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दिल्ली में केंद्रीय मंत्रिमंडल सचिवालय के तहत लोक शिकायत निदेशालय (डीपीजी) बनाया गया है। इसका प्रमुख केंद्र सरकार का सचिव स्तर का अधिकारी होता है। यह लोक शिकायत निदेशालय केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय का एक हिस्सा है।
डीपीजी से आफलाइन शिकायत कैसे करें-
यदि क्षेत्रीय पासपोर्ट आफिस के खिलाफ शिकायत पर विभाग या मंत्रालय ने कोई कार्रवाई नहीं की है। या आप विभाग की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं, तो आप अपनी शिकायत के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज नत्थी करके डीपीजी को भेज सकते हैं। कृपया संबंधित सहायक दस्तावेजों की प्रतियों के साथ अपनी शिकायत का विवरण दें। शिकायत सुलझाने के लिए विभाग के शिकायत समाधान तंत्र के जरिए किए गए पूर्व-प्रयासों के बारे में बताएं। यह भी बताएं कि क्या आपने संगठन या विभाग के किसी पूर्व-निर्णय के खिलाफ किसी न्यायालय, अधिकरण या उपभोक्ता फोरम में कोई अपील दायर की है। अपनी पहचान के साथ-साथ, पत्र-व्यवहार का पता, ई-मेल का पता तथा टेलीफोन नम्बर भी बताएं। अपने पत्र पर अपने हस्ताक्षर करना अथवा अपने अंगूठे का निशान लगाना ना भूलें।
डीपीजी से आऩलाइऩ शिकायत कैसे करें-

शिकायत पर डीजीपी की कार्रवाई-
डीजीपी की कार्रवाई की समय सीमा और फीस-
लोक शिकायत निदेशालय के प्रमुख-
डा. इंद्रजीत सिंह
सचिव
दूरभाष सं0 011-23345545
011-23017075
फैक्स नंबर 011-23345637
ई-मेल पता -secypg[at]nic[dot]in
लोक शिकायत अधिकारी-
आलोक कुमार
अवर सचिव
011-23747632
aalok[dot]kumar[at]nic[dot]in
लोक शिकायत निदेशालय (डीपीजी) का पता-
सचिव, लोक शिकायत निदेशालय
सेकंड फ्लोर, सरदार पटेल भवन
संसद मार्ग, नई दिल्ली-110001
फोन : 011-2334-5545
फैक्स : 011-2334-5637
ई-मेल: This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.
नोट: यदि आप चाहें तो सरदार पटेल भवन के ग्राउंड फ्लोर पर लगाए गए ड्रॉप बॉक्स में भी अपनी शिकायत लिखकर डाल सकते हैं।
अनूपपुर (मध्य प्रदेश)। प्रदेश में रिश्वतखोर अधिकारियों के हौसले पस्त होने का नाम नहीं ले रहे हैं। रीवा की लोकायुक्त पुलिस ने अनूपपुर जिले के कोतमा से ग्रामीण यंत्रिकी सेवा विभाग के एसडीओ और उपयंत्री को 32 हजार 400 सौ रुपए की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। बदरा जनपद में पदस्थ एसडीओ उमेश श्रीवास्तव और उपयंत्री देवेंद्र सिंह चौहान सड़क निर्माण के लिए सप्लाई किए गए मटेरियल का बिल पास कराने की एवज में रिश्वत ले रहे थे। तभी लोकायुक्त पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
आपको बता दें कि अनूपपुर के चुकान गांव में दो महीने पहले करीब 1 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई गई, जिसकी कुल लागत 12 लाख 99 हजार थी। हालांकि यह सड़क अभी भी पूरी तरह नहीं बन पाई है। रीवा लोकायुक्त निरीक्षक हितेन्द्रनाथ शर्मा के मुताबिक मटेरियल सप्लायर सुरेन्द्रनाथ मिश्रा ने जनपद बदरा के ग्राम पंचायत चुकान के लखन गुप्ता के खेत से कनारटोला के बीच बनी ग्रेवल रोड के निर्माण में सामग्री की सप्लाई की थी। जिसकी कुल राशि 5 लाख 49 हजार 500 रुपए हुई थी। इस मटेरियल सप्लाई के भुगतान के एवज में एसडीओ और उपयंत्री ने मटेरियल सप्लायर सुरेंद्रनाथ मिश्रा से 15 प्रतिशत कमीशन मांगी थी। जब बहुत कहने-सुनने के बाद भी एसडीओ और उपयंत्री ने मटेरियल के बिल का भुगतान नहीं किया, तो मिश्रा ने 18 मई को लोकायुक्त रीवा में दोनों के खिलाफ शिकायत कर दी। मामले की शिकायत मिलने के बाद मंगलवार सुबह 11 बजे 14 सदस्यीय टीम ने उपयंत्री देवेंद्र सिंह चौहान के कोतमा स्थित घर में एसडीओ उमेश कुमार श्रीवास्तव तथा उपयंत्री चौहान कोतमा को 32 हजार 400 सौ रुपए लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। इसमें से 27 हजार 400 सौ रुपए की रिश्वत एसडीओ और 5000 उपयंत्री चौहान ने लिए थे। लोकायुक्त टीम की योजना के अनुसार सुरेन्द्रनाथ मिश्रा ने जैसे ही रुपए के अलग-अलग पैकेट में दोनों को दिए वैसे ही लोकायुक्त ने उन्हें धर दबोचा। और दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। हालांकि बाद में लोकायुक्त ने दोनों आरोपियो को जमानत दे दी।
