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शाहजाहांपुर (उत्तर प्रदेश)। ठगी की साजिश रचने वाले उत्तर प्रदेश पुलिस टीम 100 के सिपाही और होमगार्ड को अदालत ने भेजा जेल। इन पर ठगी के जरिए पांच लाख 80 हजार रुपये लूटने का आरोप है। पुलिस ने सिपाही और होमगार्ड के अलावा तीन अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया।और सभी को अदालत में पेश किया गया। अदालत के आदेश पर सभी को जेल भेज दिया गया। वहीं एसपी डॉ. एन चिनप्पा ने कहना है कि उन्होंने आरोपी सिपाही को निलंबित कर दिया है। और उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करके जेल भेज दिया गया है। इस मामले में विभागीय जांच कराई जाएगी। जबकि होमगार्ड के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए होमगार्ड कमांडेंट को पत्र भेज दिया है।
लखनऊ के सरोजनी नगर क्षेत्र निवासी अभिमन्यु को जमीन में गढ़ा सोना सस्ता सोना दिलाने के नाम पर बीती 24 मई को पुवायां गांव पसिया खेड़ा बुलाया गया था। इस मामले में अभिमन्यु ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि सीतापुर के थाना मछरेटा क्षेत्र के गांव मंसूरपुर निवासी शबीव, इसी गांव के असलत, पुवायां क्षेत्र के गांव अनावा निवासी मौलाना इस्बन, मुश्ताक मुसीर आदि ने सोना सस्ता दिलाने के नाम पर रुपये ठग लिए थे। घटना के थाना ¨सधौली क्षेत्र में तैनात यूपी 100 की टीम मौके पर पहुंच गई थी। अभिमन्यु ने टीम से इस मामले की शिकायत की थी। लेकिन यूपी 100 टीम ने कोई कार्रवाई नहीं की। उल्टा पीड़ित की पिटाई कर दी थी। पीड़ित ने यूपी 100 टीम में शामिल सिपाही कुलदीप और होगगार्ड रामकुमार पर ठगी में शामिल होने का शक जताया था। पहले तो पुलिस दोनों को बचाने का प्रयास कर रही थी। लेकिन मामले में दबाव बनने पर पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया था। पूछताछ में उनकी मिलीभगत सामने आने पर पुलिस ने दोनों आरोपितों के खिलाफ ठगी की साजिश करने का मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने इस मामले में आरोपित असलम और इसके दो साथी अकील और शकील को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। पुलिस टीमें अन्य आरोपितों की तलाश में दबिश दे रही हैं।
हैरानी की बात यह है कि यूपी 100 टीम को किसी ने कॉल भी नहीं की। इसके बाद वह घटना स्थल पर कैसे पहुंच गई। टीम किसी प्रकार की घटना की जानकारी कंट्रोल रूम को नहीं दी। घटना के बाद पीड़ति अभिमन्यु ने यूपी 100 टीम पर मारपीट का आरोप भी लगाया था। इससे लग रहा है कि टीम को पहले ही पूरे मामले की जानकारी थी। आरोपित टीम से मिले हुए थे। पुलिस का डर दिखाकर पीड़ित पर दबाव बना चाह रहे थे। जांच के बाद पूरा मामला खुलकर सामने आ गया। दोनों सिपाही और होमगार्ड घटना में संलिप्त पाए गए। पूछताछ में पकड़े गए असलम ने बताया कि उसके गिरोह में करीब 15 लोग शामिल हैं। जो बाहर के लोगों को गढ़ा हुआ सोना सस्ते दामों में दिलाने के नाम पर फांस लेते थे। रुपये ठगने के बाद वह निकल जाते थे। वह इससे पहले कई लोगों को शिकार बना चुके हैं।
