Total: 1726 results found.
Page 83 of 87
उन्नाव (उत्तर प्रदेश)। गरीब जनता को परेशान करने के लिए बदनाम उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक और हैरतंगेज कारनामे को अंजाम दिया है। उन्नाव गैंगरेप मामले में जब प्रधानमंत्री कार्यालय ने विधायक के खिलाफ रिपोर्ट मांगी तो उन्नाव पुलिस ने रसूखदार आरोपी विधायक के मन माफिक रिपोर्ट बनाकर प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज दी।
आपको बता दें कि पीड़िता किशोरी और उसके चाचा की पुलिस ने नहीं सुनी तो उसने 13 अगस्त को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को शिकायती पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई। पीएमओ से कार्यकारी सचिव राकेश मिश्र ने 14 अगस्त को एक पत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के कार्यालय को भेजा, जिसमें पीडि़ता की शिकायत वाले बिंदुओं को अंडरलाइन करते हुए जांच कराकर कार्रवाई करने और उसकी रिपोर्ट भी मांगी गई। इस पर वहां से उन्नाव पुलिस को भेजकर रिपोर्ट मांगी गई। गौर करने वाली बात यह है कि 17 अगस्त को डीएम के माध्यम से एसपी कार्यालय पहुंची विधायक के खिलाफ शिकायत अगले ही दिन एसपी को मिली। माखी पुलिस ने इसमें ज्यादा समय नहीं लिया और तीसरे ही दिन 21 अगस्त को वापस रिपोर्ट भेज दी , जिसमें पीडि़त किशोरी को बहला फुसलाकर भगा ले जाने के मामले में आरोपियों को जेल भेजने की आख्या दी गई। विधायक पर लगाए गए आरोप को रिपोर्ट में फर्जी ठहरा दिया गया। अब पीडि़त परिवार का दर्द सामने आने के बाद फिलहाल अधिकारी कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। इससे यह माना जा रहा है कि पूर्व में तैनात रहे पुलिस अधिकारियों की तरह ही वर्तमान पुलिस अधिकारी विधायक के रसूख के आगे मौन ही नहीं रहे बल्कि उन्होंने वही किया जो विधायक ने कहा या उनके माफिक था। उस वक्त कार्रवाई होती तो शायद पीडि़ता के पिता की जान नहीं जाती।
मृत्यु प्रमाणपत्र
मृत्यु प्रमाणपत्र एक दस्तावेज होता है , जिसे मृत व्यक्ति के नजदीकी रिश्तेदारों को जारी किया जाता है , जिसमें मृत्यु की तारीख तथ्य और मृत्यु के कारणों का विवरण होता है ।
मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए कानून
जन्म और मृत्यु पंजीकरम अधिनियम ,1969
1-मृत्यु होने के 21 दिनों के भीतर संबंधित राज्य या संघ राज्य क्षेत्र में पंजीकरण कराना जरुरी है ।
महापंजीयक- केंद्र में मृत्यु का पंजीकरण का काम करता है ।
मुख्य पंजीयक- राज्यों में मृत्यु का पंजीकरण का काम करता है ।
जिला पंजीयक- गांवों में मृत्यु का पंजीकरण का काम करता है ।
पंजीयक परिसर- नगरों में मृत्यु का पंजीकरण का करता है ।
मृत्यु प्रमाणपत्र की प्रक्रिया
संलग्नक सूची
1.पहचान से सम्बंधित निर्वाचन आयोग द्वारा जारी वोटर कार्ड/पैन कार्ड /ड्राइविंग लाइसेन्स/राष्ट्रीयकृत बैंक की फोटो युक्त पासबुक/राशन कार्ड/स्वप्रमाणित घोषणा पत्र से कोई एक की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत करना होगा।
2.चिकित्सालय का जन्म /मृत्यु प्रमाण पत्र अथवा जहाँ पर चिकित्सालय नहीं है अथवा चिकित्सालय होते हुए भी चिकित्सालय में बच्चे का जन्म/मृत्यु नहीं हुई है ऐसी दशा में आवेदक को जन्म/मृत्यु प्रमाण पत्र के सम्बन्ध में ग्राम प्रधान/क्षेत्रीय पार्षद/सांसद /एम .बी, बी. एस डॉक्टर में से किसी एक का हस्ताक्षर एवं मोहर सहित प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा।
मृत्यु प्रमाणपत्र के लाभ
1-जन्म प्रमाणपत्र बहुत महत्वपूर्ण पहचान का दस्तावेज है । इसके होने पर नागरिक सरकार की बहुत सारी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं ।
2-यह सभी प्रयोजनों के लिए किसी की मृत्यु की तारीख और तथ्य को प्रमाणित करता है ।
जन्म प्रमाणपत्र
जन्म प्रमाणपत्र सभी कार्यों के लिए जन्म की तारीख और तथ्य को प्रमाणित करता है । यह हर नागरिक के लिए आवश्यक है ।
जन्म प्रमाणपत्र के लिए कानून
जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र ,1969 के मुताबिक हर जन्म और मृत्यु प्रसव का पंजीकरण संबंधित राज्य या संघ राज्य क्षेत्र की सरकार में होने के 21 दिन के अंदर करें ।
महापंजीयक- केंद्र में जन्म और मृत्यु प्रसव का पंजीकरण का काम करता है ।
मुख्य पंजीयक- राज्यों में जन्म और मृत्यु प्रसव का पंजीकरण का काम करता है ।
जिला पंजीयक- गांवों में जन्म और मृत्यु प्रसव का पंजीकरण का काम करता है ।
पंजीयक परिसर- नगरों में जन्म और मृत्यु प्रसव का पंजीकरण का करता है ।
जन्म प्रमाणपत्र की प्रक्रिया
1-जन्म का पंजीकरण कराएं।
2-कानून द्वारा निर्धारित प्रपत्र भरकर 21 दिन के भीतर संबंधित स्थानीय प्राधिकारी के पास जमा कराएं।
3-प्रपत्र के जमा करने के बाद संबंधित अस्पताल के वास्तविक रिकार्ड के सत्यापन के बाद जन्म प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाता है।
4-अगर 21 दिन के भीतर जन्म पंजीकृत नहीं किया जाता है, तो राजस्व अधिकारी के आदेश पर पुलिस के द्वारा सत्यापन के बाद प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाता है ।
संलग्नक सूची-
जन्म प्रमाणपत्र के लाभ
1-जन्म प्रमाणपत्र बहुत महत्वपूर्ण पहचान का दस्तावेज है । इसके होने पर नागरिक सरकार की बहुत सारी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं ।
2-यह सभी प्रयोजनों के लिए किसी के जन्म की तारीख और तथ्य को प्रमाणित करता है । जैसे मतदान का अधिकार प्राप्त करना, स्कूलों और सरकारी सेवाओं में दाखिला, कानूनी रुप से अनुमत विवाह करने का दावा, वंशगत और संपत्ति के निपटान आदि।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
मेनका गांधी के मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 21 हर व्यक्ति को यह मौलिक अधिकार देता है कि कानून द्वारा निश्चित की गयी प्रक्रिया के अनुसार ही किसी व्यक्ति को जीवन से या मुक्ति से वंचित किया जा सकता है और यह प्रक्रिया संगतपूर्ण , उचित और निष्पक्ष होनी चाहिए न कि कोई अनुच्छेद 21 से मिलती जुलती प्रक्रिया हो । यदि कोई व्यक्ति ऐसी प्रक्रिया से अपनी स्वतंत्रता खो देता है जो संगतपूर्ण , उचित व निष्पक्ष नहीं है , ऐसी स्थिति में अनुच्छेद 21 के तहत उसके मौलिक अधिकार का खंडन माना जायेगा और वह अपने मौलिक अधिकार को लागू करने का अधिकार रखता है औऱ रिहाई ले सकता है। कोई भी प्रक्रिया जो शीघ्र मुकदमा सुनिश्चित नहीं करती संगतपूर्ण, उचित और निष्पक्ष नहीं कहलाई जा सकती।
अदालत का अधिकार
सरकार का कर्तव्य
भारत में मुफ्त कानूनी सेवाएं
मुफ्त कानूनी सहायता पाने वाले लोग
फौजदारी या आपराधिक मामले
सिविल या दीवानी मामले
भारत में न्यायालय की व्यवस्था
सत्र न्यायालय के न्यायाधीश-
सत्र न्यायालय के न्यायाधीश-
न्यायाधिकरण(ट्रिब्यूनल)
लोक अदालत
नई दिल्ली। दिल्ली में राशन घोटाले को लेकर आई कैग की रिपोर्ट पर दिल्ली सरकार ने अब खुद का बचाव करते हुए उपराज्यपाल और अधिकारियों पर हमला बोला है। दिल्ली की केजरीवाल सरकार दावा कर रही है कि एलजी और आला अधिकारियों की सरपरस्ती में दिल्ली में बीते महीने राशन का OTP घोटाला हो गया।
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने एक प्रेस कांफ्रेंस करके बताया कि 'दिल्ली में मार्च महीने में कुल 41 हज़ार ट्रांजैक्शन हुए जिसमें हमारी शुरुआती जांच में पाया गया कि 1549 घरों का राशन तो मात्र 11 फ़ोन नंबर पर OTP लेकर दे दिया गया और इसमें 500 घरों का राशन तो एक सिंगल नंबर पर दिया गया है।
मनीष सिसोदिया का कहना है कि दिल्ली में 72 लाख लोग सरकारी राशन पर आश्रित हैं। दिल्ली में कुल 19 लाख कार्ड धारक हैं। सरकार की ओर से प्रतिवर्ष इन्हें साढ़े 4 लाख टन राशन दिया जाता है। आप सरकार बनने से पहले और उसके बाद भी राशन चोरी रोकने के लिए हमने संघर्ष किया है। अब भी दिल्ली की झुग्गियों में ये चोरी रोकने की कोशिश की जा रही है, लेकिन अधिकारियों को एलजी का संरक्षण मिला हुआ है। इसके चलते आज भी राशन में धांधली की जा रही है। राशन की बिक्री के लिए ई पीओएस सिस्टम लगाया गया है। दिसंबर में यह सिस्टम पहले 90 दिनों के लिए लगाया गया। वहां फिंगर प्रिंट में दिक्कत आती थी और उसमें ढेरों खामियां थी। इस साल 1 जनवरी से पूरी दिल्ली में ई पीओएस लागू हुआ, उसमें दिल्ली सरकार ने ए सुझाव केबिनेट की ओर से दिए गए थे, ताकि लोगों को इंटरनेट की कमी से परेशानी न हो लेकिन ऑफ लाइन को एलजी ने नहीं माना। केबिनेट के निर्देश के बावजूद उसमें खामी छोड़ी गई। 21 फरवरी के दिन मैंने इस परेशानी की जानकारी भी दी। ई पीओएस खत्म करने की अपील की, लेकिन एलजी ने नहीं माना। 499 राशन कार्ड धारकों का ओटीपी एक मोबाइल नंबर पर है। मंत्री के आदेश के बाद ओटीपी सिस्टम को बंद कर दिया गया। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि एक ही मोबाइल नंबर पर भेजे गए 499 राशन कार्ड धारकों का राशन दिया गया। इसी तरह 202 घरों के राशन एक मोबाइल नंबर पर भेजे गए ओटीपी के जरिए दिया गया। 172 घरों के राशन में भी यही हुआ। आदर्श नगर इलाके में एक ही नंबर पर कई लोगों को राशन दिया गया। 41000 घरों का राशन चंद मोबाइल नंबर पर भेजे गए ओटीपी पर दिए गए। ऐसे 500 मोबाइल नंबर की सीरीज है।
सिसोदिया के मुताबिक वो पहले से एलजी से मांग कर रहे हैं कि राशन के लिए POS सिस्टम यानी पॉइंट ऑफ सेल सिस्टम बंद करें, जिसमें राशन मिलने में लोगों को दिक्कत हो रही है, लेकिन एलजी ने बंद नहीं किया बल्कि POS में OTP यानी वन टाइम पासवर्ड वाला सिस्टम लगा दिया। सरकार की एलजी से मांग है कि फ़ूड कमिश्नर पर कार्रवाई हो, राशन दुकान पर पॉइंट ऑफ सेल सिस्टम बंद हो और डोर स्टेप डिलीवरी शुरू की जाए।
वहीं राशन दुकान चला रहे सुरेश कुमार ने बताया कि आज से 4-5 साल पहले जब राशन कार्ड के फॉर्म भरे गए थे तो खुद उन्होंने भी बहुत से लोगों के कहने पर अपना फ़ोन नंबर उनके राशन कार्ड से जुड़वा दिया। सुरेश ने बताया कि कई बार गरीब लोग और जानने वाले लोग खुद उनसे अपना फ़ोन उनके राशन कार्ड के साथ जुड़वाते हैं। लेकिन उनका कहना है कि उनको नहीं पता था कि किसी दिन ये OTP समस्या होगी। सुरेश नेंखुद बताया कि उनके अपने नंबर पर 10 लोगों को राशन कार्ड जुड़ा है।
बरेली (उत्तर प्रदेश)। बरेली के ब्लॉक रामनगर में शौचालय निर्माण को लेकर एक अऩोखी घटना सामने आयी है, जहां के किटौना गांव में शौचालय की बकाया राशि को लेकर नाराज ग्रामीणों ने बीडीओ आफिस में धावा बोल दिया। हालात बिगड़ता देख बीडीओ मौके से भाग निकले, जब ग्रामीणों ने उन्हें भागता देखा तो दौड़ा लिया। इस दौरान ब्रजपाल नाम का ग्रामीण उनकी गाड़ी की बोनट पर लटक गया, लेकिन बीडीओ पंकज कुमार गौतम ने गाड़ी नहीं रोकी। वहीं ब्रजपाल करीब चार किमी तक चलती गाड़ी पर लटका रहा। हालांकि चार किलोमीटर दूर जाकर बीडीओ ने गाड़ी रोकी, तब कहीं जाकर ब्रजपाल गाड़ी से उतर सका। घटना के बाद बीडीओ ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करायी और पूरे घटनाक्रम से डीएम को अवगत कराया। हालांकि ग्रामीण ब्रजपाल की तरफ से भी मामले की शिकायत दर्ज करायी गयी है। अब पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।
आपको बता दें कि रामनगर ब्लॉक से करीब पांच किमी दूर किटौना गांव पड़ता है। गांव में 105 शौचालयों के निर्माण के लिए पात्र लाभार्थी चयनित हुए थे। जिनके खाते मे छह-छह हजार रुपए आए। इनमें 70 लोगों ने ही निर्माण कराया, वो भी मानकों के अनुरूप नहीं है। इसके चलते शौचालय निर्माण की अगली किश्त नहीं भेजी गई थी। ये लोग पिछले कई दिनों से शौचालय को लेकर हंगामा कर रहे थे। बुधवार को एक बार फिर शेष भुगतान को लेकर गांव के ब्रजपाल के साथ आधा दर्जन से अधिक लोग ब्लॉक पहुंचे और रकम न जारी करने और निर्माण न कराए जाने पर हंगामा शुरू कर दिया।
बीडीओ पंकज कुमार गौतम का कहना है कि कई दिनों से किटौना के लोग ब्लॉक पर आकर हंगामा कर रहे हैं। आज तो हद ही हो गई। जब शराब के नशे मे कई लोग आए और हमलावर हो गए। ग्रामीण ब्रजपाल आते ही गाली-गलौज करने लगा। मेज पर रखे कई कागज फाड़ दिए। और मउ गांव में भी जाकर घेर लिया। जब वहां से भागा तो गाड़ी पर चढ़ गया। ऐसी हालत मे कैसे काम करें। मानक के अनुरूप काम नही हुआ है और हमसे पेमेंट मांग रहे हैं। डीएम को पूरा मामला बता दिया है। ऐसी स्थिति मे कोई कर्मचारी काम नही कर सकता। पूरे मामले को लेकर थाने में शिकायत दर्ज करायी है।
वहीं घटना से भड़के ग्रामीण बीडीओ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने आंवला थाने पहुंच गए और जमकर हंगामा किया। गांव वालों के समर्थन में कैबिनेट मंत्री के भाई और सैकड़ो लोगों ने बखेड़ा कर दिया। किटौना गांव के लोगों ने बीडीओ पर रिश्वत मांगने और शौचालय निर्माण की रकम रोकने का आरोप लगाया है। अब मामले का खुलासा पूरी जांच के बाद ही होगा।
मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश)। मुजफ्फरनगर में जंगलराज का एक हैरतअंगेज नमूना सामने आया है, जहां कम राशन देने का विरोध करने पर दुकानदार ने एक 75 साल की बुजर्ग महिला की पीट-पीट कर हत्या कर दी। मामले की शिकायत के बाद पुलिस ने दुकान मालिक सहित तीन लोगों पर मामला दर्ज कर लिया है। हालांकि अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई है। ग्रामीणों ने कई घंटों तक पुलिस को शव नहीं सौंपा। हालांकि, काफी मशक्कत के बाद अधिकारी लाश को अपने कब्जे में कर सके और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सका। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
महिला के बेटे भूरा की द्वारा दर्ज करायी गयी एफआईआर के मुताबिक महिला का नाम आसी है जो सरकारी राशन की दुकान पर राशन लेने गई थी। इस दौरान उसने दुकानदार से कम राशन दिए जाने की शिकायत की। इस पर आरोपी दुकानदार से उसकी कहासुनी हो गई। इस पर दुकानदार भड़क गया और उसने अपने दो साथियों के साथ तैश में आकर बुजुर्ग महिला की बेरहमी से पिटाई कर दी। स्थानीय लोगों ने बताया की दुकानदार शमीम से जब आसी ने शिकायत की तो उसने गुस्से में महिला का सिर दीवार से भिड़ा दिया। सूचना मिलने पर आसी के घर वाले पहुंचे, उस वक्त वो खून से लथपथ थी। उसे फौरन अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां उसे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इस हत्या के बाद गांव में तनाव का माहौल बन गया। पुलिस को शव का पोस्टमार्टम कराने में भारी जद्दोजहद करनी पड़ी। हालांकि पुलिस की समझाइश के बाद ग्रामीणों ने शव को पुलिस को सौंपा और फिर इसे पोस्ट मॉर्टम के लिए भेजा गया।
सर्किल अधिकारी (सीओ) मोहम्मद रिजवान ने बताया कि महिला के बेटे भूरा की एक शिकायत पर दुकान के मालिक नसीम सहित तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि मामले के दो अन्य आरोपी शमीम और जानू हैं। मामले में अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। पुलिस पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। पुलिस ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि महिला की मौत पीटाई से हुई है या फिर इसका कोई दूसरा कारण है। वहीं मामले को लेकर मौके पर मौजूद लोगों के साथ साथ अन्य लोगों से पूछताछ की जी रही है।
आगरा (उत्तर प्रदेश)। गोरखपुर और फर्रुखाबाद में हुए हादसे के बाद भी मेडिकल कॉलेजों की लापरवाही रुकने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामला आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज का है। जहां एक बुजुर्ग मां को इलाज कराने के लिए एंबुलेंस नहीं मिली तो बेटा अपने हाथ में यूरिन बैग और कंधे पर ऑक्सीजन का सिलेंडर लेकर कई घंटों तक धूप में खड़ा रहा। बेटा अपनी बीमार मां के साथ एंबुलेंस का इंतजार करता रहा, लेकिन उसे कोई एंबुलेंस नहीं मिली।
वहीं एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रमुख अधीक्षक अजय अग्रवाल का कहना है कि, "यह कोई मामला नहीं है। मरीज की शिफ्टिंग की जा रही थी तो वार्डबॉय ने ऑक्सीजन का सिलेंडर मरीज के बेटे को पकड़ा दिया था, तभी मिडिया वहां आ गयी और फोटो खींचने लगी। फिर भी हम सीएमओ से जांच करवा रहे हैं, जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।" जबकि वहां मौजूद लोगों का कहना है कि ऑक्सीजन लगाने के बाद मरीज को वॉर्ड में शिफ्ट करने के लिए कहा गया। ट्रॉमा सेंटर से वॉर्ड काफी दूर है इसलिए एंबुलेंस बुलाने को कह कर उन्हें जाने के लिए कह दिया गया। मां-बेटे ट्रॉमा सेंटर से बाहर निकल आए और काफी देर तक धूप में खड़े रहे। तेज धूप के कारण बुजुर्ग महिला की तबियत फिर बिगड़ने लगी तो उन्हें इमर्जेंसी में भर्ती कराना पड़ा। अब मेडिकल प्रशासन मामले की लीपापोती में लगा हुआ है।
दिल्ली में ईमानदार सरकार चलाने का दावा करने वाली केजरीवाल सरकार पर 5400 करोड़ के राशन घोटाले का आरोप लगा है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि दिल्ली में राशन वितरण के दौरान बड़ी अनियमितता बरती गई है। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि बिहार के चारा घोटाले की तरह दिल्ली में भी बाइक और टेम्पो पर अनाज ढोया गया।
सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय खाद्य निगम के गोदाम से राशन वितरण केंद्रों पर 1589 क्विंटल राशन की ढुलाई के लिए आठ बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के बस, टेम्पो, स्कूटर और बाइक का इस्तेमाल किया गया था। 2016-17 में जिन गाड़ियों को राशन की ढुलाई के लिए इस्तेमाल किया गया , उनमें से 42 गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन ही नहीं है। इतना ही नहीं रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राशन का भी वितरण नहीं हुआ है। इसलिए आशंका जताई जा रही है कि अनाज की चोरी हुई है।
इस घोटाले के खुलासे के बाद सियासत भी तेज हो गई है। दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने बुधवार को प्रेसवार्ता करके केजरीवाल सरकार पर हमला बोला, उन्होंने कहा कि दिल्ली में बिहार जैसा चारा घोटाला हुआ है। बिहार में जानवरों का चारा और यहां गरीबों का राशन खा लिया गया। केजरीवाल छोटे लालू हो गए हैं। आगे उन्होंने कहा कि केजरीवाल को दिल्ली की जनता से माफ़ी मांगते हुए अपना पद छोड़ देना चाहिए। मनोज तिवारी ने एलान किया कि राशन घोटाले के विरोध में बृहस्पतिवार को भाजपा विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करेगी। वहीँ दिल्ली के पूर्व मंत्री और बागी विधायक कपिल मिश्रा ने कहा कि यह घोटाला एक साल में 1800 और तीन साल में 5400 करोड़ रूपये का हो गया है। उन्होंने बताया कि वह सीएजी रिपोर्ट के आधार पर शुक्रवार को सीबीआई दफ्तर जाकर सम्बंधित मंत्री इमरान हुसैन की शिकायत करेंगे। कपिल का कहना है कि दिल्ली सरकार की राशन माफिया से सीधी मिलीभगत है, जिसके लिए मंत्री इमरान हुसैन जिम्मेदार हैं।
हालांकि सीएजी की रिपोर्ट आने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने ट्वीट करके कहा कि सीएजी की तरफ से उजागर भ्रस्टाचार या अनियमितता के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी। किसी को भी बख्शा नहीं जायेगा। केजरीवाल ने मामले की जाँच के लिए सीबीआई जांच की मांग की है।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। बाराबंकी पुलिस की मनमानी से परेशान गैंगरेप पीड़ित महिला ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास के सामने आत्मदाह करने की कोशिश की। हालाँकि मौके पर मौजूद लोगों ने आनन-फानन में महिला को अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। महिला 30 प्रतिशत तक जल चुकी है।
बाराबंकी के एक गांव की रहने वाली इस महिला का आरोप है कि करीब 2 वर्ष पहले कुछ लोगों ने उसके साथ दुष्कर्म किया था। इस घटना के बाद वह पुलिस थाने पहुंची और आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने गैंगरेप की बजाय छेड़छाड़ का केस दर्ज़ कर लिया और गैंगरेप की धराएं नहीं लगाई। पीड़िता बार-बार पुलिस से न्याय दिलाने की गुहार लगती रही लेकिन पुलिस ने उसकी कोई बात नहीं सुनी। पुलिस की इस मनमानी से परेशान महिला लखनऊ के कालिदास मार्ग पर मुख्यमंत्री आवास के पास पहुंची और अपने ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा लिया। हालाँकि वहां पर मौजूद लोगों ने जल्दी से ले जाकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया। अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि महिला 30 प्रतिशत तक जल चुकी है और उसकी हालत नाजुक है, लेकिन उसकी जिंदगी खतरे से बाहर है। वहीँ इस घटना के बाद पुलिस जाग गयी है और पूरे मामले की जाँच शुरू कर दी है।
इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ सिंह के गृह जिले इलाहाबाद के स्वरूपरानी अस्पताल के डॉक्टर सरेआम दवाओं के जरिये कमिशनखोरी कर रहे हैं। यहां के डॉक्टर दूरदराज से आये मरीजो को देखने के बाद उन्हें अस्पताल की सभी मुफ्त दवाएं नहीं लिखते हैं। कमिशन खाने के चक्कर में डॉक्टर 30 फीसदी दवाएं अस्पताल की लिखते हैं जबकि 70 फीसदी दवाएं मेडिकल स्टोर की लिखते है। इन 70 फीसदी दवाओं पर मेडिकल स्टोर वाले डॉक्टर को 60 फीसदी कमिशन देते हैं।
इस अस्पताल में आने वाले मरीजों का कहना है कि वैसे तो सरकार विज्ञापन के जरिये प्रचार करती है कि सरकारी अस्पताल में सभी प्रकार की दवाएं मुफ्त हैं, लेकिन स्वरूपरानी अस्पताल में आकर पता चला की यहां डॉक्टर मरीजों को मुफ्त की दवाएं लिखने की बजाए सरेआम लूट रहे हैं। गरीब मरीज पैसे के अभाव में दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।
आपको जानकर यह हैरानी होगी कि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री, जिले के आयुक्त, जिलाधिकारी, स्वरूपरानी अस्पताल के प्रधानाचार्य इलाहाबाद के ही रहने वाले है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इन सभी पदाधिकारियों के होते हुए गरीब मरीजों से ये खुली लूट क्यों हो रही है। क्या इन्होंने इस लूट की तरफ से अपनी आंखें बंद की हुई हैं या फिर इनकी शह पर लूट हो रही है!
नई दिल्ली। दिल्ली के रामलीला मैदान में पिछले सात दिनों से अनशन पर बैठे समाजसेवी अन्ना हजारे ने गुरुवार को अनशन खत्म कर दिया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने उन्हें नारियल पानी पिलाकर अनशन खत्म कराया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और महाराष्ट्र सरकार के जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन मौजूद थे। अन्ना ने अनशन खत्म करने का ऐलान करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों के कृषि उपज की लागत के आधार पर डेढ़ गुना ज्यादा दाम देने का फैसला किया है. साथ ही उन्होंने बताया कि लोकपाल की नियुक्ति पर केंद्र जल्द फैसला लेगा. उन्होंने कहा कि हम केंद्र को इन सबको पूरा करने के लिए 6 महीने का समय देंगे, वरना हम फिर से आंदोलन करेंगे.
केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से अन्ना की मांगों को लेकर 11 बिंदुओं वाला ड्राफ्ट आंदोलनकारियों के समक्ष रखा। जिसमें निम्नलिखित मांगें मानी गयी हैं।
समाजसेवी अन्ना हजारे ने 23 मार्च को अनशन पर बैठने के बाद सरकार के सामने ये मांगें रखी थीं।
सीकर (राजस्थान)। जिले के एक हॉस्पिटल में मानवता को शर्मशार कर देने वाली घटना सामाने आयी है, जहां प्रसव पीड़ा के चलते एक गर्भवती महिला छह घंटे तक लेबर रूम में तड़पती रही। वहीं रिश्वत नहीं देने से नाराज हास्पिटल के स्टाफ ने पीड़ित महिला को जयपुर रेफर कर दिया। ऐसी दशा में बेबस परिवार प्रसूता को लेकर हास्पिटल की सीढ़ियों से उतर रहा तभी उसने एक बच्चे को जन्म दे दिया। हालांकि समय रहते प्रसूता की जेठानी ने नवजात को संभाल लिया। वहीं बच्चे के जन्म की सूचना मिलने पर हास्पिटल प्रशासन के हाथ-पैर फूल गए। कर्मचारी आनन-फानन में जच्चा-बच्चा को स्ट्रेचर में लेटाकर लेबर रूम ले गए, जहां दोनों की देखभाल शुरु कर दी।
