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दिल्ली। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने डोर स्टेप डिलीवरी योजना को लेकर उप राज्यपाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पूर्वी दिल्ली जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालय पहुंचे मनीष सिसोदिया ने आरोप उपराज्यपाल पर आरोप लगाया कि यहां लोग एक प्रमाण पत्र बनवाने के लिए चार-पांच दिनों से कार्यालयों का चक्कर लगा रहे है। बुजुर्ग यहां कतारों में अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि बगैर दलालों को पैसा दिए यहां पर काम नहीं होता है। इसी भ्रष्ट सिस्टम को खत्म करने के लिए वह डोर स्टेप डिलीवरी योजना लेकर आ रहे थे।
मनीष सिसोदिया का कहना है कि इस योजना के तहत जिसे प्रमाण पत्र बनवाना था वह कॉल सेंटर में कॉल करता। सूचना मिलने के बाद सरकार का कर्मचारी उसके घर जाता। उसकी बायोमैट्रिक पहचान, आंखों की पुतली भी स्कैन करता। दस्तावेज जमा करता। फिर जांच के बाद आवेदक को प्रमाण पत्र घर पहुंचाता। जबकि एलजी साहब का कहना है कि इससे प्रदूषण बढ़ जाएगा। आगे उन्होंने आरोप लगाया कि इस योजना से प्रदूषण नहीं बढ़ेगा, बल्कि इससे भ्रष्ट सिस्टम खत्म हो जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि जब मैंने लोगों से बात की तो पता चला कि वे चार पांच दिन से यहां काम कराने आ रहे हैं। लेकिन वहीं उपराज्यपाल साहब को लाइन में खड़े लोगों और सरकारी कार्यालयों के बाहर बैठे बिचौलिये नहीं दिखाई दे रहे हैं।
मनीष सिसोदिया ने कहा कि वह उपराज्यपाल साहब से आग्रह करते हैं कि एक दिन वह बिना बताएं किसी सरकारी कार्यालय जाकर वहां के हालात देखें। वहीं बीजेपी के सवाल उठाने पर सिसोदिया ने कहा कि वह आम लोगों को बरगलाना बंद करें। उन्हें बीजेपी पर आरोप लगाया कि उन्हें लोगों की नहीं बल्कि कंपनियों की चिंता है। साथ ही सवाल किया कि क्या बिचौलिये बीजेपी के कार्यकर्ता हैं। फिर वह क्यों भ्रष्टाचार खत्म करने वाली योजना का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब पिज्जा, क्रेडिट कार्ड की होम डिलीवरी हो सकती है तो प्रमाण पत्र क्यों नहीं हो सकता है।
देहरादून (उत्तराखंड)। परिवहन विभाग ड्राइविंग लाइसेंस के लिए लिए जाने वाले टेस्ट में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के उद्दश्य से अब नई व्यवस्था अमल में लाने जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत परिवहन विभाग अब सिमुलेटर पर नहीं, बल्कि ड्राइविंग टेस्टिंग लेन पर चालकों की परीक्षा लेगा। परिवहन विभाग प्रदेश के 10 स्थानों पर ऑटोमेटेड ड्राईविंग टेस्ट लेन बनाने की तैयारी में लगा है। विभाग को भूमि भी मिल चुकी है। यह परीक्षा कैमरे में रिकॉर्ड की जाएगी। जो इस परीक्षा में पास होगा उसे ही लाइसेंस मिलेगा। बढ़ती दुर्घटनाओं को ध्यान में रखते हुए लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया सख्त की जा रही है।
आपको बता दें कि समानांतर पार्किंग करने की दक्षता के लिए आपको- (क) एट (8) की आकृति बनाने की परीक्षा और (ख) गाड़ी से रिवर्स गियर में एस (s) बनाने की परीक्षा देनी होगी। जबकि (क) ढाल में खड़ी गाड़ी को बिना पीछे आए आगे चढ़ाई पर चढ़ाना (केवल 15 इंच की छूट) और (ख) दोपहिया वाहनों को दो बार एट (8) की आकृति बनाने की परीक्षा देनी होगी।
गौरतलब है कि ट्रांसपोर्ट पायलेट प्रोजेक्ट के तहत दून में सात दिसंबर 2015 को लर्निंग लाइसेंस की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई थी। फरवरी 2016 से परमानेंट डीएल की प्रक्रिया भी ऑनलाइन हो गई। आरटीओ सुधांशु गर्ग ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से जारी गाइड लाइन के अनुसार ड्राइविंग लाइसेंस बनाने में सख्ती जरूरी है। असफल आवेदकों को एक माह बाद दोबारा परीक्षा का मौका दिया जाता है, लेकिन अगर वे दोबारा फेल होते हैं तो मौका तीन माह बाद मिलता है।
अब आपके डीएल, परमिट, रजिस्ट्रेशन और टैक्स की वैधता खत्म होने पर आपके मोबाइल पर एसएमएस आ जाएगा। यह एसएमएस परिवहन विभाग आपकी फाइल में दर्ज मोबाइल नंबर पर भेजेगा ताकि आप समय से अपने लाइसेंस व अन्य दस्तावेजों का नवीनीकरण करा सकें। आरटीओ ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति ने मोबाइल नंबर बदल दिया है तो वह आरटीओ कार्यालय आकर नया नंबर अपडेट करा सकता है।