पटना (बिहार) मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कैबिनेट मंत्रियों की बैठक में राज्य के सरकारी सेवकों को मिलने वाले लोन को लेकर बड़ी राहत दी है। बैठक में फैसला लिया गया कि अब सरकारी सेवकों को मकान निर्माण के लिए एडवांस के रूप में 7.5 लाख रुपए की बजाय 25 लाख का लोन मिलेगा। और साथ ही सरकारी कर्मियों को कंप्यूटर और लैपटॉप खरीदने के लिए भी लोन दिया जायेगा। सोमवार को कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। वहीं दूसरी ओर सरकारी सेवकों के कार और मोटर साइकिल के लिए एडवांस की सुविधा बंद कर दी गई है।
इस फैसले की पुष्टि करते हुए कैबिनेट विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह ने कहा कि सरकारी सेवक मकान बनाने के लिए अब 25 लाख रुपए तक मकान निर्माण एडवांस ले सकेंगे। इसी प्रकार मकान के विस्तार के लिए सरकारी सेवकों को अब 1 लाख 80 हजार की बजाय 10 लाख रुपए तक मिलेंगे। जबकि सरकारी सेवक को सेवाकाल में पांच बार कंप्यूटर एडवांस मिलेगा। पहली बार इसके लिए न्यूनतम 30 हजार रुपए से लेकर अधिकतम 80 हजार रुपए तक एडवांस मिलेंगे। दूसरी बार अधिकतम 30 हजार रुपए से लेकर 75 हजार रुपए तक एडवांस मिलेगा। वहीं दूसरी ओर सातवें वेतनमान में प्रावधान नहीं होने की वजह से सरकारी सेवकों के कार और मोटर साइकिल एडवांस की सुविधा बंद कर दी गई है। इसके अलावा कैबिनेट की बैठक में कई और भी फैसले लिए गए।
पटना (बिहार) मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कैबिनेट मंत्रियों की बैठक में राज्य के सरकारी सेवकों को मिलने वाले लोन को लेकर बड़ी राहत दी है। बैठक में फैसला लिया गया कि अब सरकारी सेवकों को मकान निर्माण के लिए एडवांस के रूप में 7.5 लाख रुपए की बजाय 25 लाख का लोन मिलेगा। और साथ ही सरकारी कर्मियों को कंप्यूटर और लैपटॉप खरीदने के लिए भी लोन दिया जायेगा। सोमवार को कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। वहीं दूसरी ओर सरकारी सेवकों के कार और मोटर साइकिल के लिए एडवांस की सुविधा बंद कर दी गई है।
इस फैसले की पुष्टि करते हुए कैबिनेट विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह ने कहा कि सरकारी सेवक मकान बनाने के लिए अब 25 लाख रुपए तक मकान निर्माण एडवांस ले सकेंगे। इसी प्रकार मकान के विस्तार के लिए सरकारी सेवकों को अब 1 लाख 80 हजार की बजाय 10 लाख रुपए तक मिलेंगे। जबकि सरकारी सेवक को सेवाकाल में पांच बार कंप्यूटर एडवांस मिलेगा। पहली बार इसके लिए न्यूनतम 30 हजार रुपए से लेकर अधिकतम 80 हजार रुपए तक एडवांस मिलेंगे। दूसरी बार अधिकतम 30 हजार रुपए से लेकर 75 हजार रुपए तक एडवांस मिलेगा। वहीं दूसरी ओर सातवें वेतनमान में प्रावधान नहीं होने की वजह से सरकारी सेवकों के कार और मोटर साइकिल एडवांस की सुविधा बंद कर दी गई है। इसके अलावा कैबिनेट की बैठक में कई और भी फैसले लिए गए।
गया (बिहार) आपने पुलिस की गिरफ्त से अपराधियों को फरार होते अक्सर सुना होगा, लेकिन गया में एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां रिश्वत लेने के आरोप में बंद चाकन्द थानाध्यक्ष पवन कुमार पुलिस की गिरफ्त से फरार हो गया। इसने दो शराब तस्करों को 1 लाख 16 हजार रुपए रिश्वत लेकर छोड़ दिया था। इस घटना की सूचना मिलने के बाद जिले के एसएसपी राजीव मिश्र थाने पहुंचे और आरोपी पवन कुमार को थाने से ही पकड़ लिया और उससे रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली थी। इसके बाद पवन कुमार को पूछताछ के लिए डीएसपी कार्यालय लाया गया। चंदौती थाने में उसे रखकर कागजी प्रक्रिया पूरी कर जेल भेजने की तैयारी की जा रही थी तभी वह पुलिसकर्मियों को चकमा देकर वह फरार हो गया। पुलिस आरोपी पवन कुमार की तलाश कर रही है।