परिजनों का कहना है कि पीड़िता मंजू (28) पत्नी भगवानाराम को देर रात प्रसव पीड़ा हुई तो परिवार मंगलवार सुबह चार बजे मंजू को जनाना अस्पताल लेकर पहुंचा। और स्टाफ ने मंजू को भर्ती कर लिया। परिजनों का आरोप है कि मंजू को भर्ती करने के बाद लेबर रूम में कार्यरत स्टाफ ने सुरक्षित डिलीवरी कराने के नाम पर 1600 रुपए की रिश्वत मांगी। वहीं पीड़िता मंजू लेबर रूम में तड़पती रही। परिजन इलाज की गुहार लगाते रहे, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। स्टाफ धमकाता रहा कि गर्भ में बच्चा उल्टा है। अगर उन्होंने रिश्वत नहीं दिया तो ज्यादा समय लग सकता है। गर्भ में बच्चे को खतरा है। वहीं रिश्वत न दिए जाने पर सुबह 10.15 बजे मंजू को जयपुर रैफर कर दिया। ड्यूटी डॉक्टर ने जरा भी रहम नहीं दिखाया। और महिला का रैफर कार्ड तैयार कर दिया। परिवार लेबर रूम से पीड़िता को लेकर जैसे ही अस्पताल की सीढ़ियों तक पहुंचा। मंजू ने नवजात को जन्म दे दिया। साथ चल रही जेठानी फूलदेवी ने समय रहते नवजात को संभाल लिया। इसके चलते वह सीढ़ियों पर नहीं गिरा। इसके बाद मंजू की जेठानी और दूसरी तीमारदार महिलाओं ने उसे फर्श पर लिटाकर डिलीवरी कराई।
वहीं मामले की सूचना मिलने पर हास्पिटल का स्टाफ मौके पर पहुंचा गया। और परिवार को धमकाया कि अगर उनके खिलाफ मुंह खोला तो मुकदमा दर्ज करा देंगे। इसके बाद परिजन मंजू को वापस लेबर रूम में लेकर गए। दोपहर को उसे वार्ड में शिफ्ट कर दिया।
इतना ही नहीं स्टाफ ने फैमिली को प्रताड़ित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सुबह चार बजे स्टाफ ने भर्ती करते ही ब्लड की जरूरत बताई। स्टाफ ने यहां तक कहा कि यहां ब्लड की कोई टोंटी थोड़ी लगी है। कोई आया तो उसे ब्लड चढ़ा दिया। इस पर मंजू के ससुर सुबह जल्द अस्पताल पहुंचे। ब्लड डोनेट कर मंजू के ग्रुप का ब्लड लिया।
हालांकि परिवार ने रिश्वत मांगने और इलाज में लापरवाही बरतने की शिकायत स्वास्थ्य अफसरों से की है। प्रभारी डॉ. बीएल राड़ का कहना है कि बख्शीश मांगने के आरोपों की जांच की जाएगी। दोषी स्टाफ पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
नई दिल्ली (उत्तर प्रदेश)। केंद्र सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं से आधार को लिंक कराने के लिए 31 मार्च की समयसीमा को बढ़ा दिया गया है। सरकार ने इसके लिए अंतिम तारीख 30 जून तय की है। इससे पहले यह समय-सीमा 31 मार्च, 2018 थी। इलेक्ट्रानिक्स और आइटी मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी प्रपत्र में कहा गया है कि पीडीएस, मनरेगा और पेंशन जैसी कल्याणकारी योजनाओं से आधार को जोड़ने की अंतिम तारीख 30 जून है। बताया जा रहता है कि 31 मार्च के बाद लोग आधार नंबर, पंजीकरण की पर्ची या आधार के पंजीकरण के आवेदन को दिखाकर योजनाओं का लाभ ले सकते हैं।
आपको बता दें कि इससे पहले केंद्र सरकार ने आधार से पैन लिंक करने की डेडलाइन भी बढ़ाकर 30 जून कर दी थी। इस फैसले से मनरेगा, पीडीएस जैसी कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को फायदा मिलेगा। योजनाओं को आधार से जोड़ने के लिए जो समय की मोहलत दी गई है, उसका मकसद किसी पात्र व्यक्ति को केवल आधार की कमी के चलते योजना के लाभ से वंचित होने से बचाना है।
गौरतलब है कि करने की बात यह है कि विगत मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कल्याणकारी योजनाओं के लिए 31 मार्च की सीमा को बढ़ाने के लिए कोई अंतरिम आदेश देने से इन्कार कर दिया था। सीबीडीटी ने भी हाल में आधार नंबर को पैन से लिंक करने की समय सीमा 30 जून तक बढ़ा दी। पहले यह तारीख 31 मार्च थी। सीबीडीटी ने चौथी बार समय सीमा बढ़ाई है।
नई दिल्ली (उत्तर प्रदेश)। केंद्र सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं से आधार को लिंक कराने के लिए 31 मार्च की समयसीमा को बढ़ा दिया गया है। सरकार ने इसके लिए अंतिम तारीख 30 जून तय की है। इससे पहले यह समय-सीमा 31 मार्च, 2018 थी। इलेक्ट्रानिक्स और आइटी मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी प्रपत्र में कहा गया है कि पीडीएस, मनरेगा और पेंशन जैसी कल्याणकारी योजनाओं से आधार को जोड़ने की अंतिम तारीख 30 जून है। बताया जा रहता है कि 31 मार्च के बाद लोग आधार नंबर, पंजीकरण की पर्ची या आधार के पंजीकरण के आवेदन को दिखाकर योजनाओं का लाभ ले सकते हैं।