देहरादून (उत्तराखंड)। परिवहन विभाग ड्राइविंग लाइसेंस के लिए लिए जाने वाले टेस्ट में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के उद्दश्य से अब नई व्यवस्था अमल में लाने जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत परिवहन विभाग अब सिमुलेटर पर नहीं, बल्कि ड्राइविंग टेस्टिंग लेन पर चालकों की परीक्षा लेगा। परिवहन विभाग प्रदेश के 10 स्थानों पर ऑटोमेटेड ड्राईविंग टेस्ट लेन बनाने की तैयारी में लगा है। विभाग को भूमि भी मिल चुकी है। यह परीक्षा कैमरे में रिकॉर्ड की जाएगी। जो इस परीक्षा में पास होगा उसे ही लाइसेंस मिलेगा। बढ़ती दुर्घटनाओं को ध्यान में रखते हुए लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया सख्त की जा रही है।
आपको बता दें कि समानांतर पार्किंग करने की दक्षता के लिए आपको- (क) एट (8) की आकृति बनाने की परीक्षा और (ख) गाड़ी से रिवर्स गियर में एस (s) बनाने की परीक्षा देनी होगी। जबकि (क) ढाल में खड़ी गाड़ी को बिना पीछे आए आगे चढ़ाई पर चढ़ाना (केवल 15 इंच की छूट) और (ख) दोपहिया वाहनों को दो बार एट (8) की आकृति बनाने की परीक्षा देनी होगी।
गौरतलब है कि ट्रांसपोर्ट पायलेट प्रोजेक्ट के तहत दून में सात दिसंबर 2015 को लर्निंग लाइसेंस की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई थी। फरवरी 2016 से परमानेंट डीएल की प्रक्रिया भी ऑनलाइन हो गई। आरटीओ सुधांशु गर्ग ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से जारी गाइड लाइन के अनुसार ड्राइविंग लाइसेंस बनाने में सख्ती जरूरी है। असफल आवेदकों को एक माह बाद दोबारा परीक्षा का मौका दिया जाता है, लेकिन अगर वे दोबारा फेल होते हैं तो मौका तीन माह बाद मिलता है।
अब आपके डीएल, परमिट, रजिस्ट्रेशन और टैक्स की वैधता खत्म होने पर आपके मोबाइल पर एसएमएस आ जाएगा। यह एसएमएस परिवहन विभाग आपकी फाइल में दर्ज मोबाइल नंबर पर भेजेगा ताकि आप समय से अपने लाइसेंस व अन्य दस्तावेजों का नवीनीकरण करा सकें। आरटीओ ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति ने मोबाइल नंबर बदल दिया है तो वह आरटीओ कार्यालय आकर नया नंबर अपडेट करा सकता है।
रायपुर (छत्तीसगढ़) छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री और रायपुर दक्षिण विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने जनता की समस्याओं के निदान के लिए एक सराहनीय कदम उठाया है। बृजमोहन अग्रवाल ने अपने नाम से एक ऐप जारी किया है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन 'सुशासन दिवस' पर जारी ऐप में शिकायत करने पर विभाग की समस्याओं को 15 दिन और नगर निगम से जुड़ी समस्याओं का सात दिन में निदान होगा। चुनावी साल में इसे जनता से जुड़ने का जरिए मानते हुए कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि ऐप में आने वाली शिकायतों को निपटाने के लिए नोडल अधिकारी तय कर दिए गए हैं। उनका तर्क है कि यह ऐप पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सुशासन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को पूरा करेगा।
आपको बता दें कि इस मोबाइल ऐप में कृषि, पशुपालन, मछली पालन, जलसंसाधन तथा धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभागों से संबंधित योजनाओं की जानकारी है। लोग एक क्लिक पर इन योजनाओं की जानकारी ले सकेंगे और इनका लाभ उठाने के लिए ऑनलाइन आवेदन भी कर सकेंगे। इसके अलावा इन विभागों से जुड़ी अपनी समस्याओं की जानकारी भी इसमें दर्ज करा सकेंगे। इसमें शिकायत करने पर पंजीकरण क्रमांक दिया जाएगा। इससे वे मोबाइल से ही शिकायतों की स्थिति की जानकारी ले सकते हैं। माना जा रहा है कि ऐप जारी होने से विभागीय अफसरों की जवाबदेही बढ़ जाएगी।
इस ऐप में विभागीय समस्या और रायपुर दक्षिण विधानसभा नाम से दो आईकान बने हैं। यहां अलग-अलग शिकायत की जा सकती हैं। विभागीय समस्याओं में छह विभागों को शामिल किया गया है। इसमें कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, जलसंसाधन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग हैं। जिस विभाग की शिकायत करनी है, उस पर क्लिक करने के बाद एक बॉक्स खुलेगा। इस बॉक्स में अपनी जानकारी और शिकायत को लिखकर सबमिट करना होता है। समस्या के साथ अगर कोई फोटो है, तो उसे भी अपलोड किया जा सकता है। इसमें शिकायत संख्या मिलेगी, जिसे ट्रैक करके शिकायत की स्थिति को जाना जा सकता है। इस ऐप को डाउनलोड करने के लिए प्लेस्टोर में बृजमोहन अग्रवाल लिखना है। इसके बाद आप ऐप डाउनलोड कर सकते हैं। इसे दो तरीके से लॉगइन किया जा सकता है। मोबाइल नंबर और इमेल के माध्यम से लागिन करने के बाद एक ओटीपी जनरेट होता है। ओटीपी नंबर डालने के बाद ऐप के होम पेज पर पहुंच जाएंगे।
