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उत्तर प्रदेश में जनहित गारंटी अधिनियम के तहत राजस्व विभाग में आय प्रमाण पत्र बनाने के लिए 20 कार्य दिवस निर्धारित किया गया है।
रांची (झारखंड)। आप अभी भी ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं तो जरा सावधान हो जाएं। पुलिस के बार-बार समाझाने के बावजूद यदि हेलमेट के बिना वाहन चलाते हुए पकड़ गए तो आपको मंहगा पड़ सकता है। गुरुवार को पुलिस ने रांची शहर के दर्जनों चौराहों पर चेक पोस्ट लगाया और बिना हेलमेट के बाइक चलाने वालों की धरपकड़ शुरू कर दी। इस चेकिंग के दौरान 100 से अधिक लोग पकड़े गए। बिना हेल्मेट बाइक चला रहे सैकड़ों लोगों से जुर्माना वसूला गया। पुरुलिया रोड में कई स्कूल होने की वजह से भारी संख्या में स्टूडेंट्स का मूवमेंट होता है। ऐसे में सबसे अधिक पुलिस पुरुलिया रोड में ही जमी रही। इसमें 50 से अधिक स्कूटी और बाइक सवारों को बिना हेलमेट पकड़ा गया। पुलिस की इस कार्रवाई से पूरे शहर में हड़कंप मच गया। पुरुलिया रोड में कुछ लोगों ने हंगामा भी किया, लेकिन पुलिस की शख्ती के आगे उनकी एक न चली और उन्हें जुर्माना भरना पड़ा।
देहरादून (उत्तराखंड)। यदि आप डाइविंग लाइसेंस बनवाने जा रहे हैं तो आपके लिए परिवहन विभाग एक अच्छी खबर लेकर आया है। अब आपको लाइसेंस बनवाने के लिए अंगूठा नहीं लगाना होगा। परिवहन मुख्यालय ने ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अंगूठे का निशान लगाने की व्यवस्था को बंद करने का फैसला लिया है। इसके लिए परिवहन विभाग ने राष्ट्रीय सूचना केंद्र को पत्र लिखा है।
आपको बता दें कि केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित सारथी एप्लीकेशन में बायोमीट्रिक कैप्चरिंग को स्थानीय स्तर पर डेटाबेस रखे जाने को आधार एक्ट के प्राविधान के अनुसार विधि सम्मत नहीं माना है। इस संबंध में केंद्र सरकार ने 27 जुलाई को पत्र भी जारी किया था। इसमें सारी बातों का हवाला दिया गया है। सारथी के तहत लिए जो थंब इंप्रेशन लिए जा रहे हैं, वह अवैध हैं। इस संबंध में परिवहन मुख्यालय की तरफ से सभी आरटीओ और एआरटीओ को भी पत्र भेजा गया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार राज्य स्तर (सॉफ्टवेयर एनआईसी ने विकसित किया है) पर थंब इंप्रेशन को बंद नहीं किया जा सकता है, ऐसा करने पर लाइसेंस बनने की पूरी प्रक्रिया ही प्रभावित हो जाएगी।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में पहले ही अंगूठे का निशान (थंब इंप्रेशन) बंद करने का आदेश हो चुका है।
गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)। आखिरकार बाबा राघवदास मेडिकल कालेज में बच्चों के मौत के मामले में नामजद निलंबित प्राचार्य डाक्टर राजीव मिश्र और उनकी पत्नी डाक्टर पूर्णिमा शुक्ला को भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में आज पेश किया गया। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने डाक्टर राजीव मिश्र और उनकी पत्नी डाक्टर पूर्णिमा शुक्ला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। केस दर्ज होने के बाद एसटीएफ इस डाक्टर दंपति को कानपुर से गिरफ्तार करके बुधवार की शाम को गोरखपुर लेकर आयी। अब एसटीएफ इस दंपति से थाने में मेडिकल कालेज की त्रासदी के बारे में पूछताछ कर रही है। हालांकि इस मामले में नामजद अन्य आरोपियों की अभी तलाश की जा रही है।
आपको बता दें कि बाबा राघवदास मेडिकल कालेज में 10 और 11 अगस्त की रात को आक्सीजन खत्म होने की वजह से 35 से अधिक बच्चों की मौत हो गयी थी। इस घटना के बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया था। वहीं अपनी गलतियों को स्वीकार करने की बजाय प्रशासन और प्रदेश सरकार यह दावा करती रही कि बच्चों की मौत आक्सीजन की कमी से नहीं हुई है। हालांकि इस मामले पर हंगामा मचने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आक्सीजन की आपूर्ति बंद होने के मामले की जांच के आदेश दे दिए। जिसके बाद मुख्य सचिव के नेतृत्व में गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में पूर्व प्राचार्य डा. राजीव मिश्र, उनकी पत्नी डा. पूर्णिमा शुक्ला के साथ ही इंसेफेलाइटिस वार्ड के प्रभारी डा. कफील खान सहित नौ लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया।