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भोपाल (मध्य प्रदेश)। मतदाता सूची में लाखों मतदाताओं के नाम को लेकर मचे घमासान के बीच चुनाव आयोग ने कांग्रेस पार्टी के दावे को गलत करार दिया है। निर्वाचन आयोग का कहना है कि है कि इस संबंध में 3 जून को की गई कांग्रेस पार्टी की शिकायत जांच में गलत पाई गई। कलेक्टरों के माध्यम से हजारों बीएलओ को लगाकर जांच कराई गई। इसमें आरोप पूरी तरह प्रमाणित नहीं पाए गए। इन 34 जिलों की 91 विधानसभा सीटों में करीब 90 फीसद मतदाता पात्र निकले और सूची में दर्ज पते पर ही पाए गए। शिकायत में जो आरोप लगाए गए थे, उन क्षेत्रों में 7.81 प्रतिशत मतदाताओं के नाम पहले ही अपात्र होने की वजह से हटाए जा चुके हैं। जबकि 2.91 फीसद मतदाता के नाम हटाने योग्य पाए गए हैं। इसमें गैर-हाजिर, मृत और डुप्लीकेसी से संबंधित मामले शामिल हैं।
इस जांच में 1 लाख 76 हजार 564 व्यक्तियों के नाम सूची से या तो पहले ही हट चुके थे या फिर दर्ज ही नहीं पाए गए। सिर्फ 49 हजार 422 ऐसे मतदाता निकले, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की कार्रवाई की जानी है। निर्वाचन आयोग की मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सलीना सिंह के अनुसार शिकायत की जांच के दौरान कलेक्टरों से 26 लाख 76 हजार 231 प्रकरणों की जानकारी प्राप्त हुई। ये सभी मामले 34 जिलों की 91 विधानसभा सीटों से जुड़े थे। बीएलओ ने एक-एक मतदाता के घर जाकर जांच की। कुल 22 लाख 60 हजार 158 मतदाताओं के सत्यापन में 20 लाख 34 हजार 172 मतदाता घरों में उपस्थित मिले। 01.75 लाख वोटरों के नाम मतदाता सूची में पहले से ही दर्ज नहीं थे। बाकी 50 हजार मतदाताओं के मामले में गड़बड़ी मिली है, जिसे ठीक करने का काम जारी है। बीएलओ ने मतदाताओं के हस्ताक्षर एवं मोबाइल नंबर भी लिए हैं। पहचान मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड या अन्य आईडी प्रूफ के द्वारा करवाई गई। ऐसे मतदाता जो उपस्थित नहीं मिले, उनके संबंध में परिवार के मुखिया या सदस्य अथवा स्थानीय निवासियों से जानकारी ली गई। कुल मिलाकर कलेक्टरों द्वारा बूथ लेवल ऑफिसरों को घर-घर भेजकर कराए गए सत्यापन से एक बात साफ हो गई कि मतदाता सूची में उस तरह की गड़बड़ियां नहीं हैं, जैसा दावा किया जा रहा था। इसकी रिपोर्ट बुधवार देर रात चुनाव आयोग को भेज दी गई।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि 26 लाख 76 हजार 231 मतदाताओं में से 3 लाख 67 हजार 73 मतदाताओं की जांच होना बाकी है। इनकी पड़ताल करके रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेजी जाएगी। बाकी जिलों में भी जांच चल रही है। ये एक सतत प्रक्रिया है। समान चेहरे वाली शिकायत की जांच बाकी मतदाता सूची में समान चेहरे वाले कई मतदाताओं की शिकायत पर कार्रवाई होना अभी बाकी है। इसके लिए विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से जांच का काम चल रहा है। 31 जुलाई को मतदाता सूची का प्रारंभिक प्रकाशन होगा। इसके बाद दावे-आपत्ति का सिलसिला शुरू हो जाएगा। 27 सितंबर को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। इस दौरान नाम जोड़ने, संशोधन और हटाने का काम चलेगा। 4.99 करोड़ रह गए मतदाता प्रदेश में अपात्रों के नाम मतदाता सूची से हटाने के बाद अब मतदान के योग्य मतदाताओं की संख्या 4 करोड़ 99 लाख 34 रह गई है। यह संख्या पहले 5 करोड़ 1 लाख 96 हजार 47 थी।
सलीना सिंह मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने चुनाव आयोग को जांच रिपोर्ट भेजने के बाद बताया कि कांग्रेस की शिकायत जनवरी 2018 की मतदाता सूची के आधार पर थी। मई तक हम 10 लाख 31 हजार 812 अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं के नाम हटा चुके थे।
रायगढ़ (छत्तीगढ़)। पुलिसकर्मियों के परिवारों के आंदोलन के एलान के बीच एक अजीबो गरीब चिट्ठी वायरल हुई है। रायगढ़ के एक हेड कांस्टेबल ने एसपी को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें उसने कहा है कि उसकी पत्नी 25 जून को रायपुर में हो रहे धरने में जाएगी। इस दौरान उसे अपने बच्चों को संभालना पड़ेगा। वह पत्नी की चेतावनी से डरा हुआ है। इसलिए बच्चों को संभालने के लिए दो दिन की छुट्टी दे दी जाए। वहीं एसपी टीआर कोशिमा का कहना है कि हेड कांस्टेबल ने चिट्ठी को सोशल मीडिया में वायरल किया है। यह तरीका अनुशासन भंग करने वाला है। हेड कांस्टेबल को नोटिस दिया गया है। जवाब मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी। रघुनाथनगर थाने के हेडकांस्टेबल संजय कुमार सिंह ने एसपी के नाम यह चिट्ठी थाना प्रभारी को दी है। चिट्ठी वायरल होने के बाद एसपी ने हेडकांस्टेबल से जवाब मांगा है।
हेड कांस्टेबल ने अपनी चिट्ठी में एसपी को लिखा है कि मैं प्रधान आरक्षक- 286 संजय कुमार सिंह जो थाना रघुनाथनगर में पदस्थ हूं। मेरी पत्नी ऊंचे और राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखती है। जिसके कारण मुझे उसके आदेशानुसार ही कार्य करना पड़ता है। वह 25 तारीख को रायपुर में होने वाले पुलिस परिवार के धरना प्रदर्शन में शामिल होना चाहती है। मैं नहीं चाहता हूं कि वह उस धरने में शामिल हो। उसको रोकने के लिए मारना पीटना आवश्यक है। लेकिन उसका मायका राजनीतिक होने के कारण मुझ पर कभी भी अपराध दर्ज करवा सकती है। अत: श्रीमानजी से निवेदन है कि मुझे अपनी पत्नी को डराने-धमकाने / पिटाई करने की अनुमति प्रदान करने की कृपा करें, जिससे मैं उसे धरना में रायपुर जाने से रोक सकूं।
वहीं छत्तीगढ़ में पहली बार अपने अधिकारों को लेकर उबल पड़े पुलिसकर्मियों ने अपने पत्नी-बच्चों और परिजनों को आंदोलन का चेहरा बना लिया है। पुलिस परिवारों का आंदोलन राज्यभर में फैलता जा रहा है। पूरे प्रदेश में आंदोलन को कुचलने की कोशिशें तेज हो गईं हैं। लेकिन 25 जून नजदीक आने के साथ ही पुलिस परिवारों का आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है। कोरबा में 40 महिलाओं को हिरासत में लिया गया। हालांकि हंगामे की आशंका से 6 घंटे बाद छोड़ दिया गया। सभी शहरों में पुलिस परिवार 25 जून को राजधानी रायपुर और जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। बुधवार को भी रायपुर को छोड़कर कई शहरों में रैलियां निकाली गईं। कोरिया में पुलिसकर्मियों के परिजनों ने कोरिया में रैली निकाली और कलेक्टोरेट पहुंचकर एसडीएम को सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के दौरान जिलेभर के पुलिस जवानों के परिजन मौजूद थे। परिजनों ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे चुप नहीं बैठेंगे। सीएम हाउस का घेराव करेंगे। अंबिकापुर में पुलिस परिवार ने अंबिकापुर की प्रमुख सड़कों से रैली निकाली। अफसर रह-रहकर कार्रवाई की चेतावनी देते रहे। लेकिन वे नहीं माने। कलेक्टोरेट पहुंचकर रैली खत्म की और ज्ञापन सौंपा। नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने भी रैली में शामिल होकर उन्हें समर्थन दिया।