रायपुर (छत्तीसगढ़) छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री और रायपुर दक्षिण विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने जनता की समस्याओं के निदान के लिए एक सराहनीय कदम उठाया है। बृजमोहन अग्रवाल ने अपने नाम से एक ऐप जारी किया है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन 'सुशासन दिवस' पर जारी ऐप में शिकायत करने पर विभाग की समस्याओं को 15 दिन और नगर निगम से जुड़ी समस्याओं का सात दिन में निदान होगा। चुनावी साल में इसे जनता से जुड़ने का जरिए मानते हुए कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि ऐप में आने वाली शिकायतों को निपटाने के लिए नोडल अधिकारी तय कर दिए गए हैं। उनका तर्क है कि यह ऐप पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सुशासन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को पूरा करेगा।
आपको बता दें कि इस मोबाइल ऐप में कृषि, पशुपालन, मछली पालन, जलसंसाधन तथा धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभागों से संबंधित योजनाओं की जानकारी है। लोग एक क्लिक पर इन योजनाओं की जानकारी ले सकेंगे और इनका लाभ उठाने के लिए ऑनलाइन आवेदन भी कर सकेंगे। इसके अलावा इन विभागों से जुड़ी अपनी समस्याओं की जानकारी भी इसमें दर्ज करा सकेंगे। इसमें शिकायत करने पर पंजीकरण क्रमांक दिया जाएगा। इससे वे मोबाइल से ही शिकायतों की स्थिति की जानकारी ले सकते हैं। माना जा रहा है कि ऐप जारी होने से विभागीय अफसरों की जवाबदेही बढ़ जाएगी।
इस ऐप में विभागीय समस्या और रायपुर दक्षिण विधानसभा नाम से दो आईकान बने हैं। यहां अलग-अलग शिकायत की जा सकती हैं। विभागीय समस्याओं में छह विभागों को शामिल किया गया है। इसमें कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, जलसंसाधन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग हैं। जिस विभाग की शिकायत करनी है, उस पर क्लिक करने के बाद एक बॉक्स खुलेगा। इस बॉक्स में अपनी जानकारी और शिकायत को लिखकर सबमिट करना होता है। समस्या के साथ अगर कोई फोटो है, तो उसे भी अपलोड किया जा सकता है। इसमें शिकायत संख्या मिलेगी, जिसे ट्रैक करके शिकायत की स्थिति को जाना जा सकता है। इस ऐप को डाउनलोड करने के लिए प्लेस्टोर में बृजमोहन अग्रवाल लिखना है। इसके बाद आप ऐप डाउनलोड कर सकते हैं। इसे दो तरीके से लॉगइन किया जा सकता है। मोबाइल नंबर और इमेल के माध्यम से लागिन करने के बाद एक ओटीपी जनरेट होता है। ओटीपी नंबर डालने के बाद ऐप के होम पेज पर पहुंच जाएंगे।
रांची (झारखंड)। सीबीआई की रांची स्थित विशेष अदालत ने चारा घोटाले मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव को दोषी करार दिया है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा को बरी कर दिया है। लालू यादव सहित अन्य 15 दोषियों को 3 जनवरी को सजा सुनाई जाएगी। स्पेशल सीबीआई जज शिवपाल सिंह ने यह फैसला सुनाया। फैसला सुनाने के बाद लालू यादव को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है वह 3 जनवरी तक रांची की बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में रहेंगे। उन्हें दोषी करार दिए जाने के बाद बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल ले जाया गया। कोर्ट का फैसला सुनते ही लालू ने कहा- ये क्या हुआ? लालू यादव ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक के बाद एक कई ट्वीट कर खुद को जेल भिजवाने के लिए बीजेपी को जिम्मेदार बताया। वहीं चारा घोटाला मामले में रिहा होने के बाद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा ने कहा कि ये सब सीबीआइ का किया धरा था, मैं लालू का चिर विरोधी रहा, कभी साथ नहीं था।
जबकि लालू के दोषी करार दिए जाने के बाद प्रशंसकों में जहां गुस्सा और हताशा साफ-साफ देखा जा रहा है वहीं बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और लालू के उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव ने कहा कि हम इस जजमेंट को हाई कोर्ट में चुनौती देंगे। हमने पहले ही चाइबासा मामले में हाईकोर्ट में अपील की है। जमानत की प्रक्रिया तभी शुरू होगी जब हाईकोर्ट खुलेगा। नीतीश कुमार और बीजेपी शुरू से ही लालू जी को बदनाम करने में और उनकी इमेज को खराब करने में जुटी हुई है।