यदि चोरी की गयी आपकी गाड़ी तुरंत तलाश करने पर न मिले तो सबसे पहले पुलिस को कॉल करें और फिर थाने जाकर केस दर्ज करवाएं। चोरी करने वाला व्यक्ति आपकी गाड़ी का इस्तेमाल करके कोई आपराधिक गतिविधि जैसे हत्या, चोरी, लूटपाट, एक्सीडेंट या कुछ और करता है तो पुलिस सबसे पहले गाड़ी के मालिक को ही पकड़ती है। सभी धाराएं गाड़ी मालिक के खिलाफ लगा दी जाती हैं। ऐसे में आपको पुलिस के सामने यह साबित करना होता है कि आपकी गाड़ी चोरी हुई थी। यदि आप यह साबित नहीं कर पाते हैं तो आप जिंदगीभर की मुसीबत में पड़ सकते हैं।
गाड़ी चोरी होने पर क्या करें
आप सबसे पहले झूठी शिकायत देने वाले शिकायतकर्ता के खिलाफ एक काउंटर शिकायत सम्बंधित या नजदीकी पुलिस स्टेशन में दें या उनके उच्चाधिकारी को दें। शिकायत दर्ज कराने के लिए किसी सबूत को साथ देने की जरूरत नहीं होती। यह जांच अधिकारी की जिम्मेदारी होती है कि वो शिकायत की जांच करे, गलत पाये जाने पर शिकायत बंद कर दे या फिर सही पाये जाने पर सम्बंधित धारा के तहत केस दर्ज करें।
आपराधिक मामलों में झूठी शिकायत पर क्या करें
आजकल आधार कार्ड बहुत आवश्यक दस्तावेज हो गया है। इसके बिना आप कई सरकारी सेवाओं से वंचित हो सकते हैं, लेकिन यह सब वेरिफाइड बायोमेट्रिक और डेमोग्राफिक डाटा की वजह से ही संभव हो पाता है। आधार के 12 अंकों के यूनिक आईडेंटिफिकेशन नंबर में आपकी पूरी डिटेल होती है। खतरे की बात यह है कि इस नंबर के जरिए आपसे धोखाधड़ी भी किया जा सकता है। हालांकि आप आधार की वेबसाइट पर ऑनलाइन लॉक-अनलॉक का ऑप्शन का इस्तेमाल करके किसी भी तरह की धोखाधड़ी से बच सकते हैं। जब आप अपना बॉयोमीट्रिक डाटा लॉक कर देते हैं तो न आप स्वयं और न ही दूसरा व्यक्ति डाटा का इस्तेमाल कर सकता है। यह सुविधा केवल ऑनलाइन उपलब्ध है। हालांकि इसके लिए आपका मोबाइल नंबर आधार के साथ रजिस्टर होना चाहिए।
आधार कार्ड बायोमीट्रिक डाटा क्या होता है
जब आप अपना आधार कार्ड बनवाने जाते हैं तो कार्ड बनवाने के दौरान सेंटर पर आपका फिंगर प्रिंट और रेटिना स्कैन डेटाबेस को लिया जाता है। इसे ही बायोमीट्रिक डाटाबेस कहा जाता है। हम आपको बताते हैं कि किस तरह आप आधार कार्ड की सुरक्षा के लिए आनलाइन आधार कार्ड लॉक - अनलॉक कैसे करते हैं।



आधार कार्ड को अनलॉक कैसे करें
यदि आप कोई सरकारी सेवा लेने जा रहे हैं तो और वहां पर आधार कार्ड का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको आधार कार्ड को अपने घर पर ही अनलॉक करके जाना पड़ेगा। तभी आपका काम हो पायेगा। अब आप नीचे दिए गए आधार कार्ड को आनलाइन अनलॉक करने की प्रक्रिया का पालन करें।


नोट-
नई दिल्ली। दिल्ली में चुनाव के दौरान दिल्लीवासियों को भ्रष्टाचार मुक्त और ई-गवर्नेंस वाली व्यवस्था देने का वादा करने वाली आप सरकार बेनकाब हो गयी है। आप सरकार सिटिजन चार्टर के मुद्दे पर फिसड्डी ही साबित हुई है। आप सरकार ने नागरिक अधिकार संशोधन विधेयक तो पास करा दिया, लेकिन 22 मार्च 2014 से अभी तक सिटिजन चार्टर का पोर्टल तक अपडेट नहीं हुआ है। और न ही अधिकारियों के पास ही इसकी कोई नयी जानकारी है। पोर्टल अपडेट न होने की वजह से कितने विभागों या सेवाओं में सिटिजन चार्टर लागू है और कितनों में नहीं लागू है, इसके बारे में कुछ पता नहीं चलता है।