आपको बता दें कि इससे पहले केंद्र सरकार ने आधार से पैन लिंक करने की डेडलाइन भी बढ़ाकर 30 जून कर दी थी। इस फैसले से मनरेगा, पीडीएस जैसी कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को फायदा मिलेगा। योजनाओं को आधार से जोड़ने के लिए जो समय की मोहलत दी गई है, उसका मकसद किसी पात्र व्यक्ति को केवल आधार की कमी के चलते योजना के लाभ से वंचित होने से बचाना है।
गौरतलब है कि करने की बात यह है कि विगत मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कल्याणकारी योजनाओं के लिए 31 मार्च की सीमा को बढ़ाने के लिए कोई अंतरिम आदेश देने से इन्कार कर दिया था। सीबीडीटी ने भी हाल में आधार नंबर को पैन से लिंक करने की समय सीमा 30 जून तक बढ़ा दी। पहले यह तारीख 31 मार्च थी। सीबीडीटी ने चौथी बार समय सीमा बढ़ाई है।
नई दिल्ली। सरकार ने लोगों को अपनी स्थायी खाता संख्या (पैन) को बायोमीट्रिक पहचान आधार से जोड़ने के लिए चौथी बार समयसीमा बढ़ाई है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी) ने आधार से पैन लिंक करने की डेडलाइन बढ़ा दी है। अब 30 जून तक पैन को आधार से लिंक किया जा सकता है। अभी तक यह समयसीमा 31 मार्च थी। आदेश में कहा गया है कि आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए पैन- आधार को जोड़ने की समयसीमा बढ़ाई जा रही है। आधार को पैन कार्ड से इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट पर जाकर लिंक किया जा सकता है।
आपको बता दें कि अब तक 16.65 करोड़ लोगों ने अपने पैन को आधार से लिंक करा लिया है। देश में करीब 33 करोड़ लोगों के पास पैन (स्थायी खाता संख्या) है। सरकार ने आयकर रिटर्न दाखिल करने और नया पैन लेने के लिए आधार नंबर को देना अनिवार्य कर दिया है। यही नहीं किसी को पैन कार्ड बनवाना है तो उसके लिए भी आधार अनिवार्य है।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जब तक पांच जजों वाली कांस्टीट्यूशन बेंच का अंतिम फैसला नहीं आ जाता तब तक कोई अंतिम तिथि नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट विभिन्न सेवाओं को आधार से जोड़ने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई कर रही है। समझा जाता है कि सीबीडीटी का ताजा आदेश उच्चतम न्यायालय के इसी महीने आए आदेश के मद्देनजर आया है।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने आंगनबाड़ी केंद्रों में बंटने वाले पुष्टाहार पर बार कोडिंग की नई व्यवस्था शुरू की है। योगी सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों में बंटने वाले पुष्टाहार की कालाबाजारी को रोकने के लिए ये नई पहल की है। इतना ही नहीं पुष्टाहार अब बाल विकास परियोजना कार्यालय के बजाय सीधे आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाया जायेगा। सरकार ने पुष्टाहार की विविधता बढ़ाने के लिए इसमें नमकीन व मीठा दलिया के साथ ही प्रीमिक्स लड्डू को भी शामिल किया है।
योगी आदित्यनाथ सरकार की कैबिनेट ने मंगलवार को 14 मंडल समूहों में पुष्टाहार सप्लाई के लिए हुए न्यूनतम रेट लगाने वाली फर्मों के टेंडर फाइनल कर दिए। योगी सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों में बंटने वाले पुष्टाहार की सप्लाई के लिए ई-टेंडर आमंत्रित किये थे। इस बार प्रदेश के 18 मंडलों को 14 हिस्सों में बांटकर यह टेंडर किये गए थे। कैबिनेट ने टेंडर में पुष्टाहार सप्लाई की आई न्यूनतम दरों को मंजूरी दे दी है। पुष्टाहार की सप्लाई में कोई घपला न हो इसलिए इसमें अलग-अलग रंग के पैकेट रखे गए हैं। बच्चे, गर्भवती महिलाएं व धात्री महिलाएं सभी के लिए पोषाहार के पैकेट अलग-अलग रंग के होंगे। पुष्टाहार के पैकेटों की बार कोडिंग से यह पता चल जायेगा कि पोषाहार का पैकेट किस आंगनबाड़ी केंद्र का है। इससे पोषाहार की कालाबाजारी करने वालों को पकड़ा जा सकेगा। इस बार पुष्टाहार की सप्लाई करने वाली पांच कंपनियां यूपी के बाहर की हैं। इनमें तमिलनाडु, गुवाहाटी व राजस्थान की एक-एक व झारखंड की दो कंपनियां शामिल हैं।