आपको बता दें कि घोटाले के वक्त लालू बिहार के मुख्यमंत्री थे। करीब 90 लाख रुपए के घोटाले में कोर्ट ने उन्हें यह सजा सुनाई है। वहीं इस मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा सहित सात लोगों को बरी कर दिया गया है। यह मामला देवघर जिला कोषागार से 84.5 लाख की फर्जी निकासी (आरसी 64ए/96) का है। इस मुकदमा के 34 आरोपियों में से 11 की मौत हो चुकी है, जबकि एक सीबीआइ का अनुमोदक बन चुका है। इसके पहले भी लालू प्रसाद यादव तथा डॉ. जगन्नाथ मिश्र चारा घोटाला के एक अन्य मामले में दोषी करार दिए जा चुके हैं।
गौरतलब है कि पुलिस ने 1994 में संयुक्त बिहार के देवघर, गुमला, रांची, पटना, चाईबासा और लोहरदगा समेत कई कोषागारों से फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के मामले दर्ज किए। धड़ाधड़ गिरफ्तारियां होने लगी तो पटना हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया और जांच का काम सीबीआई को सौंपा। तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद भी चपेट में आ गए। आरोप पत्र दाखिल होते ही उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा और बाद में कई बार जेल यात्रा भी करनी पड़ी। चारा घोटाले के 54 मामले दर्ज किए गए थे। इसमें रांची सीबीआइ में 53 और भागलपुर कोषागार से अवैध निकासी से संबंधित मामले की सुनवाई पटना सीबीआइ कोर्ट में चल रही है। अधिवक्ताओं के अनुसार इसमें अबतक 47 मामलों में फैसला आ गया है। जिसमें 1404 आरोपियों को सजा मिली है। कई अभियुक्त वैसे हैं जो अन्य मामलों में भी अभियुक्त हैं। मूल रूप से करीब 160 आरोपी हैं। रांची में छह मामले अभी और बचे हैं। चार वैसे मामले हैं जिसमें बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद, डॉ. जगन्नाथ मिश्रा सहित नेता व पशुपालन पदाधिकारी शामिल हैं। वहीं दो मामलों में आपूर्तिकर्ता व अधिकारी शामिल हैं। चारा घोटाला में वर्ष 2004 से फैसला सुनाया जाना शुरू हुआ था।
(1) नाम: अशोक अग्रवाल
अधिवक्ता, दिल्ली हाईकोर्ट
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(2) नाम: अभिषेक शुक्ला
न्यू मीडिया पत्रकार
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(3) नाम: शिव शंकर पांडेय
अधिवक्ता, इलाहाबाद हाईकोर्ट
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(4) नाम: त्रिवेणी प्रसाद द्विवेदी
अधिवक्ता, इलाहाबाद हाईकोर्ट
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(5) नाम: अमित कुमार
टीवी पत्रकार
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देहरादून (उत्तराखंड)। महिला सशक्तिकरण के तहत पुलिस मुख्यालय ने मंगलवार को एक सराहनीय कदम उठाया है। पुलिस मुख्यालय ने सभी जनपदों में थाना और चौकी इंचार्ज की जिम्मेदारी महिला इंस्पेक्टरों और दारोगा को भी देने के आदेश जारी किए हैं। इस संबंध में मुख्यालय ने जनवरी तक गढ़वाल और कुमाऊं रेंज के डीआईजी से प्रत्येक जनपद की स्थिति की रिपोर्ट मांगी है। हालांकि इन महिलाओं को जिम्मेदारी देने से पहले योग्यता, कार्यक्षमता और वरिष्ठता पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
अशोक कुमार, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर के अनुसार महिला इंस्पेक्टर और दारोगाओं को भी थाना और चौकियों में बतौर इंचार्ज के अवसर मिलने जरुरी हैं। इससे उनकी कार्य करने की क्षमता बढ़ेगी। इस संबंध में सर्कुलर जारी कर दिया गया है।
आपको बता दें कि राज्य में करीब नौ महिला इंस्पेक्टर और 297 महिला दारोगा वर्तमान में कार्यरत हैं। इसके अलावा अभी 40 महिला दारोगा भी पीटसी नरेन्द्रनगर में ट्रेनिंग ले रही है। मगर अभी तक हरिद्वार में महिला इंस्पेक्टर को थाना प्रभारी और दो महिला दरोगा को देहरादून में चौकी प्रभारी का दायित्व दिया गया है। इसके अलावा अन्य महिला अधिकारियों को मौका नहीं दिया गया था।
देहरादून (उत्तराखंड)। महिला सशक्तिकरण के तहत पुलिस मुख्यालय ने मंगलवार को एक सराहनीय कदम उठाया है। पुलिस मुख्यालय ने सभी जनपदों में थाना और चौकी इंचार्ज की जिम्मेदारी महिला इंस्पेक्टरों और दारोगा को भी देने के आदेश जारी किए हैं। इस संबंध में मुख्यालय ने जनवरी तक गढ़वाल और कुमाऊं रेंज के डीआईजी से प्रत्येक जनपद की स्थिति की रिपोर्ट मांगी है। हालांकि इन महिलाओं को जिम्मेदारी देने से पहले योग्यता, कार्यक्षमता और वरिष्ठता पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
अशोक कुमार, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर के अनुसार महिला इंस्पेक्टर और दारोगाओं को भी थाना और चौकियों में बतौर इंचार्ज के अवसर मिलने जरुरी हैं। इससे उनकी कार्य करने की क्षमता बढ़ेगी। इस संबंध में सर्कुलर जारी कर दिया गया है।