इस बीच रायपुर एसएसपी अमरेश मिश्रा की अपील वायरल हुई है। लंबी चिट्ठी में उन्होंने पुलिस जवानों से कहा है कि सरकार उनकी मांगों पर विचार कर रही है। समितियां बनाई हैं, जो हर साल प्रस्ताव भेजती हैं। बेसिक सुविधाएं जरूरी हैं। इसके लिए पुलिस कल्याण बोर्ड कोशिशें कर रहा है। पुलिस एक अनुशासित विभाग है। इसमें आंदोलन करने पर बर्खास्त भी किया जा सकता है।
आपको बता दें कि पुलिसकर्मियों की बढ़ती परेशानियों और वेतनमान के विरोध में पुलिसवालों के परिवार वाले 25 जून को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। पुलिसकर्मियों के परिवार की मांग है कि पौष्टिक आहार का भत्ता 100 से बढ़ाकर 3000 रु. किया जाय, मेडिकल भत्ता 200 से बढ़ाकर 2000 रु. किया जाए, मोबाइल भत्ता 500 रु. दिया जाए, वर्दी धुलाई भत्ता 60 से बढ़ाकर 500 रु. बढ़ाया जाए, साइकिल भत्ता बंद कर पेट्रोल भत्ता 3000 रु. करें, किट पेटी सामग्री की जगह 10 हजार रु. हर साल दिया जाए, मकान किराए की राशि बढ़ाई जाए, यात्रा भत्ते में भी बढ़ोतरी हो, योग्य एवं वरिष्ठ आरक्षकों को परीक्षा के जरिए प्रमोशन किया जाए, अन्य विभागों की तरह सप्ताह में एक दिन छुट्टी दी जाए, नक्सली भत्ता 50 प्रतिशत किया जाए, प्रत्येक जवान व कर्मचारी की ड्यूटी 8 घंटे तय की जाए, नक्सल क्षेत्र के जवानों को बुलेट प्रूफ जैकेट दी जाए, ड्यूटी के दौरान मरने वालों को शहीद का दर्जा दिया जाए, शहीद के परिजन को एक करोड़ रु. दिए जाएं।
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चंडीगढ़ (हरियाणा)। हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने राज्य के अफसरों के लिए नया फरमान जारी किया है। मुख्य सचिव द्वारा जारी सर्कुलर में कहा गया है कि सरकारी अफसर और बाबू सांसदों और विधायकों के सम्मान में अपनी कुर्सी से खड़े होकर उनका स्वागत करें और उनकी पूरी मदद करें। इतना ही नहीं जब भी सांसद या विधायक सरकारी ऑफिस पहुंचे तो अधिकारी उनकी गाड़ी के पास पहुंचकर उन्हें रिसीव करें। और वापसी में उन्हें पूरे सम्मान के साथ गाड़ी तक पहुंचाएं । ऐसा न करने पर कड़ा दंड भुगतना पड़ेगा।
मुख्य सचिव के दफ्तर से जारी इस सर्कुलर में कहा गया है कि चुने गए जनप्रतिनिधियों के साथ अफसरों को शिष्टता और सावधानी के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए। जब सरकारी विभाग के दफ्तरों में सांसद या विधायक पहुंचें, तो संबंधित अफसर को प्रोटोकॉल के तहत अपनी कुर्सी से खड़े होकर उनका अभिवादन करना चाहिए। सांसदों और विधायकों के हर सवाल का अफसर पूरी सभ्यता और शिष्टाचार से जवाब देना चाहिए। जानकारी नहीं दे पाने की सूरत में इसकी ठोस वजह बताना चाहिए। सभी सरकारी अफसर सांसद और विधायकों का फोन उठाएं और व्यस्त होने की स्थिति में एसएमएस के जरिए तुरंत उन्हें इसकी जानकारी दें। माननीयों के सभी अनुरोधों को ध्यानपूर्वक सुना जाए। जिस भी संसदीय क्षेत्र में कोई प्रोग्राम हो तो वहां के सांसद को जरूर बुलाएं और उन्हें सुविधाजनक सीट दें। अगर किसी सांसद का निर्वाचन क्षेत्र दो जिले में पड़ता है तो अधिकारी दोनों जिलों में सांसद को बुलाएं। सर्कुलर में लिखा है कि अगर अफसर ने इन निर्देशों का पालन नहीं किया, तो जांच के बाद कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
गौरतलब है कि अफसरों द्वारा सांसद-विधायकों के फोन नहीं उठाने की शिकायतें आम हैं। इसी तरह प्रोटोकॉल के उल्लंघन और संतोषजनक व्यवहार नहीं होने की शिकायतें बढ़ी हैं। लोकसभा में यह मामला उठने के बाद संसदीय मामलों की समिति ने 4 जनवरी को सभी प्रदेश सरकारों को इस संबंध में सख्ती बरतने की हिदायत दी थी। इस पर कदम उठाते हुए प्रदेश सरकार ने यह सर्कुलर जारी किया है। आदेश में साफ कहा गया है कि दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वालों पर सरकार कार्रवाई करेगी।
वहीं इस फैसले से वीआइपी कल्चर हावी होने की आशंका को खारिज करते हुए कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने कहा कि प्रोटोकॉल में सांसद और विधायक का दर्जा मुख्य सचिव से ऊपर है। यदि सांसद और विधायक सरकारी कार्यालय में जाते हैं तो अफसरों को उनका अभिवादन करना ही चाहिए। कुछ अफसर इसका पालन नहीं करते, जिसके चलते यह सर्कुलर जारी किया गया है। जबकि इस सर्कुलर के बारे में एक अफसर का कहना है कि, 'अगर किसी गंभीर अपराध में गिरफ्तार हुए शख्स के प्रति नरमी बरतने की किसी सांसद की गुजारिश हम मानते हैं, तो इससे लोगों के बीच असंतोष भड़क सकता है। ऐसे में हमें जनता के साथ जाना पड़ता है।'
आपको बता दें इससे पहले उत्तर प्रदेश में चीफ सेक्रेटरी राजीव कुमार की ओर से 18 अक्टूबर 2017 को एक फरमान जारी हुआ था। जिसमें कहा गया था कि किसी भी कार्यालय में या पब्लिक जगह में यदि कोई विधायक, सांसद आते हैं, तो सभी अफसरों कर्मचारियों को उनके सम्मान में खड़े होना होगा। आईजी, डीएम और एसपी को सांसदों- विधायकों के साथ सलीके से पेश आना होगा। सांसदों, विधायकों के पत्रों की रिसीविंग देना होगा । उनके सभी पत्रों पर गंभीरता दिखाते हुए जल्द से जल्द कार्रवाई करते हुए उन्हें अवगत कराना होगा। और उनकी फोन कॉल को रिसीव करना होगा। ऐसा न करने पर कार्रवाई की जाएगी।
इंदौर (मध्य प्रदेश)। मतदाता सूची में गड़बड़ी का खुलासा होने के बाद अब एक ही पते पर हजारों मतदाताओं के नाम दर्ज होने के मामले बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं। इंदौर की विधानसभा और भोपाल की नरेला विधानसभा में सबसे ज्यादा फर्जी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में दर्ज पाए गए हैं। चुनाव आयोग ने अब ऐसे आवासों को नए सिरे से नंबर देने और मतदाता सूची में सुधार का काम शुरु कर दिया है।
