पुलिस वेरिफिकेशन होगा। इस मौके पर संचार मंत्री मनोज सिन्हा और विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह भी उपस्थित थे।
विदेश मंत्री का कहना था कि अब पासपोर्ट के लिए आवेदन करते वक्त महिला और पुरुषों को मैरिज सर्टिफिकेट देने की जरूरत नहीं होगी। ज्यादातर तलाकशुदा महिलाओं की शिकायत थी कि उन्हें अपने पूर्व पति यानी ऐसे व्यक्ति की जानकारी देनी पड़ती है, जो बच्चों के लिए अजनबी होते हैं। अब उन्हें ऐसा नहीं करना पड़ेगा।
विदेश मंत्री ने कहा कि इसके जरिए पासपोर्ट बनवाना और आसान हो गया है। एप के मुख्य मेन्यु में फीस, पासपोर्ट का स्टेटस, सेंटर, एफिडेविड और अपाइंटमेंट संबंधी उपलब्धता है। इसमें उपलब्ध सेवाओं का ब्योरा, आवेदन कहां करना है, आवेदन पत्र, फीस के भुगतान, पुलिस वेरिफिकेशन, पोस्टल डिस्पैच एवं कॉल सेंटर की जानकारी भी रहेगी। हालांकि इसके पूर्व भी मंत्रालय ने , इस तरह का एप बनाया था, लेकिन उसमें कुछ दिक्कतें थीं। इसलिए नए सिरे से यह एप विकसित किया है। इसमें आवेदक अपने स्मॉर्टफोन मोबाईल पर एप को डाउनलोड कर पासपोर्ट हेतु आवेदन कर सकते हैं। पासपोर्ट सेवा केंद्र, शुल्क का भुगतान, आवेदन की स्थिति, संपर्क तथा अन्य संबंधित जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही मुलाकात हेतु उपलब्ध समय की स्थिति, पासपोर्ट हेतु आवश्यक दस्तावेज एवं भारत के बाहर के मिशन/पोस्टों आदि के बारे में भी एप के माध्यम से जानकारियां प्राप्त की जा सकती है । इससे पासपोर्ट संबंधी आवेदन में पारदर्शिता एवं समय की बचत तो होगी ही साथ ही जरूरी जानकारी लेने में भी आसानी होगी।
विदेश मंत्री के मुताबिक, देश में फिलहाल 260 पासपोर्ट केंद्र हैं। सरकार हर लोकसभा क्षेत्र में पासपोर्ट केंद्र खोलने की योजना पर काम कर रही है। पहले दो चरणों में 251 नए पासपोर्ट केंद्र खोलने की योजना बनाई गई थी, जिसमें से 212 केंद्र बन चुके हैं। तीसरे चरण में हमने 38 केंद्र खोलने की बात कही थी, इनमें से 2 शुरू हो गए हैं।
रायपुर (छत्तीसगढ़)। राज्य में पुलिसकर्मियों के परिवारों की हड़ताल पर पुलिस प्रशासन सख्त हो गया है। पुलिस परिवारों के 25 जून को प्रस्तावित आंदोलन को रोकने के लिए अब आला पुलिस अफसर भी मोर्चे पर उतर गए हैं। धमतरी एसपी ने जिले के 11 आरक्षकों और प्रधान आरक्षकों को बर्खास्तगी का नोटिस भेज दिया है। और पुलिसकर्मियों के घरों पर पहरा भी बिठा दिया गया है। इतना ही नहीं, परिवार की महिलाओं के घरों से निकलने पर अघोषित तौर पर पाबंदी लगा दी गयी है। जगदलपुर में इस सख्ती से परेशान एक आरक्षक की पत्नी ने फांसी लगाकर खुदकशी करने की कोशिश की। हालांकि परिजन व पड़ोसियों की मदद से उसे बचा लिया गया।
वहीं दंतेवाड़ा में पुलिस कॉलोनी के बाहर पहरा लगाया गया है। घरों से बाहर निकलने वाली महिलाओं की तस्वीर खींची जा रही है। दुर्ग और कांकेर पुलिस लाइन के मुख्यद्वार पर ताला लगा दिया गया है। दंतेवाड़ा की पुलिस लाइन व सीएफ बटालियन के दरवाजों पर जवानों को तैनात किया गया है। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर अधीक्षकों ने पुलिस कर्मियों की रुटीन छुट्टियां रद्द कर दी हैं। अब सिर्फ उन्हीं पुलिकर्मियों को छुट्टी मिलेगी, जिसे अवकाश अति आवश्यक है। पुलिस विभाग ऐसे जवानों की सूची बना रहा है, जिनके परिवार की महिलाएं प्रदर्शन में शामिल रहीं। एक वरिष्ठ अफसर ने बताया कि आंदोलन थमने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
बताया जा रहा है कि जगदलपुर में रंजना के पति विनोद यादव का तबादला नक्सल प्रभावित मारडूम करने के बाद ही आवास खाली करने का नोटिस थमा दिया गया । इस फरियाद को लेकर उसकी पत्नी रंजना यादव एसपी डी. श्रवण के पास पहुंचीं, लेकिन एसपी ने उसे डांटकर भगा दिया । इस बात से क्षुब्ध रंजना ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या करने की कोशिश की । धमतरी के 11 आरक्षकों और प्रधान आरक्षकों का दोष सिर्फ इतना था कि इन लोगों ने सोशल मीडिया पर आंदोलन और अपनी मांगों से जुड़े पोस्ट को फॉरवर्ड किया था। पुलिस ने इस हरकत को धारा-311 का उल्लंघन माना है और द्रोह करने का आरोप लगाते हुए 7 दिन के भीतर जवाब मांगा है। एसपी ने पूछा है कि आखिर आपको बर्खास्त क्यों ने किया जाए?। इसके अलावा पुलिस अब सोशल मीडिया ग्रुप्स पर भी कड़ी निगरानी रख रही है। जिला पुलिस ने इस कार्रवाई को जायज ठहराते हुए चेतावनी दी है कि आगे भी कोई आंदोलन को सोशल मीडिया के जरिये चलाना चाहेगा उस पर भी इसी तरह की कार्रवाई होगी। वहीं इस बात की चर्चा है कि बर्खास्त पुलिसकर्मियों ने नोटिस के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी की है।