वहीं सिटीजन चार्टर एक्ट को लेकर दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता बीजेपी के विजेंद्र गुप्ता ने आम आदमी पार्टी सरकार पर जमकर निशाना साधा। विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल सरकार ने आम नागरिक को समयबद्ध सेवाएं प्राप्त करने का अधिकार देने वाले सिटीजन चार्टर को जानबूझकर पूरी तरह से प्रभावहीन बना दिया है। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा में विपक्ष सरकार के इस ढुलमुल रवैये का विरोध करेगा। इस स्कीम के जरिये विभागों को ई-गवर्नेन्स के माध्यम से नागरिकों को सेवाएं प्रदान करनी थी, परन्तु अधिकतर विभाग इस प्रकार की सेवाएं लागू करने में असफल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई विभागों द्वारा सिटीजन चार्टर ही नहीं लागू किया गया है। विजेंद्र गुप्ता ने मुख्यमंत्री केजरीवाल से मांग की है कि वे अविलम्ब यह सुनिश्चित करें कि सभी विभाग सिटीजन चार्टर को गंभीरता पूर्वक लागू करें।
आपको बता दें कि आप सरकार ने 11 अगस्त 2017 को विधानसभा में समयबद्ध सेवा प्रदानार्थ नागरिक अधिकार संशोधन विधेयक भी पास कराया, किंतु उसका भी कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया। इस विधेयक के पास होने के एक माह के भीतर सभी विभागों को अपने-अपने दायित्वों से संबंधित जानकारी देने वाले सिटिजन चार्टर को जनता में प्रचारित कर देना चाहिए था। लेकिन हकीकत यह है कि आज भी ऐसे अनेक विभाग हैं, जो इसे लागू करने में फिसड्डी साबित हुए हैं। विधेयक में सेवाएं मिलने में विलंब होने पर 10 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से और अधिकतम 200 रुपये क्षतिपूर्ति शुल्क के तौर पर देने का प्रावधान भी रखा गया था, लेकिन यह अधिकतम सीमा भी अभी तक जस की तस है। इस छोटी सी राशि को वसूल करने में भी दिल्लीवासियों को पापड़ बेलने का प्रावधान रख दिया गया है। यही वजह है कि अधिकारियों में क्षतिपूर्ति को लेकर कोई भय नहीं है। और अधिकारी सिटिजन चार्टर की समयबद्ध सेवा की जिम्मेदारी से किनारा किए हुए हैं।
प्लास्टिक आधार कार्ड से सावधान !
आधार कार्ड को पीवीसी(Poly Vinyl Chloride) या स्मार्ट कार्ड में बदलना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। यदि आपने आधार कार्ड का किसी दुकान से लेमिनेशन करा रखा है या फिर प्लास्टिक स्मार्ट कार्ड के तौर पर उसका इस्तेमाल करते हैं, तो सावधान रहें। क्योंकि प्लास्टिक या पीवीसी के आधार स्मार्ट कार्ड किसी काम के नहीं हैं।
अनुसूचित जाति/जनजाति प्रमाण पत्र
अनुसूचित जनजाति भारत के विभिन्न राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में पायी जाती है। स्वतंत्रता के पहले की अवधि में संविधान के अधीन सभी जनजातियों को ''अनुसूचित जनजाति'' के रूप में समूहबद्ध किया गया था। अनुसूचित जनजाति के रूप में विनिर्दिष्ट करने के लिए अपनाए गए मानदंडों में निम्नलिखित शामिल हैं: निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में पारम्परिक रूप से निवास करना। विशिष्ट संस्कृति जिसमें जनजातिय जीवन के सभी पहलू अर्थात भाषा, रीति रिवाज, परम्परा, धर्म और अस्था, कला और शिल्प आदि शामिल हैं। आदिकालीन विशेषताएं जो व्यावसायिक तरीके, अर्थव्यवस्था आदि को दर्शाता है। शैक्षिक और प्रौद्योगिकीय आर्थिक विकास का अभाव। राज्य विशेष/संघ राज्य क्षेत्र विशेष संबंधी अनुसूचित जनजाति का विनिर्देशन संबंधित राज्य सरकार के साथ किया गया। इन आदेशों को बात में परिवर्तित किया जा सकता है यह संसद के अधिनियम द्वारा किया जाता है।
भारत के संविधान के अनुच्छेद 342 के अनुसार संबंधित राज्य सरकार के साथ परामर्श करने के पश्चात राष्ट्रपति में अब तक 9 आदेश लागू किए हैं जिनमें संबंधित राज्य और संघ राज्य क्षेत्रों के संबंध में अनुसूचित जाति को विनिर्दिष्ट किया गया है।
जनजाति प्रमाण पत्र क्या है
भारतीय संविधान में उल्लिखित विनिर्देशन के अनुसार जनजाति प्रमाण पत्र किसी के अनुसूचित जनजाति होने का प्रमाण है। सरकार ने अनुभव किया कि बाकी नागरिकों की तरह समान गति से उन्नति करने के लिए अनुसूचित जनजातियों को विशेष प्रोत्साहन और अवसरों की आवश्यकता है। इसके परिणाम स्वरूप, रक्षात्मक भेदभाव की भारतीय प्रणाली के भाग के रूप में इन श्रेणी के नागरिकों के विशेष लाभ की गारंटी दी गई है, जैसा कि विधायिका में और सरकारी सेवा में सीटों का आरक्षण स्कूलों और कॉलेजों में दाखिला के लिए कुछ अंश पूरे शुल्क की छूट, शैक्षिक संस्थाओं में कोटा, कुछ नौकरियों आदि के लिए आवेदन करने के लिय ऊपरी आयु सीमा में छूट देना। इन लाभों को लेने में समर्थ होने के लिए अनुसूचित जनजाति के नागरिक के पास वैध जनजाति प्रमाण पत्र का होना जरूरी है।
जनजाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कैसे करें
राष्ट्रपति के अधिसूचित आदेशों में सूचीबद्ध जनजाति के लोग जनजाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकते हैं। कुछ राज्यों में जनजातीय विकास विभाग कुछ ऑनलाइन सुविधाएं मुहैया कराते हैं।
नोयडा (उत्तर प्रदेश) प्रदेश में अपराधियों को घुटने टेकवा देने का दावा करने वाली योगी सरकार को शर्मिंदा करने वाला एक और मामला सामने आया है। नोएडा के विधायक और केंद्रीय गृहमंत्री के राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह को भी वाट्स एप पर धमकी मिली है। और इनके वाट्स एप पर 10 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई है। जब शनिवार को पंकज ने धमकी की सूचना पुलिस को दी तब इसका खुलासा हुआ। अब इस मामले के खुलासे के बाद जांच को एसटीएफ के हवाले कर दिया गया है।
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में विधायकों को रंगदारी के लिए धमकी देने का पहला मामला नहीं है। यहां अब तक 24 से अधिक विधायकों को धमकी भरे संदेश भेजे जाने की बात सामने आ चुकी है। इन मामलों की जांच के लिए गठित एसआइटी लगातार केंद्रीय जांच एजेंसियों के संपर्क में है, लेकिन वह अभी उन नंबरों की सटीक लोकेशन तक नहीं पहुंच सकी है, जिनसे मैसेज भेजे जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि जांच एजेंसियां बिटक्वाइन के जरिये पेमेंट किए जाने की दिशा में भी जांच को आगे बढ़ा रही हैं। पाकिस्तान, अमेरिका सहित अन्य देशों के आइपी एड्रेस को लेकर भी छानबीन चल रही है। अब तक की जांच में एक बात पूरी तरह से साफ हो गई है कि संदेश भेजने वाला शख्स साइबर एक्सपर्ट है और वह बखूबी जानता है कि उसकी कौन से गलती उसे भारी पड़ सकती है। यही वजह है कि वह लगातार तकनीक के सहारे पुलिस को चकमा देने में अब तक कामयाब है।