आपको बता दें कि राज्य में करीब नौ महिला इंस्पेक्टर और 297 महिला दारोगा वर्तमान में कार्यरत हैं। इसके अलावा अभी 40 महिला दारोगा भी पीटसी नरेन्द्रनगर में ट्रेनिंग ले रही है। मगर अभी तक हरिद्वार में महिला इंस्पेक्टर को थाना प्रभारी और दो महिला दरोगा को देहरादून में चौकी प्रभारी का दायित्व दिया गया है। इसके अलावा अन्य महिला अधिकारियों को मौका नहीं दिया गया था।
दिल्ली। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद बैंक खातों से आधार को लिंक कराने की समय सीमा पर लग रही अटकलों पर विराम लग गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार अब आप 31 मार्च तक आप अपने बैंक खाते को आधार से लिंक करवा सकते हैं।
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की दलील को मानते हुए बैंक खातों को आधार से लिंक करने की समयसीमा को 31 मार्च तक बढ़ाने पर अपनी सहमति दे दी है। शुक्रवार को कोर्ट ने आदेश देते हुए कहा कि नए खाताधारक भी 31 मार्च तक अपने बैंक खातों को आधार से लिंक करा सकते हैं। इससे पहले नया खाता खुलवाने के लिए आधार देना जरूरी था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आधार के बिना भी बैंक में नया खाता खुलवाया जा सकता है लेकिन आवेदक को इस बात का सबूत देना होगा कि उसने आधार कार्ड के लिए आवेदन दिया है। मोबाइल सेवाओं को आधार से जोड़ने की छह फरवरी की समयसीमा को भी 31 मार्च तक बढ़ा दिया गया है। इससे पहले सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि वह मोबाइल नंबर को आधार से लिंक करने की डेडलाइन बढ़ाकर 31 मार्च 2018 करने के लिए तैयार है। उसने पहले ही दूसरी सर्विसेज के लिए डेडलाइन बढ़ाकर 31 मार्च कर दी है।
गौरतलब है कि अगर आपने किसी बैंक से लोन लिया हुआ है तो उस बैंक में आपका लोन अकाउंट होगा। आपको 31 मार्च,2018 तक इस लोन अकाउंट से आधार और पैन लिंक कराना होगा। नए नियमों के तहत क्रेडिट कार्ड को भी आधार से लिंक कराना जरूरी है। अगर आपके पास क्रेडिट कार्ड है तो आपको अपने क्रेडिट कार्ड को भी 31 मार्च, 2018 तक आधार से लिंक कराना होगा। आपका पोस्ट ऑफिस में अकाउंट है तो इस अकाउंट को भी आधार और पैन से लिंक कराना जरूरी है। आपको 31 मार्च, 2018 तक यह काम करना होगा। अगर आपका म्युचुअल फंड अकाउंट है तो आपके लिए म्युचुअलफ फंड अकाउंट को भी आधार और पैन से 31 मार्च तक लिंक कराना होगा।
कानपुर (उत्तर प्रदेश)। यदि बैंक सिक्के जमा करने से इनकार कर रहे हैं तो आप परेशान न हों, क्योंकि रिजर्व बैंक ने आरटीआई के तहत जानकारी दी है कि आप बैंकों में जितने चाहें उतने सिक्के जमा कर सकते हैं, उसकी कोई सीमा नहीं है। ऐसे में कोई भी बैंक आपके सिक्कों को जमकर करने से इनकार नहीं कर सकता है।
आपको बता दें कि गांधी ग्राम निवासी अभिलाष शुक्ल आरओ वाटर सप्लायर्स हैं। उनका खाता कार्पोरेशन बैंक में है। बैंक ने जब बाजार में मिले सिक्के लेने से मना कर दिया तो उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक से सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी। जिसमें लिखा कि सिक्का जमा करने का नियम क्या है। उसके बाद आरबीआइ के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी पी विजय कुमार की तरफ से जवाब मिला कि बैंकों में सिक्के जमा करने की सीमा संबंधी कोई नियम नहीं है। आरबीआइ ने अपने लिखित जवाब में बताया कि 'भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों में सिक्के जमा करने की कोई सीमा निश्चित नहीं की है। हालांकि सिक्का अधिनियम 2011 की धारा 6(1) के अनुसार किसी भी मूल्य वर्ग के सिक्के, एक रुपये से कम नहीं हों व कुल एक हजार रुपये तक के भुगतान के लिए वैध रहेंगे।'
गौरतलब है कि बैंकों ने नोटबंदी के दौरान बैंकों ने दो हजार और उससे अधिक के सिक्के लोगों को जारी किये। बैंकों ने आरबीआइ के नियम का पालन नहीं किया और जनता को सिक्कों के बोझ तले दबा दिया। नोटबंदी के दौरान नकदी संकट से निपटने के नाम पर बैंकों ने सड़े गले नोटों के साथ भारी संख्या में सिक्के भी जारी किए थे। तब नकदी की जरूरत हर आदमी को थी और सभी ने सिक्के लिए भी थे। इसके चलते बाजार में 200 करोड़ रुपये से अधिक के सिक्के आ गए। जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
वहीं रिजर्व बैंक का सरकुलर कागजी कार्रवाई बनकर रह गया है। जिसमें रिजर्व बैंक ने कहा है कि हर बैंक को सिक्कों को लेना होगा। हर बैंक शाखा को चस्पा करना होगा कि 'हम सिक्के जमा करते हैं'। यदि बैंक सिक्के जमा करने से इनकार करेंगे तो उनके खिलाफ जिला प्रशासन मुकदमा दर्ज करवाएगा।