अब मतदाता सूची में गड़बड़ियों की शिकायतें मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी घर-घर जाकर सुधार में लगे हुए हैं। अब तक 6400 ऐसे मतदाता सामने आए हैं, जिनके नाम सूची में दो बार दर्ज हैं। प्रशासन का कहना है कि यह त्रुटियां हैं, जो मकान बदलने जैसे कारणों से पैदा होती हैं, इन्हें दुरुस्त किया जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि इंदौर जिले की मतदाता सूची में एक लाख से अधिक फर्जी मतदाताओं के नाम शामिल है। मतदाता सूची की गड़बड़ी को दूर करने के लिए प्रशासन ने 3300 से ज्यादा कर्मचारियों की फौज लगा रखी है। इन्हें जिलेभर के 30-40 हजार घरों में रोज दस्तक देना हैं। 15 मई से शुरू हुआ यह सिलसिला 21 जून तक जारी रहेगा।
बताया गया है कि इंदौर की विधानसभा इंदौर-5 में 23 मकान नंबरों पर 1100 मतदाताओं के नाम दर्ज हैं। इंदौर 1 में चार मकान नंबर पर 3500, नरेला के 20 पतों पर 1500 और राऊ में एक ही पते पर 177 मतदाताओं के नाम दर्ज होना सामने आया है। इसके पहले कांग्रेस नेता महेंद्र सिंह चौहान भी भोपाल की नरेला विधानसभा में एक पते पर सौ से ज्यादा मतदाताओं के नाम होने की शिकायत मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में कर चुके हैं। यह बात सही भी पाई गई थी पर इसमें फर्जीवाड़ा सामने नहीं आया, क्योंकि एक बड़े परिसर में कई लोग रहे हैं। मतदाता सूची बनाते वक्त इन्हें अलग-अलग आवास क्रमांक देने की जगह एक ही नंबर दे दिया गया, जिसकी वजह से भ्रम का माहौल पैदा हुआ। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने इसकी जांच कराई और सभी को अलग-अलग आवास क्रमांक देने के निर्देश कलेक्टर को दिए हैं।
आपको बता दें कि राऊ विधायक जीतू पटवारी ने आरोप लगाया है कि इंदौर में एक लाख से ज्यादा फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं। वहीं भाजपा भी सूची को लेकर सतर्क है। उसके बूथ और वार्ड स्तर के कार्यकर्ता एक-एक मोहल्ले की सूची जांच रहे हैं। जबकि कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ के अध्यक्ष विवेक तन्खा ने मप्र में 60 लाख फर्जी मतदाताओं को लेकर 13 जून को एक बार फिर से चुनाव आयोग को शिकायत की है। आयोग ने तन्खा की शिकायत पर संबंधित जिलों से 20 जून तक रिपोर्ट मांगी है। अपनी शिकायत में तन्खा ने मप्र के 101 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची की पुन: जांच करने की मांग की है।
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फैजाबाद (उत्तर प्रदेश)। खेल अनुदेशक के पद पर नियुक्ति न होने से नाराज बीपीएड संघर्ष मोर्चा ने हर वर्ष की तरह इस बार भी 21 जून को योग दिवस के विरोध में धरना-प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। चौथे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर बीपीएड अभ्यर्थियों का यह धरना-प्रदर्शन फैजाबाद के गुलाबबाड़ी पार्क में सुबह 10 बजे होगा। जिसमें फैजाबाद के सभी बीपीएड धारियों को पहुंचने की अपील की गयी है। इस ऐलान के दौरान पार्क में बीपीएड संघर्ष मोर्चा के महासचिव समेत भारी संख्या में बीपीएड डिग्रीधारी मौजूद थे।
इस मौके पर संगठन के प्रदेश महासचिव आकाश गुप्त ने कहा कि प्रदेश में करीब 1 लाख बीपीएड डिग्री धारी युवकों ने 1 लाख रुपए खर्च करके योग का एक वर्षीय डिप्लोमा भी प्राप्त किया, लेकिन रोजगार के अभाव में उनका बुरा हाल है। केंद्र सरकार योग को बढ़ावा देने की बात करती है, लेकिन योग के शिक्षकों की भर्ती करने से करता रही है। वहीं संगठन के जिला अध्यक्ष हौसिला प्रसाद यादव ने बीपीएड के प्रशिक्षण पर रोक लगाने की मांग की है।
आपको बता दें कि गोरखपुर में आठवीं बार बीपीएड अभ्यर्थियों से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भरोसा दिया था कि वह जल्दी ही इस भर्ती को करवाएंगे। लखनऊ पहुंचते ही उन्होंने अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा राज प्रताप सिंह से अतिरिक्त प्रभार ले लिया । और उनकी जगह अवनीश अवस्थी को अपर मुख्य सचिव बना दिया। राज प्रताप सिंह पर आरोप है कि उन्होंने धमकी दी थी कि जब तक हम इस कुर्सी पर हैं इस भर्ती को नहीं करेंगे। इससे ऐसा लगता है कि योगी सरकार में नौकरशाह बेलगाम हैं या फिर मुख्यमंत्री प्रदेश के नव जवानों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। वहीं बेसिक शिक्षा मंत्री का कहना है कि हम विश्वास दिला रहें कि हम सुप्रीम कोर्ट नहीं जायेंगे और भर्ती करने चल रहे हैं। हो सकता है जून में शुरू कर दें। हालांकि अभी तक भर्ती की कोई तारीख नहीं घोषित की गयी है। बीपीएड अभ्यर्थियों का आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 28 मार्च 2018 को अधिकारियों को आदेश दिया था कि 1 सप्ताह के अंदर भर्ती की प्रक्रिया को जल्दी से जल्दी बहाल किया जाए। इसको लेकर 4 अप्रैल 2018 को अधिकारियों के साथ अभ्यर्थियों की बैठक भी हुई थी। इस बैठक में अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि 1 सप्ताह के भर्ती प्रक्रिया शुरु कर दी जाएगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 12 अप्रैल 2018 को आदेश दिया था कि बीपीएड अभ्यर्थियों की भर्ती 2 महीने के अंदर कर दी जाए और कंप्लाइंस रिपोर्ट सबमिट की जाए। लेकिन इन तानाशाह अधिकारियों ने अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की है। सरकार पर आरोप है कि उसने 32022 खेल अनुदेशकों की भर्ती में धांधली की समीक्षा करने के नाम पर रोक दिया है।