गौरतलब है कि वाट्स एप से मैसेज भेजने वाले आरोपितों ने विधायकों को 3 दिनों में परिणाम भुगतने की धमकी दी थी, जिसके बाद से लगातार वैसे ही संदेश भेज रहे हैं। वाट्स एप से भेजे जा रहे संदेशों की भाषा भी एक जैसी ही है। इससे वजह से जांच एजेंसियां यही मान रही हैं कि कोई दहशत फैलाने के इरादे से शरारत कर रहा है। अब तक भाजपा के विधायक सीतापुर के महोली के शशांक त्रिवेदी, बुलंदशहर के डिबाई की अनीता लोधी, खीरी के मोहम्मदी के लोकेंद्र प्रताप, शाहजहांपुर के कटरा के वीर विक्रम, गोंडा के महनौन के विनय द्विवेदी, गोंडा के तरबगंज के प्रेम नारायण, बरेली के फरीदपुर के श्याम बिहारी, कानपुर के भोगनीपुर के विनोद कटिया, कुशीनगर के रजनीकांत मनी त्रिपाठी, लखनऊ के नीरज बोरा, बाराबंकी के सकेंद्र वर्मा, जालौन के कल्पी के नरेंद्र सिंह और हरदोई के गोपामऊ के श्याम प्रकाश को धमकी भरे व्हाट्सऐप मैसेज और वीडियो कॉल आए चुके हैं। अब देखना है कि प्रदेश को अपराध मुक्त करने का दावा करने वाली योगी सरकार अपने विधायकों को भय मुक्त कर पाती है या नहीं।
जयपुर (राजस्थान)। वसुंधरा राजे सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं एवं साक्षात्कार में भाग लेने वाले अभ्यार्थियों के लिए रोडवेज बसों में नि:शुल्क यात्रा का तोहफा दिया है। अब राजस्थान राज्य पथ निगम यूपीएससी, आरपीएससी और आरएसएमएसएसबी की ओर से आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं के साक्षात्कार के लिए जाने वाले मूल निवासी प्रतियोगियों को साधारण व एक्सप्रेस बसों में नि:शुल्क यात्रा की सुविधा मिलेगी। राजस्थान पथ परिवहन निगम के अध्यक्ष राजहंस उपाध्याय ने गुरूवार को इस संबंध में आदेश जारी किया।
इस सुविधा को लेने के लिए यूपीएससी, आरपीएससी और आरएसएमएसएसबी की ओर से आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं के साक्षात्कार में शामिल होने वाले प्रतियोगियों को बुकिंग काउंटर और परिचालक को परीक्षा प्रवेश पत्र, एवं राजस्थान का मूल निवासी होने का प्रमाण पत्र दिखाना होगा। इसके बाद परिचालक नि:शुल्क टिकट जारी कर प्रतियोगी को साक्षात्कार पत्र में वर्णित स्थान से साक्षात्कार के स्थान तक आने-जाने की नि:शुल्क प्रदान करेगा। प्रतियोगियों को यह सुविधा केवल साधारण और द्रुतगामी बसों में ही दी जाएगी। डीलक्स और वातानुकूलित बसों में यह सुविधा देय नहीं होगी। उल्लेखनीय है कि वसुंधरा राजे सरकार ने इससे पहले वृद्धजनों के लिए नि:शुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की थी । हालांकि माना जा रहा है कि वसुंधरा सरकार ने आगामी चुनाव को देखते हुए युवा मतदाताओं को लुभाने के लिए यह कदम उठाया है।
जयपुर (राजस्थान)। वसुंधरा राजे सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं एवं साक्षात्कार में भाग लेने वाले अभ्यार्थियों के लिए रोडवेज बसों में नि:शुल्क यात्रा का तोहफा दिया है। अब राजस्थान राज्य पथ निगम यूपीएससी, आरपीएससी और आरएसएमएसएसबी की ओर से आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं के साक्षात्कार के लिए जाने वाले मूल निवासी प्रतियोगियों को साधारण व एक्सप्रेस बसों में नि:शुल्क यात्रा की सुविधा मिलेगी। राजस्थान पथ परिवहन निगम के अध्यक्ष राजहंस उपाध्याय ने गुरूवार को इस संबंध में आदेश जारी किया।
इस सुविधा को लेने के लिए यूपीएससी, आरपीएससी और आरएसएमएसएसबी की ओर से आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं के साक्षात्कार में शामिल होने वाले प्रतियोगियों को बुकिंग काउंटर और परिचालक को परीक्षा प्रवेश पत्र, एवं राजस्थान का मूल निवासी होने का प्रमाण पत्र दिखाना होगा। इसके बाद परिचालक नि:शुल्क टिकट जारी कर प्रतियोगी को साक्षात्कार पत्र में वर्णित स्थान से साक्षात्कार के स्थान तक आने-जाने की नि:शुल्क प्रदान करेगा। प्रतियोगियों को यह सुविधा केवल साधारण और द्रुतगामी बसों में ही दी जाएगी। डीलक्स और वातानुकूलित बसों में यह सुविधा देय नहीं होगी। उल्लेखनीय है कि वसुंधरा राजे सरकार ने इससे पहले वृद्धजनों के लिए नि:शुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की थी । हालांकि माना जा रहा है कि वसुंधरा सरकार ने आगामी चुनाव को देखते हुए युवा मतदाताओं को लुभाने के लिए यह कदम उठाया है।
बलिया (उत्तर प्रदेश)। प्रदेश में अस्पताल प्रशासन की संवेदनहीनता थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामला बलिया के गड़वार इलाके का है, जहां 60 वर्षीय बुजुर्ग लीलावती की गुरूवार को 108 एम्बुलेंस न पहुंचने के चलते मौत हो गई। मृतक महिला के दामाद का आरोप है कि गुरूवार की सुबह अचानक बुजुर्ग लीलावती की तबियत ख़राब हो गई। जिसके बाद उसने अस्पताल ले जाने के लिए 108 एम्बुलेंस सेवा को कॉल किया, लेकिन कई घंटे इंतजार करने पर एंबुलेंस नहीं आयी। वो लोग आनन-फानन में परिजन बुजुर्ग महिला को ठेले पर लेकर अस्पताल पहुंचे। लेकिन अस्पताल में डाक्टर ही नहीं मौजूद थे। ऐसे में इलाज के अभाव में लीलावती की मौत हो गयी।
बताया जा रहा है कि बलिया जिले के थाना क्षेत्र गड़वार अंतर्गत गोविंदपुर की रहने वाली लीलावती को अचानक सुबह अचानक पेट मे दर्द होने लगा, तो लीलावती की बेटी और दामाद ने 108 पर एम्बुलेंस के लिए छह से सात बार फोन किया। बड़ी मुश्किल से एंबुलेंस चालक ने फोन उठाया और उसने कहा कि वह आ रहा है, लेकिन तीन घंटे इंतजार के बाद भी वह जब एम्बुलेंस लेकर नहीं पहुचा, तो दामाद मनोज दर्द से कराह रही अपनी सास को ठेला पर लादकर छह किलोमीटर दूर सरकारी हॉस्पिटल पहुंचा। लेकिन वहां पर कोई डाक्टर मौजूद नहीं था। हालांकि अस्पताल में मौजूद एक वार्ड बॉय ने चेक किया तो पता चला कि इनकी तो मौत हो चुकी है।
वहीं हमेशा की तरह बलिया जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी एसपी राय ने बयान दिया कि बुजुर्ग महिला की मौत का मामला गंभीर हैं। हमने मामले की जांच करने के निर्देश दे दिये हैं। इस मामले में दोषी डॉक्टर और एम्बुलेंस को अटेंड करने वाले ड्राइवर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अब देखना ये है कि दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई होती है या फिर हमेशा की तरह इस मामले को भी जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
दिल्ली में राशन कार्ड के प्रकार और सुविधाएं-
बीपीएल, एएवाई और अऩ्नपूर्णा कार्ड धारक का चयन-
यदि आपके राशन कार्ड का कार्य सरकार द्वारा निर्धारित समयसीमा में नहीं होता है तो आप आप नीचे दिए गए अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।
यदि आप राशन डीलर की मनमानी से परेशान हैं तो उसके खिलाफ शिकायत कर सकते हैं।
दिल्ली का अमीर हो, या गरीब कोई भी व्यक्ति वेबसाइट के जरिए आनलाइन राशन कार्ड की सूची में अपना नाम देख सकता है।