वहीं एसएसपी ने बताया कि थानाध्यक्ष को निलंबित करते हुए विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी गई है। चूंकि उसे रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है, इसलिए चाकंद थाने में ही डीएसपी विधि व्यवस्था संजीव प्रभार ने प्राथमिकी दर्ज कराई है।
गौरतलब है कि मिली जानकारी के मुताबिक छापेमारी के दौरान चाकंद थानाध्यक्ष ने शुक्रवार की रात नगर प्रखंड गन्नु बिगहा गांव से शराब से लदी 1 बोलेरो और 4 तस्करों को भी गिरफ्तार किया था। बताया जा रहा है कि थानाध्यक्ष पवन कुमार ने तस्करों के बिचौलिए सरपंच से बातचीत करके 1 लाख 16 हजार में मामले की डील की और दो तस्कर को छोड़ दिया। गाड़ी छोडऩे के लिए शराब तस्करों से तीन लाख रुपये की मांग की गई थी। तस्करों ने डेढ़ लाख रुपये का भुगतान कर दिया था। हालांकि एसएसपी को इसकी गुप्त सूचना मिल गई थी। जब इस घटना की सूचना एसएसपी को मिली तो वह स्वयं मामले की पड़ताल करने चाकन्द थाने पहुंच गए। और उन्होंने एएसपी संजय भारती एवं डीएसपी संजीव प्रभार के साथ थानाध्यक्ष के सरकारी आवास की छानबीन की। वहां से 1 लाख रुपए 16 हजार रुपये बरामद होने के बाद एसएसपी ने तत्काल उसे गिरफ्तार कर लिया। एसएसपी ने बताया कि इसके पीछे पुलिस की लापरवाही या मिलीभगत है। दोनों बिंदुओं पर जांच की जा रही है। एसएसपी की माने तो इस मामले में पुलिस की मिलीभगत है। दोषी पाए जाने पर विधि व्यवस्था डीएसपी और सर्किल इंस्पेक्टर दोनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एसएसपी ने बताया कि थानाध्यक्ष ने शराब की खेप बरामद करने के बाद रिपोर्ट भी दर्ज नहीं किया था। पुलिस की मिलीभगत से आरोपी थानाध्यक्ष फरार है। फिलहाल पुलिस थानाध्यक्ष पवन कुमार, बिचौलिया सरपंच और फरार दोनों तस्करों को गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी कर रही है।
अपना मुनाफा बढ़ाने के चक्कर में दुकानदार, कंपनी, डीलर या सर्विस प्रोवाइडर्स आपको धोखा दे सकते हैं। यदि आपको बिल्कुल गलत चीज मिल जाए या फिर उसमें कोई कमी हो। या कंपनी अपनी गलती मानने को तैयार नहीं है, तो आप चुप न बैठें। आप उपभोक्ता अदालत में शिकायत करें। उपभोक्ता अदालत में दुकानदार , निर्माता , डीलर या फिर सेवा प्रदाता के खिलाफ शिकायत की जा सकती है।
उपभोक्ता अदालत में कौन शिकायत कर सकता है-
उपभोक्ता अदालत में शिकायत कैसे करें-
हर मामले की उपभोक्ता अदालत अलग-अलग होती है-
हर उपभोक्ता अदालत में एक फाइलिंग काउंटर होता है, जहां सुबह 10.30 बजे से दोपहर 1.30 बजे तक शिकायत दाखिल की जा सकती है।
हर मामले की फीस अलग-अलग होती है-
उपभोक्ता अदालत से राहत-
आप शिकायत दर्ज करवा सकते हैं-
शिकायत दर्ज होने पर फोरम स्वत: मामले की सुनवाई शुरू कर देगा। वह संबंधित संस्थान से स्पष्टीकरण मांगने के साथ ग्राहक को 90 दिन में न्याय दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर देगा।
कोर्ट का आदेश पालन न करने पर सजा-
विपक्ष अगर कोर्ट का आदेश पालन न करे तो उसे शिकायतकर्ता को 10 हज़ार रुपए की पेनल्टी और 3 साल तक की सज़ा दी जा सकती है। सज़ा भुगतने के बाद भी आदेश का पालन करना बाकी रहता है तो जरूरत के मुताबिक आदेश का पालन करवाने के लिए प्रॉपर्टी भी जब्त की जा सकती है।
आरोप पत्र (चार्जशीट) क्या है
पुलिस किसी भी मामले में एफआईआर दर्ज करने के बाद, उसकी जांच करती है। जब जांच के दौरान पुलिस को लगता है कि मामले में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं तो वह उस केस में मुकदमा चलाने के लिए न्यायालय में आरोप पत्र या चार्जशीट पेश करती है। इसे पुलिस चालान भी कहा जाता है।
चार्जशीट कितने दिनों में दाखिल होती है
आपके लिए यह जानना जरुरी है कि चार्जशीट किस सूरत में और कितने दिनों के भीतर दाखिल की जा सकती है। किसी भी केस में छानबीन पूरी करने के बाद पुलिस अधिकारी सीआरपीसी की धारा-173 में चार्जशीट दाखिल करते हैं।
मुकदमा वापस ले सकते हैं
सीआरपीसी की धारा-321 के तहत अभियोजन पक्ष सार्वजनिक हित में मुकदमा वापस लेने की अर्जी दाखिल कर सकता है। इसके लिए सरकारी वकील सरकार से स्वीकृति लेता है और कोर्ट में दलील पेश करता है कि सार्वजनिक हित में मुकदमा चलाना ठीक नहीं है। लिहाजा केस वापस लेने की अनुमति दी जाए। जब अदालत सरकारी वकील की दलीलों से संतुष्ट होती है, तभी वह मुकदमा वापस लेने की अनुमति देती है। यदि सरकारी पक्ष की दलीलों से अदालत संतुष्ट नहीं है तो वह मुकदमा वापस लेने की अर्जी को ठुकरा सकती है।
मोबाइल या कोई सामान चोरी होने पर जब आप पुलिस थाने जाते हैं तो पुलिस एफआईआर दर्ज करने की बजाय आपकी एनसीआर काट देती है। आइए जानते हैं कि एनसीआर क्या है-
आमतौर पर देखने को मिलता है कि घटना स्थल की जानकारी न होने पर लोगों को समझ में नहीं आता है कि आखिर वह किस पुलिस थाने में अपनी एफआईआर दर्ज कराएं। लेकिन यदि आपको घटना स्थल के बारे में जानकारी नहीं है तो चिंता करने की कोई बात नहीं है। आप किसी भी थाने में अपनी एफआईआर दर्ज करवा सकते हैं।
नोयडा (उत्तर प्रदेश)। एक सिपाही के ट्वीट से नोयडा क्राइम ब्रांच की टीम के काले कारनामे का पर्दाफाश कर दिया है। क्राइम ब्रांच की टीम की अवैध उगाही के खुलासे के बाद एसएसपी ने क्राइम ब्रांच के 16 पुलिसकर्मियों की पूरी टीम को भंग कर दिया है। साथ ही नोएडा क्राइम ब्रांच के सभी पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक, नोएडा क्राइम ब्रांच में तैनात पुलिसकर्मियों के दो गुटों के बीच उगाही के पैसे के बंटवारे को लेकर उपजे विवाद के बाद यह रेट लिस्ट सामने आयी है। हालांकि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ अजय पाल ने मामले की गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच नगर पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह को सौंप दी है।
आम तौर पर उत्तर प्रदेश पुलिस पर रिश्वतखोरी के आरोप हमेशा लगते रहे हैं। लेकिन अवैध उगाही की इस रेट लिस्ट के खुलासे ने लखनऊ में सीनियर अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए हैं। नोएडा क्राइम ब्रांच में तैनात पुलिसकर्मी संजीव तेवतिया ने उगाही के इस पूरे बही खाते को अपने सीनियर अधिकारियों को भेजा था, जो लीक होकर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। सिपाही ने अपने ट्वीट में सिलसिलेवार बताया है कि किस तरह क्राइम ब्रांच की टीम अवैध वसूली करती थी। इस रेट लिस्ट में साफ-साफ लिखा है कि किस कारोबारी से कितने पैसे मिलते हैं और पुलिस कहां-कहां से कितने पैसे वसूलती है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस बही खाते में इंस्पेक्टर से लेकर एसपी तक को मिलने वाले पैसों का लेखा जोखा दर्ज है। उसने अपराध रोकने के लिए गठित क्राइम ब्रांच के अफसरों द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए उत्तर प्रदेश के डीजीपी से लेकर जिले के पुलिस कप्तान तक को ट्वीट किया है। उसने ट्वीट के जरिए फोन नंबर देकर अफसरों को जानकारी दी है कि क्राइम ब्रांच के लोग कहां-कहां से रिश्वत लेते हैं। उसने नकली सीमेंट बेचने वाले, होटल चलाने वाले, सरिया चोरी का धंधा करने वाले, नकली डीजल बेचने वाले, सट्टा जुआ चलाने वालों के अलावा कई तरह के और अनैतिक कार्य करने वाले लोगों से वसूली जाने वाली रकम का ब्यौरा दिया है। इस ट्वीट में उसने आरोप लगाया है कि जनपद में तैनात एसपी स्तर के एक अधिकारी प्रतिमाह 25 हजार रुपए रिश्वत लेते हैं। इस आरोप के चलते पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।
इतनी ही नहीं सिपाही संजीव ने अपने ट्वीट में नोयडा में चल रहे एनकाउंटर पर भी सवाल उठाया है। उसने हाल ही में नोएडा पुलिस द्वारा एक मुठभेड़ में मारे गए श्रवन नामक बदमाश के एनकाउंटर को फर्जी बताया है। उसने लिखा है कि श्रवन के एनकाउंटर करवाने वाले व्यक्ति को 50 हजार रुपया दिया गया है। और साथ ही 50 हजार रुपया अभी देना है। इन सनीसनीखेज खुलासों के बाद योगी सरकार के एनकाउंटर की सच्चाई की पोल खुल गयी है। योगी सरकार देशभर में अपनी पीठ थप-थपा रही है कि उसने प्रदेश के अपराधियों का एनकाउंटर करके उनकी कमर तोड़ दी है, जिससे प्रदेश में अपराथ में कमी आ गयी है। लेकिन सच्चाई कुछ और ही सामने आ रही है। ऐसा लगता है कि जिस क्राइम ब्रांच पर सरकार ने अपराधियों पर नियंत्रण करने की जिम्मदारी सौंपी थी, वही अवैध उगाही और फेक एनकाउंटर में संलिप्त थे।
अधिकार एक्सप्रेस में आपका स्वागत है, हम इस वीडियो में आपको बताएंगे कि आप किस प्रकार से बैंक कर्मचारियों की शिकायत कर सकते हैं।
बैंक कर्मचारी बैंकिंग सेवा न दे या फिर गलत व्यवहार करे तो आप सबसे पहले बैंक के अधिकारी से लिखित, टोल फ्री नंबर या ऑनलाइन के जरिए शिकायत कर सकते हैं।
बैंक कर्मियों की शिकायत-
सरकारी बैंकों के टोल फ्री नंबर-
निजी बैंकों के टोल फ्री नंबर-
सरकारी बैंकों की वेबसाइट-
बैंक कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई-
बैंक के कर्मचारियों के खिलाफ बैंक शिकायत सेल , बैंक के टोल फ्री नंबर अथवा बैंक की वेबसाइट पर शिकायत करने के पश्चात आपको कम से कम 30 दिनों तक का इंतजार करना चाहिए। 30 दिन के अंदर बैंक द्वारा आपकी शिकायत का समाधान किया जाएगा। और यदि 30 दिनों के बाद भी बैंक ने आपकी समस्या का निवारण नहीं किया है। और आपको बैंक द्वारा किसी प्रकार का संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया है या द्वारा दिए गए जवाब से आप संतुष्ट नहीं हैं, तो आप बैंकिंग लोकपाल से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। और अपनी शिकायत का समाधान प्राप्त कर सकते हैं।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। आखिरकार उन्नाव रेपकांड में सीबीआई ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए माखी थाने के तत्कालीन थानेदार अशोक सिंह भदौरिया और दरोगा कांता प्रसाद सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। सीबीआई ने लम्बी पूछताछ के बाद देर शाम दोनों की गिरफ्तारी की। गुरुवार को सीबीआई दोनों को आरोपियों को कोर्ट में पेश करेगी। इन आरोपियों के साथ ही सहित माखी थाने के छह पुलिसकर्मियों को एसआइटी की जांच के बाद निलंबित कर दिया गया था।
बताया जा रहा है कि इन आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी षड्यंत्र, साक्ष्य मिटाने व फर्जी तरीके से आर्म एक्ट का मुकदमा लिखे जाने के मामले में की गई है। सीबीआइ जांच में पीडि़त किशोरी के पिता की हत्या के मामले में अहम तथ्य सामने आए हैं। तत्कालीन एसओ सहित अन्य पुलिसकर्मियों ने पीडि़त किशोरी के पिता को जेल भेजने के आपराधिक इरादे से ही फर्जी तरीके से तमंचे की बरामदगी दिखाई गई थी। यह भी साफ हो गया है कि माखी थानाध्यक्ष सहित अन्य पुलिसकर्मी भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के दबाव में थे। पीडि़त किशोरी के पिता की हत्या के आरोप में विधायक सेंगर के भाई अतुल सिंह सहित पांच आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
माना जा रहा है कि सीबीआई का शिकंजा जल्दी ही अन्य आरोपी पुलिसकर्मियों पर भी कस सकता है। पीड़िता के पिता की हत्या की जांच में पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी को बेहद अहम माना जा रहा है। इसके साथ ही अब पीड़िता किशोरी के पिता को फंसाने के लिए रचे गए पुलिसिया खेल की अन्य परतें भी खुलेंगी।
आपको बता दें कि सीबीआई जांच के दौरान पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया गया था कि 4 जून 2017 को रेप की घटना के बाद माखी पुलिस ने साजिश के चलते मामले को दबा दिया था। जबकि 3 अप्रैल को कचहरी पेशी से लौटे पीड़िता के पिता की विधायक के भाई अतुल सिंह सेंगर ने अपने साथियों के साथ मिलकर पिटाई की थी। इस पिटाई के बाद 9 अप्रैल को तड़के पीड़िता के पिता की जिला अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। इस प्रकरण में थानेदार अशोक सिंह भदौरिया और बीट दरोगा कांता प्रसाद सिंह ने विधायक के भाई के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय पीड़िता के पिता के खिलाफ फर्जी रिपोर्ट लिखकर उन्हें जेल भेज दिया गया था। जब सीबीआई ने पीड़िता के पिता पर रिपोर्ट दर्ज कराने वाले उसके चचेरे भाई टिंकू सिंह को गिरफ्तार किया तब जाकर मामले की हकीकत सामने आयी। टिंकू सिंह ने सीबीआई को दिए अपने बयान में बताया है कि पुलिस के कहने पर उसने पीड़िता के पिता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एक महीने की जांच और टिंकू के बयानों से मिले तथ्यों को लेकर सीबीआई ने कई अहम सबूत जुटाए। और फिर पूरे मामले की जांच के बाद सीबीआई ने माखी थाने के तत्कालीन थानेदार अशोक सिंह भदौरिया और दरोगा कांता प्रसाद सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने बच्चों के पाठ्यक्रम को लेकर एक अहम कदम उठाया है। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने कक्षा 9 से 12 तक के पाठ्यक्रम में यातायात नियमों को शामिल कर लिया है। इस पाठ्यक्रम में सिर्फ यातायात नियम ही नहीं प्राथमिक उपचार के बारे में भी बच्चों को ज्ञान हासिल होगा। मध्यमिक शिक्षा परिषद ने यह कदम दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए परिवहन विभाग की गुजारिश के बाद उठाया है।
इस कदम का मकसद यह है कि पढ़ाई के दौरान ही बच्चे स्कूल में यातायात नियमों की जानकारी समय से हासिल कर सकें। और एक सजग प्रहरी की तरह यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करें और साथ ही लोगों को भी यातायात के नियमों के लिए जागरूक करें। इसके लिए परिवहन विभाग ने एक सिलेबस तैयार कर माध्यमिक शिक्षा परिषद को भेजा था। शिक्षा महकमे अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है।
यातायात नियमों से लैस इस पाठ्यक्रम में करीब डेढ़ दर्जन जानकारियों को बिंदुवार रखा गया है। ड्राइविंग के मुख्य तथ्य, अभिभावकों के कर्तव्य, यातायात संकेतकों की जानकारी एवं अर्थ, सड़क यातायात चिह्न् के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसके अलावा ट्रैफिक लाइट, लाल बत्ती, हरी बत्ती और जेब्रा लाइन पार करते वक्त बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में चित्र के साथ बड़े आसान तरीके से बताया गया है।
माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा लागू कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में 'द रूल्स ऑफ द रोड' अंग्रेजी और हिंदी में 'सड़क सुरक्षा एवं यातायात के नियम' के रूप में शामिल किया गया है। इसमें एक कहानी के माध्यम से बच्चों को सचेत किया गया है कि वह सड़क पर कैसे चले और क्या-क्या सावधानियां बरतें। जबकि कक्षा 10 के पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को प्रारंभिक हिंदी, में यातायात के नियम, संस्कृत में यातायात नियम, निबंध के रूप में पेश किया गया है। वहीं सामाजिक विज्ञान में सड़क सुरक्षा एवं यातायात, नैतिक खेल एवं शारीरिक शिक्षा और ट्रेड ऑटोमोबाइल में इंजन की विभिन्न कंट्रोल प्रणालियां, ट्रैफिक नियमों एवं सुरक्षा के उपायों के बारे में भी विस्तार से बताया गया है। वहीं अंग्रेजी में रोड टू सेफ्टी, सड़क यातायात एवं सावधानियां शामिल किया गया है। साथ ही कक्षा 11 के अंग्रेजी के पाठ्यक्रम में ट्रैफिक नियमों को निबंध के रूप में शामिल किया गया है। वहीं ट्रेड-ऑटोमोबाइल के तृतीय प्रश्नपत्र के लिए ट्रैफिक नियमों एवं सुरक्षा के उपाय के बारे में बच्चों को बताया गया है।