अंबाला (हरियाणा)। हरियाणा सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी आदेश से प्रदेश के शिक्षक सकते में आ गए हैं। शिक्षा निदेशालय ने अपने आदेश में कहा है कि प्रदेश के सभी शिक्षक शिक्षा विभाग को अपनी संपत्ति का ब्योरा 30 जून तक दे दें। अब संपत्ति का ब्यौरा देने के बाद ही उनका जून माह का वेतन जारी किया जाएगा। शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी किए संपत्ति की जानकारी मांगी है। जबकि सभी शिक्षकों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अपनी संपत्ति का ब्योरा 15 जून देना था, लेकिन किसी ने जानकारी नहीं दी। वहीं हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष सत्य नारायण ने कहा कि सरकार ने शिक्षकों से गलत जानकारी मांगी है। आम चीजें हर घर में होती हैं। इसमें स्थायी भूमि के सारे हित, स्वामित्व, पैतृक तौर पर प्राप्त जमीन की जानकारी के अलावा नगद, जेवर, डिपॉजिट, इंश्योरेंस पॉलिसी, शेयर, सिक्योरिटी, लॉन और एडवांस सहित मोटरसाइकिल, गाड़ियां, घोड़े, रेफ्रिजरेटर व रेडियो सहित अन्य इलेक्ट्रानिक सामान जैसे फ्रिज, कूलर व एसी आदि शामिल हैं। इन सभी चीजों की भी जानकारी मांगी गई है। अध्यापक संघ इसका विरोध करती है।
शिक्षकों को संपत्ति का ब्यौरा देने के लिए निदेशालय ने दो पेज का चल और अचल संपत्ति के लिए अलग-अलग प्रपत्र भी जारी किया है। शिक्षकों को निर्धारित कालम को भरते हुए पूरी जानकारी देनी होगी। वहीं इस आदेश से सहमे शिक्षक अपनी प्रॉपर्टी के कागजातों को खंगालने में जुटे हुए हैं। इस फार्म में स्थायी भूमि के सारे हित, स्वामित्व, पैतृक तौर पर प्राप्त जमीन की जानकारी के अलावा कैश, ज्वेलरी, डिपॉजिट, इंश्योरेंस पॉलिसी, शेयर, सिक्योरिटी, लॉन और एडवांस सहित कितनी मोटरसाइकिल, गाड़ियां, घोड़े, रेफ्रिजरेटर व रेडियोग्राम सहित अन्य क्या क्या इलेक्ट्रानिक सामान जैसे फ्रिज, कूलर व एसी उनके नाम है इसकी भी जानकारी मांगी गई है। प्रदेश के स्कूलों में करीब 2.70 लाख का शिक्षक स्टाफ है।
आपको बता दें कि फर्स्ट, सेकेंड व थर्ड रैंक के टीचर्स को संपत्ति का ब्योरा देने का नियम प्रदेश सरकार ने दिसंबर 2015 में बनाया था, अधिकतर ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। नियम के अनुसार टीचर्स को अपनी सालाना प्रॉपर्टी रिटर्न भरना होता है, शिक्षकों ने 2015 के बाद से प्रॉपर्टी का रिटर्न नहीं भरा। इसीलिए निदेशालय ने उनका जून का वेतन रोकते हुए प्रॉपर्टी की जानकारी मांगी है। शिक्षा निदेशालय के आदेश के अनुसार फर्स्ट, सेकेंड व थर्ड रैंक के शिक्षकों को 30 जून तक निदेशालय को जानकारी देनी होगी। फर्स्ट रैंक में डीईओ, डीईईओ व डाइट प्रिंसिपल आते हैं। सेकेंड रैंक में प्रिंसिपल, डिप्टी डीईओ, लेक्चरर, हेडमास्टर व बीईओ और थर्ड रैंक में जेबीटी व पीजीटी आते हैं।
अंबाला (हरियाणा)। हरियाणा सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी आदेश से प्रदेश के शिक्षक सकते में आ गए हैं। शिक्षा निदेशालय ने अपने आदेश में कहा है कि प्रदेश के सभी शिक्षक शिक्षा विभाग को अपनी संपत्ति का ब्योरा 30 जून तक दे दें। अब संपत्ति का ब्यौरा देने के बाद ही उनका जून माह का वेतन जारी किया जाएगा। शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी किए संपत्ति की जानकारी मांगी है। जबकि सभी शिक्षकों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अपनी संपत्ति का ब्योरा 15 जून देना था, लेकिन किसी ने जानकारी नहीं दी। वहीं हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष सत्य नारायण ने कहा कि सरकार ने शिक्षकों से गलत जानकारी मांगी है। आम चीजें हर घर में होती हैं। इसमें स्थायी भूमि के सारे हित, स्वामित्व, पैतृक तौर पर प्राप्त जमीन की जानकारी के अलावा नगद, जेवर, डिपॉजिट, इंश्योरेंस पॉलिसी, शेयर, सिक्योरिटी, लॉन और एडवांस सहित मोटरसाइकिल, गाड़ियां, घोड़े, रेफ्रिजरेटर व रेडियो सहित अन्य इलेक्ट्रानिक सामान जैसे फ्रिज, कूलर व एसी आदि शामिल हैं। इन सभी चीजों की भी जानकारी मांगी गई है। अध्यापक संघ इसका विरोध करती है।
शिक्षकों को संपत्ति का ब्यौरा देने के लिए निदेशालय ने दो पेज का चल और अचल संपत्ति के लिए अलग-अलग प्रपत्र भी जारी किया है। शिक्षकों को निर्धारित कालम को भरते हुए पूरी जानकारी देनी होगी। वहीं इस आदेश से सहमे शिक्षक अपनी प्रॉपर्टी के कागजातों को खंगालने में जुटे हुए हैं। इस फार्म में स्थायी भूमि के सारे हित, स्वामित्व, पैतृक तौर पर प्राप्त जमीन की जानकारी के अलावा कैश, ज्वेलरी, डिपॉजिट, इंश्योरेंस पॉलिसी, शेयर, सिक्योरिटी, लॉन और एडवांस सहित कितनी मोटरसाइकिल, गाड़ियां, घोड़े, रेफ्रिजरेटर व रेडियोग्राम सहित अन्य क्या क्या इलेक्ट्रानिक सामान जैसे फ्रिज, कूलर व एसी उनके नाम है इसकी भी जानकारी मांगी गई है। प्रदेश के स्कूलों में करीब 2.70 लाख का शिक्षक स्टाफ है।
आपको बता दें कि फर्स्ट, सेकेंड व थर्ड रैंक के टीचर्स को संपत्ति का ब्योरा देने का नियम प्रदेश सरकार ने दिसंबर 2015 में बनाया था, अधिकतर ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। नियम के अनुसार टीचर्स को अपनी सालाना प्रॉपर्टी रिटर्न भरना होता है, शिक्षकों ने 2015 के बाद से प्रॉपर्टी का रिटर्न नहीं भरा। इसीलिए निदेशालय ने उनका जून का वेतन रोकते हुए प्रॉपर्टी की जानकारी मांगी है। शिक्षा निदेशालय के आदेश के अनुसार फर्स्ट, सेकेंड व थर्ड रैंक के शिक्षकों को 30 जून तक निदेशालय को जानकारी देनी होगी। फर्स्ट रैंक में डीईओ, डीईईओ व डाइट प्रिंसिपल आते हैं। सेकेंड रैंक में प्रिंसिपल, डिप्टी डीईओ, लेक्चरर, हेडमास्टर व बीईओ और थर्ड रैंक में जेबीटी व पीजीटी आते हैं।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। पुलिस की लाठियां खाने और इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद आखिकार बीपीएड अभ्यर्थियों की उम्मीदें जाग गयी हैं। गोरखपुर में आठवीं बार अभ्यर्थियों से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भरोसा दिया कि वह जल्दी ही इस भर्ती को करवाएंगे। लखनऊ पहुंचते ही उन्होंने अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा राज प्रताप सिंह से अतिरिक्त प्रभार ले लिया । और उनकी जगह अवनीश अवस्थी को अपर मुख्य सचिव बना दिया। राज प्रताप सिंह पर आरोप है कि उन्होंने धमकी दी थी कि जब तक हम इस कुर्सी पर हैं इस भर्ती को नहीं करेंगे। इससे ऐसा लगता है कि योगी सरकार में नौकरशाह बेलगाम हैं या फिर मुख्यमंत्री प्रदेश के नव जवानों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। वहीं बेसिक शिक्षा मंत्री का कहना है कि हम विश्वास दिला रहें कि हम सुप्रीम कोर्ट नहीं जायेंगे और भर्ती करने चल रहे हैं। हो सकता है जून में शुरू कर दें। हालांकि अभी तक भर्ती की कोई तारीख नहीं घोषित की गयी है।