राशन कार्ड सूची में नाम जानने के लिए दस्तावेज
हम आपको बताएंगे कि किस तरह से आप घर बैठे बड़ी ही आसानी से अपने कंप्यूटर से या मोबाइल से आनलाइन शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। इसके लिए आपको National Consumer Helpline (NCH) की वेबसाइट में जाना होगा। वहां पर आप किसी भी कंपनी या दुकानदार के खिलाफ अपनी शिकायत रजिस्टर करवा सकते हैं।
ऑनलाइन शिकायत कैसे दर्ज करें-



ऑफलाइन शिकायत कैसे दर्ज करें-
दिल्ली में कोई भी ग्राहक या गैर-सरकारी संगठन कम वजन तौलने या नापने की लिखित शिकायत स्टैंर्डड्स ऑफ वेट्स ऐंड मेजर्स (एनफोर्समेंट) ऐक्ट 1985 के तहत मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट, कड़कड़डूमा, शाहदरा को कर सकता है।
आप कंट्रोलर, माप-तौल विभाग को फोन, फैक्स, लिखित या मेल से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। विभाग 15 दिन के अंदर बताता है कि आपकी शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई।
शिकायत करने के लिए पता है :
कंट्रोलर, माप-तौल विभाग, दिल्ली सरकार,
के ब्लॉक, विकास भवन, आई. पी. एस्टेट,
नई दिल्ली-110002,
फोन : 011-23379266,
फैक्स : 011-23379267,
मेल : This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.
आप फूड ऐंड सप्लाई मिनिस्टर, दिल्ली सरकार को भी लिखकर शिकायत कर सकते हैं।
फूड ऐंड सप्लाई मिनिस्टर पता-
फूड ऐंड सप्लाई मिनिस्टर, दिल्ली सचिवालय,
आई. पी. एस्टेट, नई दिल्ली-110002,
फोन : 011-23392126/27
फोन : 011-23378759,
फैक्स : 011-23379206
आप 09:30 से 05:30 बजे तक ऑफलाइन भी शिकायत दर्ज करवा सकते है, इसके लिये आपको सभी जानकारी फोन पर बतानी होगी। इसके लिए नीचे नंबर दिया गया है।
फोन नंबर: 1800-11-4000 या 14404
आप अपनी शिकायत SMS के द्वारा भी भेज सकते हैं। इसके लिए नंबर नीचे दिया गया है।
SMS के लिए फोन नंबर : 8130009809
हमारे देश में अधिकतर दुकानदार उपभोक्ताओं को कम तौल करके सामान देते हैं। जिसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ता है। उपभोक्ता जानकारी और जागरूकता के आभाव में हमेशा कम तौल के शिकार होते रहते हैं। उपभोक्ता को चाहिए कि वह बाट और माप के नियमों की जानकारी रखें और खुद को कम तौल से बचाएं। बाट और माप के सरकारी नियम जो हर उपभोक्ता को पता होना चाहिए।
उपभोक्ता को सही बाट-माप का अधिकार-
केन्द्रीय सतर्कता आयोग (सेंट्रल विजिलेंस कमीशन) भारत सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारियों/कर्मचारियों से सम्बन्धित भ्रष्टाचार नियंत्रण की सर्वोच्च संस्था है। केन्द्रीय सतर्कता आयोग को भ्रष्टाचार के किसी भी आरोप को प्रकट करने अथवा कार्यालय का दुरुपयोग करने से सम्बन्धित लिखित शिकायतें प्राप्त करने तथा उचित कार्यवाही की सिफारिश करने का अधिकार प्राप्त है।
केन्द्रीय सतर्कता आयोग का काम क्या है-
केन्द्रीय सतर्कता आयोग से शिकायत कैसे करें-

शिकायत भेजते समय सावधानी बरतें-
केन्द्रीय सतर्कता आयोग को शिकायत भेजने का पता-
केन्द्रीय सतर्कता आयोग,
सतर्कता भवन, ए ब्लॉक,
जीपीओ कॉम्प्लेक्स,
आईएनए, नई दिल्ली- 110023
ईपीएबीएक्स: - 011- 24600200 (30 लाइन्स)
फैक्स: 011- 24651010/24651186
ईमेल: This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.