मंडला (मध्य प्रदेश)। जिले के नैनपुर में एक बाबू की ऐसी करतूत सामने आयी है, जिसे पढ़कर आप हैरान रह जाएंगे। सोमवार को हरिजन आयोग के राष्ट्रीय महासचिव अशोक धनवार की उपस्थिति में नगरपालिका में पदस्थ दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में लंबे समय से दैनिक वेतन पर काम कर रहे कर्मचारियों को स्थाई करने पर चर्चा हुई। इस दौरान राष्ट्रीय महासचिव अशोक धनवार ने दैनिक सफाई कर्मचारी की समस्या व कार्यालय प्रक्रिया को सुनने के बाद कहा कि स्वास्थ विभाग में 2016 तक जिनको भी कार्य में रखा गया है। उन सभी का नियमितिकरण होना है। यह शासन के आदेश हैं और नियुक्ति सूक्ष्मता से होना है। सभी कर्मचारी किसी प्रलोभन में न आएं यह आप का अधिकार है। जिसका हक आप सभी को मिल कर रहेगा।
वहीं बाबुओं की मनमानी के बारे में बताया कि वे 10 से 12 वर्षों से कार्य कर रहे हैं। पीएफ भी कटता है, लेकिन परेशानी आने पर मिलता नहीं है। बाबू कहते हैं कि अभी पीएफ की राशि नहीं मिल पाएगी। जब तक तुम्हें 11 से अधिक बीमारियां नहीं होंगी तब तक तुम पीएफ के लिए पात्र नहीं हो सकते हो।
स्वास्थ्य निरीक्षक श्रीचंद शर्मा ने बताया कि 88 सफाई कर्मचारी का स्थाईकरण होना है जिसमें पहली सूची 28 लोगों की बनी है। जिसमें एक नाम भोजेलाल का कट गया है और 27 कर्मचारी का 30 दिसंबर तक स्थाईकरण में नाम आ जाएगा। इस सूची में 10 वर्ष से ऊपर कार्य कर रहे हैं उनका नाम है।
हैरान की बात यह थी कि बैठक से सीएमओ, स्थापना शाखा के लिपिक एवं विभाग के जिम्मेदार अधिकारी को नदारद थे। इस गैरजिम्मदार हकत से महासचिव नाराज दिखे। उनका कहना था कि बड़े दुर्भाग्य की बात है कि कर्मचारियों के हित में अहम बैठक आयोजित की गई, लेकिन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ही नदारद हैं।
वाराणसी (उत्तर प्रदेश): राजकीय कार्यों में पारदर्शिता लाने की मुहिम के तहत सरकार के ने एक और पहल की है। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग द्वारा प्रदेश के सभी प्राधिकरणों में, प्राधिकरण की योजनाओं एवं प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत ले-आउट के आवासीय भूखंडों के समस्त मानचित्रों को आनलाइन स्वीकृति का साफ्टवेयर विकसित किया गया है, जिसका शुभारंभ आयुक्त सभागार में शनिवार को राज्यमंत्री डा. नीलकंठ तिवारी ने किया। इस समारोह की अध्यक्षता कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने की।
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में आनलाइन मानचित्र स्वीकृति की इस नवीन व्यवस्था के तहत ही मानचित्र स्वीकृति के लिए प्राधिकरण में जमा किए जाएंगे। अभी तक मैनुअल व्यवस्था थी जिसको अतिक्रमित कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश में आनलाइन मानचित्र स्वीकृति की यह व्यवस्था सभी 33 विकास प्राधिकरणों एवं आवास विकास परिषद में प्रभावी होगी। इस व्यवस्था के प्रभावी होने से भवन स्वामी आनलाइन मानचित्र स्वीकृति का लाभ ले सकेंगे। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा शीघ्र ही समस्त भवन मानचित्रों को आनलाइन स्वीकृति की कार्यवाही किए जाने पर कार्य किया जा रहा है। इसे शीघ्र प्रभावी किया जाएगा।
इस वेब साफ्टवेयर से आवेदक संबंधित विकास प्राधिकरण को इंटरेक्टिव मैप में चयनित कर सकता है। यदि मानचित्र में कोई कमी है, तो अधिकतम दो कार्य दिवसों में ईमेल के माध्यम से अवगत करा दिया जाएगा। अन्यथा मानचित्र स्वत: स्वीकृत हो जाएगा। आवेदक को ईमेल पर भी प्रेषित कर दिया जाएगा। आवेदक अपने आवेदन पर कार्यवाही को वेबसाइट पर ट्रैक कर सकता है। स्वत: फीस केलकुलेटर का प्रावधान किया गया है। मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया में इलेक्ट्रानिक वेरिफिकेशन कोड का उपयोग किया गया है। ई-पेमेंट गेट-वे से आनलाइन भुगतान की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक स्तर पर आवेदक को एसएमएस द्वारा सूचना प्रेषित करने की व्यवस्था है। प्रत्येक स्तर पर उत्तरदायित्व निर्धारण की पारदर्शिता को और प्रभावी बनाने के लिए किया गया है। स्वीकृत किए जाने वाले मानचित्र की वैधानिकता को सुरक्षित करने के लिए क्यूआर-कोड का प्रावधान किया गया है। साफ्टवेयर में एप्लीकेशन, कालोनी एवं अन्य आवश्यक विवरण के लिए सर्चटूल का प्रावधान भी किया गया है। साफ्टवेयर के कार्यरूप में आने से मानचित्रों से संबंधित समस्त सूचनाएं व विवरण एकीकृत रूप में प्राधिकरण स्तर व प्रदेश स्तर पर सदैव उपलब्ध रहेगी।.