बीपीएड अभ्यर्थियों का आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 28 मार्च 2018 को अधिकारियों को आदेश दिया था कि 1 सप्ताह के अंदर भर्ती की प्रक्रिया को जल्दी से जल्दी बहाल किया जाए। इसको लेकर 4 अप्रैल 2018 को अधिकारियों के साथ अभ्यर्थियों की बैठक भी हुई थी। इस बैठक में अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि 1 सप्ताह के भर्ती प्रक्रिया शुरु कर दी जाएगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 12 अप्रैल 2018 को आदेश दिया था कि बीपीएड अभ्यर्थियों की भर्ती 2 महीने के अंदर कर दी जाए और कंप्लाइंस रिपोर्ट सबमिट की जाए। लेकिन इन तानाशाह अधिकारियों ने अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की है। सरकार पर आरोप है कि उसने 32022 खेल अनुदेशकों की भर्ती में धांधली की समीक्षा करने के नाम पर रोक दिया है।
वहीं समाजवादी पार्टी का आरोप है कि अनुदेशकों की भर्तियां इसलिए नहीं की जा रही हैं क्योंकि योगी आदित्यनाथ की सरकार का कहना है कि यह समाजवादी पार्टी की सरकार का पाप है हम भला इसे क्यों ढोएं। ऐसी दशा में यदि नया नोटिफिकेश जारी होता है तो ज्यादा उम्र हो जाने की वजह से 5 हजार अभ्यर्थी इस भर्ती से बाहर हो जाएंगे, जो उचित नहीं है। हालांकि बीजेपी का कहना है कि जल्दी ही बीपीएड अभ्यर्थियों की भर्ती की जाएगी, लेकिन उन्होंने कोई निश्चित तारीख नहीं बतायी। उनका कहना है कि यह मामला अभी केंद्र और राज्य के बीच पैसे के कंट्रीब्यूशन को लेकर फंसा हुआ है। और जल्दी ही इसका समाधान करवा दिया जाएगा।
जबकि बीपीएड अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें सरकार के आश्वासन पर भरोसा नहीं है। क्योंकि योगी सरकार डेढ़ साल से आश्वासन ही दे रही है। बेसिक शिक्षा मंत्री और अधिकारियों से बातचीत के बाद सिर्फ आश्वासन ही मिला है, अब तक कुछ हुआ नहीं है। वहीं 2011 और 2015 में भर्ती के लिए प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों को समाजवादी पार्टी की सरकार ने लाठियों से पिटवाया और कई अभ्यर्थियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करवा दिए। इस आंदोलन के कारण 2015 में 150 नव जवान एक महीने तक जेल में रहे। और आज भी मुकदमे लड़ रहे हैं। सरकार को चाहिए कि वह सभी अभ्यर्थियों के ऊपर से मुकदमे वापस ले।
आपको बता दें कि 2010 से ये अभ्यर्थी आंदोलन कर रहे हैं। 10 वर्ष के लंबे आंदोलन के बाद समाजवादी पार्टी की सरकार ने नवंबर 2016 में 7000 के मासिक संविदा के तहत 32022 खेल अनुदेशकों की भर्ती की प्रक्रिया शुरु की थी। काउंसलिंग की समय सारणी भी जारी कर दी गयी थी। करीब डेढ़ लाख बीपीएड धारी आवेदकों ने आवेदन किया था। लेकिन जैसे ही प्रदेश में सत्ता का परिवर्तन हुआ। इस भर्ती को समीक्षा के नाम पर 23 मार्च 2017 को रोक दिया गया । इसके बाद अभ्यर्थियों ने बीजेपी कार्यालय, विधानसभा के सामने, जिलाधिकारी समेत पूरे प्रदेश में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। हर बार यही आश्वासन दिया गया कि समीक्षा हो रही है जब समीक्षा पूरी हो जाएगी तो भर्ती प्रक्रिया को शुरु कर दिया जाएगा। इससे निराश होकर अभ्यर्थी इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण में गए । और इलाहाबाद हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 03 नवंबर 2017 को आदेश दिया कि सरकार एक महीने के अंदर भर्ती की प्रक्रिया को पूरा करे। लेकिन सरकार भर्ती की प्रक्रिया को पूरी करने की बजाय इलाहाबाद हाईकोर्ट चली गयी। इसके बाद दोबारा अभ्यर्थी 12 अप्रैल 2018 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच में गए। हाईकोर्ट ने प्रदेश की योगी सरकार को झटका देते हुए आदेश दिया कि 2 महीने के अंदर भर्ती की प्रक्रिया को पूरा करे। इसके बाद अभ्यर्थी मुख्यमंत्री, बेसिक शिक्षा मंत्री और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष से मिले, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही दिया गया, कोई कार्यवाही नहीं की गयी ।
गौरतलब है कि नवंबर 2016 में निकाली गयी 32022 खेल अनुदेशक भर्ती मेरिट के आधार पर है और कोई भी काउंसलिंग नहीं हुई है। इसलिए यह पूर्णतया सुरक्षित है अक्सर संविदा की भर्ती में राज्य सरकार बजट का रोना रोती है, जबकि माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट के द्वारा पहले ही सिंगल बेंच में राज्य सरकार की यह दलील दलील ठुकरा दी गई और सुप्रीम कोर्ट का भी निर्देश है कि बजट के मामले में शिक्षक भर्तियों में राज्य सरकारें बहाने नहीं कर सकती, क्योंकि यह पूर्णतया कैबिनेट से पास होते हुए अनुपूरक बजट में पूर्व मुख्यमंत्री के द्वारा पहले ही पास करवा दिया गया था। इसलिए योगी सरकार राजनीतिक दुश्मनी के लिए इस वैकेंसी को निरस्त नहीं कर सकती। जब मामला न्यायालय में हो को निरस्त करने और भर्ती कराने का अधिकार केवल और केवल माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट के पास है । उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में एक खेल शिक्षक होना अनिवार्य है। उत्तर प्रदेश के 32022 स्कूल में अभी भी एक भी खेल शिक्षक नहीं हैं। माना जा रहा है कि प्रदेश में करीब 80 हजार युवा बीपीएड की डिग्री लेकर बैठे हुए हैं और खेल शिक्षक बनने का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन सरकार उन्हें नौकरी देने को तैयार नही है। ऐसी दशा में हताश-परेशान ये होनहार बच्चे पकौड़े बेच रहे हैं, चाय बेच रहे हैं, मंदिरों में फूल बेच रहे हैं। हालांकि इन नवजवानों का सपना है कि वह स्कूल के बच्चों को अच्छा खिलाड़ी बनाएं।
ऐसी दशा में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या भारत को ओलंपिक खेलों में मेडल पाने का सपना देखना चाहिए, जहां स्कूलों में खेल शिक्षक ही नहीं है। भारत का अब तक ओलम्पिक खेलों में प्रदर्शन निराशाजनक ही रहा है। 125 करोड़ से अधिक आबादी वाले एक ऐसे देश, जिसमें युवाओं की संख्या 50 करोड़ से अधिक हो, से कम-से-कम इतनी उम्मीद तो की ही जा सकती है, कि उसका नाम पदक-तालिका में यथासंभव ऊपर हो। लेकिन अनावश्यक राजनीतिक दखल, खेल शिक्षकों की कमी, ग्रामीण प्रतिभाओं की अनदेखी, अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के आधुनिक खेल-सुविधाओं के अभाव इत्यादि कारणों से भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन बहुत ही निराशाजनक रहा है। रियो ओलंपिक में सिर्फ दो लड़कियां ही पदक लाने में सफल हो पायी थी। यदि ऐसा ही हाल रहा तो आगे भी कोई उम्मीद करना बेमानी ही है।