केन्द्रीय सतर्कता आयोग (सेंट्रल विजिलेंस कमीशन) भारत सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारियों/कर्मचारियों से सम्बन्धित भ्रष्टाचार नियंत्रण की सर्वोच्च संस्था है। केन्द्रीय सतर्कता आयोग को भ्रष्टाचार के किसी भी आरोप को प्रकट करने अथवा कार्यालय का दुरुपयोग करने से सम्बन्धित लिखित शिकायतें प्राप्त करने तथा उचित कार्यवाही की सिफारिश करने का अधिकार प्राप्त है।
केन्द्रीय सतर्कता आयोग का काम क्या है-
केन्द्रीय सतर्कता आयोग से शिकायत कैसे करें-

शिकायत भेजते समय सावधानी बरतें-
केन्द्रीय सतर्कता आयोग को शिकायत भेजने का पता-
केन्द्रीय सतर्कता आयोग,
सतर्कता भवन, ए ब्लॉक,
जीपीओ कॉम्प्लेक्स,
आईएनए, नई दिल्ली- 110023
ईपीएबीएक्स: - 011- 24600200 (30 लाइन्स)
फैक्स: 011- 24651010/24651186
ईमेल: This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.
दिल्ली में केंद्रीय मंत्रिमंडल सचिवालय के तहत लोक शिकायत निदेशालय (डीपीजी) बनाया गया है। इसका प्रमुख केंद्र सरकार का सचिव स्तर का अधिकारी होता है। यह लोक शिकायत निदेशालय केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय का एक हिस्सा है।
डीपीजी से आफलाइन शिकायत कैसे करें-
यदि सरकारी बैंकों और इंश्योरेंस कंपनियों के खिलाफ शिकायत पर विभाग या मंत्रालय ने कोई कार्रवाई नहीं की है। या आप विभाग की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं, तो आप अपनी शिकायत के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज नत्थी करके डीपीजी को भेज सकते हैं। कृपया संबंधित सहायक दस्तावेजों की प्रतियों के साथ अपनी शिकायत का विवरण दें। शिकायत सुलझाने के लिए विभाग के शिकायत समाधान तंत्र के जरिए किए गए पूर्व-प्रयासों के बारे में बताएं। यह भी बताएं कि क्या आपने संगठन या विभाग के किसी पूर्व-निर्णय के खिलाफ किसी न्यायालय, अधिकरण या उपभोक्ता फोरम में कोई अपील दायर की है। अपनी पहचान के साथ-साथ, पत्र-व्यवहार का पता, ई-मेल का पता तथा टेलीफोन नम्बर भी बताएं। अपने पत्र पर अपने हस्ताक्षर करना अथवा अपने अंगूठे का निशान लगाना ना भूलें।
डीपीजी से आनलाइन शिकायत कैसे करें-

शिकायत पर डीजीपी की कार्रवाई-
डीजीपी की कार्रवाई की समय सीमा और फीस-
लोक शिकायत निदेशालय के प्रमुख-
डा. इंद्रजीत सिंह
सचिव
दूरभाष सं0 011-23345545
011-23017075
फैक्स नंबर 011-23345637
ई-मेल पता -secypg[at]nic[dot]in
लोक शिकायत अधिकारी-
आलोक कुमार
अवर सचिव
011-23747632
aalok[dot]kumar[at]nic[dot]in
लोक शिकायत निदेशालय (डीपीजी) का पता-
सचिव, लोक शिकायत निदेशालय
सेकंड फ्लोर, सरदार पटेल भवन
संसद मार्ग, नई दिल्ली-110001
फोन : 011-2334-5545
फैक्स : 011-2334-5637
ई-मेल: This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.
नोट: यदि आप चाहें तो सरदार पटेल भवन के ग्राउंड फ्लोर पर लगाए गए ड्रॉप बॉक्स में भी अपनी शिकायत लिखकर डाल सकते हैं।