माना जा रहा है कि पाठ्य पुस्तकों में सड़क सुरक्षा संबंधी पाठ्यक्रम को शामिल करने का अच्छा असर पड़ेगा। अधिकांश सड़क हादसे यातायात नियमों का पालन नहीं करने के कारण होते हैं। बच्चे जब स्कूल में ट्रैफिक नियमों के बारे में पढ़ेंगे तो उनमें जागरूकता आएगी। और वे अपने परिवारवालों और परिचितों को भी इस बारे में बताएंगे।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने बच्चों के पाठ्यक्रम को लेकर एक अहम कदम उठाया है। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने कक्षा 9 से 12 तक के पाठ्यक्रम में यातायात नियमों को शामिल कर लिया है। इस पाठ्यक्रम में सिर्फ यातायात नियम ही नहीं प्राथमिक उपचार के बारे में भी बच्चों को ज्ञान हासिल होगा। मध्यमिक शिक्षा परिषद ने यह कदम दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए परिवहन विभाग की गुजारिश के बाद उठाया है।
इस कदम का मकसद यह है कि पढ़ाई के दौरान ही बच्चे स्कूल में यातायात नियमों की जानकारी समय से हासिल कर सकें। और एक सजग प्रहरी की तरह यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करें और साथ ही लोगों को भी यातायात के नियमों के लिए जागरूक करें। इसके लिए परिवहन विभाग ने एक सिलेबस तैयार कर माध्यमिक शिक्षा परिषद को भेजा था। शिक्षा महकमे अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है।
यातायात नियमों से लैस इस पाठ्यक्रम में करीब डेढ़ दर्जन जानकारियों को बिंदुवार रखा गया है। ड्राइविंग के मुख्य तथ्य, अभिभावकों के कर्तव्य, यातायात संकेतकों की जानकारी एवं अर्थ, सड़क यातायात चिह्न् के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसके अलावा ट्रैफिक लाइट, लाल बत्ती, हरी बत्ती और जेब्रा लाइन पार करते वक्त बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में चित्र के साथ बड़े आसान तरीके से बताया गया है।
माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा लागू कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में 'द रूल्स ऑफ द रोड' अंग्रेजी और हिंदी में 'सड़क सुरक्षा एवं यातायात के नियम' के रूप में शामिल किया गया है। इसमें एक कहानी के माध्यम से बच्चों को सचेत किया गया है कि वह सड़क पर कैसे चले और क्या-क्या सावधानियां बरतें। जबकि कक्षा 10 के पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को प्रारंभिक हिंदी, में यातायात के नियम, संस्कृत में यातायात नियम, निबंध के रूप में पेश किया गया है। वहीं सामाजिक विज्ञान में सड़क सुरक्षा एवं यातायात, नैतिक खेल एवं शारीरिक शिक्षा और ट्रेड ऑटोमोबाइल में इंजन की विभिन्न कंट्रोल प्रणालियां, ट्रैफिक नियमों एवं सुरक्षा के उपायों के बारे में भी विस्तार से बताया गया है। वहीं अंग्रेजी में रोड टू सेफ्टी, सड़क यातायात एवं सावधानियां शामिल किया गया है। साथ ही कक्षा 11 के अंग्रेजी के पाठ्यक्रम में ट्रैफिक नियमों को निबंध के रूप में शामिल किया गया है। वहीं ट्रेड-ऑटोमोबाइल के तृतीय प्रश्नपत्र के लिए ट्रैफिक नियमों एवं सुरक्षा के उपाय के बारे में बच्चों को बताया गया है।
माना जा रहा है कि पाठ्य पुस्तकों में सड़क सुरक्षा संबंधी पाठ्यक्रम को शामिल करने का अच्छा असर पड़ेगा। अधिकांश सड़क हादसे यातायात नियमों का पालन नहीं करने के कारण होते हैं। बच्चे जब स्कूल में ट्रैफिक नियमों के बारे में पढ़ेंगे तो उनमें जागरूकता आएगी। और वे अपने परिवारवालों और परिचितों को भी इस बारे में बताएंगे।
हरियाणा पुलिस अत्याचार की शिकायत कहां करें-
हरियाणा पुलिस शिकायत प्राधिकरण में शिकायत कैसे करें-
पुलिस शिकायत प्राधिकरण का पता, फोन नंबर-
हरियाणा राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण
पुरानी बिल्डिंग लोक निर्माण विभाग
(भवन व सडक़ें), सैक्टर-19बी चंडीगढ़-160017
फोन नंबर- 0172-2772244
किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के दौरान यह ध्यान रखना चाहिए कि गिरफ्तारी या इन्ट्रोगेशन करने वाले पुलिस अधिकारियों के नाम और पद के टैग लगाए हुए हैं या नहीं? इसके अलावा इस बात की भी पुष्टि करनी कि पुलिस अधिकारियों द्वारा गिरफ्तारी या इन्ट्रोगेशन का प्रविष्टि पुलिस स्टेशन के रजिस्टर में उसी समय समांतर रूप से किया जा रहा है या नहीं?