नई दिल्ली। केंद्र सरकार बैंक खातों को आधार से लिंक करने के बाद अब ड्राइविंग लाइसेंस को भी आधार से लिंक करने जा रही है। सरकार का मत है कि ऐसा करने से सड़क हादसों के बाद फरार हो जाने वाले अपराधियों को आसानी से पकड़ा जा सकेगा। हालांकि सरकार ने अभी ड्राइविंग लाइसेंस को आधार से लिंक करने की कोई समय सीमा नहीं तय की है।
मंगलवार को केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस से बात करते हुए कहा कि 'ड्राइविंग लाइसेंस को आधार से लिंक करवाया जा रहा है, ताकि नशे में वाहन में चलाने वाला व्यक्ति यदि एक राज्य से दूसरे राज्य में लोगों को मारकर भाग जाए, तो उसे आसानी से पकड़ा जा सके। एक व्यक्ति अपना नाम तो बदल सकता है, लेकिन वह अंगुलियों के प्रिंट नहीं बदल सकता है।' प्रसाद ने कहा कि केंद्र सरकार के इस कदम का मकसद फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने पर रोक लगाना है। आधार से जुड़े होने से आपके सारे बायोमीट्रिक डिटेल्स सरकारी एजेंसियां ड्राइविंग लाइसेंस से पता कर सकेंगी। ऐसे में अगर कोई शख्स दो ड्राइविंग लाइसेंस बनाना चाहता है तो उसकी चोरी पकड़ी जाएगी। उन्होंने बताया कि 'मैं ड्राइविंग लाइसेंस को आधार कार्ड को जोड़ने के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ बातचीत कर रहा हूं। उम्मीद है कि ऐसा करने के बाद सड़क पर एक्सिडेंट करके भाग जाने के वाले अपराधियों को पकड़ना आसान होगा।'
आपको बता दें कि, 2017 से ही ड्राइविंग लाइसेंस को आधार से लिंक करने की बात चल रही है। केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ड्राइविंग लाइसेंस को आधार से लिंक करने के पक्षधर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने आधार के साथ ड्राइविंग लाइसेंस को लिंक करने की कोई समय नहीं बतायी है।
नई दिल्ली। केंद्र सरकार बैंक खातों को आधार से लिंक करने के बाद अब ड्राइविंग लाइसेंस को भी आधार से लिंक करने जा रही है। सरकार का मत है कि ऐसा करने से सड़क हादसों के बाद फरार हो जाने वाले अपराधियों को आसानी से पकड़ा जा सकेगा। हालांकि सरकार ने अभी ड्राइविंग लाइसेंस को आधार से लिंक करने की कोई समय सीमा नहीं तय की है।
मंगलवार को केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस से बात करते हुए कहा कि 'ड्राइविंग लाइसेंस को आधार से लिंक करवाया जा रहा है, ताकि नशे में वाहन में चलाने वाला व्यक्ति यदि एक राज्य से दूसरे राज्य में लोगों को मारकर भाग जाए, तो उसे आसानी से पकड़ा जा सके। एक व्यक्ति अपना नाम तो बदल सकता है, लेकिन वह अंगुलियों के प्रिंट नहीं बदल सकता है।' प्रसाद ने कहा कि केंद्र सरकार के इस कदम का मकसद फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने पर रोक लगाना है। आधार से जुड़े होने से आपके सारे बायोमीट्रिक डिटेल्स सरकारी एजेंसियां ड्राइविंग लाइसेंस से पता कर सकेंगी। ऐसे में अगर कोई शख्स दो ड्राइविंग लाइसेंस बनाना चाहता है तो उसकी चोरी पकड़ी जाएगी। उन्होंने बताया कि 'मैं ड्राइविंग लाइसेंस को आधार कार्ड को जोड़ने के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ बातचीत कर रहा हूं। उम्मीद है कि ऐसा करने के बाद सड़क पर एक्सिडेंट करके भाग जाने के वाले अपराधियों को पकड़ना आसान होगा।'
आपको बता दें कि, 2017 से ही ड्राइविंग लाइसेंस को आधार से लिंक करने की बात चल रही है। केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ड्राइविंग लाइसेंस को आधार से लिंक करने के पक्षधर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने आधार के साथ ड्राइविंग लाइसेंस को लिंक करने की कोई समय नहीं बतायी है।
पंचकुला (हरियाणा)। पंचकूला पुलिस लाइन में बहुत शर्मनाक मामला सामने आया है, जहां रक्षक ही रक्षक का भक्षक बन गया। पुलिस लाइन के एक हेड कांस्टेबल को महिला कांस्टेबल से छेड़छाड़ के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पीड़ित महिला ने एक महीने पहले की आरोपी हेड कांस्टेबल की शिकायत की थी, लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गयी। महिला ने जब मीडिया के सामने अपनी आप बीती बताई, तब कहीं जाकर हेड कांस्टेबल के खिलाफ कार्रवाई की गयी। हालांकि मामले के तूल पकड़ने के बाद अब पुलिस विभाग ने बताया है कि इस मामले की जांच पुलिस अधिकारी करेंगे।
आपको बता दें कि शिकायतकर्ता महिला कांस्टेबल अपने पति के साथ पंचकूला पुलिस लाइन में रहती है। उसके घर के नजदीक ही आरोपी हेड कांस्टेबल बिजेंद्र व उसकी एएसआई पत्नी भी रहते हैं। नजदीक रहने का फायदा उठाकर बिजेंद्र काफी दिनों से उससे छेड़छाड़ कर रहा था और उसे फोन कर शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव भी बना रहा था। जिसका महिला कांस्टेबल ने कई बार विरोध किया। महिला का आरोप है कि घर में अकेली काम कर रही थी, तभी बिजेंद्र उसके घर में घुस आया और उसे पीछे से पकड़ लिया। इसके बाद छेड़छाड़ शुरु कर दी। जब उसने बिजेंद्र को धक्का दे दिया, तो वह उसे पकड़ने के लिए आगे बढ़ा। यह देख पीड़िता का पति उसके सामने आ गया। इस बात से नाराज बिजेंद्र उन्हें गाली देने लगा और बोला कि तुम दोनों को जान से मार दूंगा। इतना ही नहीं पीड़िता का आरोप है कि हेड कांस्टेबल बिजेंद्र ने उसके चरित्र पर भी सवाल उठाए और सभी के सामने बेइज्जत भी किया। जिसके बाद महिला ने आरोपी हेड कांस्टेबल के खिलाफ मामला दर्ज कराया, लेकिन महिला की शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं विभाग के पुलिसकर्मी महिला कांस्टेबल को न्याय दिलाने की बजाय समझौते का दबाव बनाने में लगे रहे। इसके बाद पीड़िता को मजबूरन मीडिया के सामने आना पड़ा और मीडिया के सामने हेड कांस्टेबल की करतूत का खुलासा करना पड़ा। तब कहीं जाकर बुधवार को आरोपी हेड कांस्टेबल को गिरफ्तार किया गया।
आप मध्य प्रदेश में किसी भी बोर्ड में पढ़ाई करते हैं। और आपकी मार्कशीट कट-फट गयी या फिर चोरी हो गयी है, तो घबराने की कोई बात नहीं है। आप यहां पर उसकी दूसरी कॉपी (डु्प्लीकेट कॉपी) प्राप्त कर सकते हैं।