वाराणसी (उत्तर प्रदेश): राजकीय कार्यों में पारदर्शिता लाने की मुहिम के तहत सरकार के ने एक और पहल की है। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग द्वारा प्रदेश के सभी प्राधिकरणों में, प्राधिकरण की योजनाओं एवं प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत ले-आउट के आवासीय भूखंडों के समस्त मानचित्रों को आनलाइन स्वीकृति का साफ्टवेयर विकसित किया गया है, जिसका शुभारंभ आयुक्त सभागार में शनिवार को राज्यमंत्री डा. नीलकंठ तिवारी ने किया। इस समारोह की अध्यक्षता कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने की।
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में आनलाइन मानचित्र स्वीकृति की इस नवीन व्यवस्था के तहत ही मानचित्र स्वीकृति के लिए प्राधिकरण में जमा किए जाएंगे। अभी तक मैनुअल व्यवस्था थी जिसको अतिक्रमित कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश में आनलाइन मानचित्र स्वीकृति की यह व्यवस्था सभी 33 विकास प्राधिकरणों एवं आवास विकास परिषद में प्रभावी होगी। इस व्यवस्था के प्रभावी होने से भवन स्वामी आनलाइन मानचित्र स्वीकृति का लाभ ले सकेंगे। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा शीघ्र ही समस्त भवन मानचित्रों को आनलाइन स्वीकृति की कार्यवाही किए जाने पर कार्य किया जा रहा है। इसे शीघ्र प्रभावी किया जाएगा।
इस वेब साफ्टवेयर से आवेदक संबंधित विकास प्राधिकरण को इंटरेक्टिव मैप में चयनित कर सकता है। यदि मानचित्र में कोई कमी है, तो अधिकतम दो कार्य दिवसों में ईमेल के माध्यम से अवगत करा दिया जाएगा। अन्यथा मानचित्र स्वत: स्वीकृत हो जाएगा। आवेदक को ईमेल पर भी प्रेषित कर दिया जाएगा। आवेदक अपने आवेदन पर कार्यवाही को वेबसाइट पर ट्रैक कर सकता है। स्वत: फीस केलकुलेटर का प्रावधान किया गया है। मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया में इलेक्ट्रानिक वेरिफिकेशन कोड का उपयोग किया गया है। ई-पेमेंट गेट-वे से आनलाइन भुगतान की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक स्तर पर आवेदक को एसएमएस द्वारा सूचना प्रेषित करने की व्यवस्था है। प्रत्येक स्तर पर उत्तरदायित्व निर्धारण की पारदर्शिता को और प्रभावी बनाने के लिए किया गया है। स्वीकृत किए जाने वाले मानचित्र की वैधानिकता को सुरक्षित करने के लिए क्यूआर-कोड का प्रावधान किया गया है। साफ्टवेयर में एप्लीकेशन, कालोनी एवं अन्य आवश्यक विवरण के लिए सर्चटूल का प्रावधान भी किया गया है। साफ्टवेयर के कार्यरूप में आने से मानचित्रों से संबंधित समस्त सूचनाएं व विवरण एकीकृत रूप में प्राधिकरण स्तर व प्रदेश स्तर पर सदैव उपलब्ध रहेगी।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। प्रदेश की योगी सरकार ने लोकसेवा अधिकार के तहत बहुत ही अहम फैसला लिया है। अब आम लोगों को नगर निकायों से मिलने वाली सुविधाओं के लिए रोज-रोज चक्कर नहीं काटने होंगे। सरकार ने नगर निकायों से जुड़ी सेवाओं के लिए नए सिरे से समय सीमा तय कर दी है। अब जन्म-मृत्यु प्रमाण जहां 30 दिन के भीतर जारी करना होगा, वहीं नामांतरण के लिए 45 दिनों की समयसीमा तय की गई है।
प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार सिंह ने सभी नगर निकायों को ‘उप्र. जनहित गारंटी अधिनियम-2011’ की संशोधित व्यवस्था के मुताबिक सुविधाएं देने का निर्देश दिया है।
आपको बता दें कि अब नगर निकायों के लिए पेयजल और सीवर कनेक्शन का आवेदन मिलने के 30 दिन के भीतर कनेक्शन देना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार ने अधिनियम में पेयजल व सीवर कनेक्शन देने की समय सीमा तय कर दी है। इसी तरह रिक्शा, खाद्य समेत अन्य तरह के लाइसेंस देने का काम भी 20 दिन के भीतर करना होगा। नियत समय सीमा में सेवाएं उपलब्ध न कराने पर आवेदक शिकायत दर्ज करा सकता है। शिकायतों का निस्तारण भी 30 दिन में करना अनिवार्य होगा। शिकायतों की सुनवाई भी दो स्तरों पर होगी।
नगर निगमों की सेवाओं से संबंधित शिकायतों की सुनवाई के लिए प्रथम अपीलीय अधिकारी के तौर पर नगर आयुक्त किसी अपर नगर आयुक्त या संयुक्त नगर आयुक्त को नामित करेंगे। वहीं नगर पालिका परिषद व नगर पंचायतों से संबंधित सेवाओं से संबंधित शिकायतों के लिए प्रथम अपीलीय अधिकारी उप जिलाधिकारी होंगे। इसी तरह नगर निगमों में द्वितीय अपीलीय अधिकारी नगर आयुक्त और नगर पालिका परिषद व नगर पंचायतों के लिए डीएम होंगे।...