जयपुर (राजस्थान)। प्रदेश की वसुंधरा राजे सिंधिया की सरकार ने मासूम बच्चियों सहित दुष्कर्म के आरोपियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए एक नया कदम उठाया है। अब दुष्कर्म, छेड़छाड़ और पोक्सो एक्ट सहित महिलाओं से जुड़े सभी मामलों में प्रथम सूचना रिपोर्ट सिर्फ महिला पुलिस अधिकारी को ही दर्ज करनी होगी। किसी पुलिस थाने में यदि कोई महिला पुलिस अधिकारी मौजूद नहीं है तो किसी स्वयं सेवी संगठन से जुड़ी महिला प्रतिनिधि की मदद ली जा सकेगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी एडवाइजरी के बाद राज्य सरकार ने पुलिस मुख्यालय सहित कलेक्टर-एसपी को एक गाइडलाइन जारी की है। निशक्त पीड़िता की एफआईआर दर्ज करने के लिए पुलिस को उसके निवास स्थान जाने तक के निर्देश दिए गए हैं।
दुष्कर्म के आरोपियों को जल्द सजा दिलाने के लिए राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार ने सभी जिला कलेक्टर्स एवं पुलिस अधीक्षकों को महिलाओं से जुड़े मामलों को लेकर गाइड लाइन जारी की है। नई गाइड लाइन के अनुसार यदि दुष्कर्म पीड़िता मानसिक अथवा शारीरिक रूप से नि:शक्त है तो पुलिस अधिकारी ऐसी पीड़िता की रिपोर्ट दर्ज करने उसके घर जाएंगे। इसकी वीडियो ग्राफी भी की जाएगी। दुष्कर्म से जुड़े मामलों में जांच दो माह में पूरा कर चार्जशीट दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, तय कर दिया है कि कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करते समय मेडिकल रिपोर्ट के साथ ही विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट भी संलग्न करनी होगी । दुष्कर्म या छेड़छाड़ की शिकार पीड़िता सहित जिस किसी व्यक्ति ने ऐसी घटना की सूचना दी है उसे भी प्रथम सूचना रिपोर्ट की प्रति तत्काल प्रभाव से उपलब्ध करवाई जाएगी। ताकि, किसी तरह की कोई शिकायत हो तो तत्काल दूर की जा सके।
इस नई गाइडलाइन में खास बात यह है कि राज्य अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक उप्रेती की ओर से जारी परिपत्र में कहा गया है कि इस तरह के अपराधों में शामिल सरकारी अफसरों एवं कर्मचारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी। यानी सरकारी कार्मिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
पूरे देश में महिलाओं की सहायता के लिए सरकार ने नंबर जारी किए हैं। इन नंबरों पर कॉल करके महिलाएं तुरंत मदद पा सकती हैं।
महिलाओं के अधिकार
शस्त्र धारकों को अपने लाइसेंस की जानकारी नेशनल डाटा बेस ऑन आर्म्स लाइसेंस पर देना जरूरी है। यदि आपके पास शस्त्र हैं और आप यह जानकारी नहीं देते हैं तो आपका लाइसेंस निरस्त हो सकता है।
हर लाइसेंस धारक की यूनिक आईडी जनरेट की गयी है। जिन धारकों के पास यह आईडी नहीं है, उनका लाइसेंस निरस्त हो सकता है।
लाइसेंस की जानकारी कहां दें
यूनिक आईडी से लाइसेंस का फर्जीवाड़ा रुकेगा
मरीज मुआवजे के लिए दावा कर सकता है
मरीज हॉस्पिटल में शुल्क अदा करने के बाद मरीज उपभोक्ता की श्रेणी में आ जाता है। वह निजी और सरकारी अस्पतालों और डॉक्टरों की लापरवाही के खिलाफ उपभोक्ता अदालत में मुकदमा कर सकता है । और मुआवजे की मांग कर सकता है।
यदि मरीज को लगता है कि हॉस्पिटल में कोई गड़बड़ है या उसका इलाज सही तरीके से नहीं किया गया है तो वह मेडिकल काउंसिल के साथ ही उपभोक्ता अदालत में भी अपील कर सकता है।
उपभोक्ता अदालत में शिकायत की प्रक्रिया-