इसके लिए आपको सबसे पहले मध्य प्रदेश सरकार की अधिकारिक वेबसाइट https://mponline.gov.in/ पर जाना होगा।








डुप्लीकेट मार्कशीट के आवेदन की स्थिति जानें



नई दिल्ली। यदि अभी तक आपने पासपोर्ट नहीं बनवाया है तो आपके लिए खुशखबरी है। विदेश मंत्रालय ने एम पासपोर्ट सेवा नामक सेवा शुरु की है। इस एप के जरिए आपको पासपोर्ट के लिए ऑनलाइन आवेदन और अपाइंटमेंट एंड्रायड मोबाइल पर मिल सकेगा। विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट आवेदन को आसान बनाने के लिए मोबाइल पर ही अपॉइंटमेंट देने के लिए मोबाइल एप को नई सुविधाओं के साथ विकसित किया है। जिससे पासपोर्ट आवेदकों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। इस मोबाइल एप में नीतिगत मामलों में भी समस्याओं के निराकरण से जुड़े कई विकल्प दिए गए हैं।
क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी रश्मि बघेल ने बताया कि मंत्रालय ने पहले भी इस तरह का एप बनाया था, लेकिन उसमें कुछ दिक्कतें थीं। इसलिए नए सिरे से यह एप विकसित किया गया है। इस मोबाइल एप के मुख्य मेन्यु में विंडो के रूप में फीस, पासपोर्ट का स्टेट्स, सेंटर, एफिडेविड और अपाइंटमेंट संबंधी उपलब्धता है। इतना ही नहीं, इस एप में उपलब्ध सेवाओं का ब्योरा, आवेदन कहां करना है, आवेदन पत्र, फीस के भुगतान, पुलिस वेरिफिकेशन, पोस्टल डिस्पैच एवं कॉल सेंटर की जानकारी भी दी गयी है।
आपको बता दें कि प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजीटल इंडिया योजना के तहत क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय सहित अन्य कार्यालयों में मोबाइल फोन से आवेदन कराने की सुविधा शुरू कर दी है। इस एप के शुरु होने से पासपोर्ट आवेदकों को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इससे दलालों की भूमिका पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
नई दिल्ली। यदि अभी तक आपने पासपोर्ट नहीं बनवाया है तो आपके लिए खुशखबरी है। विदेश मंत्रालय ने एम पासपोर्ट सेवा नामक सेवा शुरु की है। इस एप के जरिए आपको पासपोर्ट के लिए ऑनलाइन आवेदन और अपाइंटमेंट एंड्रायड मोबाइल पर मिल सकेगा। विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट आवेदन को आसान बनाने के लिए मोबाइल पर ही अपॉइंटमेंट देने के लिए मोबाइल एप को नई सुविधाओं के साथ विकसित किया है। जिससे पासपोर्ट आवेदकों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। इस मोबाइल एप में नीतिगत मामलों में भी समस्याओं के निराकरण से जुड़े कई विकल्प दिए गए हैं।
क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी रश्मि बघेल ने बताया कि मंत्रालय ने पहले भी इस तरह का एप बनाया था, लेकिन उसमें कुछ दिक्कतें थीं। इसलिए नए सिरे से यह एप विकसित किया गया है। इस मोबाइल एप के मुख्य मेन्यु में विंडो के रूप में फीस, पासपोर्ट का स्टेट्स, सेंटर, एफिडेविड और अपाइंटमेंट संबंधी उपलब्धता है। इतना ही नहीं, इस एप में उपलब्ध सेवाओं का ब्योरा, आवेदन कहां करना है, आवेदन पत्र, फीस के भुगतान, पुलिस वेरिफिकेशन, पोस्टल डिस्पैच एवं कॉल सेंटर की जानकारी भी दी गयी है।
आपको बता दें कि प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजीटल इंडिया योजना के तहत क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय सहित अन्य कार्यालयों में मोबाइल फोन से आवेदन कराने की सुविधा शुरू कर दी है। इस एप के शुरु होने से पासपोर्ट आवेदकों को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इससे दलालों की भूमिका पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
नई दिल्ली। केंद्र सरकार देश के हर गांव तक बैंकिंग सुविधा पहुंचाने के लिए एक अहम कदम उठाने जा रही है। अब सरकार कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) चला रहे सभी ग्रामीण उद्यमियों को बैंकिंग कॉरेस्पॉंडेंट बनाएगी। इतना ही नहीं कॉमन सर्विस सेंटरों बैंकों से जोड़ने के अतिरिक्त उन्हें रेल आरक्षण और जनरल टिकट बुक करने का अधिकार भी दिया जा रहा है। इस बात का एलान रेल और वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को किया।
रेल और वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि वह सभी 2.90 लाख सीएससी को बैंकिंग कॉरस्पांडेंट्स की तरह काम करने की मंजूरी देन जा रहे हैं। इसके अलावा यह भी देखेंगे कि किस तरह सीएससी पर एक्सटेंडेंड बैंक काउंटर्स शुरू किए जा सकते हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज आसानी से उपलब्ध हो सके। इसके लिए गोयल ने कानून और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद से सीएससी के जरिए फाइनेंशियल सर्विसेज उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को स्पीड, स्किल और स्केल उपलब्ध कराने के लिए कहा है। उनका ये भी कहना था कि सीएससी मुद्रा लोन उपलब्ध कराने का एक माध्यम भी बन सकता है।
वहीं इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार ने सभी वीएलई को बैंकिंग कॉरेस्पॉंडेंट बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। देश में इस वक्त 2.90 लाख सीएससी हैं, जिनमें 54000 सीएससी को महिलाएं चला रही हैं। रविशंकर प्रसाद मुताबिक सरकार चाहती है कि देश की सभी 2.50 लाख ग्राम पंचायतों तक ऑप्टिकल फाइबर पहुंचे, ताकि सभी को डिजिटल सेवाएं मुहैया करायी जा सकें।
इतनी ही नहीं सरकार सभी 02.50 लाख ग्राम पंचायतो में सीएससी वाई-फाई चौपाल खोलने की योजना बना रही है, जो अभी 18 हजार ग्राम पंचायत तक सीमित है। सीएससी वाई-फाई चौपाल का उद्देश्य ग्राम पंचायत को इंटरनेट के माध्यम से बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए सरकार ने एक लाख 60 हजार किमी ऑप्टिकल फाइबर बिछाया है। इतना ही नहीं, सरकार की योजना सीएससी को मेडिकल स्टोर, डॉयग्नोटिक सेंटर, बीपीओ जैसी सुविधाओं से जोड़ने की भी है।
जबकि रेल मंत्री पीयूष ने बताया कि अभी तक करीब 40 हजार सीएससी रेल टिकट फैसेलिटी से टेक्निकली कनेक्ट हो चुके हैं। हालांकि अगले 8-9 महीने से सभी सीएससी को सीएससी रेल टिकट फैसेलिटी से कनेक्ट कर लिया जाएगा। यह समझौता आईआरसीटीसी और सीएससी इंडिया के बीच हुआ है। गौरतलब है कि सीएससी के जरिए देश के ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
नई दिल्ली। केंद्र सरकार देश के हर गांव तक बैंकिंग सुविधा पहुंचाने के लिए एक अहम कदम उठाने जा रही है। अब सरकार कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) चला रहे सभी ग्रामीण उद्यमियों को बैंकिंग कॉरेस्पॉंडेंट बनाएगी। इतना ही नहीं कॉमन सर्विस सेंटरों बैंकों से जोड़ने के अतिरिक्त उन्हें रेल आरक्षण और जनरल टिकट बुक करने का अधिकार भी दिया जा रहा है। इस बात का एलान रेल और वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को किया।
रेल और वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि वह सभी 2.90 लाख सीएससी को बैंकिंग कॉरस्पांडेंट्स की तरह काम करने की मंजूरी देन जा रहे हैं। इसके अलावा यह भी देखेंगे कि किस तरह सीएससी पर एक्सटेंडेंड बैंक काउंटर्स शुरू किए जा सकते हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज आसानी से उपलब्ध हो सके। इसके लिए गोयल ने कानून और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद से सीएससी के जरिए फाइनेंशियल सर्विसेज उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को स्पीड, स्किल और स्केल उपलब्ध कराने के लिए कहा है। उनका ये भी कहना था कि सीएससी मुद्रा लोन उपलब्ध कराने का एक माध्यम भी बन सकता है।
वहीं इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार ने सभी वीएलई को बैंकिंग कॉरेस्पॉंडेंट बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। देश में इस वक्त 2.90 लाख सीएससी हैं, जिनमें 54000 सीएससी को महिलाएं चला रही हैं। रविशंकर प्रसाद मुताबिक सरकार चाहती है कि देश की सभी 2.50 लाख ग्राम पंचायतों तक ऑप्टिकल फाइबर पहुंचे, ताकि सभी को डिजिटल सेवाएं मुहैया करायी जा सकें।
इतनी ही नहीं सरकार सभी 02.50 लाख ग्राम पंचायतो में सीएससी वाई-फाई चौपाल खोलने की योजना बना रही है, जो अभी 18 हजार ग्राम पंचायत तक सीमित है। सीएससी वाई-फाई चौपाल का उद्देश्य ग्राम पंचायत को इंटरनेट के माध्यम से बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए सरकार ने एक लाख 60 हजार किमी ऑप्टिकल फाइबर बिछाया है। इतना ही नहीं, सरकार की योजना सीएससी को मेडिकल स्टोर, डॉयग्नोटिक सेंटर, बीपीओ जैसी सुविधाओं से जोड़ने की भी है।
जबकि रेल मंत्री पीयूष ने बताया कि अभी तक करीब 40 हजार सीएससी रेल टिकट फैसेलिटी से टेक्निकली कनेक्ट हो चुके हैं। हालांकि अगले 8-9 महीने से सभी सीएससी को सीएससी रेल टिकट फैसेलिटी से कनेक्ट कर लिया जाएगा। यह समझौता आईआरसीटीसी और सीएससी इंडिया के बीच हुआ है। गौरतलब है कि सीएससी के जरिए देश के ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
भोपाल (मध्य प्रदेश) प्रदेश के मेधावी गरीब छात्रों के लिए खुशियों भरी खबर है। शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने मेधावी छात्र योजना में सुधार करते हुए फैसला किया है कि अब सत्तर फीसदी अंक लाने वाले गरीब छात्रों को कॉलेज में फीस नहीं देना पड़ेगा। कमजोर आर्थिक स्थिति वाले ऐसे छात्रों की उच्च शिक्षा का खर्च अब सरकार उठाएगी। इतना ही नहीं सरकार इन छात्रों को इसी सत्र से छात्रवृत्ति में आने वाले अंतर की भी राशि का भुगतान करेगी। इसके अलावा इस योजना में ऐसे परिवार के छात्रों को भी फीस में छूट मिलेगी जिन्होंने असंगठित श्रमिक योजना में पंजीयन करवा रखा है।
हालांकि सरकार इस मेधावी छात्र योजना में ऐसे छात्रों को ही शामिल करेगी, जिसके परिवार की आय छह लाख रुपए या इससे कम हो। इसके अलावा छात्र के परिवार के पास बीपीएल कार्ड हो या फिक छात्र एससी, एसटी वर्ग के हों। और साथ ही छात्र ने इसी सत्र में एमपी बोर्ड से बारहवीं में सत्तर प्रतिशत और सीबीएसई आईसीएसई से पचासी प्रतिशत अंक प्राप्त किया हो। इसके अलावा इस योजना में जेईई से 1.50 लाख के अंदर रैंक पाने वाले कमजोर आर्थिक आय वर्ग के छात्र भी शामिल हो सकेंगे। सरकार इन छात्रों की फीस का भुगतान सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों की संस्था के खाते में करेगी। वहीं निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में छात्रों को संस्था की फीस या डेढ़ लाख रुपए दोनों में से जो कम होगा। वह इंजीनियरिंग कालेज का खाते में जमा होगा। जबकि नीट से मेडिकल के लिए चयनित छात्रों को फीस के एवज में बांड भरना होगा। सरकारी कॉलेज में प्रवेश पाने वाले छात्र दो साल ग्रामीण क्षेत्र में सेवा देने के लिए दस लाख का बांड भरेंगे। और जबकि निजी कॉलेज में प्रवेश पाने वाले छात्र पांच साल ग्रामीण क्षेत्र में सेवा के साथ ही पच्चीस लाख का बांड भरना होगा। आपके बता दें कि जो छात्र इन शर्तों का पालन नहीं करेंगे, उन छात्रों को मेधावी छात्र योजना का फायदा नहीं मिलेगा।
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हालांकि सरकार इस मेधावी छात्र योजना में ऐसे छात्रों को ही शामिल करेगी, जिसके परिवार की आय छह लाख रुपए या इससे कम हो। इसके अलावा छात्र के परिवार के पास बीपीएल कार्ड हो या फिक छात्र एससी, एसटी वर्ग के हों। और साथ ही छात्र ने इसी सत्र में एमपी बोर्ड से बारहवीं में सत्तर प्रतिशत और सीबीएसई आईसीएसई से पचासी प्रतिशत अंक प्राप्त किया हो। इसके अलावा इस योजना में जेईई से 1.50 लाख के अंदर रैंक पाने वाले कमजोर आर्थिक आय वर्ग के छात्र भी शामिल हो सकेंगे। सरकार इन छात्रों की फीस का भुगतान सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों की संस्था के खाते में करेगी। वहीं निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में छात्रों को संस्था की फीस या डेढ़ लाख रुपए दोनों में से जो कम होगा। वह इंजीनियरिंग कालेज का खाते में जमा होगा। जबकि नीट से मेडिकल के लिए चयनित छात्रों को फीस के एवज में बांड भरना होगा। सरकारी कॉलेज में प्रवेश पाने वाले छात्र दो साल ग्रामीण क्षेत्र में सेवा देने के लिए दस लाख का बांड भरेंगे। और जबकि निजी कॉलेज में प्रवेश पाने वाले छात्र पांच साल ग्रामीण क्षेत्र में सेवा के साथ ही पच्चीस लाख का बांड भरना होगा। आपके बता दें कि जो छात्र इन शर्तों का पालन नहीं करेंगे, उन छात्रों को मेधावी छात्र योजना का फायदा नहीं मिलेगा।