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। प्रदेश की योगी सरकार ने लोकसेवा अधिकार के तहत बहुत ही अहम फैसला लिया है। अब आम लोगों को नगर निकायों से मिलने वाली सुविधाओं के लिए रोज-रोज चक्कर नहीं काटने होंगे। सरकार ने नगर निकायों से जुड़ी सेवाओं के लिए नए सिरे से समय सीमा तय कर दी है। अब जन्म-मृत्यु प्रमाण जहां 30 दिन के भीतर जारी करना होगा, वहीं नामांतरण के लिए 45 दिनों की समयसीमा तय की गई है।
प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार सिंह ने सभी नगर निकायों को ‘उप्र. जनहित गारंटी अधिनियम-2011’ की संशोधित व्यवस्था के मुताबिक सुविधाएं देने का निर्देश दिया है।
आपको बता दें कि अब नगर निकायों के लिए पेयजल और सीवर कनेक्शन का आवेदन मिलने के 30 दिन के भीतर कनेक्शन देना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार ने अधिनियम में पेयजल व सीवर कनेक्शन देने की समय सीमा तय कर दी है। इसी तरह रिक्शा, खाद्य समेत अन्य तरह के लाइसेंस देने का काम भी 20 दिन के भीतर करना होगा। नियत समय सीमा में सेवाएं उपलब्ध न कराने पर आवेदक शिकायत दर्ज करा सकता है। शिकायतों का निस्तारण भी 30 दिन में करना अनिवार्य होगा। शिकायतों की सुनवाई भी दो स्तरों पर होगी।
नगर निगमों की सेवाओं से संबंधित शिकायतों की सुनवाई के लिए प्रथम अपीलीय अधिकारी के तौर पर नगर आयुक्त किसी अपर नगर आयुक्त या संयुक्त नगर आयुक्त को नामित करेंगे। वहीं नगर पालिका परिषद व नगर पंचायतों से संबंधित सेवाओं से संबंधित शिकायतों के लिए प्रथम अपीलीय अधिकारी उप जिलाधिकारी होंगे। इसी तरह नगर निगमों में द्वितीय अपीलीय अधिकारी नगर आयुक्त और नगर पालिका परिषद व नगर पंचायतों के लिए डीएम होंगे।
नई दिल्ली। अरविंद केजरीवाल की सरकार पर एक बार फिर घोटाले के आरोप का गंभीर मामला सामने आया है। आम आदमी पार्टी सरकार के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने बुधवार को आरोप लगाया कि दिल्ली की सरकार ने अस्पतालों में डायलिसिस मशीनों की खरीद में टेंडर नियमों की अनदेखी कर जर्मन कंपनी को फायदा पहुंचाया। उनका कहना था कि इस खरीद से दिल्ली सरकार को न सिर्प 13 करोड़ का नुकसान होगा, बल्कि प्रति डायलिसिस 700-800 रुपए का अतिरिक्त भार प्रति मरीज प्रति डायलिसिस भी पड़ेगा।
हालांकि अरविंद केजरीवाल सरकार के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा के इस गंभीर आरोप का अब तक दिल्ली सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया है।
आपको बता दें कि नेशनल हेल्थ मिशन योजना के अंतर्गत आने वाले प्रधानमंत्री डायलिसिस प्रोग्राम के तहत दिल्ली सरकार ने 24 अक्टूबर को दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में लगाने के लिए हेमोडायलिसिस मशीन, आरओ सिस्टम आदि खरीदने व लगाने के लिए टेंडर आमंत्रित किया था।
इसके बाद गत दो नवंबर को प्री बिड मीटिंग के बाद छह नवंबर को दिल्ली सरकार ने एक संशोधन के द्वारा टेंडर के नियमों में बदलाव कर दिया। फिर एक तरह की खासियत वाली डायलिसिस मशीन जोकि केंद्र सरकार के डॉक्यूमेंट के अनुसार 'ऑप्शनल' थी उसे 'मेंडेटरी' कर दिया गया। नियमों में इस बदलाव के बाद अब कोई भी सप्लायर जर्मन की एक विशेष कंपनी के अलावा कहीं और से मशीन नहीं खरीद पाएगा। वहीं, अन्य सभी कंपनियों की मशीनों को दिल्ली सरकार ने टेंडर प्रक्रिया से बाहर कर दिया।
कपिल मिश्रा का आरोप है कि उक्त कंपनी की मशीन न सिर्फ महंगी होती है, बल्कि उसका रखरखाव आदि भी महंगा होता है। इस टेंडर में अब सरकार को न सिर्फ 13 करोड़ का नुकसान होगा, बल्कि प्रति डायलिसिस 700-800 रुपये का अतिरिक्त भार प्रति मरीज प्रति डायलिसिस भी पड़ेगा।
गौरतलब है कि इससे पहले स्वास्थ्य विभाग में दवाओं की खरीद-फरोख्त को लेकर भी विधायक कपिल मिश्रा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दिल्ली सरकार द्वारा 300 करोड़ रुपये की एक्सपायरी दवाएं खरीदने और घोटाले का आरोप लगाया था, जिसके बाद भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) तक ने कार्रवाई की थी।